माहरा हरयाणा ( हरयाणवी कविताये, रचनाये,गीत 

म्हारी गजल ..


अपणी अकल
,बिराणा धन
लाग्गे ज्यादा
, दुखै मन

रिश्ते -नाते पैसा तोल्ले

संस्कार मं लगी अगन


पड्या सुबकता भाईचारा

शहर लूटज्ञा अपणापन


मर्यादा कै छुरा बिठाया

बाप नीच नै हो कै टुन्न


सुण कै इब करतूत कसूती

होता नहीं कालजा सुन्न


तन्नै तेरी
, मन्नै मेरी
अपणी मस्ती
, अपणी धुन

अर्थ और क्यूँ काढ़े भाई

जितना बोलूं
, उतना सुन
 
म्हारी गजल ..


अपणी अकल
,बिराणा धन
लाग्गे ज्यादा
, दुखै मन

रिश्ते -नाते पैसा तोल्ले

संस्कार मं लगी अगन


पड्या सुबकता भाईचारा

शहर लूटज्ञा अपणापन


मर्यादा कै छुरा बिठाया

बाप नीच नै हो कै टुन्न


सुण कै इब करतूत कसूती

होता नहीं कालजा सुन्न


तन्नै तेरी
, मन्नै मेरी
अपणी मस्ती
, अपणी धुन

अर्थ और क्यूँ काढ़े भाई

जितना बोलूं
, उतना सुन


मस्त स ,जबरदस्त स |
 
पानी का ओसरा |

बन्धे ऊपर नागन काळी डटगी फण नै ठाकै .... टेक
सिर तै उपर कस्सी ठाई मारी हांगा लाकै।।
​

नागण थी जहरीली वा फौजी का वार बचागी
दे फुफकारा खड़ी हुई आंख्यां मैं अन्धेर मचागी​
दो मिनट मैं खेल रचागी चोट कसूती खाकै।।



हिम्मत कोन्या हारया फौजी हटकै उसनै वार किया
कुचल दिया फण लाठी गेल्यां नाका अपणा त्यार किया
चला अपणा वार लिया काळी नागन दूर बगाकै।।


रात अन्धेरी गादड़ बोलैं जाड्डा पड़ै कसाई
सुर सुर करता पानी चालै घणी खुमारी छाई
डोळे ऊपर कड़ लाई वो सोग्या मुंह नै बाकै।।



बिल के मां पानी चूग्या सूकी रैहगी क्यारी
बाबू का सांटा दिख्या या तबीयत होगी खारी
मेहरसिंह जिसा लिखारी रोया मां धोरे जाकै।।​
 
रामफल एक फौजी

सारे गाम में रुक्का पड़ग्या के रामफल आवेगा

बेरा ना रामफल इबके के ल्यावेगा

रामफल एक फौजी था

बड़ा ए मनमोजी था

माँ बाप का सहारा था

छोटे बहन भाई ने जी ते प्यारा था

खैर एक फौजी गाड़ी आके गाम में रुकगी

जिसने देख के सबकी आँख झुक गी

गाडी महा ते एक संदूक तरया

जिसके उप्पर झुक्ग्या गाम सारा

गाडी का दरवाजा हवा गैला डोले था

सबकी आँख नम थी पर कोई नहीं बोले था

संदूक में तिरंगे के महा एक जवान लूटा राख्या था

अरे
वो तो ताऊ भरतु का सपना सुआ राख्या था
यो तो वो
हे रामफल से जो सबका याड़ी था
हसी
खुसी ते रहया करे था कबड्डी का खिलाडी था
माँ की आख्या का तारा था

और बाप के बुढ़ापे का सहारा था

छोटी बहन जी ते प्यारी थी

दो महीने पाछे ब्हया की तयारी थी

भाई ने कॉलेज की पढाई पूरी करनी थी

एब्की छुटिया में उसकी भी फीस भरनी थी

छत की मरम्मत करानी थी

घर में सफेदी भी करानी थी

खेत में बोरिंग
करवाना था
और पलाट में डंडा भी
खिचवाना था
पर तू तो सारे काम अधूरे छोद्ग्या

अर साऱ्या ते मुह मोड्ग्या

छोटे भाई का रो रो के बुरा हाल होरया था

रामफल की बहन का मुह लाल होरया था

रामफल की माँ अपना सयम खोगी

साथ आये फोजिया के सर होगी

थम बेकसूर लोगा पे गोली चलाओ सो

जमीन के टुकड़े की खातिर कितना खून बहाओ सो

थारी बन्दूक ते जब गोली चाल्ले से

थमने ना बेरा वा कितने घा घाल्ले से

थारे खातर छोटी सी बात होजा से

किसे का पूत किसे का भाई किसे का सुहाग खोजा से

रामफल के बाबू ने उसकी छाती टटोली

और गोज महा ते उसकी आखरी चिठ्ठी खोली

उसमे लिखा था

माँ तेरे ते बुझे बिना एक काम कर रहया सु

तेरी कोख ते जनम लिया और भारत माँ पे मर रहया सु

तेरे दूध का नाम उच्चा कर रहा सु

दो चार ने मार के मर रहा सु

मेरे बाबु ते कह दिए वो कती नहीं रोवेगा

अर मेरे छोटे भाइया में भी
देशभक्ति के बीज बोवेगा
बस इब्ब मेरी सास टूटन ने होरी से

और कलम भी हाथ ते छुटन ने होरी से

बस एक आखरी इच्छा पूरी करवइयो

मेरी अंतिम यात्रा पे राम नाम की जगह भारत माता के नारे लग्वाइयो



जिस भी लेखक न लिखी ह ये लाइन भौत खूब, कोई भी भावुंक हो सकता ह, मेरा पूरा परिवार भारतीये फौज से जुडा हुआ ह येहा ये पोस्ट करते हुआ गर्व महसूस हुआ

 
जगत में बहुत दुखी जमींदार |

धन जोड़ रहे मुख मोड़ रहे या मौज उडावे संसार,
जगत में बोहत दुखी ज़मींदार...

आधी रात पहर का तड़का देक्खे बाहर लिकड़ कै नै,
ढाई गज का पाट्या खंडवा ऊपर गोस्सा धर कै नै,
एक बाज्जू का कुड़ता पहरया ऊंची धोत्ती कर कै नै,
करे चलन की तियारी खेत में दोन्नु बैल पकड़ कै नै,,

ऊपर धुप पडे निच्चे धरती त्प्पे ..
अर यो बीच में तपै ज़मींदार जगत में बोहत दुखी ज़मींदार...

दोहफारे की रोट्टी ले कै ज़मिदारनी आई ,
गंठा-रोट्टी ल्याई खेत में वा साग बनावन ना पाई,
अर ज़मींदार नै आपणे करम मैं वें ऐ सोचय कै खायी..

तारयाँ की छांह हाली आया ना नहाया ना खाया,
थोडी सी वार में जगा दिया वो सोवण बी ना पाया,
ठा कै कस्सी चाल्या खेत मैं नाक्का-बंधा लाया,
एक नाक्के मैं आप डेह पडया मरता हुआ जडाया,,

यें सरकारी- यें पटवारी सब सोवें पैर पसार जगत मैं बोहत दुखी ज़मींदार...

करी लामणी पैर गेर लिया जेट्ठ-साढ़ के म्हीने मैं,
ज़मींदार का सारा कुणबा हो रहया दुखी पसीने मैं,
आंधी अर तूफ़ान आग्या बह्ग्यी रास्य जोहड़ के मेंह..

चार धडी भुरली के दाणे इईब रहे से बाक्की,
लुहार बी न्यू कहां लाग गया जडी थी मन्नें दरांत्ति,
ग्गाड्डी ऊंघी जुआ बनाया कहन लाग्गया खात्ती,
चुहडी अर चमारी दोन्नु पैर लेवन नै आई सें,

इब भुरली के दाणे चुगरदे नै जाने यें भी लेग्ये खात्ती-लुहार..
जगत मैं बोहत तै घणा दुखी ज़मींदार...

लेखक का ना बेरा !!!
 
पुलिसिया रोहतास - कवि जगबीर राठी |

आपणा सै वो ढ़ब्बी ख़ास
सारै कहैं उसने पुलिसिया रोहतास़

ड्यूटी का कतई ख़रा सै माणस
न्यू समझो ‘कैप्टन कुक’ का आटा सै, कतई ना छाणस

शहर मैं रोज़ गश्त लगावै सै
कई ढाल़ की ड्यूटी निभावै सै

एक दिन उसनै कानून अपनै ढंग तै मोड़ दिया
हाथ मैं आया-ऊया एक जेबकतरा छोड़ दिया

मैं भी धोरै खड़ा था, मैं बोल्या, क्यूँ रै
छोड़ दिया तन्नै यू दुष्ट न्यू रै

वो बोल्या, रै इसकी तो सारी माफ़ सै
रै बाबल़ी बूचः समझा कर, स्टाफ सै

मैं बोल्या, भाई इस लिखा-पढ़ी तैं मेरा पांडा छुड़ाइयो
इसकै जेबकतराँ की पोस्ट लिकड़ै तै, मन्नै भी बताइयो

उसकी इस हरकत पै एस.पी. सॅाब छो मैं आये
तुरन्त उसको ट्रैफिक ड्यूटी के आर्डर भिजवाये

चैराहे पै बहोत कसूता घाम था
तलै सड़क अर ऊपर राम था

सड़क पै एक बुढ़िया भ़ाजी आवै थी
मोटर-गाड़ियाँ न देख, वा बांगी-बांगी जावै थी

रोहतास नै सोच्या, बुढ़िया मरैगीं, बुढ़ै बारै, किसनै सिर करैगी
उसनै अपनी ड्यूटी निभाई, बड़े ज़ोर तैं सीटी बजाई

पर बुढ़िया के तो समझ ना आवै
सुणै एक ना, चाली जावै

सैड़ दे सी बुढ़िया के धोरै जाकै
बुढ़िया नै बोल्या वो धमका कै

न्यू बोल्या के करै थी रो बॅावली ताई
एक सुणी ना, मन्नै इतणी सीटी बजाई

बुढ़िया पहल्यां तो थोड़ी-सी खांसी
अर फेर बड़ी ज़ोर से हांसी

न्यू बोल्यी, इब के कसर रह रही सै
मेरी के सीटी सुणन की उमर रह री सै

बुढ़िया रोहतास की आब-सी तारगी
अर जांदी-जांदी उसनै पुचकारगी

एक दिन की और बात सुणाऊँ
गज़ब कर दिया, यार आगै के बताऊँ

वो खड़ा चैराहे पै, आ गी एक छोरी
सुथरी शान की अर रंग की गौरी

आ कै बोल्यी, मेरी हैल्प कराओ
कुछ गुण्डे मेरे पीछे पड़े सैं, पाण्डा छुटवाओ

रोहतास बोल्या, दिल खोल्या

बड़ी मुश्किल में हूँ वरना ना यू दिल को भींचे होता
शुक्र सै डयूटी पे हूँ ना तो मैं भी तेरे पीछे होता

मैं बोल्या, तू के कहै सै
पुलिस आला हो कै भावना मैं बवै सै
रोहतास बोल्या सिरीयस हो कै
देख मेरी जगहाँ खड़या हो कै

रै के होग्या, जै हाम लॅा एण्ड आर्डर के आँख-कान साँ
रै हाम भी तो धरती पै आये, हाम भी तो इन्सान साँ

पर तू सोच़, नहर मैं सड़ती लाष नै हामैं तो खींच के ल्यावैं सां
पौ की अंधेरी रात मैं जाग कै, थामनै हामैं तो सुलावें सां

भाई, मेरै पाप कोन्या लाग़ै
अर धर्म मेरे तैं कोन्या भाज़ै

लावारिस मुरदयां नै पुराणे टायरां तैं, मैं-ए जाक़ै जलाया करूँ
आपणा तो योए तीर्थ सै, न्यू-ए धर्म कमाया करूँ

तूं तो न्यूं-ऐ बेकार में र्याड़ जगावै सै
तूं ए बता, पुलिस आलयां नै, कोए ब्याह-शादियाँ मैं बुलावै सै

मैं बोल्या, ठीक सै भाई, इबके तेरा बर्थ-डे मनाऊँगा
अर गिफ्ट मैं तेरे खातर सतपुतर ल्याऊँगा

न्यू बोल्या, ले आइये पर थाणे मैं ना पाइये
जै आग्या थाणे मैं, जी नै हो ज्यागा झांगल

उन्नै सतपुतरां तैं तेरा पाछा पीटांगे
सारे बिछा के कांबल

ले आइये गैल्या थोड़ी हल्दी अर घी
जब पिटण लागे तो
जोर तैं गाइये
हैप्पी बर्ड-डे टू मी, हैप्पी बर्थ-डे टू मी।
 
ज़ज्बात खाग्या...


दिल के मामले में मात खाग्या

हमने तो म्हारा ज़ज्बात खाग्या


गाम नै तो
बख्श दिया था हक
पर रिश्तेदार हाथों हाथ खाग्या


इतणा चालाक लिकडया
महबूब
मिलते ही काम की बात खाग्या


उसते बड़ा कपूत कौण होवेगा

जो
बेटा बाप की खुबात खाग्या

हद की भी हद होवे सै देखो

कुकर वो अपणी औकात
खाग्या
 
हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे


आपणे सुख दुखां नै नुए कटठे होके बांटागे
हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे

हरि का आडे आणा भाई नाम धरा हरियाणा
उसे टेम तै आज तई सै दूध दही का खाणा
.चूरमा टिंडी खा-खा कै नुए आंगली चांटागे
हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे

तीज त्योहार हाम सारे मिल के मनावां सां
हर टेम म्हारी संस्करिति नै आगै लावां सां
... बस हरियाणवी हो बात नुए देशी रंग छाटांगे
हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे

खेल कूद और पढाई म्हं सारे आगै जारै सां
कद बण हरियाणवी भाषा जोर घणा लारै सां
सारै जणे मिलके आपणे सुख दुख साटांगे
हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे

हरियाणा आलां की बात होव लोह लाट सै
संदीप कंवल भुरटाणे आला कररया ठाठ सै
ठाठ बाट तै सारी उम्र ऐश तै काटांगे
आपणे सुख दुखां नै नुए कटठे होके बांटागे
हाम हरियाणा आले तो नुए काच्चै कांटागे
 
बहुत खराब करे...

गाल्या में छोरा अल्बादी ,
पाकिस्तान के उग्रवादी ,
घर में रोज बियादी बहुत खराब करे ....

बगड में चुगलखोर ,
पतंग की टूटोड़ी डोर ,
रात ने गलिया में चोर बहुत खराब करे......

आधे कपडे पहरोडी छोरी ,
सांड की टूटोड़ी मोरी ,
टाबरा ने ओरी बहुत खराब करे .....

घर में जम जमाई ,
नाते आवडी लुगाई ,
मियाद टपोडी दवाई बहुत खराब करे .....

कैंसर की बीमारी ,
रुपिया सागे यारी ,
अर खड़ी करोड़ी भुवारी बहुत खराब करे ....

म्यान ते लिकडोडी तलवार ,
यार होवे गदार ,
बिरानी नार बहुत खराब करे .....

धंदे में ब्लैक ,
नशे में समेक ,
माडे ने हर एक बहुत खराब करे
 
साजन के घर जाना से माँ .....तू मेरी तश्ली करदे..

साजन के घर जाना से माँ तू मेरी तश्ली करदे....
जो कुछ लेना देना से बांध जुड़ क धरदे |

बडें घरा का रासहा री माँ होवेसे बडा भार्या,
9 खेसी कर छोटी बडी तू खेश मंगा दे 12,
25 तिल्ल्ल मेरी करदे आग्लिया की 18,
अगड पडोसन देखण आवे रंग लगे गा न्यारा,
थम ने ते दिया घी बेटी ते थम ने बी हर दे...
जो कुछ लेना देना से बांध जुड़ क धरदे |

साजन के घर जाना से माँ तू मेरी तश्ली करदे....
जो कुछ लेना देना से बांध जुड़ क धरदे |

बढ़िया बिंदेर्वाल मंगा माँ साल्ल चुबारा खातेर,
पीठ नारियल मेरे बांध दे जेठ कुवारा खातेर,
कंगा सीसा रुमाल तोलिये देवेर प्यारा खातेर,
आबल खांड कसार बांध दे पति के यारा खातेर,
उश खाती के ने कह दिए मेरा चरखा पीढा घड़ दे ..
जो कुछ लेना देना से बांध जुड़ क धरदे ||

साजन के घर जाना से माँ तू मेरी तश्ली करदे....
जो कुछ लेना देना से बांध जुड़ क धरदे |

एक सो का मैं पत्ता दू मेरा न्यारा सूट सीमाइये,
दरजी के न कह के तू जाली भी लगवाइये,
सखी सहेली नु देखन आवे तू सारी चीज़ दिखाइये,
सारी मन में राजी होज्या तू हँस हँस क बतलाइये,
तेली के ने कहदिये री मेरा सोड सोडिया भर दे....
जो कुछ लेना देना से बांध जुड़ क धरदे |||

साजन के घर जाना से माँ तू मेरी तश्ली करदे....
जो कुछ लेना देना से बांध जुड़ क धरदे |

5-7 दिन सासरे में नु अ डरना हो से,
जाडे में जा बठ तसल्ली गर्मी में मरना हो से,
ननद जिठाणी आग चालमा पाणी भरना हो से,
ऐडी दार बूट मंगा माँ जाड़े में ठरना हो से,
मांगे राम भाई ने घाल दिए तू फागन के उतर दे.....
जो कुछ लेना देना से बांध जुड़ क धरदे ||||

साजन के घर जाना से माँ तू मेरी तश्ली करदे....
जो कुछ लेना देना से बांध जुड़ क धरदे |
 
आजकल के नेता

विदेशियाँ की के बात करां अपने ही बेएतबार हो रे सै
आजकल के नेता तो जमा बहन के यार हो रे सै

सोने की चिड़िया कुहाया करता
पर इनती तो खजाने साफ़ कर दिए
तुर्क मुग़ल के बताउं भाइयो
इनती तो अंग्रेज भी माफ़ कर दिए
हरे भरे इस देश में ये खरपतवार होरे सै

आजकल के नेता तो जमा बहन के यार होरे सै

इलेक्शन ते पहलां तो ये म्हारे महल बनवा दे
पाछे ते ये म्हारी झोपडी भी गिरवा दे
नौकरी के लारे पे हम वोट दे देवे
और बना के सरकार ये नज़ारे ले लेवे
हरिश्चंद्र के देश में ये झूठ की सरकार होरे सै

आजकल के नेता तो जमा बहन के यार होरे सै

यार दोस्त भाई बहन इनका कोई रिश्तेदार कोनी
भैंसा की शुं मने तो इनपे जमा ही एतबार कोनी
चढ़े तवे पे सब अपनी रोटी सेखें सै
और हमने कोई न पूछे सब अपने प्यारे देखें सै
चोफेरे ते काट खाया देश "चैहल" जमा चार मुहे औज़ार होरे सै

आजकल के नेता तो जमा बहन के यार होरे सै


(नरपाल सिंह चैहल)

बड़े भाइयो और चाचे - ताउओं ते अनुरोध है जे कोई अक्षर अनुचित लागे तो माफ़ कर दियो और बेशक Delete कर दियो.
​
 
Last edited:
भूल क्यूकर जाऊं तेंने


भूल क्यूकर जाऊं तेंने
तेने अपनी बनाना चाहू सु

अपनी बना के तेंने,
"गोबर पथवाना" चाहू सु!

गोबर पाथती तू गजब लागेगी,
तेरी लुगडी सर तें उतर के भाजेगी

तेरा दामण हिलोरे खावेगा,
कई बे गोबर में सना पावेगा

भैंसा की धार तू काढेगी
दूध ताता कर सब ने बांटेगी

सब के जूठे बर्तन तू धोवेगी
रात ने सब तें पाछे तू सोवेगी

तड़के उठ चाकी तू चलावेगी
पीस क चून रोटी तू बनावेगी

दोफारी में ले तासला, ले जा रोटी हाली की
काटे "भरोटा" जुवार का, माने कती न 'काली' सी

सांझी नलका पर ते पानी ल्यावे
तेरे दोघड सर पे चाहू सु..


भूल क्यूकर जाऊं तेंने
तेने अपनी बनाना चाहू सु
 
Last edited:
इन्सानी कुत्ते"


कोर्ट में एक कसूता मुकदमा आया
एक सिपाही एक कुत्ते नै बांधैं ल्याया
सिपाही नै जब कटघरे में आ कै कुत्ता खोल्या
कुत्ता रहग्या चुपचाप, मुँह-तैं कुछ ना बोल्या
नुकिले दाँदां में कुछ खून-सा नज़र आवै था
चुपचाप था कुत्ता, किसे तैं ना नजर मिलावै था
होया खड़या एक वकील
... देण लाग्या दलील
बोल्या, यू ज़ालिम कसूता सै
जज सॉब यू कुत्ता सै
इसनै जो करणी कमाई सै
देख कै इन्सानियत घबराई सै
क्रुर सै, निर्दयी सै, इसनै घणी तबाही मचाई सै
दो दिन पहल्या जन्मी एक छोरी, आपणे दाँदां तैं खाई सै
इब कतई ना देखो बाट
उतारो इसनै मौत के घाट
जज की आँख होगी लाल
तन्नैं क्यूँ खाई कन्या इसे ढाल
हुक्म सै इनै जिन्दा रहण ना दयो
कुत्ते का वकील बोल्या, इसन कुछ कहण तो दयो
फेर कुत्ते न मुँह खोल्या
सहज दे-सी वो बोल्या
हाँ, मन्नै वा कन्या खाई सै
अपणी कुत्तानियत निभाई सै
कुत्ते का धर्म सै ना दया दिखाणा
माँस चाहे किसा-ए हो, ओ-ए खा जाणा
पर मैं दया-धर्म तैं दूर नही
खाई तो सै, पर मेरा कसूर नही
मन्नै बेरा सै, जब वा छोरी गई बगाई थी
और कोय नही, उसकी माँ वाएं फैंकण आई थी
जब मैं उस कन्या के गया पास
उसकी आँख्यां मैं देख्या भोला विश्वास
जब वा मेरी जीभ देख कै मुस्काई थी
कुत्ता सूँ, पर उसनै मेरे अन्दर इन्सानियत जगाई थी
मन्नै सूंघ कै नै पैड, वो घर टोया था
जित माँ उसकी थी, अर बाबू भी सोया था
मन्नै कू-कू करकै वा माँ जगाई
पूछा तन्नै, कन्या क्यों बगाई
चॉल, मेरी गैल, उसनै लै कै आ
भूखी सै वा, उसनै अपणा दूध पिला
माँ सणते ही रोण लागगी
आपने दुखड़े धोण लागगी
बोली, कोन्या लाऊँ अपणै कॉलजे के टुकड़े नै
क्यूँ कर खोल बताऊँ अपने दिल के दुखड़ै नै
मेरे धोरै पहल्याँ ही चार छोरी सैं
दो नै बुखार सै, अर दो चटाई पै सो री सैं
मेरी सासू मारै सै तान्यां की मार
मन्नै पीटण आया मेरा भरतार
बोल्या, फेर छोरी ले आई
क्यूं कर ज़ांगी ये सारी ब्याही
वंश की तन्नै काट दी बेल
जा खत्म कर दे इसका खेल
माँ सूँ, पर थी मेरी लाचारी
ज्यातैं फैंक आई, छोरी प्यारी
कुत्ते का गॅला भरग्या
पर ब्यान वो पूरे करग्या
बोल्या, मैं फेर उल्टा आग्या
दिमाग पै मेरे धूम्मां छाग्या
वा छोरी गुट्ठा चूमण लाग री
हाँसी न्यू जाणे मेरी बाट में जाग री
कॉलजै पै धर लिया मन्नै पात्थर
थर-थर काँपयां मेरा ज़ॉथर
बोल्या, ऐ बोअली, जी कै, के करैगी
दूध नही, जहर सै, पी कै, के करैगी
हाम कुत्तां नै करे सै बदनाम
म्हारै तैं घिणौने करैं सैं काम
कदे ज़िन्दी अरक दे पेट मैं मरवावै सैं
अर आपणै आप नैं इन्सान बतावै सैं
मेरे गात मैं भय करगी उसकी मुस्कान
मन्नै इतणा तो लिया था ज़ॉण
जो समाज इसतैं नफरत करै सै
कन्या हत्या-सी गन्दी हरकत करै सै
उड़े तैं इसका जाणा आच्छा
इसका तो मर जाणा आच्छा
थाम लटकाओ मन्नै फांसी, चाहे मारो जूत्ते
पर टोह कै ल्याओ पहल्याँ वे इन्सानी कुत्ते
पर टोह कै ल्याओ पहल्याँ वे इन्सानी कुत्ते..."
 
बहू का टौटा

एक दिन सारे मै जॊहड नहाण लाग रहै थै
बाबु आगया जब गौता लाण लाग रहै थै
या बहु किसकी कह ईट बगाण लाग रहै थै
बाबु हम तॊ भैस ना नहवाण लाग रहै थै
मनै दैख लिए बहु न बगाण लाग रहै थै
बगाण न बहु कौना रहरी गाम मै
ताऊ तेरा लैवण गया आसाम मै
मँहगा सौदा होरया, छोरया न बयाहण का
भुगत रहा जमाना , छॊरी कॊख मे मरवाण का

तिलकराज पुनियाँ
गांव-गिरावड (झजजर) 124103​
 
हरियाणा का वीर भुमि फौजी वीरौ ने कायम राखया सै
 
"यु किसान कितना करडा हो सै"

ऊंखल तै मूसल का मेल तगड़ा हो सै,
काबू साचा अर झूठा यो झगड़ा हो सै,
भाई गंडा पड़दे हो ज्यो खेत तै बाहर,
नीतो खामखा का उड़ फेर पचड़ा हो सै,

... जो खुद उठ के पाणी भी ना पी सके,
वो दोनूं टांगा आला भी लंगड़ा हो सै,
दुपहरी मैं जिसने गेंहू के गैरे लगाए हों,
वोये जानै यूं किसान कितना करड़ा हो सै,

पौ मैं पाणी लाणा कोए आसान काम नि,
करके देखियो हाड फोड़ यूं खसरा हो सै,
भाई-चारे की बात नूये सुलट ज्या तै ठीक,
नातो कोर्ट-कचहरी मैं घनाये रगड़ा हो सै....
 
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