albaadi baalkaan key kissey.

ये सारे बालक बड्डे हो लिए के..... ना होए हो ते इनने बाल सुधार गृह खंदा दो ....
 
bhai jaata ka budda budhape m bigada kre . ye jitne badde hote javenge utne bigadte jange. to badda hon ka koi fayda koni...............................aar itne sudhre hoye balak bi thik na ho sai.
 
ये सारे बालक बड्डे हो लिए के..... ना होए हो ते इनने बाल सुधार गृह खंदा दो ....

baalke isse-a hoyaa karein, baaki to nirey khaat sein, kuradiyaan pe bagaan jogey.
 
जब में उनिवरसिटी कालेज में पढ्या करदा | म्हारी प्रेप की एक हिंदी की किताब आऊट ऑफ़ सलेबुस घोषित होगी | हाम उने मेडिकल मोड़ पे बेचन लागे तो उडे की सारी दूकान आलयाँ नु बेरा पाटर्या था पहलाम तें-ए| उडे हाम बेचन ना पाए | फेर हाम पोंच्गे प्रेम बुक डिपो , परताप चोक ,पुराना बाज़ार ,रोहतक | हाम ६-७ जने थे | प्रेम भाई ने किताब तो ले ली | पर नु बोल्या अक बेरा ना के बात से आज २०-२५ किताब ये-ए आई सें सेकेण्ड हेंड कुछ गड-बड़ से के | हाम डर गे मखा जा आज ना बिकी तो फेर रद्दी में बेचनी पड़ेगी | हाम ऊ ताहि नु बोले अक महारा कोलेज ने ये किताब फ्री में दे दी लाइबरेरी माँ तें जयां तें जो बालक बेच के गए सें वे भी म्हारे कोलेज के-ए सें | जब जा कें उने म्हारी किताब ली | जब उने बेरा पाट्या होगा तो आपना सर पीट लिया होगा |
 
म्हारे गाळ में एक था मेहर सिंह (इब्बी से ) | वो घना छोला था | सारी हान गाळ bakey जांदा , कदे आपने बालकां नु , कदे आपने डांगरा नु ,एर कदे आपनी लुगाई नु | ( इससे का रहडुआ हामने जोहड़ में बगाया था पर या घटना पहलम की से ) | ऊके ५ छोरी थी एर हाम चार भाई- भान| उन् का घर एर महारा घर आमी -सामी थे | एर महारा भी उन् गेल्याँ हर मिन्हे में १-२ बे रोला हो लिया करदा | एक बे म्हारी उन् गेल्याँ जब लड़ाई होई तो मन्ने एर मेरे भाई - भाणा ने मिल के उन् के आछे पाडे | तो उनने आपना घर मूँद लिया | ओंकी एक खिड़की थी ऊमे जाली लागरी थी | ओमाके बहार तें किम्मे दिखे ना था | ज्यां तें हाम आंख्यां के दोनु ओड नु हाथ ला कें देखन की कोशिस कराँ थे अक वे के करण लागरे सें | इतने में बडली छोरी ने भीतर तें फाली मारी | मेरी आँख में लाग्दी-लाग्दी रहगी | एर आछा बड्डा मोघा होग्या जाली में | एर हामने भी दीखन लाग्या उमा के | फेर में जाली के धोरे जान के जाऊं, एर वा फली मारे | उने आपनी सारी जाली मोघ्याँ तें तोड़ गेरी | फेर म्हारे पक्का होग्या अक आज इका सूड़ उतरेगा | एर हाम ऊके बाबू की बाट देखन लागे सांझ सी के | ऊके बाबू ने आंदे-ए रहडुआ खडा कर्या जाल्याँ धोरे एर उकी नजर पड़ी | फेर के था नु बेरा पाटदें अक उकी बड्डी छोरी का कर्या होया काम से | दे सांटयाँ -- दे सांटयाँ
 
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म्हारे घरां में एक मेरे ताऊ की छोरी संतोष (वा-ए जी की गठडी बस माँ तें ठाई थी ) कित्ते घनिये लूगाइयां गेल्याँ गई थी | बाकी लूगाइयां नु ई ताहि बस की टिकेट लेवन का जिम्मा दे राख्या था | जब ये लुगाई वापस गाम में आई तो बस माँ तें उतरतें नु टिकट चेकर मिलग्या , एर लाग्या टिकट बुझ्न | संतोष बावली बन कें नु बोली एक मन्ने के बेरा था अक टिकट लेंय पाछे दिखानी भी पड़्या करें | मन्ने तो सारी बग़ा दी थारी बस में ,जा आपनी चुग ले चाह्न्दी हों तो | असल में उने टिकट ली-ए कोणी थी | फेर घरां आके सारे इन्ने हँसे अक हान्स-हान्स के पेट फूट्गे |
 
मेरे हान का म्हारी गाल में एक था राजे (राजपाल सिंह ) वे १०-१२ भाई -भान थे | इलाज की कमी तें ४-५ ते मर लिए इब्ब ताहि उन् का बाबु और किम्मे तो कर्या नि करदा बस यो-ए काम कर्या करदा | वो कित्ते भी जांदा रिश्ते दारी में ,बियाह में , बारात में मेरे लत्ते मांग्या करदा | उनका तो २-३ साल में एक आध समया करदा | एक बे वो मेरी निक्कर पाड़ लाया | एर वो बीडी पीया करदा शर्ट में बीड़ियाँ के मोघे कर लाया | उकी एक और भुंडी आदत थी एक वो बिना धोये एर पाड्या होया ,बिना सिम्मे लत्ते घरां गेर जांदा | उका एक बे नया कुडता-पाजामा सिम्म्या एर मन्ने ऊएइ नु कह कें अक रे मेरे लत्ते पुराने होरे सें में माम्या के जाऊं सूँ तू मन्ने एक दिन खातर तेरा कुडता-पजामा दे दे | उने दे दिया एर में कित माम्या के जाऊं था | मन्ने साबत दिन खेता में पहरया एर सांझ सी नु खेलती हान ट्राली में उलझा कें कई जगह तें पाड़ दिया एर आगले दिन वो पाट्या होया एर मेल्या कुडता पाजामा ऊके घरां जा गेरा | फेर उने कदे मेरे पे लत्ते नि मांगे |
 
म्हारे साहरे आले ठोले में एक था धारे ( धीर सिंह ) | उने एक पुराना ट्रेक्टर ले लिया एर वो बिना धक्का मारें स्टार्ट ना होया करदा | ताड्कें सांझ लोकां नु कट्ठे करे रहंदे धक्का मरवान खातर ,एर तावाला सा चालु भी कोणी होया करदा, लोकां के पसीने छुट जाया करदे | बालक एर आदमी उनकी गाळ कानी जांदे नु सोचदे अक बेरा ना कब धक्का मरवान खातर बुला लें | एक बे इस्सा होया अक जोहड़ के साहरे वे धक्का मर्वावें थे घिर्डआन पर तें अक तावाला चालु होज्या गा | भाइओ वो उन् पे संभाला कोणी एर बालका ने हांगा घना ला दिया एर ट्रेक्टर जा बड़ा जोहड़ में डूनघे सी | फेर किस्से ने कोए साहरा नि लाया एर उन्ने दुसरा ट्रेक्टर भाड़े पे ल्या के वो काढना पड्या | एर उन्ने वो ल्या कें खडा कर दिया इतने ना बिका वो खड्या-ए रह्या | धारे का नाँ परमानेंट " धर-धर धारे" लिकड़ ग्या |
 
मेरी मौस्सी का बियाह था | में एर मेरे मामा का छोरा गुलू जो मेरे -ए हान का था | हाम ९-१० आल के होंगे जब ,हाम बरातियां की गाड़ियां धोरे के हांडअन लागरे थे | एक गाड्डी खुल्ली मिलगी हाम ने , पहलम तो ऊमे हाम बइठे रहे | फेर गुलू ने बेरा ना के उध आई | उडे कुतयाँ का गू पड्या था उने वो सीटान पे ला दिया एर जब मन्ने नु कही अक में मामाजी तें बताऊंगा तो डाकि ने पहलम-ए जा कें मेरा नाँ ले दिया अक देख रविंदर ने के कर दिया | मेरे आछे रहपट लागे एर सारे नु बोले अक यो तो देहरादून के मिलट्री स्कूल में पढ़े से ,यो इस्सा काम ना करे | इस्से काम तो तेरे बर्गे गाम के उत कर सकें सें | फेर वो जब एक्ला फंसया जब मन्ने करडा धोया |
 
मेरा एक काका महारे घरां में रंडुआ था |एर उकी उम्र भी लिकड़ गी थी | पर कोए हो उने खाम खा नु कह देंदा अक रे बियाह करवा ले , तो घना राजी हो जांदा एर उपे किम्मे हो काम करवा लेंदे | एक बे परले ठोले के कई बड्डे बालक कट्ठे हो कें आये सांझ सी नु एर आके ऊके धोरे बैठ गे | गाम बड्डा होने के कारण वो उनने पिछान तो पाया ना | वे नु बोले अक म्हारी रिश्तेदारी में एक काणी छोरी से जा तू कह तो आगले इतवार नु तेरी सगाई करवा दयां | वे ऊपे ५००/- रपिये लेगे अक छोरी का बयोंत ना से एर सगाई खातर आवेंगे तो खर्चा पानी तो चाहिए | उने सारे घरां में कह दी अक आगले अतवार नु मेरी सगाई से| थारे बासना में बियाह बड लिया एर तम ने बेरा बी कोणी | इतवार नु एक जणा उने आके फेर कह गया अक तय्यार रहिये सांझ सी चार बजे आँवेंगे | वो तो डाकि बेठगा नई धोती बाँध कें, एर सक्कर एर पताशे मंगवा लिए बंडवान खातर | हाम सारे बालक भी कट्ठे होगे सक्कर पताश्यां के मारे | एर भाई वो रात नु ९ बजे ताहि बेठ्या रहा सिंगरा- मिन्ग्रा कोए ना आया | एर हाम धिग्ताने उकी सक्कर एर पताशे खा कें डांकआँ आये |
 
मेरा छोट्ला काका कँवल सिंह फोज में था | एक बे म्हारी दूर की रिश्तेदारी माँ तें एक छोरा आग्या एर नु बोल्या अक म्हारे पड़ोस का फोजी छुट्टी आर्या से एर वो कँवल की गेल्याँ -ए स | कँवल ने नु कही से अक म्हारे घर तें ५ किल्लो घी ले आइये | ऊ फोजी ने में खन्दाया सूँ | मेरी काकी नु राजी हो कें घी घाल दिया | पाछे जब चिट्ठी गेरी तो उडे तें जवाब आया अक ना तो मन्ने घी मंगाया एर ना मन्ने मिल्या एर ना ऊ गाम का कोए बन्दा मेरी गैल फोज में स | पाछे जब ऊ छोरे के घरां सिकायत ले कें गए जब बेरा पाट्या अक वो रोहतक के किअए कोलेज में पढ़े स एर कमरा किराए पे ले कें रह्या करे | एर उने कई रिश्तेदारियां माँ तें नुएअ घी ल्या कें खा-खा कें सेहत बनान लाग्र्या स | थोड़े दिना में सब नु बेरा पाटग्या एर वो किस्से रिश्तेदारी में जान जोगा नि रह्या |
 
Bhai ravi i baat kahu hu tere sarre kisse ganne hi ND hain urr ek comics khad de shel hodda bhai cartoon bana degga urr jatland ki apni desi pehli comics bahut hit hovegi.
 
Bhai ravi i baat kahu hu tere sarre kisse ganne hi ND hain urr ek comics khad de shel hodda bhai cartoon bana degga urr jatland ki apni desi pehli comics bahut hit hovegi.

bhai pahlam meri kavitaa ki kitaab aawengi ,we final stage me sein, fer iss baare me sochungaa , er itney kissey bhi khatam hovan ke love laaglein ge. comments ke liye dhaneywaad
 
जब में मुंबई में पढ्या करदा तो हाम कई जाणे हरयाने वाले कट्ठे एक कंटीन में बैठे थे | आड़े मुंबई में कट्टिंग चा पीया करें ( मतलब हरयाणवी स्टैंडअड़ के हिसाब तें एक सुरड्का ) | एक छोरा गुढ़ाआन गाम का जो मेरे तें २- बेच सीनियर था वो नु बोल्या अक रे ये के किम्मे चा सें इस्सी तो मानस ५० चा पि जा | तो ई बात पे एक दुसरे छोरे ने जो बोहर का था , शरत ला ली ऊ गेलयाँ १०० रापियाँ की , एर चा पि गा तो चा के पिस्से भी बोहरिया दे गा ना तो गूढ़आनिये नु देने पड़ेंगे | एर ओन्ने चा की केतली धरवा ली एर लाग्या गूढ़आनिया चा पीण एर भाई टसक-टसक कें वो पि ग्या | एर बोह्रिये के पसीने छूट गे एर उने नु सोची अक में शरत तो हार लिया इब्ब १००/- रपिये देने पड़ेंगे, तो उने फेर चेलेंज कर दिया , अक ईपे और तो पि नि जांदी इब्बके जीत गा तो बराबर हो ज्या गा| एर गूढ़आनिये तें बोल्या अक जा तू और ५ चा पि ले तो में तन्ने और १००/- रपिये दूंगा | एर भाई वो पि ग्या | बोहरिया पाद ग्या एर पिस्से देवन तें नाट ग्या तो सार्या नु मिल कें उकी घडी खोस ली एर शरत पूरी करी | फेर तोमर( गूढ़आनिया ) हंड्या उलटी करदा | एर २०० ग्राम देशी घी खाया जब जा कें २ दिन में उका पेट ठीक होया |
एर उस घटना की ख़ास बात या थी अक उड़े ६०-७० आदमी कट्ठे हो गे थे एर वे नु कहवे थे अक इस्से ऊत्पणे तो हरयाना के जाट कर सकें सें | और किस्से के बस की बात कोणी |
 
में मुंबई में होस्टल में रह्या करदा | एर म्हारा जूनियर बेच था | होस्टल के कमरे बड़े -बड़े थे कलास रूम बर्गे | एक कमरे में १४ बंकर बेड थे इका मतलब २८ बालक एक कमरे में रह्या करदे | मन्ने २-३ मिन्हे होए थे होस्टल में रहंदे नु ,एक बिहारी गेल्याँ रोला होगा पढ़न की जगह पे | वो बोल्या " साला जाट तुम्हारा बूढी (बुद्धि) घुटने में होता हे" | भाई उन्ने नु सोची अक यो तो पतला सा हे एर तेरा यो के कर लेगा (भईये चावल खा -खा के मोटे होए रह्या करें पर उन् में जान कोणी होंदी ) मन्ने ऊके मार बुद्धि- मार बुद्धि(गोड्डे ) एर उकी सोड सी उधेड़ दी | एर फेर उड़े तखते पड़े थे जिन में चोभे लिकड़ रे थे | मन्ने वो ठा कें उन् पे बागा दिया | उकी सारो कड़ एर सर लहू लुहान होगया | म्हारे सीनियर उन्ने ठा कें लेगे डिस्पेंसरी एर वो दो दिन अड़मिट रह्या | एर मेरी आगले दिन ओ-आई - सी (परिन्सिपल) के आगे पेस्सी लाग गी | एर सब नु बोले अक इब्ब तो बलहारा का होस्टल लिकाडा होवे गा | म्हारा ओ-आई-सी एक जाट सिख था | मन्ने ऊताही बता दी अक यो जाटां नु गाल बके था एर नु बोल्या अक जाटां के तो गोडयाँ में दिमाग हो से | ओ-आई-सी ने में ठीक ठाक उलटा खंदा दिया | एर उस बिहारी ताहि आगले दिन वार्निंग लेटर मिलगया होस्टल में जातिवाद और घर्णा फेलाने के आरोप में | आंडी जाट |
 
हाम नए-नए न्यारे होए थे | मेरा छोट्ला काका कँवल सिंह फोज में था एर उनके जब ताहि बालक ना होए थे | वो खान की चीजो लांदा तो हाम-ए खाया करदे | पर न्यारे होंए पाछे मेरी काकी हामने चीजो ना देंदी ,लुको लेंदी| ऊन धोरे बालक ना थे जयां तें , हेली का दुमंजला पर का चुबारा उन् ताहि दे दिया था | एक बे कँवल छुट्टी आया एर मेरी काकी ने चीजो लुको दी | एर नु बोली इबके किम्मे ना लाया | एर वा पानी लेवन चाली गई कुवे पर तें (जब ताहि नलके ना लागे थे ) | मन्ने चीजो पे हाथ साफ़ करण का पलान बनाया | चोक में तो मेरा बाबु एर मेरा काका बेठे थे , उड़े के तो में जा नि सकूं था उप्पर , में पड़ोसियां की छात पर के चढ़ गया एर एक दर्जन केले एर ७-८ संतरे टास्क-टास्क के खा कें एर उनके छोतके मेरी काकी की संदूक के तले लुको के , जित के आया था उत के-ए उतर्ग्या | मेरी काकी ने जब वे फल ना पाए तो मेरी माँ आगे रोला मचाया एक और बालक तो छोटे सें यो रविंदर का काम से | पहलम तो उकी चोरी पकड़ी गयी , अक वा नाट्गी थी अक किम्मे ना लाया, एर एब्ब नु कहवे से एक रविंदर फल खाग्या, एर में भी नाट गया ,अक मन्ने कोणी खाए | एर सारे नाट गे अक यो तो उप्पर गया कोणी हाम तले चोक में बेठे थे | पर जब सांझ नु मेरे पे रोटी कोणी खायी गई जब मेरी माँ नु बेरा पाट्या अक मेरा झेद कयाँ तें भर्या से |
 
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