Dohe

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anjali ji , please can you put in meanings as well! :)


nice compilations all! :)


please put the meaning as well so that we can all learn something ! :)

घर से बाप्पू की किसी बात पे वोह घने छो में लिकड़ता है, मन में छो के मारे आग लगी हुई थी , उसी सन्दर्भ में ये दोहा है

मैं जाट पिता का लाड़ला पुत्र हूँ, मुझे प्यास लगी है । मेरे मन में जो आग लगी है वह बिना पानी पिए नहीं
बुझेगी । हालाँकि रास्ते में पक्का कुआँ बना हुआ है लेकिन न जाने किस पापी ने यह ज़ुल्म किया है कि उस पर डोल नहीं रखा है ।
 
थोड़ा-सा नीर पिला दै, बाकी घाल मेरे लोटे मैं
अरे तूँ भले घराँ की दीखै, तन्ने जन्म लिया टोटे मैं
तू मेरे साथ होले गैल, दामण मढ़वा दिऊँ घोटै मैं !
 
ye thread dekh kar mere man mein bhi Doha likhane ki ichha Jagrit hui,,,,ek doha hai

"Jaat Lath Bajaayega,,,,
Jat Land Badhtaa Jaayega":rock
 
दोष पराये देख कर ,चला हसंत हसंत ,
अपने याद ना आई , जिनका आदि ना अंत i



जो घर साधू ना पुजिये , धरती सेवा नाही ,
ते घर मरघट सा दिखे , भूत बसे दिन माही i
 
Anjali ye to mujhe ek deshi kahawat lag rahi hai?
थोड़ा-सा नीर पिला दै, बाकी घाल मेरे लोटे मैं
अरे तूँ भले घराँ की दीखै, तन्ने जन्म लिया टोटे मैं
तू मेरे साथ होले गैल, दामण मढ़वा दिऊँ घोटै मैं !
 
तू पत्थर की ऐंठ है, मैं पानी की लोच।
तेरी अपनी सोच है, मेरी अपनी सोच।।


सब-सा दिखना छोड़कर, खुद-सा दिखना सीख।
संभव है सब हों ग़लत, बस तू ही हो ठीक।।


सब कुछ पलड़े पर चढ़ा, क्या नाता क्या प्यार।
घर का आँगन भी लगे, अब तो इक बाज़ार।।
 
My favorite

Kabira Teri Jhompri, Gal Katiyan Ke Paas, Jo Karenge So Bharenge, Tu Kyon Bhayo Udaas..
 
Last edited:
क्षमा शोभते उस भुजंग को जिसके पास गरल हो ,
उसका क्या जो दंतहीन , विषहीन , विनीत सरल हो i


जो बडन को लघु कहे , नहीं कबीर घट जाए ,
गिरिधर मुरलीधर कहे , कछु दुःख मानत नाए i


साँच बराबर तप नहीं , झूट बराबर पाप ,
जाके ह्रदय साँच है, ताके ह्रदय आप i

माया तजे तो क्या हुआ , मान ताज़ा नहीं जाए ,
मान बड़े मुनिवर गए , मान सबन को भाए i

सुर, नर, मुनि, जन, देवता, ब्रह्म, विष्णु,महेश,
ऊँचा महल कबीर का , पार ना पावे शेष i
 
my favourate

कहति नटति रीझति मिलति खिलति लजि जात।
भरे भौन में होत है, नैनन ही सों बात॥
 
:)

काला नाला ही में जल , सो फिर पानी होए
जो पानी मोती भया , सो फिर नीर न होए !!



तन मन लज्जा न करें , काम बाण उर्शाल
एक काम सब बस किये , सुर नर मुनि बेहाल !!



कबीरा यह गति अटपटी , चटपटी लखी न जाये
जो मन की खटपट पिटे , अधर भया ठहराए !!



कबीरा लहरी समुद्र की मोती बिखरे आये
बगुला परख न जानही , हंसा चुन चुन खाए !





सांच बराबर तप नहीं , झूठ बराबर पाप
जाके ह्रदय सांच है , वाके ह्रदय आप !




@ अंजू / अंजू : दिस वन फॉर यू :)




सबका हूता लीजिये , सोचा शब्द निहार
पक्षपात नहीं कीजिये , कहे कबीर विचार :) !
 
भक्ति महल बहु उंच है , दूर से ही दर्शाए
जो कोई जन भक्ति करे , शोभा वरनी न जाए !



बलिहारी गुरु आपुनो , घडी घडी सौ सौ बेर
मानुष से देवत किया , करत न लागी बेर !



दुर्लभ मानुष जनम है , देह न बारम्बार
तरुवर जो पत्ते झरे , बहुरि न लागे डार !



मांगन मरण सामान है , मत मांगो कोई भीख
मांगन से मरना भला , यही सतगुरु की सीख !




कहना था सो कह दिया , अब कछु कहा न जाए
एक रहा दूजा रहा , दरिया लहर समाये !!
 
Anil,
Khod Khad Dharati Sahe
Kaat Koot Vanaraay
Kutil Vachan Sadhu Sahe
Aur Se Saha Na Jaaye:p

Arr yo Anju ka doha-
Kehna tha so keh diya, baaki raha na kuch,
Jug bhala toh kab bhala, Jab rehna aaye chup:D
@ अंजू / अंजू : दिस वन फॉर यू :)




सबका हूता लीजिये , सोचा शब्द निहार
पक्षपात नहीं कीजिये , कहे कबीर विचार :) !
 
Anil,
Khod Khad Dharati Sahe
Kaat Koot Vanaraay
Kutil Vachan Sadhu Sahe
Aur Se Saha Na Jaaye:p

Arr yo Anju ka doha-
Kehna tha so keh diya, baaki raha na kuch,
Jug bhala toh kab bhala, Jab rehna aaye chup:D


:) :) Appreciate that! :)
 
For today !

प्रेम छिपाए न छिपे , जा घाट परगट होए
जो पे मुख बोले नहीं , नैन देते हैं रोये !


सुख के संगी स्वार्थी दुःख में रहते दूर
कहे कबीर परमार्थी दुःख सुख सदा हुजूर !


सुर नर मुनि जन देवता , ब्रह्म विष्णु महेश
ऊंचा महल कबीर का पार न पावे सेष !



कृष्ण करीमा एक है , नाम धराया दोए
कहे कबीरा दो सुनी भरम पड़े मति खोये !



प्रेमी ढून्दन मैं फिरूं , प्रेमी मिले न कोए
प्रेमी सो प्रेमी मिले , विष से अमृत होए !!


प्रेम बिना धीरज नहीं , विरह बिना बैराग
सतगुरु बिन जावे नहीं , मन मन सा का दाग !



कुशल कुशल जो पूछता , जग में रहा न कोए
जरा मुई न मन मुआ , कुशल कहाँ से होए !!
 
ज्ञान रतन का जातां कर , माटी का संसार
हाय कबीरा फिर गया , फीका है संसार !!


कबीर मन पंछी भया , भय ते बाहर जाए
जो जैसी संगती करे , सो तैसा फल पाए !!


लकडी जल कोयला भई , कोयला जल भयो राख
मैं पापिन ऐसी जली , कोयला भई न राख !!


करता था तो क्यूँ रहा , अब करी क्यूँ पछताए
बोए पेड़ बबूल का , अम्बवा कहाँ से पाए !!!



भक्ति भजन हरी नाम है , दूजा दुःख अपार
मनसा वाचा कर्मणा कबीरा सुमिरन सार !!!




 
sabte pahelin you pada tha....

kal kare so aaj kar, aaj kare so ab !
pal main pralay hoegi, bahuri karega kab !!


ajkal ye bhi sain ....

na mera hai kuch bhi, na tera hai koe !
jo mann prem bharat, phoot phoot hai roye !!

na paden ka chaanv hai, na nadiya ka neer !
mera aapan kuch hai, to mera hridya or peer !!
 
तीरथ गए से एक फल , संत मिले फल चार
संत गुरु मिले अधिक फल , कहे कबीर विचार सुनो ....


प्रेम पियाला जो पिलाया , शीश दक्षिणा देये
लोभी शीश न दे सके , नाम प्रेम का लेये !


माया मरी न मैं मारा , मर मर गया शरीर
आशा तृष्णा न मरी , कह गए दास कबीर ..!


माखी गुड में गडी रहे , पंख रहे लिपटाए
हाथ पल और सर धुनें , लालच बुरु बलाए!!


मन मोटा मन पातरा मन पानी मन लाये
मन की जैसी उपजे , तैसी ही हो जाये !!



सातों शब्द जो बाजते , घर घर होर राग
ते मंदिर खाली पड़े , बैठन लागे काग !!


 
दास कहावन कठिन है , मैं दासन का दास
अब तो ऐसा होई रहा , पाँव तले की घास !!




भक्ति महल बहु उंच है , दूर ही ते दर्शाए
जो कोई जन भक्ति करे , शोभा बरनी न जाए !




एक दिन ऐसा होयेगा सब सौं परे बिछोह
राजा रानी राव रंक सावध क्यूँ नहीं होए ?





नींद निशानी मौत की , उठ कबीरा जाग
और रसायन छाडी के , नाम रसायन लाग !!





मैं रोयुन सब जगत को , मौको रोवे न कोए
मौको रोवे सोचना जो शब्द बोए की होए !!

 
पर-उपदेश कुशल बहुतेरे ;
जे अचरिन, नर नहीं घनेरे
!

करम प्रधान विश्व करी राखा!

तुलसीदास
 
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