हाम नए-नए न्यारे होए थे | मेरा छोट्ला काका कँवल सिंह फोज में था एर उनके जब ताहि बालक ना होए थे | वो खान की चीजो लांदा तो हाम-ए खाया करदे | पर न्यारे होंए पाछे मेरी काकी हामने चीजो ना देंदी ,लुको लेंदी| ऊन धोरे बालक ना थे जयां तें , हेली का दुमंजला पर का चुबारा उन् ताहि दे दिया था | एक बे कँवल छुट्टी आया एर मेरी काकी ने चीजो लुको दी | एर नु बोली इबके किम्मे ना लाया | एर वा पानी लेवन चाली गई कुवे पर तें (जब ताहि नलके ना लागे थे ) | मन्ने चीजो पे हाथ साफ़ करण का पलान बनाया | चोक में तो मेरा बाबु एर मेरा काका बेठे थे , उड़े के तो में जा नि सकूं था उप्पर , में पड़ोसियां की छात पर के चढ़ गया एर एक दर्जन केले एर ७-८ संतरे टास्क-टास्क के खा कें एर उनके छोतके मेरी काकी की संदूक के तले लुको के , जित के आया था उत के-ए उतर्ग्या | मेरी काकी ने जब वे फल ना पाए तो मेरी माँ आगे रोला मचाया एक और बालक तो छोटे सें यो रविंदर का काम से | पहलम तो उकी चोरी पकड़ी गयी , अक वा नाट्गी थी अक किम्मे ना लाया, एर एब्ब नु कहवे से एक रविंदर फल खाग्या, एर में भी नाट गया ,अक मन्ने कोणी खाए | एर सारे नाट गे अक यो तो उप्पर गया कोणी हाम तले चोक में बेठे थे | पर जब सांझ नु मेरे पे रोटी कोणी खायी गई जब मेरी माँ नु बेरा पाट्या अक मेरा झेद कयाँ तें भर्या से |