albaadi baalkaan key kissey.

भाइयो में यो धागा न्यू शुरू करूँ सूँ एक़ हाम ने सब ने बालकपन में थोड़ी घनी सबने अल्बाद करी सें, तो क्यों ना वे सुनाई जाँ अर मजे लयां.

Isnai ya upar aali baat likh kai thread shuru karya tha ..ibb yo haade albaadi koongraan ke kisse likhan laag gaya to munnai yo e kahi thi ke bhai yo balkaan ka kissa koni..ek thread aur bana le..Albaadi koongran ke kissey...aaj kaal nyu bhi JL pai naye naye thread challan ka fashion chal rehya hai..to thaam donu bhai bhi kyu picche hatto.:rock:rock

bhai atish kai jagah aag ku luwaanaa chahwey se , ekky thaan bhakkad paattan de.
 
bhai jamma dhedha barga kaam ho jaga, nyari-nyari albaad likhi javengi to.is mari ek m a jann de sari albaada ne.to is mari haam dusra thread nhi banava bhai atish mohan.
भाइयो में यो धागा न्यू शुरू करूँ सूँ एक़ हाम ने सब ने बालकपन में थोड़ी घनी सबने अल्बाद करी सें, तो क्यों ना वे सुनाई जाँ अर मजे लयां.

Isnai ya upar aali baat likh kai thread shuru karya tha ..ibb yo haade albaadi koongraan ke kisse likhan laag gaya to munnai yo e kahi thi ke bhai yo balkaan ka kissa koni..ek thread aur bana le..Albaadi koongran ke kissey...aaj kaal nyu bhi JL pai naye naye thread challan ka fashion chal rehya hai..to thaam donu bhai bhi kyu picche hatto.:rock:rock
 
म्हारे खेताँ के बिचाले के नहर जा से | एर नहर पर के और कई गामां के पाली भी आपने डांगर ले आया करदे लूटान खातर नहर में | जब भी स्कूल की छुट्टी होंदी घरके डांगर खोल के चाल्दे कर देंदे अक जा चरा ल्या १५-२० दिन | में केजुअल पाली था | उड़े परमानेंट पाली भी होया करदे सकूल माँ तें उठे होए | जुकर मेरे ताऊ के दो छोरे थे | में घन खरी बे उन् की-ए गेल डांगर ले जाया करदा | एक दिन इस्सा होया अक में एक्ला चाल्या गया एर उडे डांगरा नु ले कें | उड़े दुसरे गाम के पाली म्हारे खेताँ में डांगर चरावें थे ४-५ जने | मन्ने उन् ताहि कही अक तम आड़े तें काढ ल्यो पर वे माने कोणी एर उलटा मन्ने सतावन लागे | कबे नक़ल मारे मेरे पे एर कबे डांगर भिड़ं लाग ज्यां म्हारे दान्ग्रान की गेल तो हटावें कोणी| में ९-१० साल का था एर वे ११ -१२ साल के | में उन् की गेल लड़ भी कोणी सकूं था | दोफारी में वे आपने डांगरआँ नु ले गे नहर में लूटान खातर एर आप भी लत्ते काढ कें लागे लोटन कती उघाड़े | उन् के लत्ते नहर की पटड़ी पे धरे थे मन्ने लूकमा लाट्ठी तें वे नहर में सरका दिए | एर वे जब बाहर लिकड़े तो हंडे उघाड़े लत्ते टोहन्दे | जब ताहि तो लत्ते जा लिए होंगे १ की. मी.| फेर वे नूय गए आपने गाम में | नंगे पाली |
 
मुंबई में म्हारे होस्टल में मेरे तें २ बेच पाछे एक छोरा हिसार का आया | शायद ऊ का नाँ वीरेंदर सिंह ढानढा था | ऊँ तो मुस्किल तें ५.५ फिट का रह्या होगा पर था बड़ा कसूत | मेरी ऊ गेल्याँ बढ़िया जम गी | क्यूंकि वो भी मेरे जिस्सा अल्बादी था | वो हिस्सार के जाट कोलेज का जनरल सेकेरेटरी रह चुका था एर होस्टल में रहवन का भी करड़ा अनुभव था | म्हारे होस्टल की एक ख़ास बात थी अक हरयाने के जट्टां की रेगिंग केवल हरयाने के जाट ही कार्या करदे | और किस्से की हिम्मत नि होया करदी | एर हरयाने के जाट बाकी सब की रेगिंग भी कार्या करदे | जयां तें बाकी जात के हरयाने के बन्दे भी आपने आप नु जाट बताया करदे | एर जब हाम उन् ने नु कंदे अक तम कु बताओ सो तो वे कंदे अक भाई बता लन दो हाम भी रेगिंग तें बच जयां गे | तो बात चाल री थी ढानढा की ,तो जब वो होस्टल में आया तो उने आन्दे-ए एक मद्रासी के थप्पड़ मार दिया | यो ढानढा जाट कम भैया घना दिखे था एर ऊ मद्रासी ने सोच्या अक ल्या भैये की रेगिंग कर लू | अक क्यूंकि इन्ने छोटे एर खतरनाक जाट कमे होया करें | बाकी जाट सारे छ.छ. फिट के थे | ई ने १०-१५ दिन पाछे लेक्चेर अटेंड करने भी बंद कर दिए एर बाकी सब चाले जांदे तो किते हो बड के सो जांदा| म्हारे ओ .आई .सी ने होस्टल परफेक्ट ताहि कही के यो लड़का कु नि आर्या तो ऊ की टोह पड़ी | ई का एक काका फौज में लेफ्तिनेनेट कर्नल था एर उन् की बदली मुंबई में-ए होरी थी | कदे यो होस्टल माँ तें लिकड़ के ऊ धोरे चाल्या जांदा | ई के काका ने कह दी अक तू यो कोरस छोड़ दे एर जा कें आपना कोलेज ज्वाइन कर ले उलटा-ए | वे उंने आई. ए .अस या आई .पि .अस. बनाना चाहवे थे | तो भाई ढानढा एक दिन थया गा सोंदा होस्टल में एर वो परफेक्ट ऊने ले ग्या ओ. आई .सी .धोरे | एर घणी डांट खा कें आया | वो आन्दे-ए मेरे तें बोल्या अक कुन्सी ट्रेन जा से सांझ सी नु गाम कानी | मन्ने बताई अक वि. टी. तैं ७.१५ की पंजाब मेल से | उने पलान बनाई अक साढ़े छ बजे आपां चालाँ गे एर तू मन्ने बिठा आइये | उंने आपना सूट केस दिन में -ए तैयार कर लिया | एर ऊ की पलान का मेरे सिवाय और किस्से ने कोणी बेरा था | में उका सूट केस टेक्सी में ले कें बेठ ग्या | एर ढानढ़े ने ऊ भैये होसटल परफेक्ट के ऊ के कमरे धडा -धड घने करड़े घूंसे थप्पड़ मार दिए | एर भाई ढानढा तो इस्सा गया अक आज ताहि ऊ का तो बेरा-ए ना | भाई पढता हो तो फोन कर लिए |
 
एक बे राज डगर (वो ए जीने मेनेजर क बुड़का भरा था ) का भाई मंजीत स्कूल माह तै काड दिया गया, बालका न मार्या करता आर पढ्या कोणी करता | आर मास्टरा न न्यू कही आक जिब तू अपने बाबु न ल्यावेगा, जिब्बे बडिए स्कूल म | उने डरते न घरा अपणे बाबु तै कोणी बताई | आर आगले दिन १०० रापिया म एक बिहारी पकड़ लेग्या | स्कूल म जाते इ मंजीत नु बोल्या आक गुरूजी मेरा बाबु आग्या | वो मास्टर नु बोल्या आक जी आप आये हो इसके साथ वो बिहारी भिड़ते ही नु बोल्या "हा मास्टरजी हम ही आये है कहो का बात ह हमार लड़के ने का गुनाह कर दिया है जो इतना परेशान कर रहे ह इसको | मास्टर भिड़ते इ पिछाण ग्या | आर नु बोल्या आक तू बिहारी आर यो जाट थार कुकर ब्योत बना इसा, आर भाई वो मास्टर लाग्या उ बिहारी क मारण आर ढंग तै छेता | अरे बाबूजी हमका छोड़ दयो अयसी गलती हम कभी नही करूँगा बिहारी नु करण लाग ग्या | फेर वो मंजीत काट्या गेर क |
 
[ | आर आगले दिन १०० रापिया म एक बिहारी पकड़ लेग्या | स्कूल म जाते इ मंजीत नु बोल्या आक गुरूजी मेरा बाबु आग्या |

jaa manjeet ke baabu ne beraa paat jaandaa , to manjeet er oo bihaari donuaa ne -a jaan tein maar dendaa.
 
मेरा काका थान सिंह ( वो-ए जी की सानी में में ग्यार मिला आया था ) जब १८-१९ साल का होगा | एक बे बुवारे के बखत दो बारी महारा पानी का ओसरा आवन के बखत नहर थम जांदी | असल में १०-१५ की मी गेल ने चडी- चांदी गाम पड़े से ,जब भी नाहर आंदी वे नहर काट देंदे | मेरे काका के छो उठया एर आगली बरियाँ जब नहर आई तो बिना किस्से नु बताई रात नु जा मंड्या नहर काटन | तडके ताहि ऐकले ने नहर काट दी पर घनी चोडी पाटन ना पाई थी इतने बेलदार आलीये | उने बेल्दारां के लट्ठ मारे ,एर ऊडे तें भजा दिए | २ घंटयाँ में बेलदार आ लिए ,पुलिस एर उनका एक्सीकूटइव इन्जिनियेर नु ले के | इतने म्हारे घरां के ९०-१०० किल्ले तल्लारे लेवन लाग रे थे | ऊ की २ मिन्हा की सजा होई | पर जब पाछे जब भी पानी की कमी होंदी तो लोक नु कहंदे थान सिंह नु ,अक रे जा नहर काट के आइये |
 
एक बे म्हारी गाल में एक साइकल आला आग्या | वो बाला के बदले में खील बेचे था (बदले था )| हाम गाल के घने-ए बालक हमेशा की ढाल कट्ठे होगे , एर लाये आपनी माँ, काकियां एर दादियाँ के बाल कट्ठे कर-कर कें | जिन्नी उंने खील दी, वे ख़तम होगी दो गल्याँ में-ए | हाम ६-७ साल के होंगे | इब्ब और खील कुकर खावाँ | ऊ के झोले में मोघा होर्या था ,जी में वो बाल घालर्या था | उका माडा सा ध्यान हट तें -ए ,में ऊके झोले में तें बाल काढ मोघे माँ कें, उस्से ताहि दे देंदा | नु कर-कर कें ,मन्ने कई बे खील खाई | एक अल्बाद और याद आगि अमरूदां की ,काल पोस्ट करूंगा |
 
म्हारे गाम में एक रहड़ी आला आग्या जो लोहे के बदले में अमरुद देवे था | हाम ने भी कुछ फालतू का जंग लाग्या होया लोहा दे कें ने अमरुद खा लिए ,पर उन् तें के मन भरे था | वो रहड़ी आला एक्ला था | आगली ओड नु तो उंने अमरुद धर राखे थे ,एर पाछली ओड नु पुराना लोहा गेरे था | मन्ने म्हारी गाल के ३-४ बालक गेल ले लिए ,एर एक था पाले ( रामपाल ) वो रेहड़ी के लटका दिया गेल नु | जब वो रहड़ी हांके था ,तो उका मुंह आगे नु रहवे था एर लटका होया पाले उंने दिखे कोणी था | एर वो लोहे का कोए टूकडा सहज सी नु तले नु गेर देंदा, बिना आवाज के |एर जब रहड़ी आगे लिकड़ जांदी माडी दूर जब म्हारे माँ तें एक जणा जा कें ठा लेंदा | एर दूसरी गाल माँ के आगे जा कें अमरुद ले लेंदा | नु कर कें ने हाम ने ४-५ बे अमरुद खाए | लोहे के अमरुद |
 
एक किस्सा और याद आग्या | एक साइकल आला म्हारी गाल में आलूबुखारे बेचन लाग्र्या था | ऊँ तो वो लोहे के बदले देवे था पर उकी झोली जो उंने साइकल के दोनु ओड़ ने लटका राखी थी , ऊ में कासन भी गेर रया था | या जब की बात से जब में १४-१५ साल का था | एक मेरा गाल का दोस्त आया एर नु बोल्या उकी दादी ने साइकल आले ताहि कांसे का गिलास बेच दिया आलू बुखारयाँ के बदले में | हामने ऊताही झाड़ा देवन की कही तो वो लाग्या ladan | हामने कई और बड्डे २-३ छोरे बुला लिए एर धिग्ताने उका सारा सोदा गाल में गेर लिया | ऊ धोरे कई कासन पित्तल के एर कांसी के पाए | ये घनखरे कासन ,yaa तो बालक ,जिन्ने बेरा कोणी उनकी किम्मत का या फेर बूढी लुगाई, जिन्न धोरे पिस्से ना होया करदे ,एर आपने बालकां ते न्यारी रह्या करदी, उन् के काम होया करदे | फेर तो हामने वो साइकल आला भुंडा तोड़ा गेर कें एर ऊके जिन्ने आलू बुखारे बच रे थे वे खाए सारी गाल के बालकां ने | उका साइकल भी तोड़ दिया एर पाछे तो कई बुड्डयाँ ने भी ऊके लट्ठ मारे | एर वे कासन जो लगभग १५-२० होंगे छोट्टे बड्डे मिल कें ,लोकां ताहि कही अक आपने पिछान-पिछान ले जाओ | फेर वो साइकल आला म्हारे गाम में कद्दे नि दीख्या |
 
Last edited:
जब में कोलेज में पढ्या करदा तो महारा एक ग्रुप होया करदा | हाम कयाएँ ना कयाएँ के ओडे कोयेसे हो नु बकरा बनाया ,करदे खावन पीवन के मारे | एक बे म्हारे माँ तें एक मदीने के छोरे का जनम दिन था ,हाम ऊ की गेल लाग लिए अक भाई समोसे खुवा | हाम रोहतक बस स्टैंड( पुराना ) पे एक ढाब्बे पे चाले गए ,जो की एक शरणार्थी का था | हाम ने जब समोसे खा लिए तो ऊ ढाब्बे आले ने दुगना बिल बताया | हाम नु बोले अक नु कुकर | ढाब्बे अला नु बोल्या अक छोल्याँ के न्यारे पिस्से आर समोस्याँ के न्यारे | जब के ऊके लिखये होए रेट ५/ रपिये थे | छोला समोसा के बीच में कोमा लार्या था ,एर नु कह दे था, अक देख हाम ने तो पहलम तें -ए लिख राख्या से | पहलम तो उनने रोला कर्या, एर ऊके कई मानस भी आगे ,एर धिन्ग्ताना करण लागे, पिस्से लेवन खातर | मेरा बडला मामा ( गुलू फोगाट का पापा ) चो. करण सिंह जब बस स्टैंड का मेनेजर था | में ऊ ढाब्बे आले नु पकड़ कें उन् धोरे लेग्या | तो मेरे मामा ने वो घणा धमकाया ,अक तू इब्ब तो छुट के आया से ३ दिना पाछे एर फेर कबाड़े करण लाग्या | ऊ ढाबे आले ने ३-४ दिन पहलम एक आर्मी के मेजर गेल्याँ भी पंगा कर्या था, एर ऊ गेल्याँ भी हाथा पाई करी थी , तो ऊ मेजर ने थाना सिटी में रपट लिखा दी थी ,अर यो ढाब्बे आला ३ दिना ताहि छित कें आया था | मेरे मामा ने बताई अक यो हर साल ब्लेक लिस्ट कर्या जा स ,एर फेर नए नाम तें फेर ठेका ले ले स | ऊ ने गलती मान के म्हारे पे पिस्से कोणी लिए, एर नु बोल्या अक चोधरी साब मन्ने के बेरा था ,अक यो थारा रिश्तेदार से इब्ब पाछे कोणी करू | पर जब रोला होर्या था ,तो कई कैनडेकटर एर ड्राईवर भी आगे थे | वे भी नु कहवे थे ,अक ई ढाब्बे आले का तो रोज का रोला होगया ,म्हारी गेल्याँ भी क्याहें ना कयाहें बात पे फेंस्या रह से | ई के तो आछे पडवा हों सें | जब तो हाम चाले गए, पर घायल हो कें ,एर हाम ने सोच ली अक यो छेतना से | एक हफ्ते पाछे हाम ६-७ जाने गए, एर उन् ने बाकियां ने में तो बिठा दिया, उड़े पार्क करी होई बस में ,अक कदे तन्ने यो पिछान ना ले, एर बाकी लागे ऊ का ढाब्बा तोडंअन | उस्से के बांस काढ-काढ के उस एर उस के मानसा के मारे ,एर उन् का सारा सोदा खिंडा दिया एर भाज गे उथों | ठुकाई सुधार |
 
में शायद ६-७ साल का होउंगा जब की बात सें | गर्मियां में मेरे पेट में हल्का-हल्का दरद रह्या करदा सोच आदि भी ठीक ना होया करदी | मन्ने मेरे दादा तें बताई , तो उनने रोज ३ बे एक चूरन खावन ने दिया एर एक कोकाकोला की बोत्तल पीन की कही १५ दिन ताहि | मेरा दादा देसी बेद था | में लाग्या रोज पीवन | माडे दिना में आदत पड गी | पर ऊँ कती ठीक भी होग्या | फेर तो जब भी जी करदा में मेरी माँ ताहि कह देंदा अक पेट दुखे स | एर कोकाकोला पी आंदा | एक दिन मेरा दोस्त सुरेंदर बोल्या अक रे तन्ने थारे घर के कुकर पिस्से दे दे सें कोका पीवन खातर | मन्ने बता दी अक पेट दुखन के बहाने ते ले आऊँ सूँ | ऊने मेरी माँ ताहि जा बताई अक ई के इब्ब पेट ना दुखता | यो बहकावे स | तो मेरे थप्पड़ भी लागे एर फेर हमेश्या खातर मेरी कोका कोला भी बंद होगी | फेर मेरी एर सुरेंदर की लड़ाई भी होई पर उंने में कोका प्या के मना लिया | आज भी हाम आछे दोस्त सां |
 
में शायद ६-७ साल का होउंगा जब की बात सें | गर्मियां में मेरे पेट में हल्का-हल्का दरद रह्या करदा सोच आदि भी ठीक ना होया करदी | मन्ने मेरे दादा तें बताई , तो उनने रोज ३ बे एक चूरन खावन ने दिया एर एक कोकाकोला की बोत्तल पीन की कही १५ दिन ताहि | मेरा दादा देसी बेद था | में लाग्या रोज पीवन | माडे दिना में आदत पड गी | पर ऊँ कती ठीक भी होग्या | फेर तो जब भी जी करदा में मेरी माँ ताहि कह देंदा अक पेट दुखे स | एर कोकाकोला पी आंदा | एक दिन मेरा दोस्त सुरेंदर बोल्या अक रे तन्ने थारे घर के कुकर पिस्से दे दे सें कोका पीवन खातर | मन्ने बता दी अक पेट दुखन के बहाने ते ले आऊँ सूँ | ऊने मेरी माँ ताहि जा बताई अक ई के इब्ब पेट ना दुखता | यो बहकावे स | तो मेरे थप्पड़ भी लागे एर फेर हमेश्या खातर मेरी कोका कोला भी बंद होगी | फेर मेरी एर सुरेंदर की लड़ाई भी होई पर उंने में कोका प्या के मना लिया | आज भी हाम आछे दोस्त सां |

Us tame pe Coca Cola na hoya karti......Campa Cola hoya karti...hahaha
 
एक बे म्हारे गाम के खेताँ माँ के नई हाई पवार की लाइन बिछे थी बिजली की | तो म्हारे गाम के २-३ बालकां ने मिल कें ( ये वे -ए बालक थे जिन्न ने पाछे बड्डे हो कें फोज का दारु का ट्रक खोसया था एर जेल जा कें आये थे,पर तार काटे जब वे १५ -१६ साल के होंगे ) | तार काट लिए रात नु | जब आगले दिन बिजली आले आये एर उनने तार कोणी पाए तो उनकी भाजम भाज होगी | उनके अफसर भी आगे पर बेरा कोणी पाट्या अक कीने काटे सें | पर उनने हाल भाल लेनी सुरु कर दी एर रात नु आपना एक मानस भी छोड़ दिया | एक दिन रूक कें जब ये उन् ताराँ नु साइकल पे बोरी में घाल कें रोहतक बेचन ले जां थे तो पकडे गए | फेर बिजली आलयाँ ने इनके घने मारे एर इनके घर के हाथ पाँ जोड़ के छुडा कें लाये | पुट के पाँ पालने में पिछने गए |
 
एक किस्सा और याद आग्या | एक साइकल आला म्हारी गाल में आलूबुखारे बेचन लाग्र्या था | ऊँ तो वो लोहे के बदले देवे था पर उकी झोली जो उंने साइकल के दोनु ओड़ ने लटका राखी थी , ऊ में कासन भी गेर रया था | या जब की बात से जब में १४-१५ साल का था | एक मेरा गाल का दोस्त आया एर नु बोल्या उकी दादी ने साइकल आले ताहि कांसे का गिलास बेच दिया आलू बुखारयाँ के बदले में | हामने ऊताही झाड़ा देवन की कही तो वो लाग्या ladan | हामने कई और बड्डे २-३ छोरे बुला लिए एर धिग्ताने उका सारा सोदा गाल में गेर लिया | ऊ धोरे कई कासन पित्तल के एर कांसी के पाए | ये घनखरे कासन ,yaa तो बालक ,जिन्ने बेरा कोणी उनकी किम्मत का या फेर बूढी लुगाई, जिन्न धोरे पिस्से ना होया करदे ,एर आपने बालकां ते न्यारी रह्या करदी, उन् के काम होया करदे | फेर तो हामने वो साइकल आला भुंडा तोड़ा गेर कें एर ऊके जिन्ने आलू बुखारे बच रे थे वे खाए सारी गाल के बालकां ने | उका साइकल भी तोड़ दिया एर पाछे तो कई बुड्डयाँ ने भी ऊके लट्ठ मारे | एर वे कासन जो लगभग १५-२० होंगे छोट्टे बड्डे मिल कें ,लोकां ताहि कही अक आपने पिछान-पिछान ले जाओ | फेर वो साइकल आला म्हारे गाम में कद्दे नि दीख्या |
asuta Soorma tha tu to
 
मेरा काका कँवल सिंह पहलवानी कर्या करदा | तो साझे के घर में उंने खान ने कम मिला करदा | तो वो पाछे तें दूध चोरी कर कें पीना एर मलाई तार कें खाना ,घी चोर कें खाना, उका खुराक पूरी करण का तरिका था | चोर -चोर चाचा -भतीजा | मन्ने भी वो सामिल राख्या करदा आपने भोजन चोरी के काम में | मेरा काम था बहरने में खडा हो कें पहरेदारी करण का | जा मेरी दादी आज्या तो कस कें नु कहना था (कोड)दादी भूख लागरी से ,तो मेरा काका समझ जांदा एक माँ आली | पकड़न तें बच जांदा | एर माल नु ले कें चुबारयाँ में बैठ के खांदे | जब मेरा बाबू फोज माँ तें छुट्टी आया तो मेरी दादी ने सिकायत करी अक यो कँवल कयाएं ने ना छोड़ता | तो मेरे बाबू ने रसोई में एक हारा बनवाया पक्का छात आला एर उकी चिमनी काढ दी छात में एर आगे एक जालियां आला दरवाजा ला कें ताला ठोक दिया | दो दिन में-ए मेरा काका बेरा ना कुकर किथों एक दूसरी ताली बनवा लाया | चोरी फेर चालु | जहां चाह वहाँ राह |
 
म्हारा एक गणित का मास्टर था -शाहजी |वे सरदार जी थे | पूरा ना तो उनका मन्ने बेरा कोणी पर इससे नाँ तें जाने जाया करदे | वो दशमी में एक मदीने के छोरे ने ले आया एर दाखला करा दिया ,अक बेरा ना महारा हेडमास्टर लाया था | महारा हेड मास्टर भी मदीने का था रतन सिंह दांगी | दोनु मास्टर भोत बढ़िया थे | सारा स्कूल उनकी इज्ज़त कर्या करदा | ई छोरे का नाँ तो याद कोणी पर ई का बाबु ( शायद राज सिंह दांगी ) ईंट के भट्ठे लाया करदा, एर चो. छोटूराम पोल्तेक्निक के गेट के सहारे इनकी सफ़ेद कोठी होया करदी ,मॉडल टाऊन में | इब्ब बेरा ना से अक नि | एर साह जी मास्टर की झटका मीट की दूकान थी 'डी' पार्क धोरे | शायद इनकी उड़े की जान पिछान थी | पर साह जी मास्टर ने ठेका ले लिया यो छोरा पास करान का , दसमी में | यो छोरा पढ्या कोणी करदा ,बस खाया-खाया करदा ,एर घना कसूता मोटा था | पर था कसूता हंसोकड़ा | हँसे जांदा एर हंसाये जांदा | थोड़े दिना में हाम सारे ऊ के दोस्त बन गे | उने छोडन उनकी एक फिअट कार आया करदी, एर वा-ए स्कूल छूटें पाछे ले जांदी | हाम कई बे म्हारे खेताँ ताहि ऊ में लाद के जांदे , मझक लेवन के मारे | एक दिन यो छोरा शाह जी मास्टर ने किम्मे उलटा बोल पड्या | ऊ दिन महारा हेडमास्टर भी कोणी था एर शाह जी मास्टर -ए हेडमास्टर की ठां ले रया था | वो छोरा ले जा के हेडमास्टर के कमरे में, एर कर कें भीतर तें बंद ,घना कसूता काटया गेर कें | घनी वार ताहि तो ऊ की मिमयान की वाज आंदी रही पर फेर रूक गी | शाह जी मास्टर ने बहरना खोला तो उन के घने कसूते पसीने छुट रे | एर वो छोरा बेहोस पड्या था| ऊ के पानी के छींटे भी मारे पर वो हल्या नि | एर साह जी मास्टर घना घबरा गया | सारे सकूल के मास्टर कट्ठे हो गे अक कदे किम्मे अनहोनी ना हो जा, बेचारा एक्ला छोरा था अपने बाबु का | जब स्कूल में फोन लाग लिया था | साह जी मास्टर ने फोन करदिया उनके घरां एर २० मिनट में ऊ छोरे का बाबु आलिया कार ले कें | एर जब ऊ ने कार की आवाज सुनी तो आँख खोली | ७-८ बालकां ने लाग कें वो कार में गेरा | फेर वो १० दिन ताहि स्कूल में कोणी आया | तो साह जी मास्टर उंने मना कें लाया अक आजा इब्ब तेरे मारूँ कोणी | ऊँ भी साह जी मास्टर की जान सूख गी थी ऊ दिन जब ऊने आधे घंटे ताहि होंस ना आया था | तो मास्टर में ऊँ भी हिम्मत ना रह री थी मारण की | जब वो छोरा आया ,तो हाम ने बुझी रे के होया, घने मार दिए के , तो उने बताई अक भाई यो पंडा ना छोड़े था मारण तें, जयां तें में घना चिल्लाया एर जान बुझ कें बेहोस होवन का नाटक कर्या | पर शाह जी मास्टर ने भी वो कुकरे ना कुकर दसमी पास करा-ए दिया | बढ़िया गुरु -- शिष्य |
 
Back
Top