albaadi baalkaan key kissey.

एक बे हाम ७-८ जणे बैठे थे म्हारी गाळ म | खरसा का टेम था ११-१२ का टेम होर्या था | म्हारे गाम म एक पहाड़ी सै तो हामने बैठे-बैठे न्यू सोची आक इब इ पहाड़ी पे दस चक्कर कुण मार दे इस भखत | तो भाई मेरे काका का छोरा गोलु नु बोल्या मै मार दू, एक दो लीटर आळी ड्यू की बोतल मिल्ज्या तै | हामने भाई सर्त ला दी आक ठीक सै आर बिच म कित्ते नही रुकना सै आर सब तै उप्पर आळी चोटी पै गेडे गेल एक भाठा धर के आना सै | नु बोल्या ठीक सै आर भाई हाम च्ढ्गे म्हारी छात पे देखण ताहि | इब उने गेडे मारणे चालू करे ए थे आक हामने के करा मेरे काका ताऊ हर गाळ म ताश खेलः थे हामने उण ताहि नु कह दी आक गोलु क बेरा ना के होग्या वो तो पहाड़ी पे चढ़े सै आर उतरे सै वो तो बाव्ला होग्या, वे सारे खड़े हो के उने देखण लाग गे | उने ५ गेडे तै मारे जोश-जोश म आर फेर ढीला होग्या इब रुक बी कोणी सकता ड्यू के चक्कर म आर फ्री फंड के गेडे बी मारे तो उने ज्युकर त्युकर करके कर दिए १० गेडे | आर इतणी भुंडी तरिया पसीना म तरम तर होग्या आर आते इ खाट म पड़ग्या | हामने थोड़ी सी हाण तो उके मजे लिए आक तन्ने ड्यू कोणी प्यावा तू तै बिच म रुकग्या था तन्ने लगातार गेडे कोणी लाए अपणी सर्त पूरी कोणी होई | वो किलच ग्या फेर हामने मंगा ए दी ड्यू | इब मेरे काका ताऊ हार बी आ लिए ड्यू पीण ताहि, इब वो न्यू बी ना कह सकता सर्मामता आक ड्यू मेरी ऐकले की सै , बिचारे की सारी ड्यू बट्गी सार्या म | एक गिलास थाया बिचारे क | थारी गेल इब पाछे सरत कोणी लाऊ |
 
एक बे म्हारे गाम के स्कूल में हड़ताल होगी | हाम पराइमरी ,में पढ्या करदे | हाई स्कूल के बालक हड़ताल कर रे थे कुछ स्कूल के स्पोर्ट्स फंड के मिस युँज पे | ३- दिन होगे हड़ताल होई ने एर बालक माने कोणी बहार खड़े हो के नारे बाजी करे जांदे | आखिर में हेडमास्टर ने सरपंच बुला लिया एर वो भी समझोता करवान में फेल होगया | हेडमास्टर ने एर सरपंच ने २-३ मास्टर बालकां की गेल ला दिए पकड़न खातर | वे मास्टर साइकलान पे उन् की गेल लाग लिए | बालक चढ़ गे खेताँ में एर मास्टर उन् की गेल-गेल | २ की.मी जा कें बालक रुक गे एर वे मास्टर घेर लिए | उन् के साइकल खोस लिए एर एक मास्टर घणा आकडे था ऊके लत्ते पाड़ दिए | एर नु कह दी आगला नम्बर हेडमास्टर का स जा नि मान्या तो | फेर जब जा कें बालकां का खेलाँ का सामान खरीदा एर उन् का खाने का भत्ता देना सुरु कर्या |
 
में पाच्मी में पढ्या करदा | मन्ने आपनी बुआ के जाना था | जींद धोरे ,एक गाम स जय-जय वंती | मेंने रोहतक तें बेठना था | में टिकट ले कें प्लेट फारम पे गया , उड़े एक ट्रेन खडी थी उप्प बुझी अक या पस्सेंजर ट्रेन स के | जी मानस पे बुझी वो नु बोल्या दिखता कोना के ई में पेसेंजर बेठे सें | या के माल गाडी दिखे से तन्ने | वा एक्सप्रेस गाडी थी एर सीधी जा थाम्बी जींद | उड़े टी.सी. ने पकड़ लिया अक पसेंजर ट्रेन का टिकट से एर ऊँ भी तू एक स्टेशन आगे आग्या | एर ऊ टी सी के और २ बन्दे फंस्गे उन्ने सामड उतरणा था | टी.सी. की गेल एक हवालदार भी था वे हामने एकाड्वासी ले गे एर नु बोले ,के तो पिस्से दे दो ना तो जेल होवेगी | मन्ने तो ट्रेन में बेचानिये पे बेर ले लिए थे खावन खातर , उन् माँ तो किम्मे बच रे थे | में उन् ताहि नु बोल्या अक मेरे धोरे तो पिस्से कोणी तुम बेर ले लो | एर दूसरां का दोनुआ का झाड़ा ले कें एर उन् पे जिन्ने पिस्से थाए वे ले लिए टिकट जोगे छोड़ कें ,एर भजा दिए | मेरे धोरे १० रपिये थे | जब वो हवालदार उन् का झाड़ा लेवन लाग्र्या था मन्ने वो नोट आपनी जुराबाँ में लूको लिया था | फेर उने मेरा झाड़ा लिया तो किम्मे भी कोणी पाया | इतने अन्धेरा होवन लाग्या एर अद्धा (४-५ डिब्बे की ट्रेन ) आवन में आधा घंटा और था | में नु बोल्या अक में इब्ब कोणी जाऊं थारे धोरे -ए रहूँगा | जय-जय वंती उतर कें आधा घंटा पैदल चालना पड्या करदा ,एर में नु बोल्या अक मन्ने घणी करडी भूख लागरी से मन्ने खाणा खुवावो | में उन् दोनुआ के गले पड़ग्या एर उन्ने पेंडा छुडाना मुस्किल होगया | फेर हवालदार प्लात्फारम पे गया एर मेरी बुवा के गाम का एक छोरा टोह कें लाया | एर चा प्या कें में उकी गेल खान्दाया | फेर वे दोनु प्लात्फारम पे मिलगे जिन्न के पिस्से काढ़े थे | मन्ने उन् ताहि किस्सा सुनाया | तो वे बोले भाई हाम तो ख़म-खाम खा ठगे गए तू -ए उत लिकड़ा |
 
मेरा चोथे नम्बर का काका वो -ए जो पाछे थानेदार बण ग्या था | उनने या बात बताई थी | म्हारे गाम में एक बाणिया था घासीराम | ऊ का छोरा मेरे काका की गेल पढ्या करदा | जब वे दशमी क्लास में थे | बाणिया का छोरा कती नई काची किताब ले कें आया | मेरे काका ने वा किताब देखन खातर मांगी , एर आपणा नाँ लिख कें एर झोले में घाल ली | जब बाणिया का छोरा मास्टरआँ धोरे गया तो मेरे काका ने वा किताब दिखा दी एर नु बोल्या अक या तो मेरी से , यो देख लो मेरा नाँ भी लिख राख्या स | यो तो धिन्ग्ताने आपनी बतावे स | मास्टर नाटगे बानिये नु ,अक या तो इस्से की स | फेर उंने आपने घरां जा बताई , पर बानिया आवण ते नाट्गा म्हारे घरां , नु बोल्या, रहण दे, और ले लिए , ना तो यो तन्ने सकूल में भी ना बडन दे गा | मेरा काका अपने बखत का गाम का एक नंबर का उत एर बदमास मान्या जा था | उसकी करतूत जब-ए बतावन लागरी थी, अक यो पुलसिया बणे गा |
 
Ha ha ha ha ha ha ha ha........... Ravinder tre kissyan ki inter-linking bhi kasooti s....... laagya reh bhai.... bahut badhiya sein saarey kissey...

मेरा चोथे नम्बर का काका वो -ए जो पाछे थानेदार बण ग्या था | |
 
Ha ha ha ha ha ha ha ha........... Ravinder tre kissyan ki inter-linking bhi kasooti s....... laagya reh bhai.... bahut badhiya sein saarey kissey...

bhai ghoom fir ke bandey to we -a sein. inter-linking tein bandey nu beraa paat jayaa se ak yo wo-a albaadi se ji ne pahalam kunasi albaad kari thi er series banyaa rahwey se. albaadaan kaa suwaad bhi badh jaa se.
 
मेरी छोटली बेबे ४-५ साल की होगी जब की बात से | वा जब रोहतक जांदी मेरे माँ -बाबू की गैल वा अपना पेट मुफ्त के फलां तो भर लेंदी | छोटी होने के कारण रहड़ी आले नु दीक्दी कोणी एर वा चाल्दी -चाल्दी हाथ लफा कें कोए हो फल ठा कें खावण लाग जांदी एर उन् की गेळ नु चाल्दी जयां ते बेरा ना पाटदा | पहलम तो मेरे बाबू ने नु सोची अक किहये नु दे दिया होगा बालक समझ के | जब २-३ बे मेरे बाबू ने देख्या अक या तो किम्मे ना किम्मे खाएं जा से, उ पे बुझी तो उन्ने बताई अक वा ठा कें खा ले स | फेर कई बे समझाएं पाछे उकी वा बाण छुट्टी |
 
थारा साबत गाम अल्बादी है अर गाम का नाम टेक रहे हो बहु जणू इन्ते शर्म आले मानस पूरी धरती पे नहीं !
 
थारा साबत गाम अल्बादी है अर गाम का नाम टेक रहे हो बहु जणू इन्ते शर्म आले मानस पूरी धरती पे नहीं !

भाई राकेश गाम का सही नाँ तो से " भाऊ अकबर पुर " पर थारे बर्ग्या ने बोलना कोणी आंदा | तम ने -ए बिगाड़ राख्या से | एब्ब तेरे क्यूँ इन्फेरिरिटी काम्प्लेक्स हो रया से manney कोणी बेरा | haam तो हान्सनिये मानस सां भाई | हंसना ही जीवन हे |
 
यू भाऊ बम्बइया शब्द है अर तेरा गाम हरियाने में है कीमे लावे धोरे से तो ला दिया कर निरी चून के बल की धकावे है
 
यू भाऊ बम्बइया शब्द है अर तेरा गाम हरियाने में है कीमे लावे धोरे से तो ला दिया कर निरी चून के बल की धकावे है

naa bhai , choon ki koni dhikaandaa, saarey ricord, lekh er puraaney paathar laagre sein unn me sab me yo -a naam se .
 
मेरी बुआ की छोरी का बियाह था | उन् का गाम जींद धोरे से | में एर एक म्हारे घरां में ताऊ का छोरा भाति बण के जारे थे | बरात कैथल तों पराँ तों किस्से पंजाब के गाम माँ तों आरी थी | १५०-२०० मानस दारु में धुत्त हो कें ने आरे थे | एक -ए रंग का कुडता, बोथा ( तहमद ), एर पागड़ बाँध रे जानू तो एक-ए थान माँ ते पडा के लयारे हों | हाम दोनु जाणे परस ( चुपाड ) में चढ़ गे | एर उड़े पड़ी दारु की खाली बोतल ठा कें दुकानां पे बेच आये | १-२ घंटया में उन् की दारु ख़तम होवण लागी तो वे म्हारे ताहि बोले अक रे तुम म्हारी खातर दारु ल्या दो , हाम एक बोतल पे थम ने १० रपिये दे दयांगे | ३५=४० रापियाँ की बोत्तल आया करदी देसी दारु की | एर ऊ गाम की परचून की दूकान , परचून के सामान तें कम एर दारु के धंधे पे घणी चाल्या करदी | छोटा गाम था एर ५=६ दूकान थी , माड़ी वार में सारी दुकानां की दारु ख़तम होगी | एर जब वे और दारु मंगान लागे तो हाम ने जो घणे कसूते धुत्त होए पड़े थे , उन् की बोत्तल ठा-ठा कें , एर अधे भर-भर कें उन्ने ताहि बेच दी | उ दिन म्हारी गोज पिस्स्याँ की भर गी एर हाम ने नि बेरा बियाह कोडबे होया | हाम तो बरातियां की सेवा में -ए लागे रहे |
 
मेरा दुसरे नंबर का काका रंडुआ था ( वो -ए जी का मने सुखा हलवा खाया था ) | आगले साल उने ५ किलो घी एक पीपी में भर कें एर मेरे डर तें अक कदे यु खा ना जा,एक अलमारी में मोटा सा ताला ला कें धर दिया | म्हारी मेन्स नाट रि थी , एर मेरी माँ ने कह दिया था अक घी नि धरया जा गा , बस रोटी चुपड़ी होई मिलेंगी | आपां नु बिना घी रोटी आछी कोणी लागे थी | मेरे काका का लाया होया ताला खींचे तोंह खुल जा था, एर मेरे काका नु बेरा कोणी था ई बात का | में रोज तफरियां में घी गेर कें साग में खा जांदा | थोड़े दिना में काका नु बेरा पाट ग्या अक ई में और भी कोए बाढा ला राया से | मेरा काका एक दिन ठेकयां के पाछे लुक कें बेठ ग्या, एर में पकड्या गया | मेरें काका ने मारे तो कोणी पर आपणा घी ठा कें दुसरे काका के घरां धर आया जी के बालक ना थे | एर मन्ने वे गर्मिया बिना घी खाएं काढणी पड़ी |
 
मेरा एक दोस्त था म्हारी-ए गाल में जीत सिंह | ऊके बाबु धूपन ( धुप सिंह ) के उप्पर एर तले का क डेन्चर ( नकली दान्दा का सेट ) लाग्र्या था | वो गर्मिया की दोफारी में म्हारे घेर में आ के सो जांदा , उड़े कई बुढे सोया करदे | ऊ की एक भुंडी आदत थी वो पानी पीवन के डब्बे में आपना डेन्चर गेर कें सोया करदा एर उठ कें फेर पहर लेंदा | मन्ने घणी भुंडी घिन्न आंदी ,फेर वो डिब्बा मांजना पड़दा | ऊ ताहि कई बे कही एक भुंडा लागे से तू नु ना कर्या कर ,पर मानदा कोणी | एक दिन जब वो सो गया डिब्बे में डेन्चर भे कें तो हामने ऊ डिब्बे में तें पाणी काढ कें एर गंडासे के लावण का काला तेल घाल दिया | एर जब उने उठ कें ने आपने डेन्चेर काढ़े ऊके हाथ, लत्ते एर मूंह सारे काले होगे | एर फेर उने घाणी वार लागी सारा सोदा धोवन में, एर जब पाछे वो म्हारे घेर में सोवन भी कोणी आया |
 
म्हारे गाम में एक बाणिया था | शायद उका नाँ रामशरण था | इब्ब पक्का याद कोणी | वो म्हारी फसल मार्केट रेट तें माड़ी उप्पर खरीद लिया करदा ,एर मेरा बाबू नु सोच कें अक मण्डी में ले जावां गे तो भाडा लागेगा एर झारी लागेगी | तो किम्मे ना किम्मे ई ताहि देवन में फेदा से | पर वो पिस्से वारी दिया करदा | घणे-घणे चक्कर कटवा कें | एक बे रेट मार्केट के उठे कोणी एर रामशरण बेचन ना पाया जींस ,कई मिन्हा ताहि | मेरे बाबू ने दाब लाइ पर उंने पिस्से दिए कोणी | जब में १०-१२ साल का था ,मेरे बाबू ने बाणीये धोरे तें पिस्से काढअन का जिम्मा मेरे तें दे दिया | एर मेरा बाबू नु बोल्या अक खाली हाथ आया तो में तेरे मारूंगा | फोजी मानस करडा पिटे | ऊ बाणीये के १०-१२ बालक थे जो उनकी घणी बड्डी हेली( हवेली ) में उराँ -पराँ पड़े रेन्दे | तले हेली के उनका गोदाम था एर उप्पर वे रह्या करदे | में सांझ सी के गया पिस्से माँगन ,बानणी बोली " अड़ सेठ बाहर जार्या से | फेर आइये "| सेठ मन्ने देख कें लुक जाया करदा | २-३ चक्कर काटें पाछे एक दिन मेरे बाबू ने मेरे ताहि वार्निंग दे दी अक खाली हाथ नि आना स | ऊ दिन भी वे और किम्मे ओडा ले कें फेर बहकान की कोशिश करी ,मेरे छो उठ्या एर उनकी साल में एक पीतल का लोटा पड्या था ,में वो चक लाया बानिया देख्दा रहगया | १-२ दिन पाछे में फेर गया एर उंने फेर ओडा मार्या एर आगली बार में उनकी एक कांसी की थाली चक लाया | फेर तो बाणीये सयाने होगे एर आगली बारी गया तो उंने पड्काले के किवाड़ मूँद लिए | पड्काले में उनके २-३ बालक लटक रे थे | उन् माँ तें एक छोरा मेंने ठा लिया एर चालता बनया | बानणी उप्पर तें खड़ी-२ देखें गयी पर बोली किम्मे भी कोणी | वो छोरा घणा भुंडा एर सनकला था मन्ने घिन्न आई एर माड़ी दूर चाले पाछे में उलटा-अ ऊने छोड़ आया | पर ई बात का असर यो होया अक बेरी बेरा ना यो के के करेगा | आगले दिन आके वो बानिया म्हारे सारे पिस्से देगया |
 
मेरे मामा का छोरा गुलू फौगाट घना उत था ( वो -ए जी ने अफसरान के मेस में दारु पि थी )| वो मेरे तें एक क्लास पाछे था | जब मेरा मुंबई में आणा होया तो में उनिवेर्सिती कोलेज रोहतक में पढया करदा | जब उन्ने बेरा पाट्या अक मेरा दाखला मुंबई में होगया , एर में मुंबई जाऊं सूँ तो वो म्हारे घरां आया ,एर नु बोल्या अक रे तू तो जा से एर ये तेरी किताब मन्ने दे जा ,आगले साल मेरे काम आ जयां गी | मन्ने म्हारे घर्कयाँ तें बिना बुझी ऊ ताहि किताब दे दी सारी की सारी | मेरी नॉन मेडिकल थी एर सारी किताब मंहगी थी | सांझ सी नु जब मेरा बाबू घरां आया , एर जब ऊने बेरा पाट्या अक गुलू किताब ले ग्या ,तो मेरे पे घणा छो में आया | बात नु थी अक कई दिन पहलम जब मेरा बाबू उन् के घरां जा राया था तो कोए उल्हाना ले के आर्या था उन् के घरां | उन् के छोरे की किताब ,गुलू बेच कें खा ग्या था | मेरे बाबू ने कही अक ये किताब भी वो बेच कें खा ज्या ग्या | में जब्बे भाज्या साइकल ले कें ने रोहतक | उनकी झांग कालोनी में कोठी थी | इतने में पोह्न्चाया इतने गुलू किताब बेच चुका था | जब मन्ने मेरे मामा तें शिकायत करी तो उलटा मेरा नां ले कें नु बोल्या इस्से ने बेचीं सें मेरा यो झूठा नाँ ले से | पर जब उका झाड़ा लिया तो लगभग आधे पिस्से ऊकी गोझ में पागे एर आधे उन्ने उड़ा दिए थे | फेर ऊकी आछी सिकाई होई एर घरां जाए पाछे मन्ने भी अपने बाबु पे घनिए गाल खाई | एर ये किताब बेचन के कई काण्ड गुलू झांग कालोनी , माडल टाऊन एर प्रेम नगर के बालकां गेल्यान कर चुका था | किताबी डाकू |
 
म्हारे गाम का जोहड़, गाम क बाहरले ओड़ पे सै | जद बी हाम नहावन जाया करते तो साबत गाम पर करके जाया करते, आर घर आले नहावन कोणी दिया करते क्या ताहि आक उमे मिह का पाणी भरा करे गन्दा | आर हाम जिब जाया करते खरसा म जिब घर आले सो जाया करते दोफारी म, जिब घर तै लिकड़ा करते लुक - छिप क | एक दिन के होया आक हाम चले गये नहावन, ४-५ जणे जाया करते | आर म्हारी गेल मेरे काका का छोरा गोलू बी था (वो ए जो दो लीटर आळी ड्यू की खातिर पहाड़ी के दस चक्कर कटे सै ) जिब हाम न्हावन लागे इ थे आक गोलू की माँ न उका भाई ढोबला (विकाश) खंदाया आक जा रे छोरे उने टोह क ल्या | आर उने बेरा था आक कित पावेंगे वे वो गया सुधा जोहड़ म आर चुपके सी न म्हारे लते ठा ल्याया घरा | इब हाम जोहड़ माह तै लिकड़े तो लते कोणी पाए हामने सारे क टोह लिए पण कित पावे थे | हाम गाम क बीचु-बिच उघाड़े आए | घरा आए पाछे सारे घर प छिते | इसके पाछे हाम कदे बी नहावन गये तो सब तै पहला लते लुकोया करते फेर नहाया करते |
 
मेरा दोस्त सुरेंदर सिंह( वो -ए जी ने गिहूआँ की भरी गाडी में आग लायी थी ) का छोरा जो ११-१२ साल का था | पाछले साल भाज के मुंबई आग्या | वो आपने घर तें ATM कार्ड भी काढ लाया | ऊने कोड का भी बेरा था क्योंकि ऊ की माँ ऊए पे पिस्से काढ्वाया करदी | जब उनने बेरा पाट्या अक छोरा कार्ड काढ कें भाज्ग्या तो उकी माँ ने सुरेंदर धोरे फोन कर्या ( सुरेंदर BSF में इन्स्पेक्टर से )तो वो भाज्या आया | पुलिस ने withdrawal चेक करे तो बेरा पाट्या अक वो पूना में से | ये सब करदे-करदे १५ दिन लिकड़ गे एर वो पूना के एक लाज में थाया | इतने ऊ छोरे ने १.५ लाख उड़ा दिया | में गाम में गया तो सुरेंदर लाग्या रोवन , अक भाई छोरे ने बर्बाद करदिया | में नु बोल्या अक कोए बात ना छोरा तो पा गया | पर एक बात सोच | इतिहास अपने आप को दोहराता हे |
 
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