जब में कोलेज में पढ्या करदा तो महारा एक ग्रुप होया करदा | हाम कयाएँ ना कयाएँ के ओडे कोयेसे हो नु बकरा बनाया ,करदे खावन पीवन के मारे | एक बे म्हारे माँ तें एक मदीने के छोरे का जनम दिन था ,हाम ऊ की गेल लाग लिए अक भाई समोसे खुवा | हाम रोहतक बस स्टैंड( पुराना ) पे एक ढाब्बे पे चाले गए ,जो की एक शरणार्थी का था | हाम ने जब समोसे खा लिए तो ऊ ढाब्बे आले ने दुगना बिल बताया | हाम नु बोले अक नु कुकर | ढाब्बे अला नु बोल्या अक छोल्याँ के न्यारे पिस्से आर समोस्याँ के न्यारे | जब के ऊके लिखये होए रेट ५/ रपिये थे | छोला समोसा के बीच में कोमा लार्या था ,एर नु कह दे था, अक देख हाम ने तो पहलम तें -ए लिख राख्या से | पहलम तो उनने रोला कर्या, एर ऊके कई मानस भी आगे ,एर धिन्ग्ताना करण लागे, पिस्से लेवन खातर | मेरा बडला मामा ( गुलू फोगाट का पापा ) चो. करण सिंह जब बस स्टैंड का मेनेजर था | में ऊ ढाब्बे आले नु पकड़ कें उन् धोरे लेग्या | तो मेरे मामा ने वो घणा धमकाया ,अक तू इब्ब तो छुट के आया से ३ दिना पाछे एर फेर कबाड़े करण लाग्या | ऊ ढाबे आले ने ३-४ दिन पहलम एक आर्मी के मेजर गेल्याँ भी पंगा कर्या था, एर ऊ गेल्याँ भी हाथा पाई करी थी , तो ऊ मेजर ने थाना सिटी में रपट लिखा दी थी ,अर यो ढाब्बे आला ३ दिना ताहि छित कें आया था | मेरे मामा ने बताई अक यो हर साल ब्लेक लिस्ट कर्या जा स ,एर फेर नए नाम तें फेर ठेका ले ले स | ऊ ने गलती मान के म्हारे पे पिस्से कोणी लिए, एर नु बोल्या अक चोधरी साब मन्ने के बेरा था ,अक यो थारा रिश्तेदार से इब्ब पाछे कोणी करू | पर जब रोला होर्या था ,तो कई कैनडेकटर एर ड्राईवर भी आगे थे | वे भी नु कहवे थे ,अक ई ढाब्बे आले का तो रोज का रोला होगया ,म्हारी गेल्याँ भी क्याहें ना कयाहें बात पे फेंस्या रह से | ई के तो आछे पडवा हों सें | जब तो हाम चाले गए, पर घायल हो कें ,एर हाम ने सोच ली अक यो छेतना से | एक हफ्ते पाछे हाम ६-७ जाने गए, एर उन् ने बाकियां ने में तो बिठा दिया, उड़े पार्क करी होई बस में ,अक कदे तन्ने यो पिछान ना ले, एर बाकी लागे ऊ का ढाब्बा तोडंअन | उस्से के बांस काढ-काढ के उस एर उस के मानसा के मारे ,एर उन् का सारा सोदा खिंडा दिया एर भाज गे उथों | ठुकाई सुधार |