ye..arakshan arakshan...........kya hai.

out of 42000 jobs 38000 are grabbed by rohtak only in last 6 years why the hell we need reservation??


But this selfishness is shortsighted, CM chair is not going to stay for life in Rohtak but this reservation, if granted will be a long term advantage. I appeal to you to support the community in this struggle otherwise no one will support Rohtak JATS when they are in trouble
 
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​
Hats off to these people who can see the future of the next generations, they themselves will not get any benefit but still they are making every effort so that it benefits the people in future.

Our community needs genuine complete solidarity at this juncture to get the results. Let good sense prevail on all who are not supporting at the moment for selfish interests.
LONG LIVE JAT UNITY.
 
But this selfishness is shortsighted, CM chair is not going to stay for life in Rohtak but this reservation, if granted will be a long term advantage. I appeal to you to support the community in this struggle otherwise no one will support Rohtak JATS when they are in trouble
Do You still think that your help is required anywhere?
 
रेलमार्गो पर जाटों का शिकंजा और कसा
ठ्ठ जागरण टीम, चंडीगढ़/जेपी नगर आरक्षण के मसले पर अब जाट आंदोलनकारियों ने दूसरे रेलमार्गो पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। हरियाणा में जाटों ने दिल्ली जाने वाले सभी रेल ट्रैकों पर कब्जे की रणनीति बनाई है। साथ ही उन्होंने दिल्ली-जयपुर मार्ग को भी बाधित कर दिया है। दिल्ली-लखनऊ मार्ग की ट्रेनों के रूट में बदलाव की वजह से दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर भी दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा आंदोलन की अगुवाई कर रहे यशपाल मलिक ने मंगलवार को दिल्ली बार्डर पर भी प्रदर्शन का एलान किया है। हरियाणा में अलग-अलग दस स्थानों पर रेल ट्रैक पर जाटों का कब्जा है। सोमवार को उन्होंने दिल्ली-रेवाड़ी-जयपुर रेलमार्ग जाम कर दिया। भिवानी-जयपुर के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन को जहां रद कर दिया गया, वहीं दिल्ली से जयपुर के रास्ते अजमेर व गुजरात के शहरों की ओर जाने वाली गाडि़यों को अन्य मार्गो से भेजा गया। सोमवार को नौवें दिन भी हिसार-भिवानी-दिल्ली रेल टै्रक पर मय्यड़ के पास जाटों का कब्जा बना रहा। इतना ही नहीं हिसार-जयपुर और हिसार-लुधियाना रेलमार्ग सातवें दिन भी जाम रहा। हिसार-बठिंडा रेलमार्ग पर मेहूवाला में पांच लोगों ने क्रमिक भूख-हड़ताल शुरू की है। भिवानी-रोहतक रेलमार्ग पर गांव बामला में आंदोलनकारी ट्रैक पर जमे हैं। दिल्ली-फिरोजपुर मार्ग पर नरवाना में ट्रैक पर बिनैन खाप का कब्जा है। जींद-पानीपत रेलमार्ग भी बंद है। आंदोलनकारियों ने दिल्ली-अंबाला रेललाइन को भी जाम करने की धमकी दी है। अखिल भारतीय जाट समिति के प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन हवा सिंह सांगवान ने कहा है कि यदि हरियाणा सरकार ने आंदोलनकारियों को रेल ट्रैक से उठाने के लिए बल का प्रयोग किया तो दिल्ली की नाकेबंदी करते हुए जल और बिजली आपूर्ति भी बाधित कर दी जाएगी। उधर, आंदोलन के चलते रेलवे के सबसे व्यस्त दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर दबाव बढ़ने लगा है। दिल्ली-लखनऊ मार्ग बाधित होने की वजह से चार दर्जन ट्रेनों को कानपुर, टूंडला, अलीगढ़ और आगरा के रास्ते निकाला जा रहा है। पहले से ही 140 प्रतिशत क्षमता का ट्रेन संचालन झेल रहे दिल्ली-हावड़ा ट्रैक पर अब इस दबाव के चलते ट्रेनों को निरस्त किया जा रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे यशपाल मलिक ने जेपी नगर में बताया कि मंगलवार को दिल्ली के गाजीपुर व आनंद विहार बार्डर पर प्रदर्शन किया जाएगा और सांकेतिक जाम भी लगाएंगे। इसके अलावा रामपुर के बिलासपुर व मुरादाबाद के कांठ कस्बे में भी प्रदर्शन होगा। मध्य प्रदेश व पंजाब में भी जाट समाज सड़कों पर उतरेगा। जाट महिलाओं ने भी सोमवार को ट्रैक पर हल चलाकर विरोध का नायाब तरीका निकाला और ट्रैक पर तीन स्थानों पर रोटी पकाकर खुद भी खाई व धरने में शामिल लोगों को भी खिलाई।
 
दस ट्रैकों पर कब्जा
नई दिल्ली, जागरण न्यूज नेटवर्क : आरक्षण की मांग को लेकर जाट आंदोलन का दायरा बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के जेपीनगर जिला अंतर्गत काफूरपुर में रेलवे ट्रैक पर लगातार दसवें दिन भी चौपाल लगी रही। हरियाणा से दिल्ली जाने वाली सभी रेल ट्रैक पर कब्जे की रणनीति बनाई गई है। आंदोलनकारियों ने सोमवार को दिल्ली-रेवाड़ी-जयपुर रेलमार्ग जाम कर दिया। जम्मू के सांबा में राष्ट्रीय राजमार्ग एक घंटे बंद कर प्रदर्शन किया गया। सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए जाट आंदोलनकारियों ने अब हरियाणा से दिल्ली को जोड़ने वाले सभी रेलवे ट्रैक पर कब्जे की रणनीति बनाई है। सोमवार को दिल्ली-रेवाड़ी-जयपुर रेलमार्ग जाम कर दिया है। इसके साथ ही प्रदेश में दस स्थानों पर रेल ट्रैक पर जाटों का कब्जा है। आंदोलनकारियों ने सोमवार को बावल के पास दिल्ली-रेवाड़ी-जयपुर रेल मार्ग पर भी कब्जा जमा लिया। भिवानी-जयपुर के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन को जहां रद कर दिया, वहीं दिल्ली से जयपुर के रास्ते अजमेर व गुजरात के शहरों की ओर जाने वाली गाडि़यों को अन्य मार्गो से भेजा गया। बरेली-भुज एक्सप्रेस के पहिये भी पिछले एक सप्ताह से रुके हुए हैं। इस बीच नौवें दिन सोमवार को हिसार-भिवानी-दिल्ली रेल टै्रक पर मय्यड़ के पास जाटों का कब्जा बना रहा। इतना ही नहीं हिसार-जयपुर और हिसार-लुधियाना रेलमार्ग पर भी सातवें दिन भी जाम रहा। हिसार-बठिंडा रेलमार्ग पर मेहूवाला में पांच लोगों ने क्रमिक भूख-हड़ताल शुरू की है। भिवानी-रोहतक रेलमार्ग पर बामला गांव में आंदोलनकारी ट्रैक पर जमे हैं। दिल्ली-फिरोजपुर मार्ग पर नरवाना में ट्रैक पर बिनैन खाप का कब्जा है। खाप के प्रधान नफे सिंह ने बताया कि मंगलवार से पांच आदमी अनशन पर बैठ जाएंगे। इससे कुछ का ठहराव जींद तक किया गया है। जींद-पानीपत रेलमार्ग भी बंद है। इससे रेलवे को प्रतिदिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है। रोहतक-पानीपत रेलमार्ग पर इसराना में आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पुतला फूंका। उन्होंने दिल्ली-अंबाला रेल लाइन को भी जाम करने की धमकी दी है। आरक्षण की मांग को लेकर जाट आंदोलन जम्मू तक पहुंच गया है। सोमवार को सांबा में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग एक घंटे बंद कर जमकर प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष चौधरी दिवान सिंह की अध्यक्षता में जाट सांबा के कैहली मैदान में एकत्र हुए।
 
नासूर बना आरक्षण मसला
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो: उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत दूसरे राज्यों में भी पैर पसार रहे जाट आंदोलन के बढ़ते दायरे ने केंद्र सरकार ही नहीं, कई राजनीतिक दलों की पेशानी पर भी बल डाल दिए हैं। गुर्जर आंदोलन की तरह बिना किसी राजनीतिक नेतृत्व के लगातार बढ़ रही इस आंदोलन की आग हरियाणा के बाद उत्तर प्रदेश में भी फैलने को राजनीतिक दल अनायास नहीं मान रहे हैं। खासतौर से उत्तर प्रदेश में जहां मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेता तक सिर नहीं उठा पा रहे, वहां बिना किसी राजनीतिक नेतृत्व के बढ़ते जा रहे जाट आंदोलन से कई दल आशंकित हैं। कांग्रेस, भाजपा और सपा ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों की अगुआई करने वाले रालोद और भाकियू जैसे संगठन भी इस घटनाक्रम से भौचक हैं। उन्हें लग रहा है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी आंदोलन को खड़ा होने से पहले ही विफल करने वाला प्रशासन आखिर इस आंदोलन के प्रति इतनी नरमी क्यों बरत रहा है? खासकर बीते 10 दिनों से जब दिल्ली, मुरादाबाद रेल मार्गो पर ट्रेनों के न चलने से रोजाना लाखों का सरकारी नुकसान और लोगों को असुविधा हो रही है। हालांकि, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक बड़े नेता का कहना था कि जब प्रदेश की मुख्यमंत्री ही इस जाट आंदोलन का समर्थन कर चुकी हैं तो फिर प्रशासन की क्या मजाल की वह आंदोलनकारिया की की तरफ देखे भी।ध्यान रहे कि जाट आरक्षण को लेकर सबसे पहले आंदोलन हरियाणा में शुरू हुआ था। उस समय कांग्रेस आलाकमान के तेवरों के बाद वहां के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसी तरह इस आंदोलन को शांत करा दिया था। इसके बाद अब अकेले हरियाणा ही नहीं, बल्कि पंजाब और उत्तर प्रदेश भी जाट आंदोलन की चपेट में है। उत्तर प्रदेश में बसपा को छोड़कर कोई भी राजनीतिक दल इसके समर्थन में नहीं आया है। चूंकि, उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव है, इसलिए, राज्य में सक्रिय दूसरे दल भी इस मुद्दे के खिलाफ खड़े नहीं दिख सकते। निजी बातचीत में भाजपा, कांग्रेस और सपा ही नहीं बसपा नेता भी ट्रेनों को रोके जाने और आंदोलनकारियों के प्रति सभी जगह बरती जा रही नरमी के पक्ष में नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय भी जाट आरक्षण के विस्तार से खासा चिंतित है।
 
जाट आन्दोलन को समर्थन
मेरठ : जाट आरक्षण आन्दोलन में मेरठ के वकीलों ने भी बैठक कर समर्थन कर दिया है। सोमवार को कचहरी परिसर में जाट युवा अधिवक्ता संगठन के सदस्यों ने बैठक कर यशपाल सिंह मलिक की अध्यक्षता में चलाये जा रहे आरक्षण आन्दोलन को समर्थन की घोषणा की। कहा कि अपने हक की लड़ाई के लिए लड़ाई लड़ेंगे। प्रवेन्द्र कुमार, विवेक कुमार, सुधीर पवार, इन्द्रजीत सिंह, अमर पाल सिंह राणा, रामकुमार तोमर, आनन्द छबडि़या, सुनील राणा, सुमित, मौजूद रहे। छात्रों ने ज्ञापन सौंपा: विवि के छात्रों ने जाट आरक्षण के समर्थन में विवि के बाहर सीओ सतपाल सिंह को ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने सरकार का पुतला भी फूंकना चाहा जिसे पुलिस ने नाकाम कर दिया। इस अवसर पर छात्रों ने प्रदेश और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। प्रदर्शनकारियों में परवेंद्र सिंह, मनीष सिंह, सोरन, संदीप, पिंटू, अभिषेक, हिमांशु आदि उपस्थित थे।
 
Chandigarh, March 15 (IANS) Haryana Chief Minister Bhupinder Singh Hooda Tuesday said that he fully supported the Jat community's demand for job quota under the other backward classes (OBC) category but only in central government.
Interacting with media here, Hooda said the OBC quota for Jats should only be in the central government and there was no justification to give Jats reservation in the state.

The Jat community in Haryana, along with its counterparts in Uttar Pradesh and Rajasthan, has been agitating for the last few days for the OBC job quota. The comunuity's agitation in Haryana's Hisar, Jind and Bhiwani districts has severely affected life and railway services.

Denying allegations of the opposition Indian National Lok Dal (INLD) that the state government was not serious about the Jats' demand, Hooda said he last year wrote to Prime Minister Manmohan Singh for favourable action on the issue.

Reacting to the opposition claim that Haryana's request to the prime minister had been rejected, Hooda clarified that his letter had not been rejected by the National Backward Classes Commission, which had only stated that the matter was not in its purview and that the letter had been forwarded to the union social justice and empowerment minister.

The 1,200 MW Rajiv Gandhi mega-thermal plant at Khedar in Hisar district has been shut down in the last one week following blockade of railway tracks by the Jat protesters.

Hooda said the required coal could not reach the thermal plant due to the agitation and power supply was being affected in parts of the state, especially at a time when students were taking their final examinations.
 
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जाटों के तेवर देख केंद्र ने वार्ता को बुलाया
ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली केंद्रीय नौकरियों में कोटे की मांग को लेकर यूपी और हरियाणा में पांच मार्च से रेल रोको आंदोलन चला रहे जाट 11वें दिन भी रेलवे ट्रैक पर डटे रहे। आंदोलनकारियों के उग्र होते तेवरों को देख आखिरकार केंद्र सरकार ने अपनी चुप्पी तोड़ी और जाट नेताओं को बातचीत के लिए बुला लिया। जाट आरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने बताया कि गृह मंत्री पी. चिदंबरम और सामाजिक न्याय मंत्री मुकुल वासनिक से वार्ता करने के लिए समिति के राष्ट्रीय महासचिव उमेद सिंह के नेतृत्व में 11 सदस्यीय दल बुधवार को दिल्ली जाएगा। वहीं, सरकार जाट आंदोलन पर सरकार संसद में अपना पक्ष भी रखेगी। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीपीए) की बैठक में जाट आंदोलन पर राजनीतिक फैसला लेने के बारे में गंभीरता से विचार किया गया। इसके बाद केंद्र सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों को आंदोलनकारी नेताओं को बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसमें गृह मंत्री पी. चिदंबरम भी शामिल हैं। जाट समुदाय की आरक्षण की मांग पर विचार करने के लिहाज से सामाजिक न्याय मंत्री मुकुल वासनिक को भी बातचीत में शामिल किया है। वही, सरकार ने संसद में भरोसा दिलाया है कि वह इस मामले पर बुधवार को अपना पक्ष रखेगी। राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान भाजपा सांसद रामदास अग्रवाल ने इस मामले पर सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा, इतने समय से यह आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है और सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही। क्या सरकार इस बात का इंतजार कर रही है कि हालात पूरी तरह से बेकाबू हो जाएं। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री अश्विनी कुमार ने भरोसा दिलाया कि इस मामले पर सरकार चुप नहीं है और बुधवार को अपना बयान देगी।
 
जाट डटे, केंद्र का बुलावा
हिसार, जागरण टीम : आरक्षण की मांग पर जाटों का आंदोलन जारी है और प्रदेश के करीब दस रेलमार्गो पर आंदोलनकारी काबिज हैं। वहीं केंद्र ने जाट नेताओं को फिर वार्ता का न्योता भेजा है। पहले दौर की वार्ता सफल नहीं हुई थी। जाट नेताओं ने आरक्षण न मिलने तक आंदोलन के लिए डटे रहने की घोषणा की है। जाट आरक्षण पर प्रदेश में आंदोलनकारियों द्वारा दिल्ली जाने वाली सभी रेल ट्रैकों को घेरने की धमकी के बीच केंद्र सरकार ने वार्ता का न्योता भेजा है। बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम व वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक और अखिल भारतीय जाट समिति के प्रतिनिधिमंडल के साथ बुधवार सुबह नई दिल्ली में वार्ता करेंगे। इस मामले पर बुधवार को सरकार संसद में अपना पक्ष भी रखेगी। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक और प्रदेश के अध्यक्ष पूर्व कैप्टन हवा सिंह सांगवान ने बताया कि वार्ता के लिए संघर्ष समिति ने पंद्रह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है। प्रतिनिधिमंडल समिति के राष्ट्रीय महासचिव उमेद सिंह के नेतृत्व में वार्ता करेगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा से भी पांच सदस्य वार्ता में भाग लेंगे। इस बीच लगातार दसवें दिन मंगलवार को भी हिसार-भिवानी-दिल्ली रेल टै्रक पर मय्यड़ के पास जाटों का कब्जा बना रहा। हिसार-जयपुर और हिसार-लुधियाना रेलमार्ग पर आठवें दिन उनका कब्जा रहा। हिसार-बठिंडा मार्ग तथा दिल्ली-रेवाड़ी-जयपुर रेलमार्ग पर मंगलवार को आंदोलनकारी काबिज रहे। रेल ट्रैक के पास ही टेंट लगाकर भोजन तैयार किया जा रहा है। इससे हिसार के बजाय भिवानी-रेवाड़ी-जयपुर पैसेंजर ट्रेन को मंगलवार को भी रद करना पड़ा। दिल्ली से जयपुर के रास्ते राजस्थान के अजमेर सहित विभिन्न स्थानों व गुजरात की ओर जाने वाली गाडि़यों को नारनौल-रींगस रूट से रवाना किया जा रहा है। मंगलवार को दिल्ली-फिरोजपुर रेलमार्ग पर नरवाना में जारी धरने में बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंची। दाड़न खाप ने भी धरने में शामिल हो आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। जींद-पानीपत, नरवाना-कुरुक्षेत्र व जींद-नरवाना के बीच ट्रैक बंद रहा। इसी तरह रोहतक-भिवानी ट्रैक पर बामला में आंदोलनकारी जमे हैं। रोहतक-पानीपत रेलमार्ग पर इसराना व नौल्था में धरना दे रहे जाट डटे हुए हैं।
 
May god give him some senses

जाटों को केंद्र में मिले आरक्षण
चंडीगढ़, जागरण ब्यूरो : मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मंगलवार को कहा कि जाटों को आरक्षण देने के मामले में प्रदेश सरकार एवं कांग्रेस की सोच पूरी तरह से स्पष्ट है। सरकार चाहती है कि जाटों को केंद्र के अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) में आरक्षण मिलना चाहिए। हुड्डा ने आरोप लगाया कि जाटों को आरक्षण के मामले में विपक्ष की स्थिति स्पष्ट नहीं है। विपक्षी नेता अलग-अलग मंचों पर अलग-अलग बात कहते हैं। मुख्यमंत्री विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन प्रेस दीर्घा में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। जाट आरक्षण के मुद्दे पर गंभीर न होने के इनेलो के आरोप को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले में पूरी तरह गंभीर और स्पष्ट है। उन्होंने एक वर्ष पूर्व ही प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर अनुकूल कार्रवाई करने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र को रद्द किए जाने संबंधी आरोप का जवाब देते हुए हुड्डा ने कहा कि उनका पत्र पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा रद्द नहीं किया गया है। आयोग द्वारा यह कहा गया है कि आरक्षण की समीक्षा करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और यह पत्र केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को भेजा गया है, जो इसके कानूनी पहलुओं पर विचार कर रहा है। हुड्डा ने कहा कि इनेलो विधानसभा में अन्य जातियों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात कर रहा है लेकिन क्या जाट अन्य जातियों में शामिल नहीं हैं। जातीय और आर्थिक आधार पर आरक्षण दो अलग-अलग बातें हैं। आरक्षण का आधार आर्थिक होता है तो जाति को आधार नहीं बनाया जा सकता क्योंकि आर्थिक आधार पर सभी जातियों को इसमें सम्मिलित करना होगा। यदि जाति आधार पर आरक्षण की बात करते हैं तो आर्थिक आधार पर आरक्षण अंतर्विरोधी होगा, क्योंकि हरियाणा में जाटों से ज्यादा गरीब अन्य जातियां भी हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार जाटों को केंद्र में अन्य पिछड़े वर्ग में आरक्षण देने के लिए पुरजोर वकालत करेगी लेकिन हरियाणा में जाटों को आरक्षण का कोई औचित्य नहीं है।
 
Inke apne hi mamle nahi sulajhate janta k kahan se sulajhayengey
आखिरी दिन जमकर हंगामा
चंडीगढ़, जागरण ब्यूरो : हरियाणा विधानसभा में मंगलवार को बजट सत्र के आखिरी दिन दो बार जमकर हंगामा हुआ। जाटों के लिए आरक्षण और उनके द्वारा किए जा रहे आंदोलन पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष व विपक्ष के विधायक आपस में भिड़ गए। गुस्साए विधायकों ने एक दूसरे को देख लेने की धमकियां देते हुए बांहें चढ़ा लीं और अध्यक्ष के आसन के सामने आ डटे। एक समय तो नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। पहली बार हालत जाट आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा के दौरान बिगड़ी। दूसरी बार स्थिति जाट आंदोलन पर चर्चा के दौरान बिगड़ी। विपक्षी विधायकों ने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने विपक्ष के नेता के विरुद्ध गलत टिप्पणी की है। ऐसे ही आरोप सत्तापक्ष के विधायकों ने लगाए। विपक्षी विधायक हंगामा करते हुए स्पीकर के आसन के सामने धरना देकर बैठ गए। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और विपक्ष के नेता ओमप्रकाश चौटाला के हस्तक्षेप से विवाद निपटे। इससे पहले स्थिति को काबू में करने के लिए सदन में तैनात मार्शल चौकस हो गए। अध्यक्ष ने हंगामे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सदस्यों से सदन की मर्यादा कायम रखने का अनुरोध किया। विधानसभा में प्रश्नकाल खत्म होते ही हंगामा शुरू हो गया। उस समय मुख्यमंत्री सदन में नहीं थे। इनेलो विधायक अजय चौटाला ने जाटों को आरक्षण के मसले पर पार्टी की स्थिति स्पष्ट करनी चाही। कांग्रेस विधायक संपत सिंह ने सोमवार को सदन में इनेलो से इस बारे में सवाल किया था। कांग्रेस विधायक नरेश बादली ने चर्चा में हस्तक्षेप किया तो हंगामा खड़ा हो गया। दोनों तरफ के विधायक अपनी कुर्सियों से उठ गए और एक दूसरे की तरफ बढ़ते हुए अध्यक्ष के आसन के सामने आ डटे। दोनों पक्षों में खूब गर्मागर्मी हुई। इनेलो विधायक अभय चौटाला ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के विधायक ने बिना स्पीकर की अनुमति के चर्चा में हस्तक्षेप किया तथा अशोक अरोड़ा को देख लेने की धमकी दी। हालात बिगड़ते देख मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और विपक्ष के नेता ओमप्रकाश चौटाला ने विवाद में हस्तक्षेप किया। हुड्डा ने कहा कि सदन सबका सांझा है और सबको मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। चौटाला ने कहा कि सत्ता पक्ष के विधायक की बात का जवाब देना गलत नहीं है। सुरजेवाला ने कहा कि सदन में व्यक्तिगत हमले और गलत शब्दावली का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। हुड्डा ने दोनों तरफ के विधायकों को समझाते हुए बात खत्म करने का अनुरोध किया। उनके अनुरोध पर सदन में चर्चा फिर सुचारू हो गई।
 
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Some people on jatland say they dont need reservation and kuch karna hai to hata k dikhao,
koi batayega ki iss tau ko ya baki jo wahan baithe unko kya reservation ki jarurat hai?
and inn sab ne to leke dikha dia ( that is not far) ab jo nahi chahte vo jor lagao isse hatwane k liye
 
हिसार। आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे जाट समुदाय के लोगों ने मंगलवार को भी प्रदेश भर में 10 जगह रेल यातायात जाम रखा। रेल यातायात अस्त व्यस्त होने से परेशान केंद्र सरकार ने जाट नेताओं को बातचीत के लिए बुधवार को दिल्ली में बुलाया है।

इससे पहले अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेताओं की सरकार के कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर से वार्ता हुई थी। केंद्र में जाटों को आरक्षण देने के सवाल पर विचार करने के लिए केंद्र ने एक माह का समय मांगा था। मगर जाट नेताओं ने प्रस्ताव को ठुकरा कर आंदोलन तेज कर दिया था। उधर, राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ।

जाट संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष हवा सिंह सांगवान के मुताबिक मंगलवार दोपहर को समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक को केंद्र सरकार के प्रस्ताव की सूचना मिली। मलिक नेतृत्व में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को गृहमंत्री पी चिदंबरम और सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्री मुकुल वासनिक से मिलेगा।

सांगवान ने कहा कि सरकार यदि उनकी मांग को पूरा कर देती है तो वे अपने आंदोलन को समाप्त कर देंगे। मलिक ने कहा कि गृहमंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के नेताओं के साथ राज्यों के जाट नेता भी शामिल होंगे।

बता दें कि आरक्षण की मांग को लेकर समुदाय के लोग दस दिनों में प्रदेश को देश के विभिन्न क्षेत्रों से जोडऩे वाले दस ट्रैक जाम कर चुके हैं। इसमें मुख्य रूप से हरियाणा प्रदेश से दिल्ली, मुंबई, लुधियाना, अमृतसर, जयपुर और दिल्ली के रास्ते उत्तरप्रदेश जाने वाले लगभग सभी रेलवे ट्रैक जाम हैं। रेलवे को हर रोज करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। वहीं यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है।

कई ट्रेनों के रूट बदले

आंदोलन के कारण गुवहाटी से बीकानेर के बीच चलने वाली अवध-आसाम एक्सप्रेस को वाया सहारनपुर-अंबाला-बठिंडा के रास्ते बीकानेर भेजी जा रही है। इसके अलावा फिरोजपुर से मुंबई से चलने वाली पंजाब मेल, श्रीगंगानगर से हावड़ा के बीच चलने वाली उद्यान-आभा तूफान मेल, पठानकोट-धौलाधार एक्सप्रेस को वाया धुरी, अम्बाला के रास्ते चलाया गया। लुधियाना से हिसार के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन के जाखल से लुधियाना के बीच चलाया गया।

दस जगह ट्रैक पर दिया धरना

जाट आंदोलन कारी पानीपत के इसराना में, जींद के सफींदो व नरवाना में, सिरसा के मेहूवाला में,भिवानी के बामला में,कैथल के कलायत और हिसार के मय्यड़,गाजूवाला तथा झुप्पा में रेलवे ट्रैक पर जमे हुए हैं।
 
महिलाओं ने ट्रैक पर रागिनी गाकर मांगा आरक्षण

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हिसार. मैय्यड़ के नजदीक गांव रामायण के रेलवे ट्रैक के धरनास्थल का माहौल सोमवार को कुछ अलग ही रहा। आरक्षण की मांग तो वही थी मगर तरीका अन्य दिनों से जुदा था। धरने के नौवें दिन ट्रैक पर बैठी महिलाओं ने मंच संभाला और देहाती गीत गाकर आरक्षण की मांग उठाई।

कुछ महिलाएं बेशक घूंघट में मंच पर पहुंची, मगर समुदाय के लिए आरक्षण की मांग उन्होंने जोरदार तरीके से उठाई। यूं तो महिलाओं ने कई रागनियां गाई परंतु जैसे ही हट जा हुड्डा पाछै नै गाई तो एक बार धरनास्थल पर माहौल खुशनुमा हो गया। इसके बाद यही सिलसिला थोड़ा और आगे बढ़ा और दो महिलाओं ने कोठी तै बाहर लिकड़ रै हुड्डा, जाटां नै आरक्षण दे दे रै हुड्डा रागिनी गा सभी में नया जोश भर दिया। इस दौरान महिलाओं ने जाटनी एकता जिंदाबाद के नारे भी लगाए।

खास बात रही कि महिलाओं की इस गूंज को मजबूती देने के लिए पुरुषों भी एक स्वर में बोले जाटनी एकता जिंदाबाद। समिति के प्रदेशाध्यक्ष हवा सिंह सांगवान ने भी एक घोषणा कर डाली कि समिति इस आंदोलन में शामिल सभी महिलाओं के नाम व पते अपने पास दर्ज करेगी। जैसे ही समुदाय को आरक्षण मिल जाएगा तो इन महिलाओं को समाज की तरफ से किसी न किसी रूप में अवश्य सम्मानित भी किया जाएगा।
 
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Although I support Jats demand for reservation in OBC but seriously condemn the way of protesting by sitting on Rail tracks and stopping them. I wonder if great warrior Jats come down of their dignity and practicing such cheap tricks like Gurjars ??


For ages we've been feeding the nation and securing the country by sacrificing our lives, our contribution to country's growth has been huge and commendable but certainly this cheap trick of stopping rails will dilute it to an extent and bring bad name to our community.


Haryana/UP Jats should learn from Jats of Rajasthan how they got the reservation without any single incident of violence or chaos. I request all the protesters to leave this way of demand and fine and better and peaceful way to protest so no fellow citizen of India face any chaos and inconvenience.


Hope this message bring some sanity to the protesters !!



Cheers

Jit
 
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Although I support Jats demand for reservation in OBC but seriously condemn the way of protesting by sitting on Rail tracks and stopping them. I wonder if great warrior Jats come down of their dignity and practicing such cheap tricks like Gurjars ??


For ages we've been feeding the nation and securing the country by sacrificing our lives, our contribution to country's growth has been huge and commendable but certainly this cheap trick of stopping rails will dilute it to an extent and bring bad name to our community.


Haryana/UP Jats should learn from Jats of Rajasthan how they got the reservation without any single incident of violence or chaos. I request all the protesters to leave this way of demand and fine and better and peaceful way to protest so no fellow citizen of India face any chaos and inconvenience.


Hope this message bring some sanity to the protesters !!



Cheers

Jit

kisiko aarkshan pasand nahi hai to ab kisiko ko tarika not at all surprised. Jit bhai kahin office mein to dusre logon ne kuch nhai kaha iss barein jisse unka inconvenience dikha aapko?
 
Haryana Jats to boycott Holi over job quota row


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Chandigarh: In a bid to mount pressure on the government, Haryana Jat leaders announced on Wednesday that their community will boycott the Holi festival in the state March 20 and observe a "black day".

Hundreds of Jat community members, including women, are since March 7 squatting on railway tracks and disrupting train services in Punjab and Haryana to press for reservations in government jobs under the Other Backward Classes (OBC) category.

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A delegation of Jats met Home Minister P Chidambaram and Social Justice and Empowerment Minister Mukul Wasnik in New Delhi on Wednesday.

"A special delegation of Jats, including members from Punjab, Haryana and Jammu and Kashmir, met Union Home Minister and Social Justice and Empowerment Minister in a joint meeting in New Delhi today (Wednesday). The meeting was neither successful nor unsuccessful," said Hawa Singh Sangwan, state president of All India Jat Aarakshan Sangarsh Samiti.


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"They have sought three-day time to announce their decision. In the meantime, we would continue our protest and intensify it after three days. Haryana Jats would also boycott Holi and celebrate it as black day," he said.

In Haryana, Jat protesters have blocked almost all railway lines in Bhiwani, Hisar and Jind districts. For the last few days, railway authorities have either cancelled many trains or diverted these, causing losses worth millions of rupees.

Sangwan said they would gradually block all railway lines in the state and cut off Haryana from other parts of the country.

Due to shortage of coal caused by the agitation, power generation at the recently-commissioned 1,200 MW Rajiv Gandhi Thermal Power Plant at Khedar in Hisar district has been stopped for the last four days, officials said.



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भास्कर नेटवर्क & हिसार/ नई दिल्ली

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्री मुकुल वासनिक के साथ जाट नेताओं की बुधवार को हुई वार्ता के बाद भी बात नहीं बन पाई है। जाट नेताओं ने तीन दिन का समय तो दे दिया है। लेकिन रेलवे ट्रैक से उठने से इनकार कर दिया है। जाट नेता यशपाल मलिक ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानेगी तब तक वे रेलमार्ग से नहीं उठेंगे।

जाट नेताओं ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रियों से करीब एक घंटे मुलाकात की। जाट नेता यशपाल मलिक ने कहा, ‘गृहमंत्री ने इस मामले में विचार के लिए दो-तीन दिन का समय मांगा है। सरकार को समय दे दिया है। लेकिन मांगें नहीं माने जाने तक रेलवे ट्रैक से नहीं उठने का फैसला किया गया है।’

दीपेंद्र हुड्डा व जयंत चौधरी भी मिले : बुधवार देर शाम कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा व राष्ट्रीय लोकदल सांसद जयंत चौधरी ने भी केंद्रीय गृहमंत्री से मुलाकात की। इन दोनों नेताओं ने कहा कि वे आंदोलन विरोधी नहीं हैं। लेकिन रेल या सड़क मार्ग रोकना सही नहीं है।( time will tell what you are doing is right or wrong)
 
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