एक बे विशवकर्मा स्कूल में जोनल साइंस फेयर लाग्र्या था | यो स्कूल रोहतक में झाझर रोड पे पड़े स | म्हारे हेडमास्टर ने तेथन भाड़े पे कर दी, अक जो बालक जाणा चाहवे वे चाले जाँ, ऊह में बैठ के | हाम १५-२० जाणे चाले गए ,पढ़ाई तें भी छुट्टी मिल गी | उड़े साबत दन हंडे गए, दोफारे पाछ: लागी भूख| किस्से धोरे पिस्से थे-ए कोन्या | किम्मे माडे- मोटे केले म्हारे साइंस मास्टर ने खुवा दिए ,पर २० जट्टां का पेट उन् तें थोड़े -ए ना भरे था | जित म्हारे स्कूल का स्टाल लाग्र्या था ,ओडे-ए किस्से और गाम के बाल्कां का भी स्टाल था | जब हाम भूखे मरदे, उराँ-पराँ हांडअन लागरे थे,उनका मास्टर उन्खातर तीन चार दर्जन केले एर संतरे ले आया | एर जिब्बे इनाम देवाण का एलान होगया ,एर सब जित वो परोगराम चाल रया था, उड़े चाले गए ,एर बाकी देखनिए बालक बहार काढ दिए | म्हारी तो जीभ लप्लपावे थी | हाम पहलम तो बहार लिकड़ गे ,एर फेर जब सब जा लिए तो ओटडे पर के कूद के, फेर उनके स्टाल माँ तें उनका सोदा काढ लाये | जब जा कें माडा पेट में किम्मे पड्या | हाम तो सांझ सी के आपनी तेथान में बैठ कें घरां आगे ,उन् बेचार्याँ नु किम्मे मिला अक नि बेरा ना,जिनका हाम ने चोर कें खाया था |