kuldeeppunia25
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ठीक से भाई ... आगे से न लेंगे .. इस बार की माफ़ी ने गलती कर दो![]()
ditto ...... from my side........
ठीक से भाई ... आगे से न लेंगे .. इस बार की माफ़ी ने गलती कर दो![]()
ditto ...... from my side........
म्हारी गाल में एक छोरा था | ऊह का असली नाँ तो बेरा कोणी पर ऊह ने खोखा कह्या करदे | म्हारे गाम में पंजाब नेशनल बेंक ने आपणी ग्रामीण शाखा खोल राखी थी | उह में लोग एर लूगाइयां के खाते थे | आधे तें फ़ालतूआँ के तो गुठे लाग्या करदे | लुगाई तो ओहला काढ के पिस्से लेवन आया करदी | एर सहज-सहज बोल्दी तो किस्से बेंक आले ने बेरा ना पाटदा अक या कूण से | ऊँ भी बेंक आले अकाउंट बुक जिह धोरे होंदी उह ने-ए अकाउंट का मालिक मान लिया करदे| जब ताहि फोटू भी कोणी लागणे सुरु होए थे अकाउंट बुक पे | तो यो खोखा श्रीमान जी आपणी बुआ ( यो आपणी बुआ के रह्या करदा जिह की कोए औलाद ना थी ) की गेल्याँ पिस्से काढ्वान आया करदा | उहने बेरा था अक अकाउंट में किन्ने पिस्से सें | उनके चालीस किल्याँ का जमींदारा था | तो फसल पे आछे पिस्से जमा हो जाया करदे | एक बे वो किस्से और लुगाई नु आपणी बुआ बना के ले आया अर अस्सी हजार रपिये काढ ले गा अर दिल्ली भाज गा | जब वो शायद दशमी में पढ्या करदा | या बात आज तें ३०-३५ साल पुराणी स | जब इतने पिस्स्याँ की घणी वेल्यु होया करदी | कई दिन पाछे जब उह की टोह पड़ी एर शक के आधार पे जब ऊह की बुआ ने खाता चेक कर्या , जब ऊह की करतूत का बेरा पाट्टया | पर इस कारण म्हारे गाम के एक बेरोजगार रामबीर सिंह ने नोकरी मिल गी | इब्बी वो मानस बेंक में नोकरी करे स लोग एर लुगाई पिछानन की | जब गाम के माणस उहने खोखिया नोकर कहन लागे थे |
वैधानिक चेतावनी----भाई यो काम आल्बाद कम अर अपराध घणा स कदे कोए सा नक़ल करण की कोशिश करे |
मेरा एक दोस्त स सतपाल ऊँ वो स तो रिफूजी पर जाट सकूल /कोलेज रोहतक का पढ्या होड़ स | तो बोलन- चालन अर दीखन में भी वो जाट-ए दीखे स | उह ने मेरे ताहि या बात बताई थी | उसका एक दोस्त था धर्मबीर वो दोनु कट्ठे प्रताप टाकिज रोहतक में फिल्म देखन जा र थे | यो टाकिज भियाणी स्टेंड धोरे कपड़ा मंडी में होया करदा | केरा इब्ब कोणी ,मन्ने पक्का ना बेरा | ते उह छोरे धरम बीर ने एक आइस क्रीम ले ली जब दूध आली आइसक्रीम दो रापियाँ की आया करदी एक कप से में | वो नु बोल्या अक र म्हारे इस कुह्ल्डी में के होवे स | तू नु कर छिक के खुआवन का ठेका कर ले | वो रेहड़ी आले ने सोची अक कितणी खावेगा | घणी तें घणी १०-१२ खा ले गा | उहने २५ रापियाँ में छिक के खुवान का ठेका कर लिया | इब्ब भाई धरमबीर लाग्या खावन दे धडा -धड | जाट का छोरा बेचारा आर्या था लामनियाँ की पंना काढअन | उहने तो ला दी उह की वा खोखी सी तली में | बेचारे रेहड़ी आले ने हाथ जोड़ लिए अक भाई जी मन्ने ब़क्स दो आज पाछे इन्नी बड़ी गलती कददे ना करूँ मेरी तो सारे दिन कमाई आप ने खा गेरी | जाट का पेट ,जणू दादा जी की लेट |
Partap, Ashoka, Liberty,Sangeeta sab saaf ho liye ib jata ke balak lukhma gud bech ke filam dekhan na ja sakte shiela ki ticket bhot mehangi ho rahi hai ar Bangad mein mhare gaam ke shansia ka raj hai Flyover bane pache nyu bhi uski sale kam ho gayee thee.
Good thread. Ravindra Jeet Ji. thank you for sharing........mere paas bhee bachpan kee kuchh ghatnaye hain, share to karna chahta hoon par mujhe aapki likhni nahi aati, samajh me to poora aa jata hai....
Aan bhai thare kunbe mein koye Sudha manas bhi hai ke?मेरी बुआ की छोरी साभो (साहिबकौर) घणी उत थी | या घटना उह ने म्हारे तैं बताई थी |वा मेरे तें आठ दस साल बड्डी होगी | जब सी मेरा फूफा घणा धनवान था | आजादी के बखत उह धोरे दो रुस्सी ट्रेक्टर ,एक कार अर एक बस थी | उह ने आपनी हेली के सहारे एक मकान बनवा राख्या था ,दो मंजिला अर उह में हमेशा ५-७ बाबे पड़े रह्या करदे | उन् खातर उह ने एक रसोइया भी राख राख्या था | जितना मेरे फूफा का कुनबा था उतने-ए बाबे पड़े रह्या करदे उड़े | मेरी बुआ अर बालक सब उनके विरुद्ध थे अक खाम खा आड़े इन् ने गेरे राखे स अर खुवाएं जावे स | साभो ने एक प्लान बनाई अर कदे तो उनके खाने में जब पूरा बन्न ले जब पानी मिला आंदी ,रसोइये तें लुक के | कदे घणा नूण मिला देंदी | कदे दो-तीन बुखटे मिरच्यां के गेर देंदी | कदे लुकमा उनके चूल्हे की आग बुझा देंदी ,पाणी गेर कें | कबे आधी रात ने जब बाबे सुते होंदे जब उनकी झांकी में टाल्ली बजा कें लुक जांदी | एक बे तो दलिया चढ़ा राख्या था तो रन्धया होड़ दलिया काढ लिया अर काच्चा घाल के धर दिया | बाबे परेशान अक कोए आंदा जांदा दिकदा ना अर यो सब जरुर कोए ओपरी आत्मा करे स | उन् बाब्याँ आले मकान के शामि शाभो के ताऊ की चोबारे की भींत पड़े थी कती प्लेन एक रात ने उहने अर उह के भाई ने एक हाथ का पंजा बनाया ,गत्ते का अर उह के एक गिट्टी के तागे का दोनु ओड़ ने इस्सी ढाल बाँध दिया अक एक ओड़ तें खींचे तो दूसरी ओड़ तें ढीला छोड़ दे | नु कर कें एक दो चांदनी रात में वे कसुते डरा दिए | कई बाबे तो jaande रहे पर दो-तीन बुड्डहे बाबा उड़े-ए पड़े rahe jo haandan firan joge ना थे |उन् बाब्याँ ने मेरा फूफा पटा लिया अक कढाई चढ़ानी पड़ेगी ,घर में भूतां का डेरा स | मेरे फूफा ने गाम न्यूत दिया अर रिश्तेदारी भी बुला ली | पहलम भी कई रिश्तेदार कह दिया करदे अक क्यूँ इन् बाब्याँ पे लुटता हंडे स पर वो नाराज हो जाया करदा | पर इब्बके तो कती नाश ठा दिया था बाब्याँ के चक्कर में |मेरी बुआ आगि म्हारे घरां अक नु-नु करर्या स अर किम्मे करो | फेर मेरे बाबू हर ने अर एक दो बड्डे-बूढ़े रिश्तेदार बुला कें वा कढाई रुकवाई अर वे बाबा उनके गाम के एक मदिर में ले जा कें गेर दिए | जब जा कें उन् बाब्याँ तें पेंडा chhutyaa | वीरअंगना छोरी साभो |
Aan bhai thare kunbe mein koye Sudha manas bhi hai ke?
मेरी बुआ की छोरी साभो (साहिबकौर) घणी उत थी | या घटना उह ने म्हारे तैं बताई थी |वा मेरे तें आठ दस साल बड्डी होगी | जब सी मेरा फूफा घणा धनवान था | आजादी के बखत उह धोरे दो रुस्सी ट्रेक्टर ,एक कार अर एक बस थी | उह ने आपनी हेली के सहारे एक मकान बनवा राख्या था ,दो मंजिला अर उह में हमेशा ५-७ बाबे पड़े रह्या करदे | उन् खातर उह ने एक रसोइया भी राख राख्या था | जितना मेरे फूफा का कुनबा था उतने-ए बाबे पड़े रह्या करदे उड़े | मेरी बुआ अर बालक सब उनके विरुद्ध थे अक खाम खा आड़े इन् ने गेरे राखे स अर खुवाएं जावे स | साभो ने एक प्लान बनाई अर कदे तो उनके खाने में जब पूरा बन्न ले जब पानी मिला आंदी ,रसोइये तें लुक के | कदे घणा नूण मिला देंदी | कदे दो-तीन बुखटे मिरच्यां के गेर देंदी | कदे लुकमा उनके चूल्हे की आग बुझा देंदी ,पाणी गेर कें | कबे आधी रात ने जब बाबे सुते होंदे जब उनकी झांकी में टाल्ली बजा कें लुक जांदी | एक बे तो दलिया चढ़ा राख्या था तो रन्धया होड़ दलिया काढ लिया अर काच्चा घाल के धर दिया | बाबे परेशान अक कोए आंदा जांदा दिकदा ना अर यो सब जरुर कोए ओपरी आत्मा करे स | उन् बाब्याँ आले मकान के शामि शाभो के ताऊ की चोबारे की भींत पड़े थी कती प्लेन एक रात ने उहने अर उह के भाई ने एक हाथ का पंजा बनाया ,गत्ते का अर उह के एक गिट्टी के तागे का दोनु ओड़ ने इस्सी ढाल बाँध दिया अक एक ओड़ तें खींचे तो दूसरी ओड़ तें ढीला छोड़ दे | नु कर कें एक दो चांदनी रात में वे कसुते डरा दिए | कई बाबे तो jaande रहे पर दो-तीन बुड्डहे बाबा उड़े-ए पड़े rahe jo haandan firan joge ना थे |उन् बाब्याँ ने मेरा फूफा पटा लिया अक कढाई चढ़ानी पड़ेगी ,घर में भूतां का डेरा स | मेरे फूफा ने गाम न्यूत दिया अर रिश्तेदारी भी बुला ली | पहलम भी कई रिश्तेदार कह दिया करदे अक क्यूँ इन् बाब्याँ पे लुटता हंडे स पर वो नाराज हो जाया करदा | पर इब्बके तो कती नाश ठा दिया था बाब्याँ के चक्कर में |मेरी बुआ आगि म्हारे घरां अक नु-नु करर्या स अर किम्मे करो | फेर मेरे बाबू हर ने अर एक दो बड्डे-बूढ़े रिश्तेदार बुला कें वा कढाई रुकवाई अर वे बाबा उनके गाम के एक मदिर में ले जा कें गेर दिए | जब जा कें उन् बाब्याँ तें पेंडा chhutyaa | वीरअंगना छोरी साभो |
aa leyo bhai saa saare k saare albaadi kisse padh liye...........................er ab jaa ke chain ki neend aayegi
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