albaadi baalkaan key kissey.

म्हारी गेल दो जुड़वां भाई पढ्या करदे | असली नाँ तो में कोणी बताऊँ ,कारण ,एक तो वे मर लिए दुसरा उनका परिवार इस्सा-ए स (समझ गे होगे )| इन् दोनुआ ने घणे उत्पने करे थे आछे भी एर भुंडे भी , जो याद आवेंगे वे छाप्दा जाउंगा | इब्ब इन् का नाम मान लो राम एर श्याम था | ये कट्ठे फेल होया करदे, एर कट्ठे पास होया करदे, हर क्लास में | राम ,श्याम तें तीन मिनट बड्डा था | दोनुआ की पिछान घणी मुस्किल थी, तो जब ये पैदा होए थे तो उनकी दादी एक के काला तागा एर एक के लाल तागा बाँध के राख्या करदी ,पिछान खातर अक कदे एक जाणे ने-ए दो बे दूध प्या द्यां एर दुसरा भूखा मर्जा | उनकी एक सी आवाज , एक सी चाल ,बाकी तो सब किम्मे एक सा-ए था | म्हारा इनका घणा आणा जाणा था | एक तो इनका बाबू एर मेरा बाबू एक-ए रज्मेंट में थे | दुसरा म्हारा एर इनका घेर साहरे-साहरे थे | ये दोनु मेरे तें ५-६ साल बड्डे होंगे | इनका एर मेरा साथ ९ मी एर दशमी में होया था, क्यूंकि ये कई बे थलस कें तलान आ लिए थे | ये दोनु उत भाई मन्ने दुसरे छोरयाँ तें भी बचाया करदे | में म्हारी क्लास में सब तें छोट्टा था |
दशमी में इस्सा होया ,शायद उनकी जिन्दगी में पहली बार अक श्याम पास होगया एर राम फेल | पहलम दोनुआँ की कट्ठे फोज में भर्ती होवण की पलान थी | पर इब्ब के कर्या जा सके से | राम एक्ला स्कूल में जाण तें नाट ग्या, एर श्याम फोज में भर्ती होवण तें | इब्ब घरके के करें | उन् के बाबू ने उन् खातर ५-६ मेन्ह्स मोल ले कें बाँध दी अक यो काम तो कट्ठे हो के कर लोगे | इब्ब उनकी मेह्स्स्याँ की डेरी भी बढ़िया चाल पड़ी | वे उत होवण की गेल मेहनती भी थे | दशमी करे के दो-तीन साल पाछे ताहि उनकी सगाई ना होई | एक तो उनके किल्ले १-१ ए बांडे आवें थे , दुसरा डेरी कोए ख़ास रोजगार का साधन ना स्मझ्या जावे था | कोए सगाई आला भड़े -ए ना था | दुखी हो कें राम ने श्याम की दशमी की सनंद ठाई एर जा कें फोज में भर्ती होगया | गाल में सब ने बेरा था अक राम ,श्याम की सनद ले के भर्ती होया स | राम की रंगरूटी लिकड़ती -लिकड़ती उन् दोनुआ का बियाह भी होग्या | एक दिन श्याम की उनकी गाल के एक छोरे गेल्याँ लड़ाई ही गी | एर श्याम ने चेलेंज कर दिया अक तम म्हारा किम्मे नि पाड़ सकदे | ऊह छोरे ने राम की यूनिट में चिठ्ठी गेर दी अक यो दुसरे की सनद पे भर्ती होर्या स | राम आ लिया २ मिन्हाया-ए में घरां पर्मानेनेट छुट्टी | जाटडा,काटडा आपणे ने-ए मारे |


यु काम त माडा करया ......राम स्याम की गेल.....
 
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यु काम त माडा करया ......राम स्याम की गेल.....

के कर्या जा सके से | इस्से घटना पाछे उन के उलटे दिन लाग गे थे | मेरे तो बड्डे भाईयाँ की ढाल थे , कई अल्बाद तो मन्ने उन्की गेलयाँ -ए मिल के करी थी |
 
मेरे दोस्त जुड़वां भाई , राम -श्याम जब डेरी चलाया करदे | जब कई मिहने हो गे उनके बाबू ने डेरी का हिसाब मांग्या तो दोनु भाई हिसाब देवन तें नाट गे | नु बोले अक रे बाबू तन्ने पहलम कित बताई थी अक हिसाब भी देणा स | उनके बाबू ने नु कह के अक तम हिसाब नि दयो, तो घेर का किराया ,एर खेत के ठेके के ना के पिस्से दयो | वे नु बोले इब्ब तो म्हारे धोरे पिस्से कोणी ,पर हाम दे द्यांगे | वे खूब तो फिलम देखते , अर बढ़िया-बढ़िया लत्ते पहरदे | पहलम तो वे साइकल पे दूध बेचन जाया करदे, पर थोड़े दिना पाछे उन् ने एक मोटर साइकल भी ले ली | पर आपने बाबू ताहि फुच्ट भी ना दी | उन के बाबू ने फेर दाब लाइ , तो उन् ने डरामा रच दिया | म्हारे खेताँ धोरे नहर का पुल से, म्हारे गाम के घंन्खरे दूधिये उडे-ए आ के पाणी मिलाया करदे दूध में | एक दिन राम आया भाज्या, दोफारे सी म्हारे खेत में, ऊह की गोज पाट री एर दो-तीन बट्टन टूट रे ऊह के, एर नु बोल्या , एक रे किम्मे लाठी डंडा स | मखा के होया , में उड़े-ए था खेत में | वो नु बोल्या अक एक छोरे ने मेरे दूध के मिहने के हिसाब के पिस्से खोस लिए पिस्तोल दिखा कें , तू मेरी गेल्याँ आजा | में भी गया ऊह की गेल लाठी ले कें | पुल पे जा कें राम बोल्या ,भाई देख वो जाण लाग्रा | एर दूर सी मोटर साइकल पे जांदा एक माणस दिखा दिया | एर नु बोल्या ऊह की गेल लागणा भी खतनाक से | तू मेरे बाबू ताहि कह दिए अक राम धोरे एक माणस ने पिस्से खोस लिए , एर तन्ने देख्या था वो | ये मन्ने रोज कम्पा पाया करदे भाऊ बाणीये की दूकान पे तें | एर इन् ने नु कह राखी थी भाऊ ताहि अक यो महारा भाई से ,इहने कदे भी कम्पा पीणी हो तो दे दिया कर ,एर म्हारे अकाऊंट में लिख दिया कर | इब्ब भाई का इतणा खा पी राख्या तो मन्ने तो हाँ में हाँ मिलाणी-ए थी | उससे दिन मेरी पेस्सी हो गी उनके बाबू आगे एर मन्ने गवाही दे दी अक मन्ने वो माणस भजता देख्या था, मोटर साइकल पे, एर में सीधा-साधा बालक ,मेरी बात ने सब साची ऊँ भी मान लिया करदे | फेर उनका दो तीन मिह्न्या खातर पंडा छुट ग्या हिसाब देवन तें | पर किस्से के भी जची कोणी अक इससे उत बालक पे कोए पिस्से खोस सके स | फेर उन् ने दो मिहने पाछे फेर डरामा रचा था वो आगली अल्बाद में लिखूंगा
 
मेरे दोस्त जुड़वां भाई , राम -श्याम जब डेरी चलाया करदे | जब कई मिहने हो गे उनके बाबू ने डेरी का हिसाब मांग्या तो दोनु भाई हिसाब देवन तें नाट गे | नु बोले अक रे बाबू तन्ने पहलम कित बताई थी अक हिसाब भी देणा स | उनके बाबू ने नु कह के अक तम हिसाब नि दयो, तो घेर का किराया ,एर खेत के ठेके के ना के पिस्से दयो | वे नु बोले इब्ब तो म्हारे धोरे पिस्से कोणी ,पर हाम दे द्यांगे | वे खूब तो फिलम देखते , अर बढ़िया-बढ़िया लत्ते पहरदे | पहलम तो वे साइकल पे दूध बेचन जाया करदे, पर थोड़े दिना पाछे उन् ने एक मोटर साइकल भी ले ली | पर आपने बाबू ताहि फुच्ट भी ना दी | उन के बाबू ने फेर दाब लाइ , तो उन् ने डरामा रच दिया | म्हारे खेताँ धोरे नहर का पुल से, म्हारे गाम के घंन्खरे दूधिये उडे-ए आ के पाणी मिलाया करदे दूध में | एक दिन राम आया भाज्या, दोफारे सी म्हारे खेत में, ऊह की गोज पाट री एर दो-तीन बट्टन टूट रे ऊह के, एर नु बोल्या , एक रे किम्मे लाठी डंडा स | मखा के होया , में उड़े-ए था खेत में | वो नु बोल्या अक एक छोरे ने मेरे दूध के मिहने के हिसाब के पिस्से खोस लिए पिस्तोल दिखा कें , तू मेरी गेल्याँ आजा | में भी गया ऊह की गेल लाठी ले कें | पुल पे जा कें राम बोल्या ,भाई देख वो जाण लाग्रा | एर दूर सी मोटर साइकल पे जांदा एक माणस दिखा दिया | एर नु बोल्या ऊह की गेल लागणा भी खतनाक से | तू मेरे बाबू ताहि कह दिए अक राम धोरे एक माणस ने पिस्से खोस लिए , एर तन्ने देख्या था वो | ये मन्ने रोज कम्पा पाया करदे भाऊ बाणीये की दूकान पे तें | एर इन् ने नु कह राखी थी भाऊ ताहि अक यो महारा भाई से ,इहने कदे भी कम्पा पीणी हो तो दे दिया कर ,एर म्हारे अकाऊंट में लिख दिया कर | इब्ब भाई का इतणा खा पी राख्या तो मन्ने तो हाँ में हाँ मिलाणी-ए थी | उससे दिन मेरी पेस्सी हो गी उनके बाबू आगे एर मन्ने गवाही दे दी अक मन्ने वो माणस भजता देख्या था, मोटर साइकल पे, एर में सीधा-साधा बालक ,मेरी बात ने सब साची ऊँ भी मान लिया करदे | फेर उनका दो तीन मिह्न्या खातर पंडा छुट ग्या हिसाब देवन तें | पर किस्से के भी जची कोणी अक इससे उत बालक पे कोए पिस्से खोस सके स | फेर उन् ने दो मिहने पाछे फेर डरामा रचा था वो आगली अल्बाद में लिखूंगा

हा हा हा भुंडे बिघनी बालक थे ..!!!
 
मेरे दोस्त राम एर श्याम जो डेरी खोल रे थे , २-३ मिन्हे हो लिए थे पिस्से खोस्याँ नु ,पर फेर भी उन् ने आपने बाबू ताहि हिसाब कोणी दिया एर ना समझोते के अनुसार पिस्से दिए | उनके बाबू ने फेर दाब लाइ, अक कम तें कम मन्ने लाखां रपिये लाये मन्ने उनके ब्याज के बराबर तो पिस्से दे दो | वे फेर ना नुकर करण लागे |
म्हारे गाम एर रोहतक के बीच में एक बदरो पड़े स | इह में चोमास्याँ-ए में पाणी रह्या करदा | बाकी बखत या सुखी रह्या करदी | एक दिन श्याम ,बदरो के पुल पर तें पड़ग्या मोटर साइकल सुधाँ | फेर किस्से नु वो ठाया एर ऊह के माडी-मोटी चोट भी लागरी थी | जब घरक्याँ ने बुझी अक रे के होया , कुकर पड़ग्या था | वो बोल्या अक मन्ने दोफारी में एक बुढा दिख्या , धोले लत्त्यां आला वो सड़क पर के उड़ता आवे था ,एर उहने में ठा कें बागा दिया बदरो में | मन्ने आगे कोणी बेरा के होया | ऊह दिन भी वो नु बोल्या अक में मिहने के पिस्याँ का हिसाब लाया था , पिस्से कित गए मन्ने ना बेरा | फेर उनके घर के बोल बाले रह गे | एर जब भी कोए श्याम ताई माडा सा छो में बोले जिब्बे ऊह माँ तें वो बुढा हुंकार मारण लाग ज्या | आखिर में उनके बाबू ने उन् पे पिस्से मांगने छोड़ दिए | दुधिया भूत |
 
एक था ढीमसरा ( ढीम जिस्से सर आला, कम दीमाग आला ) पहलम भी मन्ने एक पोस्ट में ऊह का जीकर कर्या था(ऊह का असली नाँ मन्ने कोणी बेरा ,के था ) | म्हारे घरां में एक मेरे ताऊ का छोरा त्रिलोक सिंह जो डांगर चाराया करदा वो माडा बड्डा होयें पाछे रोहतक एक फेक्टरी में जावन लाग्या ( बियाह करवान का मार्या, अक बिना नोकरी आले ने कोए आपनी छोरी कोणी देंदा) एर उससे फेक्ट्री में ढीमसरा भी जाया करदा | एक दिन ढीमसरे में एर त्रिलोक में शरीत लाग गी अक कुण घणा तेज साइकल चलावे | उनकी गेल दो-तीन जाणे और थे | वे बोले ,अक त्रिलोक तो घणे दिन का साइकल पे आवे - जावे स , तो यो माडा सा पाछे शुरू करेगा ,साइकल भजाना | उन् ने ढीमसरा माडा सा आगे खड्या कर दिया, तीन चार फूट, एर ऊह का साइकल ठीक ढाल खड्या करण के चक्कर में ,त्रिलोक ऊह के पाछे बिठा दिया ,एर ऊह के साइकल का हेंडल ऊह के हाथ में दे दिया ,सब ने बतला के ,एर मार दी किलकी | एर ये भी सारे जाणे पाछे लाग लिए किलकी मारदे | ढीमसरे नु त्रिलोक के साइकल का अगला पहिया दीखे अक लाग्र्या स गेल की गेल | फेक्टरी तें महारा गाम ५-६ की मी पे -ए स | जब वे गाम में पोंचे इतने तो ढीमसरे का बोझडा हो लिया था | एर त्रिलोक मझक के सुवाद ले गा l पर ढीमसरे ताहि ऊह की जीत के पिस्से दे दिए | आंडी कम्पीटीशन |
 
बात कइ साल पेहला कि स जब यो १ अप्रिल न्या न्या चाला था मैने तडके त कई अल्बाद कर ली थी पर तसली सी नहीं होई थी रात के ११ बज रे थे माहरे घर के पाछे मेरे ताउ न अपनी भैन्सा खातर बना राखा था र उड़े त मेरे तौउ का घर १ किलोमीटर पड़े था मने फोन केरा उन्के मका ताउ हुका पिके कित धर क गया था आड़े नास हो लिया भैंस न हूका गेर दिया
र आड़े तुड़ी म र गोशा म आग लाग गयी सब खुच फुकन लाग रा मेरा ताऊ धर फ़ोन उड़े त भाजा म बैठ गया पड़ोसिया क जाके र उनका आन लाग्रा पुरा कुणबा बाल्टी ठाये र उने अपने तिनु छोरा धोरे फ़ोन केर दिया नून त वे भाजे स्कूटर मोतेरसाकिल थाके र गेलाये उन तेनुआ की बहु र बालक १५ मानसा का कुनबा रात न ११ बजे अपने प्लाट म खड़े बाल्टी थाए फ़िर लागे वे मैंने धुन्धन... मारे रुके अक दिन म त हम नोकरी करा र रात न यो सोन देता ना र पाछेली बार त इसने तडके ४ बजी जगाये अक थारे भैंसा आले म बिजली आल्ला का छापा पड़ रा स आजाओ .........आज नूय करा... आन दो आज उसने इतने हमने थारेये सौना स म जाके अपने काका क सो गया र वे १२ बजे गए अपने घरा अक एब त ख़तम हो लिया होगा उसका अप्रैल फुल मेरा ताउ बोला तडके ब्णाउगा म उसका अप्रैल फुल..........
 
या बात मेरी बुआ ने बताई थी | उनके हाण की एक छोरी थी | ऊह की छोटी चार भाण और थी | ऊह छोरी का नाँ चुक्कन्नी ( चोकन्नी ) धर राख्या था | सारी पड़ी होई, खोयी होई चीज ऊह ने -ए पाया करदी | ऊह की एक खासियत थी अक गाम में किस्से के भी बियाह हो उहने बेरा रह्या करदा | वा सब के बियाह में आपनी भानाँ नु ले के एर उन् ने सुथरे लत्ते पहरा के ले जांदी , एर आछा खा पी के आजांदी | गाम बड्डा होण के कारण कोए पीछान ना पांदा एर कोए ना बुझता , एर कई जाणी कट्ठी होणे के कारण नु सोचदे अक कोसे रिश्तेदार के बालक होंगे | भूखअडड भाण |
 
मेरा ममेरा भाई गुलू फोगाट घणा उत था | वे झंग कालोनी रोहतक में रह्या करदे ( काल एक दोस्त ने बताई जो उड़े -ए रह्या करदा ,अक इब्ब उह का नाँ सुभाष नगर धर दिया | )( इब्ब राकेश सहरावत नु कह्वेगा अक म्हारे सारी याद सें , तू बस अल्बाद बता , पर नए आयां नु बेरा कोणी जयां तें बताणी पड़े सें )| गोहाणे आली फाटक धोरे (दिल्ली आली सड़क पे ) एक सिनेमा हाल था ,शायद लिबर्टी नाम था ऊह का ,पक्का याद कोणी | ऊह के धोरे एक विडिओ पार्लर की दूकान थी | ऊह मशीन में एक रपिया गेर कें एर माडी वार खेल सकें थे | एर ऊह में इनाम भी मिला करदे अक इतने गेम जीत लिए तो वापस पिस्से गधड-गधड पड्या करदे | एक बे उड़े एक मशीन खराब होरी थी एर दिल्ली तें एक मिस्त्री आर्या था ऊह मशीन नु समारण खातर | जब वो समार कें बहार लिकड़ा तो गुलू ने ऊह तें दोस्ती कर ली एर ऊह पे नु बुझ ली अक ये पिस्से गधड-गधड कुकर पड़ ज्यां सें | तो ऊह ने बताई अक ऊह के भीतर इलेक्ट्रोनिक सर्किट से जो गेम जित्तें पाछे एक सविच नु मेक-ब्रेक कर स , जिह तें डिब्बे का ढक्कन हट जा स एर पिस्से तलान आन पड़ें सें | एर जिब्ब डब्बा (पिस्स्याँ का ) खाली करणा हो जब भी शीशा ठा कें ऊह का सविच दाबें तें भी पिस्से डिब्बे माँ तें लिकडाया करें | उसे दिन तें गुलू लाग ग्या पलान बानावन | ऊह ने देख्या अक शीशा ठाना तो मुस्किल स , बेरा पाट जा गा | आगले दिन एक साइकल की ताड़ी ले गा ,पेंट में लुको कें ,एर माडी वार खेल कें एर ऊह ताड़ी तें वो शीशा माडा सा उकसा कें एर वो स्विच दाब दिया | जिब्बे गधड-गधड हो गी | फेर जब भी वो जांदा उन् की मशीन खाली हो जांदी | पारलर आल्याँ के शक हो ग्या अक इतने गेम तो कोए जीते ना सकदा एर यो डाकि जिब भी आवे स , जिब्बे गोझ भर ले जा स | आखिर में ऊह पे उन् ने परतीबन्ध ला दिया अक तू म्हारे पार्लर में नि खेलेगा | तू ते हामने कंगाल कर दे गा | इलेक्ट्रोनिक डाकू |
 
म्हारी गाल में एक छोरा था ,इस्सर (इश्वर सिंह )| वो मेरे तें १ या २ साल छोट्टा था | ऊह का एक प्रिय खेल था ,कल्लेवार सी वो आपणे बगड़ में एक छाबड़ी मुधी गेर कें , एर एक ओड तें ऊह ने उकसा देंदा, एक लिकड़ा ला कें | एर ऊह छाबड़ी के तले दाने गेर देंदा | ऊह लिकड़े के जेवड़ी बाँध के एर आप बेठ जांदा छात पे | जब छाँ तले दाणे देख के चिड़िया चुगण की मारी आ जांदी तो ऊह लिकड़े नु खींच लेंदा | रोज चार पांच चिड़िया फांश लेंदा , एर फेर उनके पायां में तागे बाँध के एर खीडकी के बाँध देंदा | कई चिड़िया तो डर के-ए मर जांदी , एर कईयाँ नु बिल्ली फड ले जांदी | ऊह ताहि कई बे कही अक भाई आछी बात कोणी , पाप लागेगा | तू सकूल में के पढ़ के आवे स , एर आड़े आ के के करे स | पर वो मान्या कोणी | ऊह ताहि उनके घरां में एक धीरू था , ऊह का भी उधाहरण दिया ,अक देख वो भी चिड़िया पकड्या करदा नु-ए | ऊह के लकवा मार ग्या था | एर इब्ब घीसड़ता हंडे स | तेरी गेल्याँ भी कदे भुंडी बाण ज्या गी |

उनके एर म्हारे खेत साहरे-साहरे पड़े थे | उनके खेत में एक कोठड़ा(खेत में बणाया होया एक या दो कमरे का मकान ) था | एक दिन सांझ सी नु ओ मन्ने सुत्त्या पा गा कोठड़े में | में ऊह की बाहर तें सांकल मूँद के आग्या | इब्ब सांझ नु तो सारे खेत खाली हो ले सें , माणसआँ तें | ऊह की वारी सी आँख खुल्ली होंगी | ऊह ने मारे रुके , उड़े कोए सुननिया ना था | तडके किस्से ने काढ्या वो | सारी रात भूखा मर्या | फेर उनके घर के कहन लागे , एक बेरा ना किस बेदर्द का कर्या होड़ काम स , जा म्हारे छोरे का रात नु दिल पाट जांदा तो, डर के मारे | में नु बोल्या ,अक यो तो माणस स पर इन् चिडयाँ का के हाल हो स जिन्न ने यो पकड्या करे | फेर जब पाछे उहने चिड़िया पकडनी छोड़ दी | फेर छे मिहना पाछे एक ट्रक तले आके इस्सर की टांग कट गी , एक | जब ताहि जिया , लाठी के ताण हांडया | दो साल पहलम केंसर तें ऊह का देहांत भी हो लिया | बेदर्दी माणस |
 
मेरी काकी , छोट्ले काका कँवल सिंह की बहु मेरी गेल्याँ घंणी नाइंसाफी कर्या करदी | कई बे इस्सा होंदा अक रोटी कम रह जांदी , बड्डा कुनबा होवण के कारण , एर वा लुको के धर देंदी | जब मेरा काका आंदा खेताँ माँ तें ,उने लूकमा खुवा देंदी एर में भूखा रह जांदा | मन्ने धमका देंदी अक इब तो सांझ ने मिलेंगी रोटी | मन्ने बेरा था अक या मेरे काका नु लुकमा रोटी खुवावे स | ऍक बे मन्ने लुक कें ने देख ली अक वा रोटी कित लुकोया करदी | एर ऍक दिन मन्ने वे रोटी खा ली एर ऊह की थां थेपड़ी लपेट के धर दी छालने में(बाजरे की रोटी थेपअड़ीयाँ बरगी-ए होया करें ) | मेरा काका आया तो मेरी काकी ने बिना देखें एर मेरे काका ताहि पकड़ा दी | काका ने छालना हटाया एर देखा तो घणा छो में आया एर वे थेपड़ी मारी मेरी काकी के बागा के | मेरे तो घी सा घल गा |
 
म्हारी गाल में एक छोरा था ,इस्सर (इश्वर सिंह )| वो मेरे तें १ या २ साल छोट्टा था | ऊह का एक प्रिय खेल था ,कल्लेवार सी वो आपणे बगड़ में एक छाबड़ी मुधी गेर कें , एर एक ओड तें ऊह ने उकसा देंदा, एक लिकड़ा ला कें | एर ऊह छाबड़ी के तले दाने गेर देंदा | ऊह लिकड़े के जेवड़ी बाँध के एर आप बेठ जांदा छात पे | जब छाँ तले दाणे देख के चिड़िया चुगण की मारी आ जांदी तो ऊह लिकड़े नु खींच लेंदा | रोज चार पांच चिड़िया फांश लेंदा , एर फेर उनके पायां में तागे बाँध के एर खीडकी के बाँध देंदा | कई चिड़िया तो डर के-ए मर जांदी , एर कईयाँ नु बिल्ली फड ले जांदी | ऊह ताहि कई बे कही अक भाई आछी बात कोणी , पाप लागेगा | तू सकूल में के पढ़ के आवे स , एर आड़े आ के के करे स | पर वो मान्या कोणी | ऊह ताहि उनके घरां में एक धीरू था , ऊह का भी उधाहरण दिया ,अक देख वो भी चिड़िया पकड्या करदा नु-ए | ऊह के लकवा मार ग्या था | एर इब्ब घीसड़ता हंडे स | तेरी गेल्याँ भी कदे भुंडी बाण ज्या गी |

उनके एर म्हारे खेत साहरे-साहरे पड़े थे | उनके खेत में एक कोठड़ा(खेत में बणाया होया एक या दो कमरे का मकान ) था | एक दिन सांझ सी नु ओ मन्ने सुत्त्या पा गा कोठड़े में | में ऊह की बाहर तें सांकल मूँद के आग्या | इब्ब सांझ नु तो सारे खेत खाली हो ले सें , माणसआँ तें | ऊह की वारी सी आँख खुल्ली होंगी | ऊह ने मारे रुके , उड़े कोए सुननिया ना था | तडके किस्से ने काढ्या वो | सारी रात भूखा मर्या | फेर उनके घर के कहन लागे , एक बेरा ना किस बेदर्द का कर्या होड़ काम स , जा म्हारे छोरे का रात नु दिल पाट जांदा तो, डर के मारे | में नु बोल्या ,अक यो तो माणस स पर इन् चिडयाँ का के हाल हो स जिन्न ने यो पकड्या करे | फेर जब पाछे उहने चिड़िया पकडनी छोड़ दी | फेर छे मिहना पाछे एक ट्रक तले आके इस्सर की टांग कट गी , एक | जब ताहि जिया , लाठी के ताण हांडया | दो साल पहलम केंसर तें ऊह का देहांत भी हो लिया | बेदर्दी माणस |

न्यू कह्या करे है अक सुवर्ग अर नरक सारे धरती पे ए सै...आड़े ए भुगत क जानी है साडी करी होई ..!!
 
मेरी काकी , छोट्ले काका कँवल सिंह की बहु मेरी गेल्याँ घंणी नाइंसाफी कर्या करदी | कई बे इस्सा होंदा अक रोटी कम रह जांदी , बड्डा कुनबा होवण के कारण , एर वा लुको के धर देंदी | जब मेरा काका आंदा खेताँ माँ तें ,उने लूकमा खुवा देंदी एर में भूखा रह जांदा | मन्ने धमका देंदी अक इब तो सांझ ने मिलेंगी रोटी | मन्ने बेरा था अक या मेरे काका नु लुकमा रोटी खुवावे स | ऍक बे मन्ने लुक कें ने देख ली अक वा रोटी कित लुकोया करदी | एर ऍक दिन मन्ने वे रोटी खा ली एर ऊह की थां थेपड़ी लपेट के धर दी छालने में(बाजरे की रोटी थेपअड़ीयाँ बरगी-ए होया करें ) | मेरा काका आया तो मेरी काकी ने बिना देखें एर मेरे काका ताहि पकड़ा दी | काका ने छालना हटाया एर देखा तो घणा छो में आया एर वे थेपड़ी मारी मेरी काकी के बागा के | मेरे तो घी सा घल गा |

ghana oot balak...bas mauka milna chahiye ...!!! haha
 
म्हारे गाम में एक पाना स "ठोबे " | उस पाने के बालकां की गेल महारा रोज सांझ नु कबड्डी का मेच होया करदा | वे रोंदड़े एर झीखताड़े थे | वे रोज म्हारे तें हार जांदे | फेर वे नु बोले अक आगे तें म्हारी बणी में मेच होवेगा | हाम एक दिन उनकी बणी में मेच खेल्दे एर एक दिन म्हारी में | वे फेर भी नि जीते कदे | फेर वे घणे झिखन्न लागे एर मार पीट पे उतर आये | वे फेर भी नि जीते एर म्हारी बणी में खेलन तें-ए नाट गे | फेर एक दिन वे आपनी गाल के बड्डे-बड्डे छोर्यां नु बुला लाये एर रोला कर कर कें एर चोट मार मार कें धिन्ग्ताने ऊह दिन का मेच जित्या डिक्लेयर कर दिया | आपना मन समझान खातर अक हामने आखिर एक मेच तो जित्ते लिया ईण पे | एर फेर वे आगे खेलण तें नाट गे | म्हारे तो चीश कसुती होरी थी बदला लवण की | हामने बस एक बे और खेलन खातर वे पटा लिए | वे नु बोले अक हाम म्हारी बणी में-ए खेलेंगे ,थारी बणी में कोणी आवां | हामने कह दी अक ठीक से | एर आगले दिन उड़े जित खेल्या करदे उनकी बणी में उड़े बीटोडयाँ में एर झाड बोझाडयाँ में शहतूत के कामड़े लुको कें आगे तडके तड़क | एर सांझ सी नु मेच शुरू होया एर उन् ने रोला कर्या | हाम के मेच खेलन गए थे | हाम तो बदला लेवन गए थे | एर काढ कें कामड़े इस्से खींच दिए अक जब पाछे उनकी सारी गाल ने-ए कबड्डी खेलनी छोड़ दी |
 
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