phoolkumar
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मोदी हुए मुद्दीन, राजनाथ हुए रज्जुद्दीन और भाजपा हुई भाजुद्दीन:
क्योंकि बीजेपी का 2014 घोषणापत्र कहता है कि "बीजेपी सत्ता में आते ही मदरसों का आधुनिकीकरण करवाएगी|’’
क्योंकि मैं एक जाट हूँ और मेरे बुजुर्ग जो जाट-मुस्लिम एकता की सांझी विरासत मुझे दे गए थे, उसको सम्भाले और बनाये रखने का पैरोकार भी हूँ, इसलिए मेरे लिए तो यह सुखद बात है कि बीजेपी सत्ता में आई तो मुस्लिम मदरसों का आधुनिकीकरण करवाएगी|
लेकिन क्या होगा उस अमित शाह के मुज़फ्फरनगर में दिए, "बदला लेने" के ब्यान का?
क्या होगा वसुंधरा राजे के "खून-खराबे" वाले ब्यान का?
तो क्या यह सब सिर्फ जाटों की भावनाओं से खेलने के षड्यंत्र थे| मैं तो पहले ही ना कहता था कि हाथी के दांत खाने के और, और दिखाने के और| शुक्र है इलेक्शन से पहले ही कट्टरता, कटुता, हिन्दू और हिंदुत्ववाद का ढोल फट गया| हाय रे क्या भाजपा यह भी भूल गई कि जाट तुझसे जुड़ा ही इस मुद्दे पर है; मतलब सत्ता आने से पहले ही तथाकथित धार्मिक उन्माद में कट्टर हुए जाटों की भावनाओं का खुला मजाक, क्या जाट युवा सहन करेगा इसको?
नहीं अभी उम्मीद है, कट्टर हुआ जाट युवा संगीत सोम के पास जायेगा, राणा के पास जायेगा, हुक्म सिंह गुर्जर के पास जायेगा, वो हैं ना सुनने वाले| मतलब अभी कह सकते हैं कि उम्मीद बाकी है|
अब मेरे भाई उनके पास जायेंगे और उनसे पूछेंगे कि बताओ हम लोग रालोद या कांग्रेस से अलग कैसे बचे? और फिर हुक्म सिंह, अपने चिरपरिचित अंदाज में कहेगा कि यह जाटों का मामला है, मरो-कटो, मुझे क्या? याद है ना जाट युवा आपको, कुछ ऐसा ही ब्यान उसने कब दिया था?
अब कोई जाट भाई कट्टर और कट्टरता की बात तो करना ही मत और अगर बीजेपी को सपोर्ट कर रहा है तो मुस्लिमों को भी सबक सिखाने की बात भी मत करना|
कोई अजीतूद्दीन कह रहा था, तो कोई जंतयुद्दीन, अब बताओ भाजपा को क्या कहूं भाजपाद्दीन, भाजपुद्दीन, भाजुद्दीन, तिलकुद्दीन, तराजूद्दीन या फिर मोदी+द्दीन = मुद्दीन या मुदीन?
देखा! अरे मेरे भोले और कट्टरता की आंधी में भटके जाट युवाओ, यह देख लो ये हैं आपके कट्टरता के गुरु| जैसे उबलता पानी धरातल छूते ही वापिस समतल हो जाता है, हो गए सारे समतल| अरे इनकी खुद की जड़ें नहीं, तो आपको क्या कट्टरता सिखाएंगे|
घर वापसी में देरी नहीं हुई है अभी भी और ना ही सुबह का भूला अगर शाम को घर आ जाए तो उसको भूला कहते|
पगड़ी संभाल जट्टा, दुश्मन पहचान जट्टा|
क्योंकि बीजेपी का 2014 घोषणापत्र कहता है कि "बीजेपी सत्ता में आते ही मदरसों का आधुनिकीकरण करवाएगी|’’
क्योंकि मैं एक जाट हूँ और मेरे बुजुर्ग जो जाट-मुस्लिम एकता की सांझी विरासत मुझे दे गए थे, उसको सम्भाले और बनाये रखने का पैरोकार भी हूँ, इसलिए मेरे लिए तो यह सुखद बात है कि बीजेपी सत्ता में आई तो मुस्लिम मदरसों का आधुनिकीकरण करवाएगी|
लेकिन क्या होगा उस अमित शाह के मुज़फ्फरनगर में दिए, "बदला लेने" के ब्यान का?
क्या होगा वसुंधरा राजे के "खून-खराबे" वाले ब्यान का?
तो क्या यह सब सिर्फ जाटों की भावनाओं से खेलने के षड्यंत्र थे| मैं तो पहले ही ना कहता था कि हाथी के दांत खाने के और, और दिखाने के और| शुक्र है इलेक्शन से पहले ही कट्टरता, कटुता, हिन्दू और हिंदुत्ववाद का ढोल फट गया| हाय रे क्या भाजपा यह भी भूल गई कि जाट तुझसे जुड़ा ही इस मुद्दे पर है; मतलब सत्ता आने से पहले ही तथाकथित धार्मिक उन्माद में कट्टर हुए जाटों की भावनाओं का खुला मजाक, क्या जाट युवा सहन करेगा इसको?
नहीं अभी उम्मीद है, कट्टर हुआ जाट युवा संगीत सोम के पास जायेगा, राणा के पास जायेगा, हुक्म सिंह गुर्जर के पास जायेगा, वो हैं ना सुनने वाले| मतलब अभी कह सकते हैं कि उम्मीद बाकी है|
अब मेरे भाई उनके पास जायेंगे और उनसे पूछेंगे कि बताओ हम लोग रालोद या कांग्रेस से अलग कैसे बचे? और फिर हुक्म सिंह, अपने चिरपरिचित अंदाज में कहेगा कि यह जाटों का मामला है, मरो-कटो, मुझे क्या? याद है ना जाट युवा आपको, कुछ ऐसा ही ब्यान उसने कब दिया था?
अब कोई जाट भाई कट्टर और कट्टरता की बात तो करना ही मत और अगर बीजेपी को सपोर्ट कर रहा है तो मुस्लिमों को भी सबक सिखाने की बात भी मत करना|
कोई अजीतूद्दीन कह रहा था, तो कोई जंतयुद्दीन, अब बताओ भाजपा को क्या कहूं भाजपाद्दीन, भाजपुद्दीन, भाजुद्दीन, तिलकुद्दीन, तराजूद्दीन या फिर मोदी+द्दीन = मुद्दीन या मुदीन?
देखा! अरे मेरे भोले और कट्टरता की आंधी में भटके जाट युवाओ, यह देख लो ये हैं आपके कट्टरता के गुरु| जैसे उबलता पानी धरातल छूते ही वापिस समतल हो जाता है, हो गए सारे समतल| अरे इनकी खुद की जड़ें नहीं, तो आपको क्या कट्टरता सिखाएंगे|
घर वापसी में देरी नहीं हुई है अभी भी और ना ही सुबह का भूला अगर शाम को घर आ जाए तो उसको भूला कहते|
पगड़ी संभाल जट्टा, दुश्मन पहचान जट्टा|