A Fistful Gaddar Jats

आर्य समाज ने सती पर्थ बंद करवाई और रेणुका चौधरी जाट हे और जाट महान हे वो शिवजी के बाल से पैदा हुआ हे और महान वैश्य या शुद्र कैसे हो सकता हे
 
आर्य समाज ने सती पर्थ बंद करवाई और रेणुका चौधरी जाट हे और जाट महान हे वो शिवजी के बाल से पैदा हुआ हे और महान वैश्य या शुद्र कैसे हो सकता हे

Kindly share valued views on the topic of the castes in India by logging in :http://www.jatland.com/forums/showt...ed-Theory-of-Indian-Caste&p=340706#post340706
 
भाईसाहब, आपनै एक हिंदू भगवान ताहीं इतनी इज्जत दे राखी सै अक उसके नाम पै अपणा नाम धर राख्या सै। पहलै आप तो लिकड़ कै नै दिखा द्यो हिंदुआं के गोड्यां तलै तै। खुद होक्का पियो सो अर दूसरयां नै होक्के की बुराई बताओ सो। हिंदुआं नै जाटां पै कोई जुल्म भी ना कर राख्या सै फेर भी बेरा ना क्यूं आप हिंदू भगवानां नै एक ओड अपणे सिर पै बठाओ सो अर दूसरी ओड उन्हा की बुराई करो सो। या तो काम्मल बात कोन्या। हो सकै सै आपका नाम तो ताऊ-ताई नै धर्या होगा, पर आपके बालकां का तो आपनै ही धर्या होगा। मन्नै तो लाग्गै सै उनका नाम भी हिंदू ए पावैगा।
Ravinder is an Indian name composed of two names, Ravi (the sun) and Indra (the King of Gods). Ravinder = Ravi + Indra=ravindra Ravinder = The Sun King of Gods.

भाई तन्ने भाषा का ज्ञान कोणी कति माड़ा सा भी , जो जट्टू बोली हां बोलाँ साँ इह में निरे इससे शब्द सें जो पुरे यूरोप आर एशिया में बोले जावें सें । "हरयाणवी बोली और उसके अनोखे शब्द " ताग्गे में इन् बाताँ पे चानणा गेरन्न की कोशिश कर राखी से ,आर माड़ा -मोटा बखत मिल जा ते ,भाई नरेंदर सिंह खरब तें भी फेट आइये ,जा किम्मे तेरे दीमाग में चढ़ जा ते । तू कई बे मेरे नाम पे आप्पत्ति जता चुका स अक इहने छोड़ दे , मन्ने भी कई बे कह ली अक र ये भाम्ण तन्ने बहका रे सें । फेर भी तेरे समझ में कोणी आंदी । जट्टां तें तन्ने भाम्ण प्यारे लागण लागगे । जा ज्युकर त्याग्गी भाज गे न्यू-ए तू भी जा रळ उनमे ।
 
आप से ज्यादा कन्फ्यूज्ड आदमी मैंने आज तक नहीं देखा उपेंदर जी, मुख्या संपादक, #१ खेल पत्रिका.

एक तरफ तो आप धर्म की संस्कृति का डंका बचा रहे है, उसे बचाने की बात कर रहे है वहीं दूसरी तरफ आप उसी धरम की उजडती संस्कृति और मुख्या धरा के मिटने पर खुश हो रहे है और चाह रहे है वे समाप्त हो. सीधा सवाल आप से ये है की अगर वर्ण ही हट गए तो हिन्दू धर्म मैं रह क्या जायेगा?


अगर पंडो(हिन्दू धर्म के रक्षको) की माने तो आप अपनी मर्ज़ी से मूत भी नहीं सकते, सितारों के अनुसार सब कुछ होता है,*नया घर लेने से पहले महूरत देखो, ब्याह करने से पहले कुंडली मिलाओ, मरने के बाद मुक्ति के लिए पाठ कराओ, इसे आजादी कहते है आप?

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ सति -बाल विवाह -विधवा शोषण आदि का अंत आर्य समाज ने किया था न की हिन्दू धर्म ने.


और जाट तो पहले से ही ये सब नहीं मानते/करते थे( arysamaaj ke aane se pahle bhi nahi maante the inn sab baaton ko,muti pujaa aadi-aadi ) । तो फिर जाट हिन्दू हुए ही नहीं ।
 
I have been patiently going through this thread to see if some sort of conclusion comes up as who is gaddar. Muje to lagta nahi agle 14 page me bhi koi nateeja dekhne ko milega ;)
अर में रहया गददार । इब्ब ताहीं ते किहे ने भी आपना नाँ कोणी जोड्या स लिस्ट में । मन्ने अल्प्संखयक डिक्लेयर करो ।
 
हा हा हा ह। भाई उप्पू भिघन! जमा दिल पे ले गया तू तो बात ने!
भाई तेरे जीसी तपस्या भी सबके बस की बात ना है :)


इह उपेंदर ने चुटकला विभाग कति ख़त्म कर दिया जाटलैंड का । सब आड़े-ए भतेरे हाँस लेवें सें ।
 
आर्य समाज ने सती पर्थ बंद करवाई और रेणुका चौधरी जाट हे और जाट महान हे वो शिवजी के बाल से पैदा हुआ हे और महान वैश्य या शुद्र कैसे हो सकता हे


यदि आपने ये कटाक्ष के रूप में लिखा है तो ठीक है
लेकिन यदि आप ऐसा मानते है तो इस बड़ी बेवकूफी भरी और अवैज्ञानिक बात नहीं हो सकती
 
यदि आपने ये कटाक्ष के रूप में लिखा है तो ठीक है
लेकिन यदि आप ऐसा मानते है तो इस बड़ी बेवकूफी भरी और अवैज्ञानिक बात नहीं हो सकती
पूरा हिन्दू धर्म ही बेवकुफीओं और अवैज्ञानिक बातों से भरा हुआ हे ।
 
यदि आपने ये कटाक्ष के रूप में लिखा है तो ठीक है
लेकिन यदि आप ऐसा मानते है तो इस बड़ी बेवकूफी भरी और अवैज्ञानिक बात नहीं हो सकती

कई श्यना का हाल देख के तो मेने लागे हे मे बेवकूफ़ ए ठीक हूँ. वैसे आप इतने नादान लगते तो नही हे के कटाक्ष को समझ ना पाए. और यदि नही समझ पाए तो अब मे कया कहूँ वैसे आप उस पोस्ट से अपना विस्लेशन करने के लिए सवतंत्र हे
 
भाई तन्ने भाषा का ज्ञान कोणी कति माड़ा सा भी , जो जट्टू बोली हां बोलाँ साँ इह में निरे इससे शब्द सें जो पुरे यूरोप आर एशिया में बोले जावें सें । "हरयाणवी बोली और उसके अनोखे शब्द " ताग्गे में इन् बाताँ पे चानणा गेरन्न की कोशिश कर राखी से ,आर माड़ा -मोटा बखत मिल जा ते ,भाई नरेंदर सिंह खरब तें भी फेट आइये ,जा किम्मे तेरे दीमाग में चढ़ जा ते । तू कई बे मेरे नाम पे आप्पत्ति जता चुका स अक इहने छोड़ दे , मन्ने भी कई बे कह ली अक र ये भाम्ण तन्ने बहका रे सें । फेर भी तेरे समझ में कोणी आंदी । जट्टां तें तन्ने भाम्ण प्यारे लागण लागगे । जा ज्युकर त्याग्गी भाज गे न्यू-ए तू भी जा रळ उनमे ।

ihh ka kihe chaadi aale(Sangh parivar) ne dimag saaf kar rakha sai. Yo koni aawe lane pai tolla sa.
 
Sure. IPC's Hindu marriage act doesn't stop Jats to marry in different gotras. Does it? Yes, it allows same gotra marriage, but in Hindu religion Jats are not only. Many castes marry in same gotras. You understand one thing : IPC's Hindu marriage act doesn't disallow the Jats to marry in different gotras. The efforts need to be made if we want this act to be changed in Jats' favour as far as same gotra marriage is concerned.
And I am also not bothered about your queries. Read post 201 in which you said 'kitne tarak diye hain ab tak aapse jo pucha gya?'

Jat padhati pta lag gai ho gai sadi ki kya hoti hai n hinduo se kaise alag h ya abhi bhi samajh na aaya tere. different gotar mein marriage to mudda hai hi nhi , mudda to same gotar mein aate shuru hota hai. Humare basic custom ko kha gya hindu marriage act lekin aapnme sirf dekha ki alag mein allow karta hai, wah re mere krantikari, aise hote hain hindu.

"kitne tarak diye hain ab tak aapse jo pucha gya?"- Ye aapke liye likha tha kyunki dusron ko aap ye keh rahe ho ki tarak nhi de rahe lekin yahan khud ek bhi tarak dia hai. atleast 10 post people have pointed you out for same.

aapse aapka varan pucha tha uska jawwab na dia ab tak
, vo khatam ho raha hai ya nhi vo alag baat hai lekin apna varan to bta do Sura bhai n ya sharam aawe sai?
 
Last edited:
मुझे एक गलत बात बोलोगे तो मैं तुम्हें 2 गलत बात बोलूंगा, क्योंकि शुरुआत आप करोगे।

मुझे तपस्या करते-करते 16वां साल लग गया है।


Isiliye tap karta hai kya ki ek k badale 2 baat kahe? wah re tapasavi.
 
हिंदू धर्म की यही तो महानता है कि इसमें आज़ादी है। हमें वर्ण चाहिए ही नहीं, न ही वर्ण व्यवस्था में न होने से हमारा कोई काम अटकता। जिस तरह से सती प्रथा, बाल विवाह, छुआछूत जैसी कुरीतियां दम तोड़ चुकी हैं, वैसे ही वर्ण व्यवस्था अब दम तोड़ चुकी है। केवल हिंदू धर्म के आलोचक इस मुद्दे को उठाते रहते हैं। अब तुम ये कमाल देखो कि एक हिस्से विशेष के जाटों को एक मुस्लिम आक्रमणकारी ने 'शूद्र/चंडाल' कहा, लेकिन उसके लिए बदनाम हिंदू धर्म हो गया। गलत जानकारी नहीं फैलानी चाहिए। मैं अक्सर ये बात सुनकर हैरान होता था। अब पता चला कि ये क्या किस्सा था। इसीलिए लाहौर कोर्ट वगैरह में जाटों को शूद्र कहा गया (अगर ऐसा हुआ है तो)। ये शूद्र वाला चक्कर उधर सिंध-पंजाब तक ही रहा। कमाल की बात है उधर के कुछ जाटों को शूद्र कहा गया तो बाकी जाटों को भड़काया जाता रहा है हिंदू धर्म के खिलाफ।
काम तो आपका हिन्दू ना होंगे तो भी नहीं अटकता | बात होती हैं मान सम्मान की , समानता की |
उपेंद्र भाई कहीं तो अपनी बात पर टिक अब जब बात खुद का वर्ण बताने कि आई तो आज़ादी को उठा लाये , अगर ऐसी ही आज़ादी थी तो फिर यह व्यवस्था का ढोंग क्यो था ? और इस धर्म से यह कुरीतिया दम क्यों तोड़ गईं ? जबकि इन कुरीतियों को जायज ठहराने के लिए शास्त्रों का हवाला दिया जाता था | इस हिसाब से तो फिर सभी शास्त्र झूठे हुए अगर नहीं तो फिर इनको कुरीति बता कर खत्म क्यों किया गया ?
उत्तर भारत और दक्षिण भारत के इस धर्म को मानने वाले लोगो मे कहीं भी कोई समानता नहीं हैं , दक्षिण मे हिन्दू अपनी मामा बुआ कि लड़की से शादी को जायज मानते हैं जबकि उत्तर भारत मे इनको बहन भाई का पवित्र दर्जा दिया जाता हैं | दक्षिण मे ज़्यादातर हिन्दू मांसाहारी हैं यहा तक कि कुछ इलाको मे गाय का मांस तक खाया जाता हैं जबकि उत्तर भारत मे ज्यादातर लोग शाकाहारी हैं और गाय का मांस खाना तो दूर यहा गाय लोगो के लिए पूजनीय हैं | तभी मैंने कहा था कि यह एक जुगाड़ हैं |

इतिहास का पूरा ज्ञान ले पहले और चल तेरी बात बढ़ी की कि एक मुसलमान ने जाटों को शूद्र कहा , तेरे हिसाब से तो हिन्दू हमारे अपने हैं वो मुसलमान तो गैर था फिर तेरे इन हिन्दू भाइयों ने जाटों को कोर्ट मे शूद्र घोषित क्यू करवाया ? गैर तो अपनी करेगा तेरे इन अपनो को जाटों से क्या परेशानी हो गई थी ?

 
उपेंदर तू नाम-नाम का रोला मचा रया था तन्ने दो-तीन उदाहरण दयूंगा :- तेरे फेर भी बात ना समझ में आई ते फेर भाम्ण तेरा रुखाला ।
१) एक नाम स "मिहिर" जो हिन्दू रखते हैं ,इसका बिगड़ा हुआ शब्द स मेहर ,जो जाट और मुसलमान रखते हैं(मेहर सिंह ,मेहर खान ) आर इन् दोनुआ का मतलब स "सूर्य "। इरान का राजा शाह पहलवी अपने आप की आर्य मिहिर के नाम से लिखता था ,पर था वो शिया मुसलमान ।

२) दुसरा नाम स"महताब " यु शब्द संस्कृत के महातप्त =महाताप =महाताब का अप्भारंश स । यु नाम भी मुसलमान आर जट्टों में परयोग होता हे पर हिन्दुओं में नहीं । महताब सिंह महताब खान ।
३) मुसलामानों का एक पैगम्बर हुआ हे "मोहमद " यु संस्कृत के महामत =महामति यानी महा बुद्धि वाला का अपभ्रंश स । अरब में अब भी मोहमद नहीं बोला जाँदा ,उनका उच्चारण "महमत" स। दक्षिन एशिया यानी भारत खंड के मुसलमान ही मोहमद बोलें सें ।

४) पैगम्बर भी संस्कृत का शब्द से इह का मतलब इश्वर का दूत ते । ऊँ ते न्यू कह देवें सें अक जो पैगाम ले के आया वो पैगम्बर होया । पर इह का शाब्दिक मतलब से जिसके पग अम्बर से आये । पग मतलब पाँव ,अम्बर मतलब आसमान ,अन्त्रिक्स । यानी जो आसामन से या अन्त्रिक्स से चल कर आया हो ।
इससे इससे- अपवाद ना सें कड़े तू फेर न्यू कहवे अक ये ते एक आध होंगे । पुरे यूरोप, मध्य एशिया और भारतीय उपखंड की भाषाएँ ,बोलियाँ सब बहने हैं ,इनको भाषाविद "इंडो-युरोपियन लेंग्वेज फेमिली "कह्या करें । ये किहे पण्डे ,भमण आर हिन्दू की बपोती नहीं हैं ,तुमाहरी संस्कृत भी भारतीय भाषा नहीं हे ,ये भी मध्य एसिया से ही आरम्भ हुई थी जिसको जाट जेसी कोमें यहाँ तक लाइ हैं । इसलिए मेरा नाम किहे हिन्दू से या हिन्दू धरम से उधार नहीं लिया हे ये तुम्हारा हिन्दू पाखंडी धर्म हे जो जट्टों का भोत कुछ उधार लिया हुआ हे ।
 
उपेंदर तू नाम-नाम का रोला मचा रया था तन्ने दो-तीन उदाहरण दयूंगा :- तेरे फेर भी बात ना समझ में आई ते फेर भाम्ण तेरा रुखाला ।
१) एक नाम स "मिहिर" जो हिन्दू रखते हैं ,इसका बिगड़ा हुआ शब्द स मेहर ,जो जाट और मुसलमान रखते हैं(मेहर सिंह ,मेहर खान ) आर इन् दोनुआ का मतलब स "सूर्य "। इरान का राजा शाह पहलवी अपने आप की आर्य मिहिर के नाम से लिखता था ,पर था वो शिया मुसलमान ।

२) दुसरा नाम स"महताब " यु शब्द संस्कृत के महातप्त =महाताप =महाताब का अप्भारंश स । यु नाम भी मुसलमान आर जट्टों में परयोग होता हे पर हिन्दुओं में नहीं । महताब सिंह महताब खान ।
३) मुसलामानों का एक पैगम्बर हुआ हे "मोहमद " यु संस्कृत के महामत =महामति यानी महा बुद्धि वाला का अपभ्रंश स । अरब में अब भी मोहमद नहीं बोला जाँदा ,उनका उच्चारण "महमत" स। दक्षिन एशिया यानी भारत खंड के मुसलमान ही मोहमद बोलें सें ।

४) पैगम्बर भी संस्कृत का शब्द से इह का मतलब इश्वर का दूत ते । ऊँ ते न्यू कह देवें सें अक जो पैगाम ले के आया वो पैगम्बर होया । पर इह का शाब्दिक मतलब से जिसके पग अम्बर से आये । पग मतलब पाँव ,अम्बर मतलब आसमान ,अन्त्रिक्स । यानी जो आसामन से या अन्त्रिक्स से चल कर आया हो ।
इससे इससे- अपवाद ना सें कड़े तू फेर न्यू कहवे अक ये ते एक आध होंगे । पुरे यूरोप, मध्य एशिया और भारतीय उपखंड की भाषाएँ ,बोलियाँ सब बहने हैं ,इनको भाषाविद "इंडो-युरोपियन लेंग्वेज फेमिली "कह्या करें । ये किहे पण्डे ,भमण आर हिन्दू की बपोती नहीं हैं ,तुमाहरी संस्कृत भी भारतीय भाषा नहीं हे ,ये भी मध्य एसिया से ही आरम्भ हुई थी जिसको जाट जेसी कोमें यहाँ तक लाइ हैं । इसलिए मेरा नाम किहे हिन्दू से या हिन्दू धरम से उधार नहीं लिया हे ये तुम्हारा हिन्दू पाखंडी धर्म हे जो जट्टों का भोत कुछ उधार लिया हुआ हे ।

bahut badhiya!
 
उपेंदर तू नाम-नाम का रोला मचा रया था तन्ने दो-तीन उदाहरण दयूंगा :- तेरे फेर भी बात ना समझ में आई ते फेर भाम्ण तेरा रुखाला ।
१) एक नाम स "मिहिर" जो हिन्दू रखते हैं ,इसका बिगड़ा हुआ शब्द स मेहर ,जो जाट और मुसलमान रखते हैं(मेहर सिंह ,मेहर खान ) आर इन् दोनुआ का मतलब स "सूर्य "। इरान का राजा शाह पहलवी अपने आप की आर्य मिहिर के नाम से लिखता था ,पर था वो शिया मुसलमान ।

२) दुसरा नाम स"महताब " यु शब्द संस्कृत के महातप्त =महाताप =महाताब का अप्भारंश स । यु नाम भी मुसलमान आर जट्टों में परयोग होता हे पर हिन्दुओं में नहीं । महताब सिंह महताब खान ।
३) मुसलामानों का एक पैगम्बर हुआ हे "मोहमद " यु संस्कृत के महामत =महामति यानी महा बुद्धि वाला का अपभ्रंश स । अरब में अब भी मोहमद नहीं बोला जाँदा ,उनका उच्चारण "महमत" स। दक्षिन एशिया यानी भारत खंड के मुसलमान ही मोहमद बोलें सें ।

४) पैगम्बर भी संस्कृत का शब्द से इह का मतलब इश्वर का दूत ते । ऊँ ते न्यू कह देवें सें अक जो पैगाम ले के आया वो पैगम्बर होया । पर इह का शाब्दिक मतलब से जिसके पग अम्बर से आये । पग मतलब पाँव ,अम्बर मतलब आसमान ,अन्त्रिक्स । यानी जो आसामन से या अन्त्रिक्स से चल कर आया हो ।
इससे इससे- अपवाद ना सें कड़े तू फेर न्यू कहवे अक ये ते एक आध होंगे । पुरे यूरोप, मध्य एशिया और भारतीय उपखंड की भाषाएँ ,बोलियाँ सब बहने हैं ,इनको भाषाविद "इंडो-युरोपियन लेंग्वेज फेमिली "कह्या करें । ये किहे पण्डे ,भमण आर हिन्दू की बपोती नहीं हैं ,तुमाहरी संस्कृत भी भारतीय भाषा नहीं हे ,ये भी मध्य एसिया से ही आरम्भ हुई थी जिसको जाट जेसी कोमें यहाँ तक लाइ हैं । इसलिए मेरा नाम किहे हिन्दू से या हिन्दू धरम से उधार नहीं लिया हे ये तुम्हारा हिन्दू पाखंडी धर्म हे जो जट्टों का भोत कुछ उधार लिया हुआ हे ।

Great but i dont think he will understand it :)
 
.

Hinduism explained truthfully and beautifully in 8 mins, Enlighten yourself !


To view this content we will need your consent to set third party cookies.
For more detailed information, see our cookies page.
 
Original poster - "doing something which can bring a bad name to the community"
How interesting how amusing.....
So I did a search on this web site and....
Brother some of these same jats are doing or have done bad to their brothers, husbands, sisters, wives etc etc. and they have been on this web site giving guidance to young jats and some of you have taken photos alongside with them and some of you have made threads praising them...they are amongst us and since you have no information about them you do not know their kartoots how sad some of you praise them wolves...

 
Back
Top