aapka sahar uski khaas baate

जोहड़ में सिर्फ डूबकी मारनी थी .... नाक कान मुह भींच के ..... भाई मुह में जोहड़ का पानी ले के "....हा....बुर्रर्र्र...." करके पिचकारी कोणी मारनी थी.....जो तेंने मारी ..... हा हा हा हा हा हा परहेज नहीं राखे भाई तेंने देसी इलाज के..... ज्या मारी रोल्ला होया यो ......

सांपले ते पहलम एक रोड पाटे से "छारा" गाम कैड | उड़े एक जोहड़ से जिसके बारे में या धारणा से अक इस जोहड़ में नहाए ते पीलिया ठीक हो जागा | मन्ने तो या बात झूठी लागी | मेरा तो बिगड़ और गया था पीलिया इस जोहड़ में डुबकी मारे पाछे| मुस्सां-सी ठीक होया फेर |
 
रविंदर जी , बात तो अपने सही कही ..... पर इब सब कुछ बदल गया खरखोदे में ........ बस अड्डा भी नया बन गया ......... चारो तरफ ते बाय पास काढ दिया ............. सिनेमा हाल बंद हो गया



इस दहिया की राजधानी की घनी चीज़ मशहुर से ......
घेवर, बर्फी, रसगुले, होके का तम्बाकू, हाथ के बने होड़ शाल, बेर, अमरुद , आम , ताज़ी सब्जी जो सारी की सारी आजादपुर मंडी में जावे से ........ आढती बाट देख्या करे याडे के tampu की | ७०% लोग delhi लिकड़ जया से तडके तड़क, सब ने भैयन रख रखे से खेत आर भेंसा का काम कारन ने .......... १०-१५ roadways जा से डेली सुबह सुबह ........... लोग घने अडवांस होन लग गे delhi और गुडगाँव आन के ने | घनी गाड़ी होन लग गयी गाम्मा में ......... सब की जमीन aquire होन लग गी, किते KMP बने से ते किते फेक्टरिया ताई | हाँ रोड जमा कसुते हो रे से .......... पर साधन नहीं से | खरखोदे की एक और खासियत से की सारे शहर नजदीक - २ से , बवाना (18KM ), सोनीपत (17KM ), नरेला (17 KM ), बहादुरगढ़ (28km ), रोहतक (31KM ) , दिल्ली - बस अड्डा (32KM ) | याडे नहर भी घनी से | पानी की मोज से | खेती भी बढ़िया हूँ से कुछ भी बो ल्यो | दहिया खाप की गौ शाला (सिसाना) सबते बड़ी गौ शाला से हरयाने में , सबते अमीर अर सबते घनी गौ से इसमें |




खरखोदा--- स ते यु छोट्टा सा कस्बा अर,चाहे गाम कह ल्यो पर रोहतक तें सोनीपत जांदी हाण पड़े स अर इह की खासियत या रही स आजादी तें-ए पहलम तें , अक खेती के राछ बड़े बढ़िया बन्या करदे आड़े | दुसरे लुहार भी खरखोदे के बणे होड़ कह के ने बच्या करदे ,मेरे मौसेरे भाई मनीष दहिया की दादालाही फेक्ट्री स आड़े जो थ्रेशर अर कम्बाइन बना के ने सारे हरयाणा,पंजाब ,दिली अर यु.पि. में सप्लाई कर्या करे | यु एक तरहां का जंक्शन स | खरखोदे तें चारुं ओड़ के गामां में सड़क जावें सें | आड़े की मुंगफली बड़ी करारी अर सुवाद होवें सें अर रेवड़ी भी बढ़िया बनाया करें | आड़े एक टूट्या सा सलीमा भी स | अर एक बस अड्डा भी स नाम मात्र का कदे-कदे बस आया करें इह पे ,ना ते सूर हान्डें जाया करें लीद करदे | या एक त्राहं की दहिया खाप की राजधानी स | खरखोदे के चारुं ओड़ ने २०-२५ की.मी. ताहीं निरे दहियां के गम सें | अमरुद भी भोत बढ़िया सुवाद होया करें खरखोदे के लव धोरे के | ----सद- भावनाओं सहित |
 
जोहड़ में सिर्फ डूबकी मारनी थी .... नाक कान मुह भींच के ..... भाई मुह में जोहड़ का पानी ले के "....हा....बुर्रर्र्र...." करके पिचकारी कोणी मारनी थी.....जो तेंने मारी ..... हा हा हा हा हा हा परहेज नहीं राखे भाई तेंने देसी इलाज के..... ज्या मारी रोल्ला होया यो ......

हम्बे, गरारे करू था मै ऊह बांसले पानी में ! :mad:
कीमे तो बीमार था ऐ, कीमे उड़े जा के और हो गया ऊह पानी में डुबकी मार के | कोरी बकवास सै अक छारा के जोहड़ में जड़ी-बूटी आला पानी सै| निरी कीकर खड़ी सै चुगरदे के जोहड़ के | मखा या ऐ जड़ी-बूटी सै के जोहड़ की ! हा हा हा... आर लोग मंड रहे पानी के पीपे भरण अक जणू ते गंगाजल सै |:boxing:
 
gurgaon me eb te nirre hotel er restaurant khool gayye.par aaj te 16 saal pahle jab me bahay ke udde gayi thi to 32nd mile stone karke ej jagah hai udde do teen trah ke restaurant hai ek discotheque paan shop baccho ke liye racing track hai.nicely maintained place for a fun outing.
 
nangal devat-yo mere sasuradiya ka gaam tha. iske kheta me centoor hotel tha(shyad eb bhi hai).ebb to poora gaanv hi saaf kar diya airport aala ne acquire kar liya.
 
Ramkisan Halwai te fail ho liya thaa, uske baad te Gaylord naam te koi angrezi halwai kee dukan khuul gayi thee,, neeri bheed rehya karti uspe bhee..... ek anaj mandi kee aud Haryana misthan bhandar aale kee paneer kee jalebi bhee badi famous thee.....
No that was not Ramlal halwai, It was Ramkishan Halwai... :-)
 
bhaisahb abb te bera konni, naa te pehle sonipat te kharkhoda yaa rohtak jaate tame, rohat gaam te likadte hee sadak ghani maadi hui karti.....
रविंदर जी , बात तो अपने सही कही ..... पर इब सब कुछ बदल गया खरखोदे में ........ बस अड्डा भी नया बन गया ......... चारो तरफ ते बाय पास काढ दिया ............. सिनेमा हाल बंद हो गया



इस दहिया की राजधानी की घनी चीज़ मशहुर से ......
घेवर, बर्फी, रसगुले, होके का तम्बाकू, हाथ के बने होड़ शाल, बेर, अमरुद , आम , ताज़ी सब्जी जो सारी की सारी आजादपुर मंडी में जावे से ........ आढती बाट देख्या करे याडे के tampu की | ७०% लोग delhi लिकड़ जया से तडके तड़क, सब ने भैयन रख रखे से खेत आर भेंसा का काम कारन ने .......... १०-१५ roadways जा से डेली सुबह सुबह ........... लोग घने अडवांस होन लग गे delhi और गुडगाँव आन के ने | घनी गाड़ी होन लग गयी गाम्मा में ......... सब की जमीन aquire होन लग गी, किते KMP बने से ते किते फेक्टरिया ताई | हाँ रोड जमा कसुते हो रे से .......... पर साधन नहीं से | खरखोदे की एक और खासियत से की सारे शहर नजदीक - २ से , बवाना (18KM ), सोनीपत (17KM ), नरेला (17 KM ), बहादुरगढ़ (28km ), रोहतक (31KM ) , दिल्ली - बस अड्डा (32KM ) | याडे नहर भी घनी से | पानी की मोज से | खेती भी बढ़िया हूँ से कुछ भी बो ल्यो | दहिया खाप की गौ शाला (सिसाना) सबते बड़ी गौ शाला से हरयाने में , सबते अमीर अर सबते घनी गौ से इसमें |
 
bhaisahb abb te bera konni, naa te pehle sonipat te kharkhoda yaa rohtak jaate tame, rohat gaam te likadte hee sadak ghani maadi hui karti.....

Bhai jab Saedpur ar ore-dhore ke gaama ki jameen acquire hoyi thi, ooh din paache kharkhode ke din phir ge. Eeb to pichaan me bhi naa aata ak yu wo e kharkhoda sae!
 
Ramkisan Halwai te fail ho liya thaa, uske baad te Gaylord naam te koi angrezi halwai kee dukan khuul gayi thee,, neeri bheed rehya karti uspe bhee..... ek anaj mandi kee aud Haryana misthan bhandar aale kee paneer kee jalebi bhee badi famous thee.....

Yesss!! I know that... Hum ussi Gylords ko Haldiraam Kahte hai... Ussi k golgappe famous hai aajkal...
Ramkishan halwai k Samose me ek baar mari hui makhi milli thi, tab se hamne wahan ki Mithai laani band karke, Amartsari ki laani shuru kar di thi when 7-8 Saal pahle...
this shop is at the corner of kache quater...
 
कलानौर ---- इस लड़ाई पाछे म्हारे गाम की सेना भोत मशहूर होई थी अर दूर-दूर ताहीं मुस्किल के बखत सहायता खातर बुलाई जाया करदी | जित रात ने या सेना रुकी थी अर हमले की पलानिंग करी थी ,वा थां उह लुगाई के पीहर आल्याँ ताहीं इनाम सवरूप दे दी गई | आज उड़े एक छोटा सा गाम बस रया स जिह ने "गढ़ टेकणा " कहया करें |

मरे बेटे ये रोहतक आल्ले भी माड़े उत् नहीं स ...... आपणे गाम की बोर त मार गया डाकि ......न्यू और बता जाता के उस सेना का सेनापति एक सांगवान था जिसका नाम था चौ. ढीलैत :)
इस गढ़ टेकना में भी सांगवान बसे स | चरखी गाँव त आड़े आके बस गए थे |
इस कलानौर गाँव में जो भी जाट स वे पाछे आके बसे स , पहले यो रांगड़ा का गाँव होता था | इब इस गाँव में रिफ्यूजी आर ढेढवा गणी स | सुन्या स के पूजा भट का घर आल्ला रिफ्यूजी मनीष नाम स के स ध्यान कोणी इसे गाँव का स |
 
janab kayi dinna me dikkhe.ke baat prabhu ki khoj me challe gayye the ke?;)
मरे बेटे ये रोहतक आल्ले भी माड़े उत् नहीं स ...... आपणे गाम की बोर त मार गया डाकि ......न्यू और बता जाता के उस सेना का सेनापति एक सांगवान था जिसका नाम था चौ. ढीलैत :)
इस गढ़ टेकना में भी सांगवान बसे स | चरखी गाँव त आड़े आके बस गए थे |
इस कलानौर गाँव में जो भी जाट स वे पाछे आके बसे स , पहले यो रांगड़ा का गाँव होता था | इब इस गाँव में रिफ्यूजी आर ढेढवा गणी स | सुन्या स के पूजा भट का घर आल्ला रिफ्यूजी मनीष नाम स के स ध्यान कोणी इसे गाँव का स |
 
मरे बेटे ये रोहतक आल्ले भी माड़े उत् नहीं स ...... आपणे गाम की बोर त मार गया डाकि ......न्यू और बता जाता के उस सेना का सेनापति एक सांगवान था जिसका नाम था चौ. ढीलैत :)
इस गढ़ टेकना में भी सांगवान बसे स | चरखी गाँव त आड़े आके बस गए थे |
इस कलानौर गाँव में जो भी जाट स वे पाछे आके बसे स , पहले यो रांगड़ा का गाँव होता था | इब इस गाँव में रिफ्यूजी आर ढेढवा गणी स | सुन्या स के पूजा भट का घर आल्ला रिफ्यूजी मनीष नाम स के स ध्यान कोणी इसे गाँव का स |
जो कमी थी वा भाई तन्ने पूरी कर दी ,भोत-भोत धन्यवाद | इह का मतलब वा छोरी संग्वानां की थी , जिह पे रोला होया था ,अर इज्ज़त खातर फेर सांगवान भी आपणी फौज ले के ने आगे थे | बाकी रोहतक आले आंडी सें भाई झुट्ठी बड़ाई ना कार्यां करें | ये सें-ए इतने आंडी अक दुसर्यां ने वे बात झुट्ठी बरगी लागें सें | इह दुनिया में जट्टों का सिरमोर हरयाना (बीचाले पड़े स ) ,हरयाणा का सिरमोर रोहतक | अर घणा बोल्या ते रोहतक का सिरमोर में आपणे गाम ने बता दयुन्गा (वो भी बीचाले पड़े स रोहतक के )(यानी विश्व जाट राजधानी = भाऊ अकबर पुर ) | महारा गाम स-ए आंडी | चाहे बदनाम कह ले अर चाहे मशहूर कह ले | अर यु पूजा भाट का घर आला ना स बाहर आला स पूजा भाट ने न्यू-ए कोणी बेरा अक घर आला क्यां ने कह्या करें | इह का पूरा नाम मनीष मखीजा स , वो यु गाणा गा के ने मशहूर होया था "तन्ने म्हारी मेन्स के डंडा क्यूँ मार्या ......" पर कित का स न्यू मन्ने ना बेरा | इब्ब वा मेन्ह्स इह के रोज डंडे मारे स |
 
हम्बे ....थाम न के सुहाया प्रभु ..ले रहे प्रभु न :)

के बात बेन-बुन होग्या के परभू | दो-तीन दिनां ते जाटलैंड में किते आग ना लागी दिखी | पर उह के सारे चस्कू ते आड़े-ए हांडअण लाग रे सें |
 
के बात बेन-बुन होग्या के परभू | दो-तीन दिनां ते जाटलैंड में किते आग ना लागी दिखी | पर उह के सारे चस्कू ते आड़े-ए हांडअण लाग रे सें |

छोरी मलिक गठ्वाला की थी और अहलावत गोत्र में ब्याही थी बाक्की तस्सली कर लिए
 
छोरी मलिक गठ्वाला की थी और अहलावत गोत्र में ब्याही थी बाक्की तस्सली कर लिए

हाँ भाई तेरी बात कती ठीक स | उह लुगाई का नाम समाकौर था | इब्बे मन्ने मेरे बाबू पे बुझी स |
 
इह का पूरा नाम मनीष मखीजा स , वो यु गाणा गा के ने मशहूर होया था "तन्ने म्हारी मेन्स के डंडा क्यूँ मार्या ......" पर कित का स न्यू मन्ने ना बेरा | इब्ब वा मेन्ह्स इह के रोज डंडे मारे स |

चलो, बात चला ही दी है तो सुनो । चाहे यह थोड़ा "Off Topic" है । रवीन्द्र, मनीश मखीजा का तै मन्नै बेरा ना । पर सब तैं पहल्यां गाना "मेरी भैंस कै डंडा क्यूं मारा" मन्ना-डे ने गाया था 1970 की फिल्म "पगला कहीं का" में । नीचे उसका विडियो लिंक दे रहा हूं - सुन लो !


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कहीं मनीश मखीजा का गाना यह तो नहीं ? ईबै ढूंढा सै कितै तैं ! -


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Last edited:
हाँ भाई तेरी बात कती ठीक स | उह लुगाई का नाम समाकौर था | इब्बे मन्ने मेरे बाबू पे बुझी स |

भाई साहब! इसका मतलब आप तो Wikipedia गेल्यां ए राखो हो। फेर कोन्या आओ किसे कै काबू। :suspicion:
 
चलो, बात चला ही दी है तो सुनो । चाहे यह थोड़ा "Off Topic" है । रवीन्द्र, मनीश मखीजा का तै मन्नै बेरा ना । पर सब तैं पहल्यां गाना "मेरी भैंस कै डंडा क्यूं मारा" मन्ना-डे ने गाया था 1970 की फिल्म "पगला कहीं का" में । नीचे उसका विडियो लिंक दे रहा हूं - सुन लो !


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कहीं मनीश मखीजा का गाना यह तो नहीं ? ईबै ढूंढा सै कितै तैं ! -


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देशवाल जी ,भोत बढ़िया ,यु पुराणा गाणा ते पहली बारी सुण्या स | अर दुसरा जो स, हिंदी में ,वो मनीष माखीजा का कोणी | उह ने ते उत्तम सिंह के नाम तें शायद गाया था अर जट्टू में था, हिंदी में नहीं | में ते उह का गाणा ओरिजनल समझूँ था , पर यु ते नकलची लिकडया |
 
इब्ब ताहि किसे ने गोहाना की जलेबी याद नहीं करी .....
के बात किसे ने खायी ऐ न ह क आज तक ... ???
आप्पां ने घनी एंडी लग्गा करे है ... जड़ भी चक्कर लगे २ - ४ किलो तो लपेट ऐ लावा
 
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