ravinderjeet
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या बात मेरे बाबू ने बताई थी | घणी पुरानी बात स १९५५-५६ की मेरे बाबू एर बुआ हर छोटे-ए थे | मेरी बुआ जो मेरे बाबू तें बड्डी थी उहने बखत तें-ए खेताँ माँ तें घरां खंदा दिया करदे, अक जा के रोटियाँ की तयारी कर ले गी | वा आंदे-ए पहलम आपना बेला दूध मलाई का भरती , एर गेर कें बुरा, एर मारती डकार | मेरी दादी कहन्दी अक आछा बाखर गेरण लागरी ,एर मेन्ह्स तले घी ना बध्या | एक दिन कयाहे काम खातर मेरे दादा ने मेरा बाबू घरां खंदा दिया बखत तें | जब मेरा बाबू घरां पोंचा तो मेरी बुआ ने बेला दामण तले लुको लिया (जब ताहि आपने इलाके में सलवार कमीज की रिवाज ना थी, लुगाई एर छोरी सब दामन पहरया करदी | केवल शरन्नार्थी लुगाई-ए सलवार पहरया करदी | ) मेरे बाबू ने खोश कें ने वो पी लिया, अर जब मेरी दादी ताहि बताई तो उहने बुरा आला झाकरा देखा ,वो कती खाली पाया, माडी सी बुरा बची थी |