Kanwarh Menace

swaich

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I live and work in Gurgaon. These days the commute to office has become absolutely horrible due to the throngs of Kanwars travelling through NH8 and other arterial roads of Gurgaon.

While the traffic police has allocated them stretches of the road to avoid traffic accidents, many of the Kanwar groups riding in jeeps, cars and bikes act very rowdily and misbehave with other users of the road. Yesterday evening I saw a moving kanwar jeep with one person sitting on the bonnet waving a hockey stick in the air as if to signal some victory celebration. This was right at the Iffco chowk with traffic police as mere onlookers. The open trucks carry huge music systems that blare through at high volume. I also saw another group of kanwars on bikes abusing and pushing a rickshaw puller who 'dared' to come close to their bike on a turn. One shudders to imagine that this continues for 2-3 weeks every year.

All this energy of youth looks misspent in such behaviour. If only these young men could be guided to help in some social causes rather than create ruckus on the road in the name of religious activities.
 
........................................All this energy of youth looks misspent in such behaviour. If only these young men could be guided to help in some social causes rather than create ruckus on the road in the name of religious activities.

Friend,

We appreciate your concern for the wastage of youth energy.

Please, start guiding them, if they are willing to listen to logic.

Thanks
 
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Friend,

We appreciate your concern for the wastage of youth energy.

Please, start guiding them, if they are willing to listen to logic.

Thanks

Hardly. Customs and traditions are always a barrier since most of them are unemployed with little education.

And who's we here?
 
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Btaa bhai kis baat ke bhakt reh gye woh.I guess isme kayi to aise miscreants,criminals hote honge jo dil khol ke paap kare ja hain ar phir soche hain ak ek be isse isse draame kar lo,saare paap dhul jaange.
Waahe baat s bhai saadhu ke bhes mai bhediye,na te sache bhakt ne raula paan ki ke jarurat.Apne mann ne naam rat ta reh aur pahuch ja maatha tekne.
Bhai bhakti bhi asli konya rhi...isme bhi perverts ghus liye

Jai Bhole Shankar
 
Btaa bhai kis baat ke bhakt reh gye woh.I guess isme kayi to aise miscreants,criminals hote honge jo dil khol ke paap kare ja hain ar phir soche hain ak ek be isse isse draame kar lo,saare paap dhul jaange.
Waahe baat s bhai saadhu ke bhes mai bhediye,na te sache bhakt ne raula paan ki ke jarurat.Apne mann ne naam rat ta reh aur pahuch ja maatha tekne.
Bhai bhakti bhi asli konya rhi...isme bhi perverts ghus liye

Jai Bhole Shankar

Thats exactly right. These people give a bad name to religion. I have seen something similar in youth travelling to Hemkunt Sahib. They carry baseball bats and drive rashly, always ready for a fight.

Is the Kanwar tradition common in all parts of Haryana or is it mainly Southern Haryana, Raj where its is more common?
 
14 जुलाई को देहरादून गया था ........ सब के सब रास्ते मोड़ तरोड़ राखे थे ........ शामली मे तो घुसने ही नहीं देते ........ 100 का नोट दिया पुलिस वाले ते और रास्ता खुल गया ........ 11 घंटे लगे देहरादून पहुचने मे ......... जब पुलिस वाले ते लेन देन की बात चल री थी तो एक सिपाही कहन लगगया की जनाब इब तो 10 दिन ते crime घने कम हो रे से ...... सारे गुंडे कावड लेन जा रे से ........... 17 तारीख तक पूरी शांति है और कमाई भी .................. समझ नहीं आत्ता के होगा इस देश का

जय हिंद, जय जाट
 
ये काँवडीये सब भंगेड़ी -नशेडी होवें सें | भांग - सुल्फा लेण जाया करें ये ,ज्युकर कांवड़ की आड़ में पुलिस भी तलाशी कोणी लेवे | ये सब घर तें फ़ालतू होवें सें | घरक्याँ का भी पेंडा छूट जा स , एक आध मिहने खातर | पहलम कोए जाट कांवड़ कोणी लाया करदा १५-२० साल तें ल्यावण लागे सें | इन् बामनां ने भका राखे सें अक कांवड़ ल्याओगे ते थारा बियाह हो जा गा | छोरी के शिवजी की जटा में पैदा होवें सें ? अक ज़ूम की ढाल काढ-काढ हाथ पे धर दे गा | खोते किते के | अर घणे ते इन् नेता अर धरम परेमी बंधूआँ ने चढ़ा राखे सें जो इन् ने सुविधा देवें सें | कई लाख के भंडारे ला देवेंगे , पर काम की थां एक रपिया भी कोणी देवें | पाछले साल भी इस्सा - ए तागा चाल्या था , कोए सा भाई टोह के ने लिंक चेपियो |
 
Russia ki tereh inko militry training lago karva do.



ये सब कामचोर सें ,क्याहें काम के कोणी | म्हारे गाम के भी कई ल्याया करें , सब फ़ालतू बन्दे पावेंगे इन् कामां में ,निखट्टू |
 
bhai mere bhole baba te badda kuch nahi thoda to bhagwan ne bhi man lyu karo

bhagwan ne manan ka bada sutra jugad toh rakhya.
bgawan bhi kilki marta hoga inhe dekh ke


i was shocked to see these news

मुजफ्फरनगर। केस एक : नाम दिव्या, दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमबीए पासआउट। पिछले तीन साल से साथी रमेश पंवार से प्रेम प्रसंग चल रहा है। दोनों जीवन भर के लिए एक साथ होना चाहते हैं। दिव्या ने इसी खास मकसद से शिवरात्रि को चुना और दिल्ली से निकल पड़ी कांवड़ लेने।
केस दो : नाम मधुलिका तोमर, गाजियाबाद के एक इंस्टीट्यूट से मास कम्यूनिकेशन कर रही हैं। वह भी मनचाहे वर को हासिल करने के लिए कांवड़ लेकर आई हैं।
दिव्या और मधुलिका तो चंद उदाहरण हैं। हरिद्वार से करीब एक करोड़ लोगों ने शुक्रवार रात तक कांवड़ उठा ली है। इसमें कुंवारियों की भी संख्या काफी मात्रा में है। कुंवारियां परिवार के साथ खास मकसद से पावन नगरी पहुंच रही हैं और बम-बम भोलों की गूंज के साथ शिवालय की तरफ बढ़ रही हैं। दैनिक जागरण ने दस अलग-अलग कुंवारियों से बातचीत की। दस युवतियों में से आठ युवतियों ने बताया कि वह मनचाहे वर को हासिल करने के लिए कांवड़ लेकर आ रही हैं। जबकि एक युवती का कहना था कि वह एयर हॉस्टस बनना चाहती है। एक अन्य युवती अपने पिता के कैंसर को ठीक करने के उददेश्य से कांवड़ लेकर आई। अगर पिछले सालों पर गौर करें तो बहुत कम संख्या में महिलाएं पावन नगरी कांवड़ लेने जाती थीं। अधिकतर महिलाएं बच्चा नहीं होने के कारण कांवड़ यात्रा को चुनती थीं लेकिन अब यात्रा में महिलाएं कम युवतियां अधिक दिख रही हैं।





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शिवरात्रि पर विशेष कृपा बरसाते हैं भोले भंडारी
विधि-विधान से किया पूजन देता है मनवांछित फल
जागरण संवाददाता, बागपत :
शिवरात्रि पर भक्तों पर भगवान शिव की भक्तों पर विशेष कृपा होती है। विधि-विधान से भगवान शंकर का पूजन करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
पूजा की सामग्री
चंदन, चावल, रोली, कलावा, जनेऊ, तुलसी मंजरी, बेलपत्र, धतूरा, फल, फूल प्रसाद, दूध, दही, गंगाजल, शहद, घी, लोटे में जल आदि।
ऐसे करें पूजन
पं. राजकुमार शास्त्री के मुताबिक शिवलिंग के सामने हाथ जोड़कर बैठें। आचमन करके तीन बार जल ग्रहण कर और ओम नम: शिवाय का उच्चारण करते हुए हाथ में जल, चावल, दक्षिणा रखकर संकल्प लें। दीपक ईशान कोण में रखें। शिवजी के साथ गणेश जी, पार्वती जी, कार्तिकेय जी, नंदी और भगवान कुबेर का ध्यान करें। इसके बाद जलाभिषेक करें। भगवान को वस्त्र, जनेऊ चढ़ायें। इसके बाद चंदन साबुत चावल, फूल चढ़ाकर धूप-दीप प्रज्ज्वलित करें। मिष्ठान अर्पण करें। बाद में फूल, तीन पत्र वाला बेलपत्र, धतूरा, पान, लौंग इलायची, सुपारी अर्पित करें।
किसका क्या फल
-दूध चढ़ाने से पुत्र प्राप्ति होती है, रोग शांत हो जाते हैं।
-दही चढ़ाने से पशुओं की बीमारी में लाभ मिलता है।
-घी अर्पित करने से स्वास्थ्य लाभ होता है।
-चीनी अर्पित करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न और व्यापार में लाभ होता है।
राशिवार ऐसे करें जलाभिषेक
मेष : जल में गाय का घी एवं तुलसी मंजरी।
वृष : गाय का घी एवं शहद।
मिथुन : जल में गन्ने का रस एवं कमल गंट्टा।
कर्क : गिलोय तथा गाय का घी
सिंह : जल में तुलसी पत्र मिलाकर।
कन्या : गाय का दूध, तुलसी मंजरी।
तुला : केसर, गाय का घी।
वृश्चिक : लाल फूल, गाय का दूध।
धनु : लाल चंदन, केसर और घी।
मकर : अर्क पुष्प, शमी के पत्ते।
कुंभ : शमी पत्र, काली गाय का घी
मीन : पीला चंदन, पीले फूल, तुलसी पत्र।
नोट: इनमें से सभी या कोई एक वस्तु जल में मिलाकर अर्पण करें)
 
bhagwan ne manan ka bada sutra jugad toh rakhya.
bgawan bhi kilki marta hoga inhe dekh ke


i was shocked to see these news

मुजफ्फरनगर। केस एक : नाम दिव्या, दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमबीए पासआउट। पिछले तीन साल से साथी रमेश पंवार से प्रेम प्रसंग चल रहा है। दोनों जीवन भर के लिए एक साथ होना चाहते हैं। दिव्या ने इसी खास मकसद से शिवरात्रि को चुना और दिल्ली से निकल पड़ी कांवड़ लेने।
केस दो : नाम मधुलिका तोमर, गाजियाबाद के एक इंस्टीट्यूट से मास कम्यूनिकेशन कर रही हैं। वह भी मनचाहे वर को हासिल करने के लिए कांवड़ लेकर आई हैं।
दिव्या और मधुलिका तो चंद उदाहरण हैं। हरिद्वार से करीब एक करोड़ लोगों ने शुक्रवार रात तक कांवड़ उठा ली है। इसमें कुंवारियों की भी संख्या काफी मात्रा में है। कुंवारियां परिवार के साथ खास मकसद से पावन नगरी पहुंच रही हैं और बम-बम भोलों की गूंज के साथ शिवालय की तरफ बढ़ रही हैं। दैनिक जागरण ने दस अलग-अलग कुंवारियों से बातचीत की। दस युवतियों में से आठ युवतियों ने बताया कि वह मनचाहे वर को हासिल करने के लिए कांवड़ लेकर आ रही हैं। जबकि एक युवती का कहना था कि वह एयर हॉस्टस बनना चाहती है। एक अन्य युवती अपने पिता के कैंसर को ठीक करने के उददेश्य से कांवड़ लेकर आई। अगर पिछले सालों पर गौर करें तो बहुत कम संख्या में महिलाएं पावन नगरी कांवड़ लेने जाती थीं। अधिकतर महिलाएं बच्चा नहीं होने के कारण कांवड़ यात्रा को चुनती थीं लेकिन अब यात्रा में महिलाएं कम युवतियां अधिक दिख रही हैं।--------
शिवरात्रि पर विशेष कृपा बरसाते हैं भोले भंडारी
विधि-विधान से किया पूजन देता है मनवांछित फल
जागरण संवाददाता, बागपत :
शिवरात्रि पर भक्तों पर भगवान शिव की भक्तों पर विशेष कृपा होती है। विधि-विधान से भगवान शंकर का पूजन करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
पूजा की सामग्री
चंदन, चावल, रोली, कलावा, जनेऊ, तुलसी मंजरी, बेलपत्र, धतूरा, फल, फूल प्रसाद, दूध, दही, गंगाजल, शहद, घी, लोटे में जल आदि।
ऐसे करें पूजन
पं. राजकुमार शास्त्री के मुताबिक शिवलिंग के सामने हाथ जोड़कर बैठें। आचमन करके तीन बार जल ग्रहण कर और ओम नम: शिवाय का उच्चारण करते हुए हाथ में जल, चावल, दक्षिणा रखकर संकल्प लें। दीपक ईशान कोण में रखें। शिवजी के साथ गणेश जी, पार्वती जी, कार्तिकेय जी, नंदी और भगवान कुबेर का ध्यान करें। इसके बाद जलाभिषेक करें। भगवान को वस्त्र, जनेऊ चढ़ायें। इसके बाद चंदन साबुत चावल, फूल चढ़ाकर धूप-दीप प्रज्ज्वलित करें। मिष्ठान अर्पण करें। बाद में फूल, तीन पत्र वाला बेलपत्र, धतूरा, पान, लौंग इलायची, सुपारी अर्पित करें।
किसका क्या फल
-दूध चढ़ाने से पुत्र प्राप्ति होती है, रोग शांत हो जाते हैं।
-दही चढ़ाने से पशुओं की बीमारी में लाभ मिलता है।
-घी अर्पित करने से स्वास्थ्य लाभ होता है।
-चीनी अर्पित करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न और व्यापार में लाभ होता है।
राशिवार ऐसे करें जलाभिषेक
मेष : जल में गाय का घी एवं तुलसी मंजरी।
वृष : गाय का घी एवं शहद।
मिथुन : जल में गन्ने का रस एवं कमल गंट्टा।
कर्क : गिलोय तथा गाय का घी
सिंह : जल में तुलसी पत्र मिलाकर।
कन्या : गाय का दूध, तुलसी मंजरी।
तुला : केसर, गाय का घी।
वृश्चिक : लाल फूल, गाय का दूध।
धनु : लाल चंदन, केसर और घी।
मकर : अर्क पुष्प, शमी के पत्ते।
कुंभ : शमी पत्र, काली गाय का घी
मीन : पीला चंदन, पीले फूल, तुलसी पत्र।
नोट: इनमें से सभी या कोई एक वस्तु जल में मिलाकर अर्पण करें)

Is prakaar kee khabron ko JatLand se black out rakhen to achha hai !
 
दिव्या और मधुलिका तो चंद उदाहरण हैं। हरिद्वार से करीब एक करोड़ लोगों ने शुक्रवार रात तक कांवड़ उठा ली है। इसमें कुंवारियों की भी संख्या काफी मात्रा में है। कुंवारियां परिवार के साथ खास मकसद से पावन नगरी पहुंच रही हैं और बम-बम भोलों की गूंज के साथ शिवालय की तरफ बढ़ रही हैं।

एक करोड़ लोगों के कावड़ उठाने वाली बात जमती नहीं । यह आंकड़ा शायद बढ़ा-चढा कर पेश किया लगता है । अगर यह सच है तो समझ लो कि अंधविश्वास ने घेर लिया है पढ़े-लिखे लोगों को भी ।

हवासिंह सांगवान ने अपनी किताब में ठीक ही लिखा है -


.....इस पाखण्डवाद के विरोध में जाट कौम ने सदियों से संघर्ष करने के बाद भी आखिरकार आज अपने हथियार डाल दिये हैं । इसी का परिणाम है कि आज इस बहादुर जाट कौम के नौजवान शेर पागलों की तरह कंधों पर कांवड़ उठाये घूम रहे हैं और रास्तों में गाड़ियों के नीचे कुत्ते, बिल्लियों की तरह कुचले जा रहे हैं वरना कभी इन्हीं के पूर्वजों ने आक्रमणकारियों और पाखण्डियों को कुचला था । जौत की जमीन रही नहीं और रोजगार मिला नहीं तो शादी हुई नहीं तो फिर इन्हें बहकाया गया कि कावड़ लाओ दुल्हन आएगी । शायद इन्हें पता नहीं दुल्हनों की हत्या तो पेट में ही हो गई थी । कुछ गांजा, चरस और भांग का लुत्फ उठाने जाते हैं तो कुछ शिविरों में हलवा, पूरी खाने जाते हैं । वरना क्या कभी किसी चावला, खन्ना, खुराना, सिन्हा, सक्सेना, आडवाणी व अम्बानी को कावड़ लाते देखा है? एक अनुमान के अनुसार हर साल औसतन आठ लाख जाट यह पागलपन कर रहे हैं जिसमें औसतन एक कावड़िया लगभग 5 हजार तक खर्च करके प्रति वर्ष जाट कौम का 40 करोड़ रुपया सरेआम बर्बाद किया जा रहा है । यह कार्य लगभग 15 सालों से चल रहा है और बढ़ता ही जा रहा है । जिन जाटों के पास किसी कारण से आज पैसा आ गया वे इन कावड़ियों के लिए शिविर लगाकर अपनी ही कौम को धर्म के नाम पर बर्बादी की तरपफ धकेल रहे हैं । पिछले वर्ष दिल्ली के एक धनाढ्य जाट से मुझे किसी कार्य से मिलना था तो पता चला कि वे हरिद्वार में कावड़ियों के लिए शिविर लगाने गये हैं कुछ दिन बाद दोबारा पता किया तो बतलाया गया कि वह मथुरा की परिक्रमा के लिए शिविर लगाने गये हैं । मैंने उसे टेलीफोन पर कहा था कि यह आस्था नहीं, पागलपन है इससे अच्छा तो कौम के चार होशियार गरीब बच्चों को अपनाकर दिल्ली में पढ़ाकर और कोचिंग दिलाकर आई.ए.एस. बना देते तो देश के चार जिलों पर हमारा प्रशासनिक कब्जा हो जाता लेकिन ये पैसे वाले जाट भी कौम को बर्बाद करने में अग्रणी हैं ।....

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एक करोड़ लोगों के कावड़ उठाने वाली बात जमती नहीं । यह आंकड़ा शायद बढ़ा-चढा कर पेश किया लगता है । अगर यह सच है तो समझ लो कि अंधविश्वास ने घेर लिया है पढ़े-लिखे लोगों को भी ।

हवासिंह सांगवान ने अपनी किताब में ठीक ही लिखा है -


.....इस पाखण्डवाद के विरोध में जाट कौम ने सदियों से संघर्ष करने के बाद भी आखिरकार आज अपने हथियार डाल दिये हैं । इसी का परिणाम है कि आज इस बहादुर जाट कौम के नौजवान शेर पागलों की तरह कंधों पर कांवड़ उठाये घूम रहे हैं और रास्तों में गाड़ियों के नीचे कुत्ते, बिल्लियों की तरह कुचले जा रहे हैं वरना कभी इन्हीं के पूर्वजों ने आक्रमणकारियों और पाखण्डियों को कुचला था । जौत की जमीन रही नहीं और रोजगार मिला नहीं तो शादी हुई नहीं तो फिर इन्हें बहकाया गया कि कावड़ लाओ दुल्हन आएगी । शायद इन्हें पता नहीं दुल्हनों की हत्या तो पेट में ही हो गई थी । कुछ गांजा, चरस और भांग का लुत्फ उठाने जाते हैं तो कुछ शिविरों में हलवा, पूरी खाने जाते हैं । वरना क्या कभी किसी चावला, खन्ना, खुराना, सिन्हा, सक्सेना, आडवाणी व अम्बानी को कावड़ लाते देखा है? एक अनुमान के अनुसार हर साल औसतन आठ लाख जाट यह पागलपन कर रहे हैं जिसमें औसतन एक कावड़िया लगभग 5 हजार तक खर्च करके प्रति वर्ष जाट कौम का 40 करोड़ रुपया सरेआम बर्बाद किया जा रहा है । यह कार्य लगभग 15 सालों से चल रहा है और बढ़ता ही जा रहा है । जिन जाटों के पास किसी कारण से आज पैसा आ गया वे इन कावड़ियों के लिए शिविर लगाकर अपनी ही कौम को धर्म के नाम पर बर्बादी की तरपफ धकेल रहे हैं । पिछले वर्ष दिल्ली के एक धनाढ्य जाट से मुझे किसी कार्य से मिलना था तो पता चला कि वे हरिद्वार में कावड़ियों के लिए शिविर लगाने गये हैं कुछ दिन बाद दोबारा पता किया तो बतलाया गया कि वह मथुरा की परिक्रमा के लिए शिविर लगाने गये हैं । मैंने उसे टेलीफोन पर कहा था कि यह आस्था नहीं, पागलपन है इससे अच्छा तो कौम के चार होशियार गरीब बच्चों को अपनाकर दिल्ली में पढ़ाकर और कोचिंग दिलाकर आई.ए.एस. बना देते तो देश के चार जिलों पर हमारा प्रशासनिक कब्जा हो जाता लेकिन ये पैसे वाले जाट भी कौम को बर्बाद करने में अग्रणी हैं ।....

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Sahi dhanda pa rehya sai Haridwar mai loggan nai..Jispai kimme nahi hota wo Haridwar jaake modda bannn ja sai... arr pher duniya nai fuddu banaye jaawein sain..

Desh ka aadha battha goll Baba, Sant, sadhu tai ho rehya sai.. Hazaron saalon se bevkoof banate aa rahe hain logon ka..bera na ke trick sai in dhorai.. Bichari Marketing companies bhi fail sain inkai aage!!
 
Kaunse saathi? Aap kya logon ke behalf pe bhi post karte hain?

ये गामां के लोग इन अपने कावाडिये बटेऊआं खातर टेंट लगा के हलवा पूरी खुवाना बन्ध कर दयो.... या लंग्वाड भूखी मरदी दो डंग भी ना पाड़े हरद्वार तें......कावड़ ल्याना तो दूर की बात स.... लेकिन ये न्यू सोचें सें आक धरम मिले स.... थम भी लूट ल्यो....

महा बकवास काम.... एर जाट भी खूब लाग रे सें अंधे होए ...... एर उनके घर आले न्यू राजी होवेंगे जाणू कारगिल में जीत के आया स छोरा......
.आर जो डाक कावड ल्यावें सें ... पन्द्राह लोग मिले के.... भाज म भाज.... जणू शिवजी बेहोश हो रा स ... एर ये उसकी मूर्छा तोड़ेंगे पानी ल्या के....
 
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