ravinderjeet
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मुंबई में म्हारे होस्टल का सुपरिडेंट एक मराठी था | पोस्ट का नाँ सुपरिडेंट था, पर ऊँ उका रेन्क udc का था | में जब सीनियर बेच में था तो मेस इंचार्ज बना दिया | इब्ब सुपरिडेंट की गेल रोज का वाय्वाहर हो ग्या तो उकी कई करतूतां का बेरा पाट्या | आई बरियाँ भूखे भईये या बंगाली मेस इंचार्ज बना करदे | पर महारा ओ-आई -सी जाट सिख होने के कारण मेरा नम्बर लाग्ग्या | ना तो यो सुपरिडेंट हमेशा उन् ने -ए चाहया करदा जो मिल बाँट के खा सकें,एर इससे-ए बाल्कां का नाँ फारवर्ड कर्या करदा | मन्ने ऊ ताहि कई बे कही अक बाल्कां के पिस्स्या का माल मत खा तन्ने कदे सेध कर ज्या गा | पर वो मान्या कोणी , फेर मन्ने ऊ गेल्याँ ऊत्पने करण की पलान बनाई | वो ओफ्फिस में बेठ के टूएंडकने आले स्टील के ग्लास में चा पीया करदा, आपनी न्यारी बढ़िया सी बणवा के | मन्ने ऊ ग्लास में चोभे ते मोघा कर दिया | एर आगले दिन जब कूक ने आके ऊ ताहि चा घाल कें दी ,आधी सारी चा ऊ के उप्पर खिंड गी | जब ऊ के समझ में आई अक यो किस्से का कर्या होड़ काम से | एर घना छो में आया एर नु बोल्या "में ढूढ़ के निकालूँ गा की किस ने किया हे " | इस सुपरिडेंट गेल्याँ और भी कई काण्ड करे थे जो में आगली अल्बाद्यां में लिखूंगा |