Hisar Byelection on 13-Oct-2011

इस उपचुनाव का परिणाम चाहे किसी के पक्ष में जाए लेकिन राजनैतिक रूप से चौटाला को लाभ ही लाभ है भले हारे या जीते ! चौटाला का मत प्रतिशत स्वाभाविक रूप से बढेगा , जो की आने वाले चुनावो में न केवल कार्यकर्ताओ का मनोबल वर्धक होगा बल्कि जनता के अंदर विस्वास पैदा करेगा ! कुलदीप का राजनैतिक भविष्य दाव पर हैं वहीँ राज्य के मुख्यमंत्री हूडा के लिए ये चुनाव जे पी के हारने से ज्यादा उनकी स्वयम की राज्य एवं दस जनपथ में साख घटाएगा ! शैलजा , किरण , बिरेंदर जैसे धड़े इसी बात की प्रतीक्षा में होंगे ! कुलदीप के पास जीतने के बावजूद हिसार की जनता को देने के लिए बासी वादों के अलावा कुछ होगा नहीं ! भारतीय जनता पार्टी का भरोसा किया नहीं जा सकता , ये अगले चुनावो में फिर से चौटाला के साथ खड़े हो सकते हैं और जहाँ तक प्रतीत होता है ऐसा ही होगा ! मुख्यमंत्री को यह स्वीकार कर लेना चाहिए की उनके विरुद्ध राज्य में anti-incumbancy आ चुकी है ! और साथ साथ यह अहसास भी अत्यंत जरुरी है कि रोहतक सोनीपत झज्जर जिलो के अतिरिक्त भी हरयाणा में जाट बसते हैं !

Dear Friend Samar!
Your sincere signs given below don't match with your comment given above. I think U're more happy in the regime of Bhajanlal who was not biased to any one. This is absolutely true and every corrupt n honest citizen knows it. Friend, neither I know from where U belong nor I want to know. Regionalism is dangerous, no doubt. But more dangerous than regionalism is negativity. After seeing the one sided progress in a particular area as U mentioned above, my reaction should be-"यार भजनु और चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने तो इसका मतलब यहाँ(according to U-rest of Haryana) कुछ किया ही नहीं" but my reaction unfortunately is "सारा पिसा बैरी नै ओढ़े ला दिया भाई"
And being thousand miles away U've enough local knowledge to comment, it is interesting.
Thanx.
 
pichli baar bhaja lal 2.5 lakh vote le rya tha .....or sampat ki kareeb 2.43lakh thi or jp ki 2 lakh k kareeb. Ibke te jp ki katti guddi lagti dikhe hai uski jat vote mere khyal te ajay k faltoo jani chahiye.
पाछली बार bsp वाला करीब 90000 वोट लेग्या था , इब ये वोट किसके जायेंगी यो हिसाब लगा के और बता ......:)
 

Dear Friend Samar!
Your sincere signs given below don't match with your comment given above. I think U're more happy in the regime of Bhajanlal who was not biased to any one. This is absolutely true and every corrupt n honest citizen knows it. Friend, neither I know from where U belong nor I want to know. Regionalism is dangerous, no doubt. But more dangerous than regionalism is negativity. After seeing the one sided progress in a particular area as U mentioned above, my reaction should be-"यार भजनु और चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने तो इसका मतलब यहाँ(according to U-rest of Haryana) कुछ किया ही नहीं" but my reaction unfortunately is "सारा पिसा बैरी नै ओढ़े ला दिया भाई"
And being thousand miles away U've enough local knowledge to comment, it is interesting.
Thanx.

प्रिय बिस्की साहब ,
आपको यह क्यों लगा कि हर प्रविष्टी मै अपने हस्ताक्षर के अनुसार करने के लिए बाध्य हूँ ? अगर हस्ताक्षर का ही आधार ले तो आपकी प्रविष्टी आपके हस्ताक्षर के हिसाब मोहबत के एक दम विपरीत कटाक्ष की बोली है ! मुझे कोई आपति नहीं है !एक राजनैतिक टिपणी में हस्ताक्षर को सम्मिलित आपने किस नजरिये से किया ? क्या आपके या मेरे आँख बांध कर लेने से क्षेत्र्वाद का निवारण हो जाएगा ? यह एक सच्चाई है तो है ! किसी दुसरे जिले में जाट बसते हैं - इस कथन का तात्पर्य विकास कार्यो के होने या न होने का सम्बन्ध कैसे जोड़ लिया आपने ? क्या इसका अर्थ यह नहीं हो सकता कि जाट मतदाता और जगह भी है ? अगर आपको नकारात्मकता दिखी तो मै उसके लिए क्षमा पात्र नहीं हूँ क्यों कि वो आपने स्वयम खोद निकली है ! यह एक साधारण स्तिथि का अति साधारण आकलन था !



बिस्की साहब,यह जानकार अत्यंत हर्ष हुआ की आपको यह बात मज़ेदार लगी कि कोई दूर बैठा व्यक्ति भी ज्ञान का पात्र हो सकता है ! ज्ञान पर न तो मेरे बाप का अधिकार है और न आपका ! वैसे मेरा मत मुख्यमंत्री के सुपुत्र के संसद क्षेत्र में है !



 
ओमप्रकाश जिंदल के नाइयाँ का था भाई। रामनिवास घोड़ेला नै भजनु जाना भी नहीं करदा। सेलवाल का भी यो ए हाल है। हाँ हांसी से भयाना जरूर भजनु का पिट्ठू था वो अलग बात है कि अब वो भी नहीं रहा। सच्चाई के इतना लंबा लिखण तै बदल जागी। हाँ मैं इस बात से सहमत जरूर हूँ कि यहाँ अन्ना की भूमिका जो लोग मान रहे हैं वे या तो गंदी मीडिया के लोग हैं या जिन नै नए धोले कुड़ते-पाजामे का नाप दे राख्या सै, वे हैं। अन्ना की अपील का लोगों पर एक प्रतिशत भी असर हो न, तो जमानत तो सबकी जब्त होनी थी फेर सबसे पहले इस मोडा की जमानत जब्त होती।
और हाँ एक बात का जवाब मैं देना भूल ग्या, वो यो कि कॉंग्रेस की हार तो निश्चित थी इसमें कोई शक नहीं था, मगर हार के असली कारणों में से किसी एक का भी जिक्र आपने नहीं किया।
1 क्षेत्रवाद
2 भ्रष्टाचार(या चीज़ इसी है कि अन्ना के बिना बताईं भी सबने दिखे सै)
3 चौ. बीरेंदर सिंह
4 जिंदल परिवार
5 छत्रपाल
6 रामकुमार गौतम
7 किरण
8 जाति-वाद, ये सबसे कमजोर मगर व्यवहार्य कारण है
और हाँ एक बात और!! अगर जयप्रकाश 1,50,000 से ऊपर वोट ले जाता है, बेशक वो हार जाता है, तो आपके ये ऊपर दिये गए सारे Logic फेल हैं।
खास बात ये भी है भाई साहब कि मैं भी अन्ना समर्थक हूँ। लेकिन ऊपर लिखे सच को मैंने अनुभव किया है
Thanx.

http://bhadas4media.com/vividh/13463-2011-10-14-18-28-10.html

हिसार में खामखा वाहवाही लूटेंगे अन्नावाले



क्योंकि हिसार कभी कांग्रेस का था ही नहीं : मैंने एक न्यूज़ चैनल पे देखा. सी वोटर के एग्जिट पोल के सहारे वो बता रहा था कि हिसार में अन्ना टीम के हक़ में फैसला आता है या कांग्रेस के! ये अन्ना आन्दोलन की प्रशंसा है तो ठीक हैं. भक्ति है तो भी ठीक है और चमचागिरी हो तो तब भी उनकी मर्ज़ी. लेकिन ये व्यावहारिक नहीं है. ये सच नहीं है. बल्कि मैं कहूँगा कि ये जिम्मेवार पत्रकारिता नहीं है. एक पत्रकार के नाते जब आप किसी का दोष किसी और के माथे नहीं मढ़ सकते तो किसी और का श्रेय भी किसी और को कैसे दे सकते हो? वैसे भी ये जो पब्लिक है वो सब जानती है. ज़मीनी सच्चाई इस न्यूज़ चैनल की जानकारी और अब हो रहे इस प्रचार से अलग है. खुद टीवी में स्ट्रिंगर से सम्पादक तक के अपने अनुभव से मैं ये कह सकता हूँ कि ज़मीनी सच्चाई या जन-धारणा के खिलाफ आप जब रिपोर्ट करते हो तो अपनी ही विश्वसनीयता और यों टीआरपी (अगर वो कोई है) तो उसका नुकसान करते हो.मुझे अन्ना के आन्दोलन या उनके लोगों को कोई क्रेडिट जाता भी हो तो इस पर ऐतराज़ नहीं है. लेकिन मुझे दुःख होगा ये जान कर कि अगर वे या उनके साथी भी किसी ऐसी घटना के लिए वाहवाही बटोरते हैं जो उनके आगमन से बहुत पहले और उनके बिना भी घट ही रही थी. मुझे लगता है कि खुद अकेले अन्ना पर छोड़ दिया जाए तो वे शायद हिसार परिणाम का कोई श्रेय नहीं लेना चाहेंगे. इसके कारण हैं. हिसार या तो भजन लाल का था या ओमप्रकाश जिंदल का. कांग्रेस का तो वो कभी था भी नहीं. चौटाला के उम्मीदवार के रूप में सुरेन्द्र बरवाला और खुद अब कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में लड़े यही जयप्रकाश भी यहाँ से सांसद रह चुके हैं.तो पहली बात तो ये मान के चलिए कि हिसार भी किसी ग्वालियर या रायबरेली की तरह पार्टियों से अधिक व्यक्तियों का संसदीय क्षेत्र रहा है. इसे विशुद्ध पार्टी के नज़रिए से अगर देखें भी तो वो शायद चौटाला की पार्टी का तो रहा हो सकता है (दो बार जीती उनकी पार्टी यहाँ से). लेकिन कांग्रेस का वो कभी नहीं रहा. कांग्रेस के साथ कभी वो रहा तो इस लिए कि भजन लाल उसके साथ थे. हिसार अगर कांग्रेस की ही जागीर होती तो हिसार के रहने वाले नवीन जिंदल भी कुरुक्षेत्र से जा के चुनाव न लड़ते होते. तो सबसे पहली बात ये कि हिसार न कांग्रेसी कभी था. न हिसार से पिछला सांसद ही कांग्रेस से था.दूसरी बात. हिसार में कांग्रेस जीतती तो वैसे भी नहीं रही. मगर इस बार उसकी हार तो तभी हो गई थी जब से हरियाणा में ये आम धारणा बनी कि मौजूदा मुख्यमंत्री हुड्डा को हरियाणा में सिर्फ रोहतक दिखाई देता है. पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा के बिना भी चौटाला का 90 में से 32 (एक अकाली समेत) सीटें जीत जाना इसका प्रमाण है. हरियाणा का इतिहास गवाह है कि चौटाला की पार्टी ने जब जब भी भाजपा के साथ मिल के चुनाव लड़ा है, हरियाणा में सरकार बनाई है.पिछली बार वे मिल के लड़े होते तो उनकी सीटें हो सकती थीं साथ के पार और कांग्रेस शायद बीस के नीचे. इस न्यूज़ चैनल समेत जिन मेरे पत्रकार बंधुओं ने कभी हरियाणा देखा, सुना या पढ़ा न हो उन्हें बता दें भाजपा के ऐन वक्त पे इनेलो-भाजपा गठबंधन और उधर जनहित कांग्रेस-बीएसपी गठबंधन टूट जाने से मिली ज़बरदस्त मदद के बावजूद कांग्रेस 90 में से महज़ 40 सीटें ही जीत पाई थी. दोनों विपक्षी गठबन्धनों में से कोई एक भी बचा रहता और सिर्फ दो तीन सीटें भी इधर की उधर हो गईं होतीं तो हरियाणा में आज कांग्रेस की सरकार नहीं होती.पर, कोई कह सकता है कि बुआ के अगर मूंछें होतीं तो क्या वो तय न होती?..ठीक. माना कि राजनीति में काल्पनिक कुछ नहीं होता. जो होता है वही होता और जो होता है वो ही दिखता है. अब अगर इस आधार पर भी देखें तो अब हिसार का श्रेय अन्ना को देने वालों को जाटों की खापों का वो आन्दोलन क्यों नहीं दिखता जो उन्होनें संगोत्र विवाह के खिलाफ कानून बनाने के लिए चलाया था? उसके बाद आरक्षण के लिए उनक वो आन्दोलन क्यों दिखता मेरे इन पत्रकार मित्रों को जिसकी वजह से कोई तीन हफ्ते तक उत्तर भारत की रेल सेवाएं बाधित रहीं थीं. जाट कांग्रेस से बहुत दूर जा चुके मित्रो. ठीक वैसे ही जैसे कमलापति त्रिपाठी, ललित नारायण मिश्र और शुक्ल बंधुओं के पतन के बाद यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश के ब्राह्मण चले गए थे. और आपरेशन ब्ल्यू स्टार के बाद किसी हद तक सिख आज भी हैं.ऊपर से इस सब कारणों का बाप, मिर्चपुर. हरियाणा के दलित तो सन 96 मायावती के उफान पे होने के बावजूद एक अकेले जगन्नाथ की वजह से बंसीलाल की हविपा के साथ भी चले गए थे. वे किसी मायावती या कांग्रेस को नहीं, अपना हित अहित देखते हैं. वैसे भी आम तौर पर धारणा ये है कि हरियाणा में आमतौर पर जाटों को पोषित करने वाली पार्टी या नेता के साथ दलित जाते नहीं हैं. ऐसे में हुड्डा वाली कांग्रेस के साथ दलितों के जा सकने की कोई संभावना बची थी तो वो मिर्चपुर में जल कर स्वाहा हो गई थी.कोई समझता हो या न समझता हो, अरविंद केजरीवाल ये बखूबी समझ रहे थे. वैसे भी वे हरियाणा के ही हैं. उन ने दिमाग लगाया. सोचा कि कांग्रेस जब हिसार में लुढ़क ही रही है तो क्यों उसका श्रेय बटोर लें. वे कांग्रेस नहीं तो फिर क्या जैसे सवालों में घिरे. सफाई देते फिरे कि उनके समर्थकों ने उन्हीं की तरह एक सवाल खड़ा करने वाले को क्यों पीटा. मेरी समझ से हिसार के क्रेडिट बटोरने के चक्कर में टीम अन्ना अपने मुख्य एजेंडे से भटकी, जाने अनजाने उस पे भाजपा समर्थित और समर्थेक होने के आरोप लगे, छवि कुछ तो संदिग्ध हुई. इसके चर्चा फिर कभी.लेकिन एक बात तय है कि कांग्रेस का विरोध करने जब गई हिसार में अन्ना टीम तो वो बस यूं ही नहीं चल दी होगी. मैं तारीफ़ करूंगा उनकी कि उन्होंने हिसार संसदीय क्षेत्र की वोटगत ज़मीनी सच्चाई को ठीक से समझा और फिर अपनी रणनीति के तहद कांग्रेस की पहले जर्जर और ढहती हुई दीवार में एक लात मारने का प्रयास उन्होंने भी किया. लेकिन हिसार में कांग्रेस उनकी वजह से तीसरे नंबर पे आ ही रही है तो वो उन्हीं की वजह से कतई नहीं आ रही है.सो, मेरे पत्रकार मित्रो, आप अन्ना के कसीदे पढो मगर हरियाणा में जाटों और दलितों दोनों के आन्दोलनों और कांग्रेस से विमुख होने के असल कारणों से मुंह न मोड़ो. सिर्फ आपके कह देने से वो तबके आप से सहमत नहीं हो नहीं हो जाएंगे जो अन्ना के आन्दोलन के भी बहुत पहले से आन्दोलन की राह पे और कांग्रेस से नाराज़ हैं. रही अन्ना के कांग्रेस के खिलाफ जाने की बात तो वे जाएँ. बेशक ये तर्क दे के कि सरकार उसकी है तो जन लोकपाल बिल पास करना उसी की जिम्मेवारी है.लेकिन मेरा मानना ये है कि वैचारिक द्रष्टिकोण से कांग्रेस अन्ना की राजनैतिक विचारधारा के ज्यादा नज़दीक होनी चाहिए. इसे हम प्रशांत भूषण पर हमला करने वाली फासीवादी शक्तियों के सन्दर्भ में देखें तो और भी बेहतर तरीके से समझ सकते हैं. फिर भी वे करें कांग्रेस का विरोध तो करते रहें. लेकिन पकी पकाई दाल पर हरा धनिया छिड़क भर देने से जैसे कोई कुक नहीं हो सकता, वैसे ही हिसार में पहले से तय कांग्रेस की पराजय उन ने कराई इसका कोई तुक भी नहीं हो सकता.
लेखक जगमोहन फुटेला हरियाणा की राजनीति और पत्रकारिता के जानकार हैं. फुटेला ने चंडीगढ़ समेत कई जगहों पर रहते हुए कई बड़े अखबारों के लिए बड़े पदों पर काम किया है. इन दिनों न्यू मीडिया के साथ पूरे तन-मन-धन से सक्रिय हैं. जगमोहन फुटेला अपने बेबाक विश्लेषण और व्यवहार के लिए जाने जाते हैं​
 


ओ भाई प्रदीप बल्हारा ,तू यु आपना नाम "बिस्कि " बदल ले ने ,मन्ने ते इसा लागे स जाणू ते काटडे के पाछे पे किहे ने लट्ठ मार दिया हो | -----सद भावनाओं सहित

 


ओ भाई प्रदीप बल्हारा ,तू यु आपना नाम "बिस्कि " बदल ले ने ,मन्ने ते इसा लागे स जाणू ते काटडे के पाछे पे किहे ने लट्ठ मार दिया हो | -----सद भावनाओं सहित

Sir Ji! Its not me, its my son Bisky, I've used it for Username only. जाट लठ मारीं पाछै सदभावना कद तें दिखाण लाग ग्ये भाई साहब? :)
 
Last edited:
काद्यान साहब! कम से कम मैं तो आपके ज्ञान पर अंगुली उठाने के लायक नहीं हूँ ये तो मैं ही जानता हूँ। और ना ही मेरी भाषा कुछ व्यंग्यात्मक थी। और हाँ अगर भाई को आपत्ति होगी तो उसका भी स्वागत करूंगा। एक बार फिर से गौर फरमाइएगा तो आपको भी इसमें कुछ सकारात्मकता ही दिखेगी, इसका मुझे पूर्ण विश्वास है।
Thanx

प्रिय बिस्की साहब ,
आपको यह क्यों लगा कि हर प्रविष्टी मै अपने हस्ताक्षर के अनुसार करने के लिए बाध्य हूँ ? अगर हस्ताक्षर का ही आधार ले तो आपकी प्रविष्टी आपके हस्ताक्षर के हिसाब मोहबत के एक दम विपरीत कटाक्ष की बोली है ! मुझे कोई आपति नहीं है !एक राजनैतिक टिपणी में हस्ताक्षर को सम्मिलित आपने किस नजरिये से किया ? क्या आपके या मेरे आँख बांध कर लेने से क्षेत्र्वाद का निवारण हो जाएगा ? यह एक सच्चाई है तो है ! किसी दुसरे जिले में जाट बसते हैं - इस कथन का तात्पर्य विकास कार्यो के होने या न होने का सम्बन्ध कैसे जोड़ लिया आपने ? क्या इसका अर्थ यह नहीं हो सकता कि जाट मतदाता और जगह भी है ? अगर आपको नकारात्मकता दिखी तो मै उसके लिए क्षमा पात्र नहीं हूँ क्यों कि वो आपने स्वयम खोद निकली है ! यह एक साधारण स्तिथि का अति साधारण आकलन था !



बिस्की साहब,यह जानकार अत्यंत हर्ष हुआ की आपको यह बात मज़ेदार लगी कि कोई दूर बैठा व्यक्ति भी ज्ञान का पात्र हो सकता है ! ज्ञान पर न तो मेरे बाप का अधिकार है और न आपका ! वैसे मेरा मत मुख्यमंत्री के सुपुत्र के संसद क्षेत्र में है !



 
who could have been a good honest candidate from Hisar as India n media watch!

Dear friends,
this thread is an idea to understand who could have been honest and ideal candidate from hisar who does not have corruption charges leveled against him and has an image of meeting people and grounded gentleman. Anyone could ring an idea of ex mPs
Surinder Barwala, Birender Singh, JP, Master Narayan Singh, OP Jindal..... which one would u prefer over the current and why?
It is important to think right and then act right....
 
Dear friends,
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Surinder Barwala, Birender Singh, JP, Master Narayan Singh, OP Jindal..... which one would u prefer over the current and why?
It is important to think right and then act right....

Politics mai aake honesty exist nahi kar sakti. Yo universal truth sai arr fact bhi :)
 
पाछली बार bsp वाला करीब 90000 वोट लेग्या था , इब ये वोट किसके जायेंगी यो हिसाब लगा के और बता ......:)

Good Point !! Ye vote Jaat Candidate ke tai jaan tai rahi (Mirchpur ala kand hoye paache to jama bhi nahi), ye jaawengi Bishnoi kai....Kuldeep ke chance laage hain jittan ke..baaki kaal bera paat jaga :)
 
Last edited:
Good Point !! Ye vote Jaat Candidate ke tai jaan tai rahi (Mirchpur ala kand hoye paache to jama bhi nahi), ye jaawengi Bishnoi kai....Kuldeep ke chance laage hain jittan ke..baaki kaal bera paat jaga :)

Ye vote jaani te congress ke thi per congress ka voter confuse ho rya tha .....upar te Kanta ne poora jor laaa rakhya tha ibki baar SC votes k liye.....kafi chance hai ki Ajay k pad gi ho kuch vote......andaja ye lagaya ja raha hai ki is baar congressiyo ki vote kam padi hai or jitni bhi jat vote padi hai ve saari Ajay ki paale mei gayi hai....

Ek baat or sunan mei aayi sai ki Jindal family ne is baar apne workers ko ye nahi bataya ki vote kahan daale.....nahi te ye saari vote congress k jaya karti. 23000 vote se Jindal factory ki.

Cross voting bhi bahut karwayi hogi congress ne ibke.
 
Bhai Hisar ki seat par joot baaj raha se Chautala ka ar Kuldip ka; Congress ka number to teesra hai. Chautala ka jor thoda ghana dikhe se baki to aajkal bera na lagta ke kaun seat kaadh ja!!
 
dear friends,
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surinder barwala, birender singh, jp, master narayan singh, op jindal..... Which one would u prefer over the current and why?
It is important to think right and then act right....
इब तो वोट पड लिए भाई इब के फायदा इस जनमत संग्रह का. चलो फेर भी आपने बूझ्या सै तो अपनी राय इस प्रकार है :

आपने जो नाम सुझाये उनमे आप शायद दो नाम जोड़ना भूल गए; कुलदीप बिश्नोई और अजय चौटाला का i

अगर भ्रष्टाचार मुक्त उम्मीदवार की बात करें तो फिर भजनलाल के कुनबे का ही हक़ बनता है क्योंकि दूधिया चांदनी जैसी साफ़ सुथरी छवि आला परिवार सै यो i

अगर खानदान और शराफत को आधार बनायें तो फेर चौटाला परिवार के सिवाए हरियाणा में कोई खानदानी और बेदाग़ परिवार शायद नहीं है i इनकी शराफत के बारे में तो कुछ कह्ने की जरूरत नहीं, क्योंकि सब नै बेरा सै ये कितने सूधे मानस सैं , आज तक मार पीट का कोए मामला प्रकाश में नहीं आ लिया i वैसे किवाड़ मूँद के किसी विधायक या पार्टी के किसी कार्यकर्ता कै कान पै धर दिया हो तो कह नहीं सकते. वैसे भी सात पीढी तक तो इनका हक़ बनै सै हरियाणा की सत्ता पर.

आपने बाकी जो नाम बताये वे सारे लगभग बराबरी पर हैं और उपरोक्त दोनों परिवारों के बाद में आते हैं
 
चुलबुल पाण्डेय जिसा कूण से इनमे?
Dear friends,
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Surinder Barwala, Birender Singh, JP, Master Narayan Singh, OP Jindal..... which one would u prefer over the current and why?
It is important to think right and then act right....
 
Result.....

ल्यो भाई आ गयी 17 तारिख भी.........आज होवेगा फैसला ...

"जेपी" आर "कांग्रेस" की रे रे माटी होती आप नीचे वाले लिंक पे देख सकते हैं.... लाइव ...... सुबह 8 (भारतीय समय) बजे के बाद...


http://e-hisar.in/


कुलदीप एर अजय का बेरा नहीं..... ट्रक्टर आले की होवे की चस्मा आले की......दोनुआ में तें एक की तो रे रे माटी होवेगी......






.
 
Last edited:
भाई भुप्पी के दादा मातुराम ने ....... भुप्पी के बाबू रणबीर सिंह सविधान स्थल आले ने...... भूप्पी ने......... एर उसके छोरे ने.....पूरे खानदान ने क्यूकर भूल गया...........

उनका भी पूरा हक़ स हरयाने ने लूट के खान का........एर माल कांग्रेस की सोनिया मम्मी ने खुवान का..........चार पीढ़ी तो हो ली....... ३ और बाकी सें कम तें कम ... :rock :rock


Dear friends,
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Surinder Barwala, Birender Singh, JP, Master Narayan Singh, OP Jindal..... which one would u prefer over the current and why?
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ल्यो भाई आ गयी 17 तारिख भी.........आज होवेगा फैसला ...

"जेपी" आर "कांग्रेस" की रे रे माटी होती आप नीचे वाले लिंक पे देख सकते हैं.... लाइव ...... सुबह 8 (भारतीय समय) बजे के बाद...


http://e-hisar.in/


कुलदीप एर अजय का बेरा नहीं..... ट्रक्टर आले की होवे की चस्मा आले की......दोनुआ में तें एक की तो रे रे माटी होवेगी......






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Ajay ka to bera nahi, lekin Kuldeep ka career jaroor daav pai laag raha hai :rock :rock
 
हाँ भाई......लेकिन "मोड़े" का कोंफीडेंस गजब का स...... वो तो कह्वन ऐ लाग रा स आक चौटाला तें हार गया तो राजनीति छोड़ द्यूंगा................... एब्ब कोए उस ने बतावे आक कसाई अगर हार ऐ गया यो इलेक्शन तो तेरी जरुरत भी के रह जागी ...... राजनीति करण भी कुण देगा तेने .........जे आज जीत गया .... तो अपनी माँ ने भी MLA बनावेगा भाई आदमपुर तें कसाई .....हूडा साब की टांट में एक और हार का जूत लागेगा....... एर एब के कांग्रेस की टिकेट लेनिया नहीं पावेगा आदमपुर by-election में............ रणजीत सिंह बर्गा कोए सदाबहार हारनिया नेता बेशक सर दे लियो ऊंखल में...
Ajay ka to bera nahi, lekin Kuldeep ka career jaroor daav pai laag raha hai :rock :rock
 
Ajay ka to bera nahi, lekin Kuldeep ka career jaroor daav pai laag raha hai

भाई लाग तो हूडा साब का भी रहया सै.. मीह केसी बाट में बैठे से बिरेंदर/सुर्जेआला आर सैलजा!! ;)
 
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