albaadi baalkaan key kissey.

पहलम बताये होए ठोले(ठोबे ) में तें-ए एक छोरा था घणा निकरमा | ऊह का असली नाँ तो बेरा कोणी पर ऊह ने सब बांदर कह्या करदे | घरक्याँ ने वो घर तें काढ राख्या था | ऊह ने किम्मे भी काम बता देंदे , वो-ए काम उलटा कर के आंदा | वे उहने ना तो खावन ने बुझया करदे एर ना कदे कई-कई दिन आंदा तो टोहन्दे | वो कदे गाम में एर कदे रोहतक पाँ के पाँ भीडान्दा हंडे जांदा | एक दिन रोहतक बस अड्डे पे (पुराणा )वो हांडअन लाग्रा था | उड़े एक फोजी जो छुट्टी आया था एर चा पीवण लाग्र्या था | ऊह की नजर हटदे-ए ऊह का शूट्केश ले कें चाल्दा हो लिया | इतने फोजी ने बेरा पाट्या इतने वो महम आली बस में चढ़न लाग्र्या था | बस चाल पड़ी थी फोजी गेल्याँ भाज्या पर इतने बस लिकड़ गी | ऊह ने एक भुंड (आटो रिक्सा ) ले कें एर बस की गेल लाग लिया | बस के थ्यावे थी ऊह के | पर गाम में पोंच्या इतने वो बस माँ तें उतर कें एर एक गाल में बडदा देख लिया | इतने अन्धेरा हो लिया एर ओपरा गाम देख कें ऊह ने रोला ना मचाया | फोजी ने फोजी ट्रेनिंग का आड़े परयोग करया | बांदर हर का घर दूँघे सी पड़े था गाम में , एर राह में भीड़ी -भीड़ी घट्टी-गाल पड़ें थी | घणे मोड़ लाग कें उनका घर आया | फोजी ने वो बड़ता देख लिया | एर जित के गया था , उड़े-उड़े गाल के हर मोड़ पे गोबर लांदा गया | एर ऊह गोबर ने देख - देख कें फेर उलटा-ए आग्या सड़क पे | रोहतक आ कें एर गेल ले कें पुलिस आधे घंटे में फेर आ लिया , एर गोबर क-ए साहरे फेर उन के घर जा पोंच्या | एर रंगे हाथ पकड्या गया वो बांदर | यो बांदर फेर बड्डा हो कें एक भोत बड़े गिरोह का नेता बन्या था | जो सारे हरयाणा में हाई टेंसन बिजली के खाम्ब्याँ के ताम्बे के तार चोरी कर्या करदे | बिजली के तारां तें बांदर ने म्हारे गाम का नाँ भोत रोशन कर्या बिना लट्टू के |
 
म्हारी साहरे आली गाल में एक भान्जा रह्या करदा | उह का नाँ चिचड ( एक पर्भक्षि कीट जो गाय मेन्ह्स की जान्घां में लाग्या रह्या करे ) धर राख्या था | वो था भी कती मरियल सा १०-१२ साल का था तो भी ६-७ साल का दिख्या करदा ,जणू तो एधम हो रया स | एर बालकां गेल्याँ सारी हान पंगे लिए जाया करदा | वो पिस्से आछे खर्च करदा | उनके घरके भी कहंदे अक हाम तो पिस्से कोणी देंदे ,यो कीथों लायावे स हामने कोणी बेरा | गाल में चाकी(फ्लोर मील ) थी | इन् ने बाहर घेर में गंडासा एर तेल की घाणी ला राखी थी | उह की खातर पुली पे पट्टा चढ़ान खातर एक मोघा छोड़ राख्या था | ऊह में के कोए पिलुरा/बिल्ली तो बेशक बड जा पर मानस /बालक का बड़ना मुस्किल था | वे हमेशा शिकायत करदे अक कदे खरीज ना पांदी एर कदे ग्राहकां के गिन्हू एर चने या दुसरा नाज चोरी हो जा स | उन् ने कई बे साल-संभाल भी ली पर बेरा कोणी पाटया | एक दिन उनका कोए छोरा वारि रात सी कायें काम खातर चाकी पे आया | उह ने बहारना खोला तो इस्सा लाग्या अक कोए उस मोघे माँ के लिकड़ा स | फेर उहने टोह्या तो अँधेरे में कुछ ना दिख्या | लट्टू बाल्या तो उहने दाणे खींडे दिखे | एर उह मोघे धोरे एक चप्पल भी पाई | जब जा कें यो छोरा पकड्या गया एर सब ने सप्रे आये अक इन्ने छोटे मोघे में यो बड्या लिकडया कुय्कर | फेर उस के मामा हर ने वो उनके घरां खंदा दिया | चोर चीचड़ |
 
hum bi jab chhote the to barish me jab nira e ghaas-foos ug yaave hai to unme ek isa paudha
rah hai jo kapda ke chip ja hai hum us paudhe ke sire jo chipak jata hai ko todkarek dusre par chipka dete the:rolleyes::rolleyes::rolleyes:ha ha ha
 
hum bi jab chhote the to barish me jab nira e ghaas-foos ug yaave hai to unme ek isa paudha
rah hai jo kapda ke chip ja hai hum us paudhe ke sire jo chipak jata hai ko todkarek dusre par chipka dete the:rolleyes::rolleyes::rolleyes:ha ha ha
very good tu to ravinder ji te b badda albadi hai ...:p
 
जौ की बाल ने तोड़ के किसी की पेंट में निचे खिसका दो .. व फेर अपने आप ऊपर चढ़ ज्या से .. इससे काम बचपन में करते थे .. but किसी मास्टर धोरे तो यो काम न किया, किसी ने किया, उसकी कसूती पिटाई होवे थी.
 
hum bi jab chhote the to barish me jab nira e ghaas-foos ug yaave hai to unme ek isa paudha
rah hai jo kapda ke chip ja hai hum us paudhe ke sire jo chipak jata hai ko todkarek dusre par chipka dete the:rolleyes::rolleyes::rolleyes:ha ha ha

wah wah wah wah wah ............hahahahahhahaa hahaha haha ahah ahha pet dukhna laggya hans hans k ..............kasuti albad,,,,,,,,,,,,,,,,,oskar award ke yog........gramy bhi ......
 
wah wah wah wah wah ............hahahahahhahaa hahaha haha ahah ahha pet dukhna laggya hans hans k ..............kasuti albad,,,,,,,,,,,,,,,,,oskar award ke yog........gramy bhi ......
de to diya ravinder te badda albadi kah to diya tha baaki kasar tane puri kar di hahahahhaha
 
de to diya ravinder te badda albadi kah to diya tha baaki kasar tane puri kar di hahahahhaha

priya ji isme karta n ek secret puodhe ka varnan bhi krya s ..........issa poudha jo dusre k chipka deta tha yu bhai ...........hahahhhahahahahah ............jma naas tha diya isne to .............
 
जित महारा स्कूल का भवन बनर्या स उड़े सन ४७ तें पहलम मुसल्मानां का कबरस्तान होया करदा | जब नई बिल्डिंग बनाई गई पुरानी गेर कें तो ४-६ किल्ल्यां का वो कबरस्तान भी स्कूल की जमीन में-ए मिला दिया गया | आये साल चोमास्स्याँ में कबे फूटबाल के एर कबे हाकी के मैदान में ये कबर धंस जाया करदी | ये कबर ५-६ फूट डून्घी होया करदी एर इन् माँ तें बाषण लिकड़ा करदे | मुसलमान शवआँ ने बाश्ना पे लुटा के दाब दिया करदे | जब हाम छटी में पढ्या करदे | सकूल की एक कूण में एक कमरा था | एक बे कई दिन ठाडा मींह बर्ष्या तो ऊह कमरे में कई कबर धंश गी | वो कमरा म्हारी क्लास का था | मैदान आली कबर ते माट्टी गेर कें भर दिया करदे पर पह्ल्डी बारी किसे कमरे में कबर धंशी थी | बालकां ने कब्रां के बाषण काढ-काढ कें ने ऊरां-पराँ गेर दिए एर कमरे का सारा फर्श पाड़ना पड्या एर कमरा ठीक होवन में कई दिन लाग गे | म्हारी क्लास दो तीन दिन तो एक बड्डा हाल था ऊह में शिफ्ट कर दी | उड़े बालकां ने आछ्या टाइम पास पा गया ढंग तें पढ़ाई तें ना होंदी | एर जब फर्श ठीक होग्या तो मास्टर ने कही अक तडके तें क्लास थारे कमरे में लागेंगी | उड़े कई बड्डे-बड्डे बालक जो सगाई के मारे स्कूल में आया करदे एर उनका ईह तें बाध पढ़ाई की गेल्याँ कोए समबन्ध ना था ,कमरा देखण गये एर उन् ने उड़े पलान बना ली | उलटे आ कें ऊह मास्टर ताहि बोले अक उड़े तो किस्से डाढी आले बूढ़े का भूत देख्या स हाम ने एर कमरे में जांदे-ए शूँ-शूँ होवण लाग जा स | वो मास्टर भी इस्सा-ए डरपोक सा था | कई बालक डर गे एर ऊह कमरे में जावण तें नाट गे | वो मास्टर भी कई बे गया एर नु बोल्या अक मन्ने तो किम्मे ना दिखदा | बालक बोले अक भूत दिखे तो बालकां ने स एर बड्या बड्डयाँ में करे | आज ताहि कदे किस्से बालक में भूत बड़े देखे सुने सें के | उन् मां ते एक छोरा जिन के खेत लव-ए पड़ें थे वो बोल्या अक काल महारा पानी का ओसरा था रात का एर में ओटडायाँ के साहारे के जाऊं था तो मन्ने कई लाल-लाल आँख कमरे की खीडकीयाँ माँ के बहार लाखांदी देखी | या बात सारे स्कूल में फेल गी | एर दुसरे मास्टर भी ऊह मास्टर का मजाक उड़ान लागे | इन् बातां में १०-१५ दिन लिकड़ गे फेर हेडमास्टर ने आ के बालक एर वो मास्टर आछ्या धमकाया | एर हेडमास्टर आप गेल्याँ उस कमरे में दो-तीन घंटी ली एर दिन में दो-तीन घंटियाँ में क्लास में बेठ्या भी | जब जा कें बालक माने | पर उन् उत बालकां का तो कई दिन टेम भी पास होया एर पढ़ाई तें भी बचे रहए | भूत बालक |
 
ke baat kayee din ho gaye koye nayee albaad nahi rachiView attachment 11726

'रची" तेरा मतलब के स राके | में के घडूं सूँ अल्बाद | जब याद आज्वेंगी तो लिख दूंगा | इब्ब तो ख़तम सी हो ली सें | एर बाकी कई इस्सी सें जो लिखण जोगी ना सें |
 
hum bi jab chhote the to barish me jab nira e ghaas-foos ug yaave hai to unme ek isa paudha
rah hai
jo kapda ke chip ja hai hum us paudhe ke sire jo chipak jata hai ko todkarek dusre par chipka dete theha ha ha

पौद्धा रह्या करे अक जाम्या (उग्या ) करे | यो बालक तो कती सहरी पप्पू स |
 
मेरी गेल्याँ भी अल्बाद होई थी एक बे | में जब यूनिवर्सिटी कोलेज में पढ्या करदा | कदे- कदे मेरे मामा का छोरा गुलू फोगाट जब बोर हो जांदा तो मन्ने बुलाण आ जांदा कोलेज में , अक आज कट्ठे खेलांगे तू आज आड़े-ए थम जाइए | दिन में ऊह के माँ एर बाबू दोनु डिवटी पे चाले जांदे | एक दिन दोफारी में हामने दोनुआ ने उनकी एक पुराणी झाँखी( जो कोठी बनांदी हाण पाड कें ने एक ओड नु गेर राखी थी ) पाड ली एर ऊह के गज काढ कें ने कबाड़ी के जा बेचे एर चाल पड़े शीला टाकिज कानी ,जो लावे-ए पड़े था | म्हारी आगे आली सीटां पे तीन चार छोरी बेठी थी | वे आपस में आछी धेंगा- मुश्ती करण लागरी थी | एर गुलू भी शीन के अनुसार उन् पे कमेन्ट मारे जा था | कबे उनकी शीटआं के लात मार दे ,कबे पकड़ कें हिला दे | एर में उहने रोकूँ था पर मेरे कहे तें वो के मांने था | मखा ये टाकिज आले तन्ने बाहर काढ देंगे एर आपणे पिस्से भी जांगे | पर उह क डर ना था एक तो टाकिज का मालिक उनके गाम का था एर मनेजर वगेरा सब उह ने जाणे थे | अधबीचाले (इंटरवल ) में हाम बहार चाले गए एर हांड फिर के एक-एक रपिये की मूंगफली ले कें ने फेर आण बेठे | वे छोरी मेरे कानी लखा-लखा हांसे | एर इतने मन्ने भी किम्म्मे शीट पे अजीब सा लाग्या | देख्या तो पकोड़याँ गेल्याँ लाल सी चटनी आया करदी वा गेर राखी थी उन् छोरियां ने | फेर ते में उड़े तें बिना फिलम देखें दुडकी गया | एर गुलू का हान्स हान्स कें बुरा हाल होर्या था एर मेरा शर्म तें | जब पाछे मन्ने कदे छोरियां की तरफदारी करण की हिम्मत नहीं करी |
विशेष ----भाइयो मेरा मजाक ना उड़इयो | मन्ने इन्ने साल पाछे भी भोत शर्मांदे -शर्मांदे ने लिखा स |
 
मेरी गेल्याँ भी अल्बाद होई थी एक बे | में जब यूनिवर्सिटी कोलेज में पढ्या करदा | कदे- कदे मेरे मामा का छोरा गुलू फोगाट जब बोर हो जांदा तो मन्ने बुलाण आ जांदा कोलेज में , अक आज कट्ठे खेलांगे तू आज आड़े-ए थम जाइए | दिन में ऊह के माँ एर बाबू दोनु डिवटी पे चाले जांदे | एक दिन दोफारी में हामने दोनुआ ने उनकी एक पुराणी झाँखी( जो कोठी बनांदी हाण पाड कें ने एक ओड नु गेर राखी थी ) पाड ली एर ऊह के गज काढ कें ने कबाड़ी के जा बेचे एर चाल पड़े शीला टाकिज कानी ,जो लावे-ए पड़े था | म्हारी आगे आली सीटां पे तीन चार छोरी बेठी थी | वे आपस में आछी धेंगा- मुश्ती करण लागरी थी | एर गुलू भी शीन के अनुसार उन् पे कमेन्ट मारे जा था | कबे उनकी शीटआं के लात मार दे ,कबे पकड़ कें हिला दे | एर में उहने रोकूँ था पर मेरे कहे तें वो के मांने था | मखा ये टाकिज आले तन्ने बाहर काढ देंगे एर आपणे पिस्से भी जांगे | पर उह क डर ना था एक तो टाकिज का मालिक उनके गाम का था एर मनेजर वगेरा सब उह ने जाणे थे | अधबीचाले (इंटरवल ) में हाम बहार चाले गए एर हांड फिर के एक-एक रपिये की मूंगफली ले कें ने फेर आण बेठे | वे छोरी मेरे कानी लखा-लखा हांसे | एर इतने मन्ने भी किम्म्मे शीट पे अजीब सा लाग्या | देख्या तो पकोड़याँ गेल्याँ लाल सी चटनी आया करदी वा गेर राखी थी उन् छोरियां ने | फेर ते में उड़े तें बिना फिलम देखें दुडकी गया | एर गुलू का हान्स हान्स कें बुरा हाल होर्या था एर मेरा शर्म तें | जब पाछे मन्ने कदे छोरियां की तरफदारी करण की हिम्मत नहीं करी |
विशेष ----भाइयो मेरा मजाक ना उड़इयो | मन्ने इन्ने साल पाछे भी भोत शर्मांदे -शर्मांदे ने लिखा स |


इसक मतलब आप भिचाले टांग मारो थे ,,,,,,छोरियां न तो गुल्लू की अल्बादा म मज़ा अवे था .........हहह्हः.
 
मेरी गेल्याँ भी अल्बाद होई थी एक बे | में जब यूनिवर्सिटी कोलेज में पढ्या करदा | कदे- कदे मेरे मामा का छोरा गुलू फोगाट जब बोर हो जांदा तो मन्ने बुलाण आ जांदा कोलेज में , अक आज कट्ठे खेलांगे तू आज आड़े-ए थम जाइए | दिन में ऊह के माँ एर बाबू दोनु डिवटी पे चाले जांदे | एक दिन दोफारी में हामने दोनुआ ने उनकी एक पुराणी झाँखी( जो कोठी बनांदी हाण पाड कें ने एक ओड नु गेर राखी थी ) पाड ली एर ऊह के गज काढ कें ने कबाड़ी के जा बेचे एर चाल पड़े शीला टाकिज कानी ,जो लावे-ए पड़े था | म्हारी आगे आली सीटां पे तीन चार छोरी बेठी थी | वे आपस में आछी धेंगा- मुश्ती करण लागरी थी | एर गुलू भी शीन के अनुसार उन् पे कमेन्ट मारे जा था | कबे उनकी शीटआं के लात मार दे ,कबे पकड़ कें हिला दे | एर में उहने रोकूँ था पर मेरे कहे तें वो के मांने था | मखा ये टाकिज आले तन्ने बाहर काढ देंगे एर आपणे पिस्से भी जांगे | पर उह क डर ना था एक तो टाकिज का मालिक उनके गाम का था एर मनेजर वगेरा सब उह ने जाणे थे | अधबीचाले (इंटरवल ) में हाम बहार चाले गए एर हांड फिर के एक-एक रपिये की मूंगफली ले कें ने फेर आण बेठे | वे छोरी मेरे कानी लखा-लखा हांसे | एर इतने मन्ने भी किम्म्मे शीट पे अजीब सा लाग्या | देख्या तो पकोड़याँ गेल्याँ लाल सी चटनी आया करदी वा गेर राखी थी उन् छोरियां ने | फेर ते में उड़े तें बिना फिलम देखें दुडकी गया | एर गुलू का हान्स हान्स कें बुरा हाल होर्या था एर मेरा शर्म तें | जब पाछे मन्ने कदे छोरियां की तरफदारी करण की हिम्मत नहीं करी |
विशेष ----भाइयो मेरा मजाक ना उड़इयो | मन्ने इन्ने साल पाछे भी भोत शर्मांदे -शर्मांदे ने लिखा स |


na na ravinder ji,,ebe koni udawan majak,,kite mauka dekh k ne point marange,,!! (hahaha...bhundi banngi ya to) :P
 
इसक मतलब आप भिचाले टांग मारो थे ,,,,,,छोरियां न तो गुल्लू की अल्बादा म मज़ा अवे था .........हहह्हः.

हहहः ... तभी तो उन छोरिया ने रविंदर भाई की सीट लीप दी ... गुलू की सीट ना लीपी .. :)
 
हहहः ... तभी तो उन छोरिया ने रविंदर भाई की सीट लीप दी ... गुलू की सीट ना लीपी .. :)

घणे सुवाद ना ल्यो रे | और भी सें इस्सी-इस्सी ,ना तो और नि लिखूंगा |
 
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