albaadi baalkaan key kissey.

या बात मेरे बाबू ने बताई थी | घणी पुरानी बात स १९५५-५६ की मेरे बाबू एर बुआ हर छोटे-ए थे | मेरी बुआ जो मेरे बाबू तें बड्डी थी उहने बखत तें-ए खेताँ माँ तें घरां खंदा दिया करदे, अक जा के रोटियाँ की तयारी कर ले गी | वा आंदे-ए पहलम आपना बेला दूध मलाई का भरती , एर गेर कें बुरा, एर मारती डकार | मेरी दादी कहन्दी अक आछा बाखर गेरण लागरी ,एर मेन्ह्स तले घी ना बध्या | एक दिन कयाहे काम खातर मेरे दादा ने मेरा बाबू घरां खंदा दिया बखत तें | जब मेरा बाबू घरां पोंचा तो मेरी बुआ ने बेला दामण तले लुको लिया (जब ताहि आपने इलाके में सलवार कमीज की रिवाज ना थी, लुगाई एर छोरी सब दामन पहरया करदी | केवल शरन्नार्थी लुगाई-ए सलवार पहरया करदी | ) मेरे बाबू ने खोश कें ने वो पी लिया, अर जब मेरी दादी ताहि बताई तो उहने बुरा आला झाकरा देखा ,वो कती खाली पाया, माडी सी बुरा बची थी |
 
म्हारी गाल का एक छोरा था | इब्ब ऊह का नाँ याद कोणी (मान लो रमलू )| मेरे तें वो सात आठ साल छोटा होगा एर ऊह की उम्र जब ८=९ साल की रही होगी | एक दिन ऊह के हाथ में मन्ने एक रपिये का सिक्का देख्या, तो में ऊह ने चिडान खातर बोल्या, अक रे रमलू यो तो मेरा रपिया स , काल गोझ माँ तें पड़ ग्या था | तू मन्ने उलटा दे दे | नु कर के मन्ने जब भी वो किते फेट जांदा ,तो में ऊह पे आपना रपिया मांगन लाग जांदा |एर वो मन्ने देख कें लूकण लाग्या,अक आ लिया एर रपिया मांगेगा | वो सहज सहज कसुता चीडान लाग्या मेरे तें | एक दिन जब मन्ने फेर ऊह पे आपना रपिया मांग्या , तो वो बोल्या "क्यों सगाई का दिया था के "| में बोल बाला रह्ग्या | मन्ने सांस नि आई | एर ऊह दिन पाछे मन्ने वो चिडाना छोड़ दिया | एर ऊह ने देख कें मेरा लूकण नु जी करदा | कसूता बालक |
 
म्हारी गाल का एक छोरा था | इब्ब ऊह का नाँ याद कोणी (मान लो रमलू )| मेरे तें वो सात आठ साल छोटा होगा एर ऊह की उम्र जब ८=९ साल की रही होगी | एक दिन ऊह के हाथ में मन्ने एक रपिये का सिक्का देख्या, तो में ऊह ने चिडान खातर बोल्या, अक रे रमलू यो तो मेरा रपिया स , काल गोझ माँ तें पड़ ग्या था | तू मन्ने उलटा दे दे | नु कर के मन्ने जब भी वो किते फेट जांदा ,तो में ऊह पे आपना रपिया मांगन लाग जांदा |एर वो मन्ने देख कें लूकण लाग्या,अक आ लिया एर रपिया मांगेगा | वो सहज सहज कसुता चीडान लाग्या मेरे तें | एक दिन जब मन्ने फेर ऊह पे आपना रपिया मांग्या , तो वो बोल्या "क्यों सगाई का दिया था के "| में बोल बाला रह्ग्या | मन्ने सांस नि आई | एर ऊह दिन पाछे मन्ने वो चिडाना छोड़ दिया | एर ऊह ने देख कें मेरा लूकण नु जी करदा | कसूता बालक |

hahahahhahahaha
milya ser n sawaaaaa ser .....................
 
म्हारे खेताँ के बीचाले के नहर जावे स | एर एक ओड़ ने सड़क लागे स | गर्मियां में पुल पे घणे टर्कआँ आले रूक जाया करदे नाहण धोन के मारे | में छुट्टियां में मेरे ताऊ के छोरयाँ की गेल डांगर चराण जाया करदा | दोफारी में हाम भी नहर में नहांदे एर उड़े-ए कम्ठाना बना लेन्दे | एक दिन एक ट्रक आले का बोनट का रबड़ का लोक टूट ग्या | यो लोक पुराने ट्रक जो सूर जिस्से हुड के होया करदे उन्न में लाग्या करदे,एक बोनट में चार | उस लोक के उप्पर एर तले "टी" होया करदी | उन् "टी" या नु काटे तें बाल बन जांदी | टेबल टेनिस की बाल जोड़ | एर वा घणी उछल्या करदी | म्हारी गाल के बालक मेरे तें बोले एक तू किथों ल्या स हामने भी दुवा दे | में बोल्या में किथोंए लाया होऊं ,थारे ताहि २ रापियाँ में ल्या दूंगा |एक नया बिजनेस शुरू होग्या | इब्ब रोज लोक किथों टूटन लागे | में ब्लेड ले जांदा | एर मेरे ताऊ के छोरे रुखाल करदे , अक कदे डरैवर कंडेकटर आज्यां नहर माँ तें लिकड़ के | एक ट्रक की एक लोक काट्दा ईमान दारी तें,जुकर बोनट भी ना खुले एर ड्रेवर नु बेरा भी ना पाटे | रोज कई ट्रकआँ के में लोक काट लायान्दा एर गिंडी(गेंद ) बणा लेंदा | मेरे ताऊ के छोरयाँ के बीडी के बण्डल आ जांदे एर मेरी चीजो आ जांदी | वे गर्मियां खूब मस्त गई म्हारी |
 
Bhai...garmi oe bhi mast javengi jab kham kha shikayat hovegi teri...like me...ekchhori dhore addd request bheji wa bhi bhundi bhundiya dhore and moderator will follow a girl by forgotting what she replied...he will gv u a warning...,chhori ne chhede hai...(bta chhori chhedni hoti te adey e atey.) khairr....u r gud..u can manage that, not me...enjoy bhai...i am fed up of kham ki samrt chhori and there il logical supporters
म्हारे खेताँ के बीचाले के नहर जावे स | एर एक ओड़ ने सड़क लागे स | गर्मियां में पुल पे घणे टर्कआँ आले रूक जाया करदे नाहण धोन के मारे | में छुट्टियां में मेरे ताऊ के छोरयाँ की गेल डांगर चराण जाया करदा | दोफारी में हाम भी नहर में नहांदे एर उड़े-ए कम्ठाना बना लेन्दे | एक दिन एक ट्रक आले का बोनट का रबड़ का लोक टूट ग्या | यो लोक पुराने ट्रक जो सूर जिस्से हुड के होया करदे उन्न में लाग्या करदे,एक बोनट में चार | उस लोक के उप्पर एर तले "टी" होया करदी | उन् "टी" या नु काटे तें बाल बन जांदी | टेबल टेनिस की बाल जोड़ | एर वा घणी उछल्या करदी | म्हारी गाल के बालक मेरे तें बोले एक तू किथों ल्या स हामने भी दुवा दे | में बोल्या में किथोंए लाया होऊं ,थारे ताहि २ रापियाँ में ल्या दूंगा |एक नया बिजनेस शुरू होग्या | इब्ब रोज लोक किथों टूटन लागे | में ब्लेड ले जांदा | एर मेरे ताऊ के छोरे रुखाल करदे , अक कदे डरैवर कंडेकटर आज्यां नहर माँ तें लिकड़ के | एक ट्रक की एक लोक काट्दा ईमान दारी तें,जुकर बोनट भी ना खुले एर ड्रेवर नु बेरा भी ना पाटे | रोज कई ट्रकआँ के में लोक काट लायान्दा एर गिंडी(गेंद ) बणा लेंदा | मेरे ताऊ के छोरयाँ के बीडी के बण्डल आ जांदे एर मेरी चीजो आ जांदी | वे गर्मियां खूब मस्त गई म्हारी |
 
म्हारे खेताँ के बीचाले के नहर जावे स | एर एक ओड़ ने सड़क लागे स | गर्मियां में पुल पे घणे टर्कआँ आले रूक जाया करदे नाहण धोन के मारे | में छुट्टियां में मेरे ताऊ के छोरयाँ की गेल डांगर चराण जाया करदा | दोफारी में हाम भी नहर में नहांदे एर उड़े-ए कम्ठाना बना लेन्दे | एक दिन एक ट्रक आले का बोनट का रबड़ का लोक टूट ग्या | यो लोक पुराने ट्रक जो सूर जिस्से हुड के होया करदे उन्न में लाग्या करदे,एक बोनट में चार | उस लोक के उप्पर एर तले "टी" होया करदी | उन् "टी" या नु काटे तें बाल बन जांदी | टेबल टेनिस की बाल जोड़ | एर वा घणी उछल्या करदी | म्हारी गाल के बालक मेरे तें बोले एक तू किथों ल्या स हामने भी दुवा दे | में बोल्या में किथोंए लाया होऊं ,थारे ताहि २ रापियाँ में ल्या दूंगा |एक नया बिजनेस शुरू होग्या | इब्ब रोज लोक किथों टूटन लागे | में ब्लेड ले जांदा | एर मेरे ताऊ के छोरे रुखाल करदे , अक कदे डरैवर कंडेकटर आज्यां नहर माँ तें लिकड़ के | एक ट्रक की एक लोक काट्दा ईमान दारी तें,जुकर बोनट भी ना खुले एर ड्रेवर नु बेरा भी ना पाटे | रोज कई ट्रकआँ के में लोक काट लायान्दा एर गिंडी(गेंद ) बणा लेंदा | मेरे ताऊ के छोरयाँ के बीडी के बण्डल आ जांदे एर मेरी चीजो आ जांदी | वे गर्मियां खूब मस्त गई म्हारी |

रवीन्द्र्जीत भाई,
आपका ये थ्रेड और आपकी वो अल्बाद और उनका सजीव चित्रण, मेरे लिए हरयाणवी ग्रामीण दर्शन के किसी ग्रन्थ से कम नहीं !
भाई आपकी संकड़ों अल्बादी घटनाओं का विवरण पढ़, बचपन की कितनी ही खट्टी मीठी यादें ताजा हो गई !
और आपकी लिखने की शैली का भी जवाब नहीं, वाह:, सहज ही मेरे गाँव की गलियों का फेरा लगवा देती है !
बहुत खूब ! ऐसे सी लिखते रहो !
भगवान् आपको खुश रखे !
 
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bhai sattey mere, teri ye baat kimmey samajh me koni aayi, tu kih kaa er kyaan khatar jikar karey s,kimmey albaad kari ho to bataa.
 
रवीन्द्र्जीत भाई,
आपका ये थ्रेड और आपकी वो अल्बाद और उनका सजीव चित्रण, मेरे लिए हरयाणवी ग्रामीण दर्शन के किसी ग्रन्थ से कम नहीं !
भाई आपकी संकड़ों अल्बादी घटनाओं का विवरण पढ़, बचपन की कितनी ही खट्टी मीठी यादें ताजा हो गई !
और आपकी लिखने की शैली का भी जवाब नहीं, वाह:, सहज ही मेरे गाँव की गलियों का फेरा लगवा देती है !
बहुत खूब ! ऐसे सी लिखते रहो !
भगवान् आपको खुश रखे !

सत्यपाल सर जी नमस्कार ,
मेरी अल्बाद पसंद करण खातर |
इन् अल्बाद्याँ खातर में कई बे छत्या भी सु ,इब्ब मेरा बाबू भी पढ्या करे मेरे छोरे की गेल बैठ के इन् अल्बाद्याँ नु , इब्ब आपनी गलती माने स अक हाँ , मन्ने गलत करया था | पर नु भी कहवे स अक ना पिट्दा तन्ने , तो तू आज जित खड्या स ,आड़े ना पोंच्दा |

सर जी आप भी छाप दो ने , खाटे-मिट्ठे अनुभव आपके |
 
म्हारे खेताँ के बीचाले के नहर जावे स | एर एक ओड़ ने सड़क लागे स | गर्मियां में पुल पे घणे टर्कआँ आले रूक जाया करदे नाहण धोन के मारे | में छुट्टियां में मेरे ताऊ के छोरयाँ की गेल डांगर चराण जाया करदा | दोफारी में हाम भी नहर में नहांदे एर उड़े-ए कम्ठाना बना लेन्दे | एक दिन एक ट्रक आले का बोनट का रबड़ का लोक टूट ग्या | यो लोक पुराने ट्रक जो सूर जिस्से हुड के होया करदे उन्न में लाग्या करदे,एक बोनट में चार | उस लोक के उप्पर एर तले "टी" होया करदी | उन् "टी" या नु काटे तें बाल बन जांदी | टेबल टेनिस की बाल जोड़ | एर वा घणी उछल्या करदी | म्हारी गाल के बालक मेरे तें बोले एक तू किथों ल्या स हामने भी दुवा दे | में बोल्या में किथोंए लाया होऊं ,थारे ताहि २ रापियाँ में ल्या दूंगा |एक नया बिजनेस शुरू होग्या | इब्ब रोज लोक किथों टूटन लागे | में ब्लेड ले जांदा | एर मेरे ताऊ के छोरे रुखाल करदे , अक कदे डरैवर कंडेकटर आज्यां नहर माँ तें लिकड़ के | एक ट्रक की एक लोक काट्दा ईमान दारी तें,जुकर बोनट भी ना खुले एर ड्रेवर नु बेरा भी ना पाटे | रोज कई ट्रकआँ के में लोक काट लायान्दा एर गिंडी(गेंद ) बणा लेंदा | मेरे ताऊ के छोरयाँ के बीडी के बण्डल आ जांदे एर मेरी चीजो आ जांदी | वे गर्मियां खूब मस्त गई म्हारी |

sir ji,, jama karda business karge...!!!
aap to ghane e oot the...!!!
Oootan k sardar...!!
 
Bhai...garmi oe bhi mast javengi jab kham kha shikayat hovegi teri...like me...ekchhori dhore addd request bheji wa bhi bhundi bhundiya dhore and moderator will follow a girl by forgotting what she replied...he will gv u a warning...,chhori ne chhede hai...(bta chhori chhedni hoti te adey e atey.) khairr....u r gud..u can manage that, not me...enjoy bhai...i am fed up of kham ki samrt chhori and there il logical supporters

Hmmmm...Khair eb to tu ban ho gya,,..!!
Manne nyu bata to de jhakoi ,,ak kit k taar kit bhidawe sa' tu...k Likhan ki koshish kare hai ar k Sabit karna chahwe sa'
...!!
 
Jab manne koi kaam dhanda ni honda ,,main u Taga khol k aap k kisse padan lag jaya karu su,,,ak kime idea aa jawega albad karan ka...ebe k budhapa aa gya..ek aadhi albad kar dyage aap ki kari hoda te motivation le ke..!!:rock:rock
 
Jab manne koi kaam dhanda ni honda ,,main u Taga khol k aap k kisse padan lag jaya karu su,,,ak kime idea aa jawega albad karan ka...ebe k budhapa aa gya..ek aadhi albad kar dyage aap ki kari hoda te motivation le ke..!!:rock:rock

जा किते पिट- छत जा तो मेरा नाम ना लिए ,अक रविंदर जीत सिंह की अल्बाद तें मन्ने प्रोत्साहन मिल्या था.
 
एक बे म्हारा एक रिश्तेदार आग्या जींद जिले का , मेरे धोरे आड़े मुंबई में, नेवी में भर्ती होवण खातर | हाम छड़े , २-३ जाणे एक कमरे में कट्ठे रह्या करदे, तो वो भी आण डटया म्हारे धोरे | हाम रात नु पढ़ती हान, नींद ना आवे, ज्यां तें रात के १२-१ बजे कोफ़ी बना के पीया करदे | उहने कदे कोफ़ी पी ना थी | उह के बाबू ने नु कह के खंदाया था, अक मुंबई में भोत सफाई रह से, जा उड़े थूक भी दिया ना, तो पुलिस पकड़ ले स | वो प्रेक्टिकल माणस था ,पहलम तो दो तीन दिन हांडया सड़क पे थूकता अक दीखाआँ कोए पुलिसिया उहने पकडे भी स अक नि |एर उहने देखे आड़े सड़कआँ एर रेलवे ट्रेक के साहरे, लोग लुगाई जंगल होंदे | गाम में तो फेर भी ओट ले कें बेठ्या करें , आड़े तो चोडे में-ए लोक बैठ जाँ सें | लोग तो आड़े चोपाटी देखण, एर मेरिन डराईव देखण आया करें, एर यो रोज तडके तडक जंगल होंदे लोकां नु देख्दा हंडे | जब वो उलटा-ए गाम में गया तो उहने पहलम तो सारी गाल कट्ठी कर ली ,अक देखो में मुंबई तें के ले के आया सूँ | एर उहने घोल दी वा कोफ़ी की सारी शीशी आधी बाल्टी दूध में | एर उह में चीनी भी मिलानी स ,नु भूल गा मेरा बटा | एर लोग लागे पिवन, सब थूके एर गाल दे अक यो के कडुआ बकवाद ले कें आया स | अंडी जाट
 
जा किते पिट- छत जा तो मेरा नाम ना लिए ,अक रविंदर जीत सिंह की अल्बाद तें मन्ने प्रोत्साहन मिल्या था.
pite pacche koi nu ni pooche ak tera guru kun sai,,,..!!
to aap tension ni lyo..!! baki kade aapne koi kissa isa ni bataya jis me aapke b lage ho 5-4...!!
 
pite pacche koi nu ni pooche ak tera guru kun sai,,,..!!
to aap tension ni lyo..!! baki kade aapne koi kissa isa ni bataya jis me aapke b lage ho 5-4...!!

सारे पढ़ के देख ले पन्नू , कई बे जीकर कर राख्या स मेरी पिटाई का भी |
 
सारे पढ़ के देख ले पन्नू , कई बे जीकर कर राख्या स मेरी पिटाई का भी |
wo to ghar kya ne cham tar rakhya sa sir ji,,,Normally jat famlies me time to time service honti reh sa'..mera matbal tha ak aap bahar to kade ni pitay..??
nue main b na pitya jau bahar...!!! ghar aalya ka to aapne bera e sa''....!!
 
मेरा काका जो थाणेदार था ,वो मदीने पढ़न जाया करदा |मदीना म्हारा गुहांड स ,जो ५-६ की.मी. पे पड़े था | दशमी ताहि का स्कूल तो म्हारे गाम में भी था | पर यो काका मेरा घणा अल्बादी था, तो मेरे ख्याल में यो सकूल तें लिकाड़ दिया होगा | यो काका मेरे बाबू ताहि बोल्या, अक भाई मन्ने वार हो जा स,सकूल जाण में , बस ना मिलदी बखत पे ,एक साइकल दुवा दे | मेरे बाबू ने नु सोच के, अक भाई का पढ़ाई का नुक्सान ना होवे ,मेरे बाबू ने ऊह ताहि साइकल दुवा दी, मेरे दादा के विरोध करें पाछे भी | जब साइकल भी किस्से किस्से धोरे होया करदी | दो --तीन मिन्हे भी ना होए थे , वा साइकल ठुवा दी | फेर मेरे बाबू ने तोड्या वो गेर कें, अक हाम तो नोकरी- खेती कर कें कमावाँ, एर तू गवान लाग्र्या | मेरा दादा भी निरा छो में आया , अक में पहलम-अ नाटू था तन्ने और दुवा ले | कई मिन्हा पाछे बेरा पाट्टया ,अक उहने वा साइकल आपणे मदीने के एक दोस्त ताहि बेच दी थी | एर पिस्स्याँ की देखि फिलम एर एअश करी | बालाक्पने में -ए ऊत्पणे करण लाग्या था | एर आखिर में पुलिस में भारती होग्या| ये सारे कुभाद्दी बालक पुलिस में-ए जाया करें | पूत के पाँ पालणे में-ए पिछान्ने गए|
 
मेरा काका जो थाणेदार था ,वो मदीने पढ़न जाया करदा |मदीना म्हारा गुहांड स ,जो ५-६ की.मी. पे पड़े था | दशमी ताहि का स्कूल तो म्हारे गाम में भी था | पर यो काका मेरा घणा अल्बादी था, तो मेरे ख्याल में यो सकूल तें लिकाड़ दिया होगा | यो काका मेरे बाबू ताहि बोल्या, अक भाई मन्ने वार हो जा स,सकूल जाण में , बस ना मिलदी बखत पे ,एक साइकल दुवा दे | मेरे बाबू ने नु सोच के, अक भाई का पढ़ाई का नुक्सान ना होवे ,मेरे बाबू ने ऊह ताहि साइकल दुवा दी, मेरे दादा के विरोध करें पाछे भी | जब साइकल भी किस्से किस्से धोरे होया करदी | दो --तीन मिन्हे भी ना होए थे , वा साइकल ठुवा दी | फेर मेरे बाबू ने तोड्या वो गेर कें, अक हाम तो नोकरी- खेती कर कें कमावाँ, एर तू गवान लाग्र्या | मेरा दादा भी निरा छो में आया , अक में पहलम-अ नाटू था तन्ने और दुवा ले | कई मिन्हा पाछे बेरा पाट्टया ,अक उहने वा साइकल आपणे मदीने के एक दोस्त ताहि बेच दी थी | एर पिस्स्याँ की देखि फिलम एर एअश करी | बालाक्पने में -ए ऊत्पणे करण लाग्या था | एर आखिर में पुलिस में भारती होग्या| ये सारे कुभाद्दी बालक पुलिस में-ए जाया करें | पूत के पाँ पालणे में-ए पिछान्ने गए|

fer aap kyo koni giye bhai sa police m ........................
 
एक बे म्हारे घरां ,मेरा फूफा आग्या | म्हारे दूध कोणी होया करदा ,जयां तें हाम मोल ले लिया करदे | मेरा फूफा आया था सांझ सी ने | तो आपने पहलम रिवाज थी अक बहार का कोए भी रिश्तेदार आवे तो उहने दूध दिया करदे पीवन नु | मेरी माँ ने में मेरे काका थान सिंह( यो वो-ए काका जिह ने नहर काटी थी एर जिह की सानी में ,में ग्यारा मिला आया था ) के भजाया अक जा उनके तें दूध लिया | मेरी काकी(इह काकी नु में भराड़ी कह के भज गया था एक बे ) नाट गी एक में तो इह बखत पलुवा ना द्यूं दूध में , दूध पाटग्या तो | फेर मेरी माँ ने उह ताहि सुनाई अक बटेऊ इस्सा-ए थारा एर इस्सा-ए महारा तू क्यों बकवाद करे से | फेर ऊह ने बडबड़ान्दी ने दूध दे दिया एर किथे ना ऊह का दूध पाट्टया |

उन् की मेन्ह्स का काटडू मरग्या था जयां तें वे बूबी बनवा रे थे (इब्ब पहलम बूबी बतानी पड़ेगी के हो से घनखरे बन्द्या नु बेरा भी कोणी होगा)
(बूबी मरे होए काटडू की खाल का बन्या करे, जिह के माड़ा सा सर बणा दिया करदे एर पुन्झअड़ काट कें ला दिया करदे ,एर भीतर तुड़ा भर दिया करदे ,यो काम चमार कर्या करदे , रोज जब धार काढणी होंदी ,तो ऊह मेन्ह्स नु दिखा- सुंघा दिया करदे ,एर वा धार दे देंदी , आज काल कोए ना बन्वान्दा बूबी , सुवे मार के काढ ले सें दूध ,जिन के कारण पाछे किडनी फेल होवे सें ) |

आगले दिन दोफारी सी में ,जब उन् के घेर में कोए भी ना था ,में ऊह बूबी नु कुरड़ीयाँ पे बग़ा आया | सांझ ने मेंहस ने दूधे ना दिया एर थान सिंह एर मेरी काकी की होई लड़ाई अक अन्पुते तन्ने किते डगाई स बूबी , केरा कित बग़ा के भाज गा तू | आगले दिन कुत्ते ठाएँ हंडे ऊह बूबी नु ,फेर बाल्कां नु बताई अक थारी बूबी नु कुत्ते ले -ए हांडअन लागरे सें | इतने थान सिंह डले मार कें छुडा कें लाया, इतने कुत्त्याँ ने उधेड़ दी थी बुबी | फेर उन् ने बची खुची तें-ए वो बयांत का काम चलाया |
 
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