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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    "जमींदार" कढ़ लिया, तू पढ़ लिया, सबकै हत्थै चढ़ लिया। फेर भी क्यू मिटे जा सै, मन-ए मन क्यूँ घुटे जा सै। तन पै तेरे कमीज़ नहीं, बोवण नै असली बीज़ नहीं। बाबै का-सा डेरा लागै, घर मैं तेरे कोय चीज़ नहीं। तन भीज्या पसीने तैं तेरा, खेत मैं टैम-सर पाणी नहीं। बरसां तैं तू लूटता आया, जड़...
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    जमींदार *बड़े चाव त जिब बाबु हल बहाना सिखावे स बड़ा राज़ी हो क लोन प 'बड़ा ट्रेक्टर ' ल्याव स सारे गाम म खुश हो क ऐ परसाद बँटवावे स सोच्या जी तोड़ मेहनत करूँगा अर घणा ऐ 'कर्जा 'ठावे स अपणा पेट काट क पाल पेट देश का,या ख़ासीयत इस 'कार 'की ना जीण में ना मरण म ,बीच आली फाँसी हो स जमींदार की...
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    "चाल ताऊ रेल्ली में" ताऊ राम राम राम राम भाई राम राम ताऊ के हाल चाल सै मैं तो ठीक सु तू सुना तेरा के ख्याल सै चाल ताऊ तन्ने दिल्ली घुमा ल्याऊ दिल्ल में के सै मैं तो ना जाऊ ताऊ आज दिल्ली में रेल्ली सै ना भाई घरा तेरी ताई अकेली सै चाल्ले ने ताऊ ताई के किते भाज के जावेगी भाज गी तो...
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    सोनीपत की चतुराई , रोहतक की अंगडाई !!!
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    भगत सिंह शहर में लॉग रहया मेलॉ, लोगाँ का कट्ठा होरया रेला मैं अर छोरा दोनूँ मिलकै पहुँचगे उड़ै ले कै झोलॉ छोरा बोल्या, बाबू मिजी ल्यूँगा खावण ख़ातर चीजी ल्यूँगा खूब खाया, फेर ध्यान घुमाया एक आदमी गुड्डे बेचता पाया छोरे नैं सिपाही का गुड्डा ठाया दुकानदार भी था घणा हुमाया बोल्या, यू चाबी का...
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    म्हारे बचपन के दिन तडके तडक उठ्या करते.... जोहड पै घूमण जाया करते कुईं के पाणी मै नहाया करते उडै ए भाजम भाज रेस लाया करते नहर धोरै रेत मै लोटया करते फेर पुल पै तै ए नहर मै कूदया करते सरकारी सकूल मै जाया करते मास्टरां के नाम लकाडा करते सकूल का ओटडा कूद कै भाज जाया करते फेर बड के पेड पै खेलया...
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    बिग् बाजार छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था एक नाई, एक खाती ,एक काला लुहार था । छोटे घर थे ,हर आदमी बङा दिलदार था छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था । कितै रोटी खां लेतै ,हर घर मे भोजऩ तैयार था, छोटा सा गाम मेरा पुरा बिग् बाजार था । बिटोङे पे घिया तौरी हो जाती जिसके आगे शाही पनीर बेकार था...
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    Haryana Tasveero Mein (Part 1)

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    बनभौरी माता के मंदिर का नहीं होगा अधिग्रह&#233

    भाई साहब येहा आस्था, सरधा, विश्वास या मूर्ति पूजा की तो बाते नहीं ह ...मैन् बात तो या ह के सारे दूसरे समाज बाह्मण, बानिये, रेफुजी छोटी सी बात प कठे होके खडे हो जा ह और अपनी बात मनवा ले ह सरकार त .....बात रोजगार/ बिजंनस की स जब भी हम अपनी खेती न कुंनसा बचा ले ह... सरकार न बेरा ही ये एक होने...
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    Banned: Raka ?!

    हर व्यक्ति के अपने उसूल होते ह ! बीना उसूलों का आदमी नहीं होता ! सायद राकेश भाई साहब उर्फ (राका) के उसूल इस फॉर्म से मैच नहीं होए... जितना उनके विचारों से पता लगा वो अपने आप को हिंदू जाट नहीं मानते... & ( Please note that the site is focussed on Hindu Jats only at this time.) लागे रूस रे से...
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    बनभौरी माता के मंदिर का नहीं होगा अधिग्रह&#233

    बनभौरी माता के मंदिर का नहीं होगा अधिग्रह&#233 बनभौरी माता के मंदिर का नहीं होगा अधिग्रहण ! बनभौरी के इस मंदिर पर 2 -3 ब्राह्मण परिवारों का कब्ज़ा हैं , जिसका सारा चढ़ावा येही लोग इस्तेमाल करते हैं | जब इस मंदिर के अधिग्रहण की बात आई तो ब्राह्मणों ने देखा की सारा माल तो सरकारी खजाने में...
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    "रावण" ( जगबीर राठी ) उस दिन च्यारूं ओर, रौनक का पहरा था और सॉलाँ की ढाल, उस दिन भी दशहरा था लोग एक मैदान मैं कट्ठे हो, रावण नैं फूक आये नई-नई बोहड़िया चहकैं थीं, थे बालक भी हर्षाये सब कुछ उसा-ए था, कुछ भी ना नया था जलता हुआ रावण देखण, मैं भी तो गया था फूस जल्या, फेर रावण भी जलग्या गरीबणी के...
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    किसे और की कहाणी कोन्या किसे और की कहाणी कोन्या इसमैं राजा रानी कोन्या सै अपनी बात बिराणी कोन्या, थोड़ा दिल नै थाम लियो।। यारी घोड़े घास की भाई, नहीं चलै दुनिया कहती आई मैं बाऊं और बोऊं खेत मैं, बाळक रुळते मेरे रेत मैं भरतो मरती मेरी सेत मैं, अन्नदाता का मत नाम लियो।। जमकै लूटै सै मण्डी हमनै...
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    बड़े कसट ठा क आया सु बड़े कसट ठा क आया सु तेरे प्यार म म बाल कटा क आया सु तेरे प्यार म काल कह थी तू मैंने भूनडे मुहे का आज नहा क आया सु म तेरे प्यार म तू नुए कह थी तेरी अनखा न फोड दूंगी देख चश्मे ला क आया सु तेरे प्यार म तू नुए कह थी तेरी बूरसट न पाड दूंगी टी -सर्ट पहर क आया सु तेरे...
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    "जाड़ा आग्या" जाड़ा आग्या इब तो करामात होया करेगी दो कौफी में लम्बी मुलाक़ात होया करेगी स्वेटर जाकेट पहर के मैं भी मोटा दिखूंगा मेरी कमजोरी पर ना इब बात होया करेगी कितनी ए कॉफ़ी पी ले, वा सहेलियां कै संग ना बिल नै लेके कोए खड़ी खाट होया करेगी दिसम्बर जनवरी में जद भी बैठांगे पार्क में...
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    दशहरा दशहरे के मौके पै आओ उल्हाना उतार देवां अपने अपने मन का मिलके रावण मार देवां हम भरत लक्ष्मन सा तो राम की सेवा करां या फिर राम बनके छोट्या पै सब वार देवां दिलों दिमाग त नफरत का ख्याल काढ के अपने हर रिश्ते नै प्यार के बदले प्यार देवां इज्जतदार समाज हो सोच गर या लेरे सो छोरियां नै लेके आओ...
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    शादी की उम्र घटाओ ?

    राधा त नूये नाचे गी ...भाई तू आछी सकींम लाया अपना त गुंनद भी खा गया .....माहरा टेम प राधा न नाचन त नाट स.....!!! ज नुए बन लाओ सो त यो 1980 त लागु करवाओ....!!! महरी गयी तेल लेंनं ...भाईया किया न बालका सुधा उलटी करवावा गे
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    शादी की उम्र घटाओ ?

    सरासर गलत फैसला उल्टा बाल विवाह की तरफ कदम ....ये अपने बुडले भी धूमें के नशे म कुछे हो कह दे ह उधारण भी मुगला के देंन लाग लिये ये ... असल म त छोरी न होंन ना देते ...हो जा गलती त ..तो बेचारी न तावली त तावली विदाई देंन के चकर म रह स.... अपने घर त डीगाओ आगला आप संभाले गा !!! सतिंदर भाई आली बात स...
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    Shayri (Part 1)

    " रहबर से ज्यादा मुझे कुछ नही समझा उसने मैं जिसे अपनेपन में लाड़ो लाड़ो करता रहा "
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    माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

    "गुण बिन लाज, लाज बिन मतलब, बिन मतलब के प्यार नहीं" रस बिन इश्क, इश्क बिन आशिक, आशिक बिन संसार नहीं, गुण बिन लाज, लाज बिन मतलब, बिन मतलब के प्यार नहीं! धन बिन ध्यान, ध्यान बिन दाता, दाता बिन जग सुना है, सत बिन पुरुष, पुरुष बिन तिरया, तिरया बिन घर सुना है, रन बिन सुरे, सुरे बिन तेगा, तेगा बिन...
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