albaadi baalkaan key kissey.

चोमासे सुरु होने के आसपास गंडयाँ में पोरी पड़नी सुरु हो जाया करें | एक बे मेरे दोस्त नरेंदर नु बोल्या अक म्हारे इंख में ४-५ पोरी पड़ रि सें गंडयाँ में, ( उनका ईंख आछा तगड़ा था ) एर दिन में तो म्हारे घर के खेताँ में रहवे सें एर साँझ सी ने मन्ने डर लागे स तम मेरी गेल चालो गंडे चुन्घन | तो में एर सुरेंदर भी हो लिए गंडे चुन्घन के मारे ऊ की गेल, डर तो हामने लाग्या-ए ना करदा | एर अन्धेरा होयें पाछे हाम रोज ८-१० गंडे रफ्डआंदे बांद्रआँ की ढाल | ८-१० दिन उड़े ईंख के बिचाले बड़ा खापरा बन गया ,खाली ठा का | एक दिन नरेंदर के बाबू ने कोठड़े पर तें देख लिया अक ईंख के बिचाले खाली कुकर दिखे स | दो तीन दिन ऊने नजर राखी एर हाम पकडे गए | नरेंदर का बाबू सीधा मानस था ,एर ऊ का छोरा खुद गंडे चुन्ह्गन में सामिल था, नु कर कें हाम पीटन तें बच गे | पर ऊ दिन पाछे हाम कई मिन्हा ताहि नरेंदर के बाबू ने देखते-ए लुक जाया करदे |
 
म्हारी गाल में एक लुगाई थी नाँ तो ऊ का याद कोणी | ऊ की एक भुंडी आदात थी अक वा बणी माँ तें ,जित हाम डांगर बिठाया करदे महारा बटोला होया गोबर चक ले जांदी | किस्से-२ की कुरड़ी मांह तेंह बगाया होया गोबर भी चोर लिया करदी | साबत दिन तसला ठाएँ हंडे जांदी | ऊ धोरे एक-ए मेंहस थी पर वा आये साल ३-४ बिटोड़े बेच्या करदी चोरी के गोबर के | एक साल इस्सा होया अक नरेंदर हेर ने घेर बनाना था तो उनने भट्टा लाया | ऊ में घने इंधन की जरूरत थी | किम्मे उनका होगया एर किमी खरीद लिया ,फेर भी इंधन की जरूरत रह गी | ई लुगाई पे भी बि९झि पर ई ने घने पिस्से मांगे | इससे -२ मानसा का इलाज म्हारे धोरे था | दो तीन दिन पाछे ला के ट्रेली रात नु ऊके गितवाड़े में एर ऊ के दो बिटोड़े मारे भट्ठे में दे कें | पाछे हांडी रिंगती | लोकां का नाश जाइयो | लोक बोले अक जब तू दुनिया का गोबर ठान्दी हांडी जब तेरा नाश ना गया | बिटोड़े चोर बालक |
 
म्हारी गाल में एक था रामसनेही (अजीब सा नाम स ) ऊनका ब्योंत तो था कोणी पर एक कार ले आया मेरे ख्याल में किराए पे चलान खातर किथों पिस्स्याँ का जुगाड़ कर कें | एर जित हाम खेल्या करदे एक खाली घेर में उडे ल्या खड़ी करी | एर वो बालकां ने उड़े तोह भजान लाग्या अक मेरी गाडी खराब हो ज्या गी | ऊ तें कई बे कही अक तम आपने घेर में खड़ी कर लो एर या ठा भी थारी कोनो पर उलटा वो मारण भजता| वे नु कंडे अक महारा घेर दूर स एर गाडी में किम्मे उजाड़ हो ज्या गा | २-३ बे तो ऊ की किबे १ पहिये की कबे २ पहियाँ की बाल (हवा) काढ दी पर फेर भी वो मान्या कोणी | एक दिन ऊ की कार का तिरपाल जो पलास्टिक सी का था , वो तार कें एर आग ला दी | ऊ दिन पाछे उन्ने उड़े कार के ,साइकल भी ना खड्या करा | हक़ मांगने से नहीं मिलता छिना जाता हे |
 
म्हारी गाल में एक उत बुढिया थी सत्संगन (वा-ए जिहने मेरे सर में भाठा मार्या था )| एक बे ऊ ने आपना पोता पीट दिया कीसे माड़ी-मोटी बात पे | ऊ छोरे का नाँ शायद मनोज था | मनोज की माँ भी आपनी सासू तें घणी डर्या करदी | वा भी किम्मे ना बोली | ऊ छोरे के खाम खा पीटन का करडा दर्द होर्या था | जब ऊ की दादी दोफारी में आपनी जूती काढ के खाट तले, सोगी ,ते मनोज ने ऊ की जूतियाँ में रोग काट दिया | एर जब सत्संगन उठी तो ऊके पा धंस गे | फेर हांडी गाल बकती कई दिन ताहि ,पर ऊने बेरा ना पाट्या अक यो रोग कीने काट्या था | गुहला बदला |
 
I doubt kade yo rog manoj ke dada ne kata ho instead of Manoj.please check.

म्हारी गाल में एक उत बुढिया थी सत्संगन (वा-ए जिहने मेरे सर में भाठा मार्या था )| एक बे ऊ ने आपना पोता पीट दिया कीसे माड़ी-मोटी बात पे | ऊ छोरे का नाँ शायद मनोज था | मनोज की माँ भी आपनी सासू तें घणी डर्या करदी | वा भी किम्मे ना बोली | ऊ छोरे के खाम खा पीटन का करडा दर्द होर्या था | जब ऊ की दादी दोफारी में आपनी जूती काढ के खाट तले, सोगी ,ते मनोज ने ऊ की जूतियाँ में रोग काट दिया | एर जब सत्संगन उठी तो ऊके पा धंस गे | फेर हांडी गाल बकती कई दिन ताहि ,पर ऊने बेरा ना पाट्या अक यो रोग कीने काट्या था | गुहला बदला |
 
manoj kaa dada to ghane saal pahalam gujar liyaa thaa, wo to pakkaa s ,er ebb to budhiyaa nu bhi gujrein kai saal hogey chek kithon karaan.
 
म्हारे गाम का एक छोरा घणा पढ़ लिख्गा था एर होस्यार भी घणा था | उका नाँ ते बेरा कोणी कुंकी जब हाम घणे छोटे थे | उनके घरक्याँ ने ऊ तें घनी उमीद थी ,अक यो बड़ा अफसर बनेगा | पर वो कमुनिस्ट बन गया ,एर घरां आणा -जाणा भी बंद कर दिया | साल-२ भर परचार करदा हंडे जाया करदा | उनके घरक्याँ की एर भाइयां की सारी उमीद टूट गी | एक बे वो एक प्रोजेक्टर एर गरीबी के ऊपर बनाई होई एक फिलम दीखान आया गाम में | ऊ की गेल २-३ छोरी एर २-३ छोरे थे परचार करनिये | एर बीच -बीच में वे भाषण भी देवे थे | अक जमींदार ईंख छुल्वान के लिए मजदूर को ले जाता हे और उसको केवल उप्पर का गोला देता हे और गन्ना खुद रख लेता हे | ये उनके साथ ज्यादती हे | मजदूर को और उसके परिवार को साल भर बंधुआ मजदूरी करवाते हैं औए साल में एक बार कुछ मण अनाज देते हैं आदि-आदि | उनने कई और इस्सी बात कह दी | जाट्टां के गाम में जाट्टां के विरोध में भाषण | पहलम तो उससे के भाइयां ने जो उसके कमुनिस्ट बनने के कारण चिडे होए थे ,एर गेल की गेल गाम के बाल्कां ने उनके आछे ठोके, एर उनका प्रोजेक्टर तोड़ कें बागा दिया एर, नय्र्या रेता मार्या उनके | एर उनकी जीप के शीशे-शास्ये तोड़ दिए | वे तो इस्से भाजे आज आवीं सें | एर उस छोरे का भी ,में इतनी गाम में था, वो कदे बोड के नि आया |
 
म्हारे गाम का एक छोरा घणा पढ़ लिख्गा था एर होस्यार भी घणा था | उका नाँ ते बेरा कोणी कुंकी जब हाम घणे छोटे थे | उनके घरक्याँ ने ऊ तें घनी उमीद थी ,अक यो बड़ा अफसर बनेगा | पर वो कमुनिस्ट बन गया ,एर घरां आणा -जाणा भी बंद कर दिया | साल-२ भर परचार करदा हंडे जाया करदा | उनके घरक्याँ की एर भाइयां की सारी उमीद टूट गी | एक बे वो एक प्रोजेक्टर एर गरीबी के ऊपर बनाई होई एक फिलम दीखान आया गाम में | ऊ की गेल २-३ छोरी एर २-३ छोरे थे परचार करनिये | एर बीच -बीच में वे भाषण भी देवे थे | अक जमींदार ईंख छुल्वान के लिए मजदूर को ले जाता हे और उसको केवल उप्पर का गोला देता हे और गन्ना खुद रख लेता हे | ये उनके साथ ज्यादती हे | मजदूर को और उसके परिवार को साल भर बंधुआ मजदूरी करवाते हैं औए साल में एक बार कुछ मण अनाज देते हैं आदि-आदि | उनने कई और इस्सी बात कह दी | जाट्टां के गाम में जाट्टां के विरोध में भाषण | पहलम तो उससे के भाइयां ने जो उसके कमुनिस्ट बनने के कारण चिडे होए थे ,एर गेल की गेल गाम के बाल्कां ने उनके आछे ठोके, एर उनका प्रोजेक्टर तोड़ कें बागा दिया एर, नय्र्या रेता मार्या उनके | एर उनकी जीप के शीशे-शास्ये तोड़ दिए | वे तो इस्से भाजे आज आवीं सें | एर उस छोरे का भी ,में इतनी गाम में था, वो कदे बोड के नि आया |

Ya Albaad T Na Laggi Jeete.................
 
मदीने की सीम के सहारे म्हारे २ किल्ले थे एर मेरे काका थान सिंह हर के भी{वो-अ जी ने नहर काटी थी } | उड़े हाम हर साल बाजरा बोया करदे ,पानी कम लाग्या करदा जयांतें | मेरा काका कँवल सिंह दशमी कर चुका था एर फोज में भारती होवन की बाट देखन लाग्र्या था( पहलम जाट्टां के बालकां ने फोज के सिवाय कया-ए का बेरा-ए ना था ) | जब सरटीयाँ में बाजरे के दाने पड लिया करदे तो खेताँ में सबके डामचे घाल दिया करदे, इब्ब तो रिवाज ख़तम होरी स | कई हज़ार चिड़िया की ड़ार हांडया करदी ,जा एक बे खेत में पड गी तो खेत साफ़ | मेरे काका कँवल की ड्युटी २ बजे ताहि थी चिड़िया उड़ान की एर मेरी सकूल छूटें पाछे २ बजे तें अन्धेरा होए ताहि | मेरे काका ने डांगरा की सानी काटनी एर खुर्रा करना एर धार काढ्नी पड्या करदी | जब म्हारे २०-२५ डांगर होया करदे | में छोटा घणा था एर दोनु किल्ल्यां में जेवड़ी पूर के डिब्बयाँ के बाँध राखी थी जुकर जा चिडयाँ की ड़ार पड़े तो सारे डिब्बे जेवड़ी खींचे तें बाजन लाग जा | में जेवड़ी खींचता तो माड़ी वार पाछे मेरे हाथ दुखन लाग जांदे | म्हारे डामचे तें आधा किल्ला दूर मेरे काका थान सिंह का डामचा था( यो माडा रावला भी था ) | ऊ ने भी नु-ए डिब्बे बाँध राखे थे | मन्ने एक दिन लूकमा एक ओर जेवड़ी ल्या कें एर थान सिंह आली जेवड़ी के बाँध दी एर जब भी मेरा काका थान सिंह आपनी डिब्बे बजान्दा गेल म्हारे भी बाज्दे | एर में खाम खा रोला मचाये जांदा अक जानू तो में भी जेवड़ी खीचन लाग्र्या सु | एर सांझ नु जेवड़ी खोल कें उससे की गेल घरां आ जांदा | भोला बचपन |
 
Tu padhe ja ne kyun khamkha tension lewe hai
Gobinda ki film ar Binder ke thread mein dimag kharch karega to bawla ho jaga

haan bhai rana,ee badey JL ke samikshk ki bhi baat man le,yo bhi kayaa-a me dimaag karch naa kardaa,beraa naa kharch karan khaatar s bhi ak ni ee dhorey,mallika sahrawat ki dhaal
 
Tere comments ka bhi yoh e haal ho ra bhai govinda ki film barga.......... yeh negative criticism chhod de ne bhai tu.....achha naa laage tenne to ignore karna seekh le....

waise, my personal opinion.... Ravinderjeet ke kissey majedaar sein bhai... kisey ka baasi punjab kesri ka churaaya-od chutkala padhan tein to laakh guna badhiya sein yeh kissey .....



Gobinda ki film ar Binder ke thread mein dimag kharch karega to bawla ho jaga
 
Tere comments ka bhi yoh e haal ho ra bhai govinda ki film barga.......... yeh negative criticism chhod de ne bhai tu.....achha naa laage tenne to ignore karna seekh le....

waise, my personal opinion.... Ravinderjeet ke kissey majedaar sein bhai... kisey ka baasi punjab kesri ka churaaya-od chutkala padhan tein to laakh guna badhiya sein yeh kissey .....

rakesh ke ek ajeeb tarah ki khaaj se jo deemaag ke bhitar doonghe hoyaa karey ,waa mitaan khaatar issey-2 comment maare tein madaa saa aaraam mil jaa s rakesh ne,koye baat naa .
 
iski albaad padhan mein jab itna tem lage hai to yu to plan banan mein e rehta hoga. Tanne lage hai is dhore kime aur karan ka tem bhi rehta hoga?
 
जब मेरे मामा की झंग कालोनी रोहतक में कोठी बणे थी ,तो सामी ५० मीटर पे ,एक कोए जाट भाई भी आपनी कोठी बाणान लाग्र्या था | एक दिन ऊ धोरे रेती कम पड़गी एर वो मेरे मामा की बची होई रेती माँ तें ५० रेती के पीपे मांग के लेगा (पीपा माप था )| ये पीपे मेरे आगे-ए मांगे थे उंने | २ साल पाछे जब मेरा मामा उप्पर के कमरे बाणान लाग्या, एर जब ऊ जाट भाई पे आपणी रेती वापस मांगी, तो वो नाट ग्या ,अक मन्ने तो थारे पे रेती ली-ए कोणी ,एर उने ,एर ऊ की बहु ने कसूता रोला पा दिया उड़े| जब की उनके बहरने आगे घनिये बची होई रेती पड़ी थी | फेर मेरे मामा ने में बुलाया एर उनके सामी -ए बुझी तो मन्ने भी बताई अक तमने ५० पीपे लिए थे ,तो वे बोले थारा भांजा थारी ओड ने -ए बोलेगा | हामने कोणी ली रेती | मेरे मामा का छोरा गुलू फोगाट महा अल्बादी ( उकी शायद इब्ब परिचय देवन की आवाशय्क्ता ना स ) एर मन्ने पलान बनाई एर तीन चार दिन पाछे एक रेहड़ी आले की रेहड़ी मांग लाये, एर रात नु ऊ पे बोरी भर-भर कें ,धर कें ,एर उनकी सारी रेती आपनी रेती में ल्या मिलाई , जो लगभग १५० पिपयाँ की बराबर तो जरूर होगी | आगले दिन म्हारी रेती धोरे के सूंघते हंडे अक कदे ये ना ठा लाये हों ,पर किम्मे प्रूफ तो था कोणी एर ऊँ बोलन की हिम्मत ना होई| कर भला हो बुरा |
 
Bhai ravi JBG group se salha kerke desi comics nikal de bahut safal hoggi.....
 
म्हारे खेत नहर एर सड़क के कूँने में पड़े स | मेरे दादा ने दो कनाल जमीन एक बेरी के बानिये हरिराम सेठ ताहि दान में दी थी, ऊ कूने की | ऊ जमीन में सेठ हरिराम ने एक धरम शाला बनवाई एर एक कुंवा खुदवाया | उडे तीन एक किलयाँ में महारा बाग़ था आम एर जामना का | मेरा एक दादा रंडुआ था ,सुधन सिंह , वो ऊ धरम शाला में रेंदा बाग़ का रुखाला | एर बखत सर ऊ की रोटी पूंचा दी जाया करदी खेत में | वो रंडुआ ऊँ कोणी रह्या | उस बखत के पंजाब के बहोत बड़े नेता(रोहतक जिले का ) की छोरी का रिश्ता आया था ऊ के पर वो सगाई छोड़ कें एर आजाद हिंद फोज में भज ग्या | एक दिन इस्सा होया एक म्हारे गाम के ४-५ छोरे बाग़ में चाले गए | एर नु बोले दादा हमने ५ किलो जामन दे -दे | ऊ की उम्र हो गी थी एर पिछाण में तो किम्मे आये कोणी | पर इतनी मेरा दादा बाग माँ तें जामन ले कें आया इतने वे ऊ के सोड़- गूदडे एर ताखाड़ी बाट ले कें जांदे रहे | छो में अगले दिन बुला के खाती एर सारा बाग़ बेच दिया (कटुवा दिया )| हाम जब बड्डे होए एर जब दूसर्याँ के बागाँ माँ तें आम ,जामन ,एर बेर चोरी करते हांडया करदे तो मेरे दादा पे घणा छो आया करदा , एक वो बाग़ म्हारे इब्ब होंदा तो मजे होंदे | पर उन् बालकां का कदे बेरा नि पाट्या अक वे कूण थे |
 
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