Freinds this news(Jagran) below will give some clues and point to ponder that, why there was so much hurry in putting up the CBI Report at the time of elections......Pandit CM ne ek teer se 2 neeshaane laga liye,,,,,aur ham Jaat bahut khush hain ki usme se ek hamaara Jaat bhai Sajjan Kumar ji hai jo shikaar hua hai,,,,jiska Sikh Riots se sahi maayne mein koyi lena dena nahi thaa,,,,,,,jo karne waale the unke to naam bhi nahi hain najdik,,,,,,,,Sajjan Kumar ji ka Delhi mein ticket katna Congress ke liye achha nahi rahega kam se kam Delhi mein,mere khayaal se JAT jyaada unity ki baat na karei to achha ye unke bas ki baat nahi lagti,,,,Maharaja Surajmal ko bhi kitni dikkat hui thi Jaato ko ek saath milaane mein,,,,ye jinko pata hai vahi jaante hain
"मास्टर स्ट्रोक और बॉल सीमा रेखा के बाहर! जिस तरह सज्जन कुमार व जगदीश टाइटलर को बाहर किया गया, इसकी योजना शायद सचिवालय में बनाई गई थी। तभी तो पिछले कुछ महीनों से सचिवालय की दौड़ गृहमंत्रालय तक होती थी। इस दौड़ ने कमाल दिखा ही दिया।
राजनीति के जानकार बताते हैं कि सचिवालय ने अपने रास्ते से दो कांटों को चुनकर बाहर फेंक दिया है। ये वो कांटे थे जो भविष्य में उनके लिए या उनके रिश्तेदार के लिए खतरा पैदा कर सकते थे। चुनाव तिथि व प्रत्याशियों की घोषणा होने के कुछ दिनों बाद जिस तरह सीबीआई ने कांग्रेस के उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट के प्रत्याशी जगदीश टाइटलर को क्लीनचिट दी, वह कई प्रश्नों को जन्म दे रहा है। आखिर, इसकी क्या जरूरत पड़ गई थी कि चुनाव के समय सीबीआई हरकत में आए। इस मामले को कुछ दिनों तक के लिए टाला जा सकता था। यही कारण है कि राजनीति की समझ रखने वाले इस पूरे प्रकरण को सचिवालय की गृहमंत्रालय तक की दौड़ को जोड़कर देख रहे हैं। सज्जन कुमार हों या जगदीश टाइटलर, दोनों के पीछे सिख विरोधी दंगा जिन्न की तरह 25 वर्षो से पीछा कर रहा था। इस जिन्न का उपयोग समय-समय पर सचिवालय की ओर से होता रहा। जैसे-जैसे सचिवालय मजबूत होता गया, जिन्न की शक्ति बढ़ती गई। अंतत: जिन्न ने अपने आगोश में दोनों पुराने राजनीतिक विरोधियों को ले ही लिया।
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की तरह ही टाइटलर व सज्जन कुमार को दिल्ली की राजनीति का धुरी कहा जाता है। हालांकि, दीक्षित का कद राजनीतिक गलियारों में दोनों से बड़ा है। उधर, रास्ते में एक और कांटा बिछा हुआ है। नई दिल्ली सीट से शहरी विकास राज्यमंत्री अजय माकन चुनाव लड़ रहे हैं जिनका संबंध सचिवालय से ठीक-ठाक नहीं बताया जाता है। इनके खिलाफ भाजपा के कद्दावर नेता विजय गोयल चुनाव लड़ रहे हैं। वे स्वयं तो मजबूत हैं ही, साथ ही इनके सिर पर भी सचिवालय का हाथ बताया जाता है। यही कारण है कि वे नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। सचिवालय के एक मास्टर स्ट्रोक में तो टाइटलर व सज्जन कुमार बाहर चले गए, अब देखें आगे क्या..?
"मास्टर स्ट्रोक और बॉल सीमा रेखा के बाहर! जिस तरह सज्जन कुमार व जगदीश टाइटलर को बाहर किया गया, इसकी योजना शायद सचिवालय में बनाई गई थी। तभी तो पिछले कुछ महीनों से सचिवालय की दौड़ गृहमंत्रालय तक होती थी। इस दौड़ ने कमाल दिखा ही दिया।
राजनीति के जानकार बताते हैं कि सचिवालय ने अपने रास्ते से दो कांटों को चुनकर बाहर फेंक दिया है। ये वो कांटे थे जो भविष्य में उनके लिए या उनके रिश्तेदार के लिए खतरा पैदा कर सकते थे। चुनाव तिथि व प्रत्याशियों की घोषणा होने के कुछ दिनों बाद जिस तरह सीबीआई ने कांग्रेस के उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट के प्रत्याशी जगदीश टाइटलर को क्लीनचिट दी, वह कई प्रश्नों को जन्म दे रहा है। आखिर, इसकी क्या जरूरत पड़ गई थी कि चुनाव के समय सीबीआई हरकत में आए। इस मामले को कुछ दिनों तक के लिए टाला जा सकता था। यही कारण है कि राजनीति की समझ रखने वाले इस पूरे प्रकरण को सचिवालय की गृहमंत्रालय तक की दौड़ को जोड़कर देख रहे हैं। सज्जन कुमार हों या जगदीश टाइटलर, दोनों के पीछे सिख विरोधी दंगा जिन्न की तरह 25 वर्षो से पीछा कर रहा था। इस जिन्न का उपयोग समय-समय पर सचिवालय की ओर से होता रहा। जैसे-जैसे सचिवालय मजबूत होता गया, जिन्न की शक्ति बढ़ती गई। अंतत: जिन्न ने अपने आगोश में दोनों पुराने राजनीतिक विरोधियों को ले ही लिया।
मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की तरह ही टाइटलर व सज्जन कुमार को दिल्ली की राजनीति का धुरी कहा जाता है। हालांकि, दीक्षित का कद राजनीतिक गलियारों में दोनों से बड़ा है। उधर, रास्ते में एक और कांटा बिछा हुआ है। नई दिल्ली सीट से शहरी विकास राज्यमंत्री अजय माकन चुनाव लड़ रहे हैं जिनका संबंध सचिवालय से ठीक-ठाक नहीं बताया जाता है। इनके खिलाफ भाजपा के कद्दावर नेता विजय गोयल चुनाव लड़ रहे हैं। वे स्वयं तो मजबूत हैं ही, साथ ही इनके सिर पर भी सचिवालय का हाथ बताया जाता है। यही कारण है कि वे नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। सचिवालय के एक मास्टर स्ट्रोक में तो टाइटलर व सज्जन कुमार बाहर चले गए, अब देखें आगे क्या..?