Inspirational stories

आपका दुश्मन कौन:-

एक बहुत बड़ी कंपनी के कर्मचारी लंच टाइम में जब वापस लौटे, तो उन्होंने नोटिस बोर्ड पर एक सूचना देखी। उसमे लिखा था कि कल उनका एक साथी गुजर गया, जो उनकी तरक्की को रोक रहा था। कर्मचारियों को उसको श्रद्धांजलि देने के लिए बुलाया गया था।
श्रद्धांजलि सभा कंपनी के मीटिंग हॉल में रखी गई थी। पहले तो लोगो को यह जानकर दुःख हुआ कि उनका एक साथी नही रहा, फिर वो उत्सुकता से सोचने लगे कि यह कौन हो सकता है?
धीरे धीरे कर्मचारी हॉल में जमा होने लगे। सभी होंठो पर एक ही सवाल था! आख़िर वह कौन है, जो हमारी तरक्की की राह में बाधा बन रहा था।

हॉल में दरी बिछी थी और दीवार से कुछ पहले एक परदा लगा हुआ था। वहां एक और सूचना लगी थी कि गुजरने वाले व्यक्ति की तस्वीर परदे के पीछे दीवार पर लगी है। सभी एक-एक करके परदे के पीछे जाए, उसे श्रद्धांजलि दे और फिर तरक्की की राह में अपने कदम बदाये, क्योकि उनकी राह रोकने वाला अब चला गया। कर्मचारिओं के चेहरे पर हैरानी के भाव थे! कर्मचारी एक-एक करके परदे के पीछे जाते और जब वे दीवार पर टंगी तस्वीर देखते, तो अवाक हो जाते।
दरअसल, दीवार पर तस्वीर की जगह एक आइना टंगा था। उसके नीचे एक पर्ची लगी थी, जिसमे लिखा था:-
"दुनिया में केवल एक ही व्यक्ति है, जो आपकी तरक्की को रोक सकता है, आपको सीमओं में बाँध सकता है और वह आप ख़ुद है."
अपने नकारात्मक हिस्से को श्रद्धांजलि दे चुके 'नए' साथियो का स्वागत है.
 
अकबर का नाम तो आप सबने सुना ही होगा।
भारत में अंग्रेजों से पहले मुगलों का राज्य था और
अकबर एक मुगल शासक था। उसके नवरत्नों में उसका मन्त्री बीरबल भी था।
वह बहुत बुद्धिमान था।

एक बार अकबर दरबार में यह सोच कर आये कि आज बीरबल को
भरे दरबार में शरमिन्दा करना है। इसके लिए वो बहुत तैयारी करके आये थे।

आते ही अकबर ने बीरबल के सामने अचानक 3 प्रश्न उछाल दिये।

प्रश्न थे- ‘ईश्वर कहाँ रहता है? वह कैसे मिलता है? और वह करता क्या है?’’

बीरबल इन प्रश्नों को सुनकर सकपका गये और बोले- ‘‘जहाँपनाह! इन प्रश्नों के उत्तर मैं कल आपको दूँगा।"

जब बीरबल घर पहुँचे तो वह बहुत उदास थे।

उनके पुत्र ने जब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया- ‘‘बेटा! आज अकबर बादशाह ने मुझसे एक साथ तीन प्रश्न ‘ईश्वर कहाँ रहता है? वह कैसे मिलता है? और वह करता क्या है?’ पूछे हैं। मुझे उनके उत्तर सूझ नही रहे हैं और कल दरबार में इनका उत्तर देना है।’’

बीरबल के पुत्र ने कहा- ‘‘पिता जी! कल आप मुझे दरबार में अपने साथ ले चलना मैं बादशाह के प्रश्नों के उत्तर दूँगा।’’

पुत्र की हठ के कारण बीरबल अगले दिन अपने पुत्र को साथ लेकर दरबार में पहुँचे। बीरबल को देख कर बादशाह अकबर ने कहा- ‘‘बीरबल मेरे प्रश्नों के उत्तर दो।

बीरबल ने कहा- ‘‘जहाँपनाह आपके प्रश्नों के उत्तर तो मेरा पुत्र भी दे सकता है।’’

अकबर ने बीरबल के पुत्र से पहला प्रश्न पूछा- ‘‘बताओ! ‘ईश्वर कहाँ रहता है?’’

बीरबल के पुत्र ने एक गिलास शक्कर मिला हुआ दूध बादशाह से मँगवाया और कहा- जहाँपनाह दूध कैसा है?

अकबर ने दूध चखा और कहा कि ये मीठा है। परन्तु बादशाह सलामत या आपको इसमें शक्कर दिखाई दे रही है। बादशाह बोले नही। वह तो घुल गयी।

जी हाँ, जहाँपनाह! ईश्वर भी इसी प्रकार संसार की हर वस्तु में रहता है। जैसे शक्कर दूध में घुल गयी है परन्तु वह दिखाई नही दे रही है।

बादशाह ने सन्तुष्ट होकर अब दूसरे प्रश्न का उत्तर पूछा- ‘‘बताओ! ईश्वर मिलता केसे है?’’

बालक ने कहा- ‘‘जहाँपनाह थोड़ा दही मँगवाइए।’’

बादशाह ने दही मँगवाया तो बीरबल के पुत्र ने कहा- ‘‘जहाँपनाह! क्या आपको इसमं मक्खन दिखाई दे रहा है।

बादशाह ने कहा- ‘‘मक्खन तो दही में है पर इसको मथने पर ही दिखाई देगा।’’

बालक ने कहा- ‘‘जहाँपनाह! मन्थन करने पर ही ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं।’’

बादशाह ने सन्तुष्ट होकर अब अन्तिम प्रश्न का उत्तर पूछा- ‘‘बताओ! ईश्वर करता क्या है?’’

बीरबल के पुत्र ने कहा- ‘‘महाराज! इसके लिए आपको मुझे अपना गुरू स्वीकार करना पड़ेगा।’’

अकबर बोले- ‘‘ठीक है, तुम गुरू और मैं तुम्हारा शिष्य।’’

अब बालक ने कहा- ‘‘जहाँपनाह गुरू तो ऊँचे आसन पर बैठता है और शिष्य नीचे।’’

अकबर ने बालक के लिए सिंहासन खाली कर दिया और स्वयं नीचे बैठ गये।

अब बालक ने सिंहासन पर बैठ कर कहा- ‘‘महाराज! आपके अन्तिम प्रश्न का उत्तर तो यही है।’’

अकबर बोले- ‘‘क्या मतलब? मैं कुछ समझा नहीं।’’

बालक ने कहा- ‘‘जहाँपनाह! ईश्वर यही तो करता है।

पल भर में राजा को रंक बना देता है और भिखारी को सम्राट बना देता है।
 
एक बुजुर्ग व्यक्ति काफी दूर से लकड़ियों का गट्ठर अपने सिर पर लादे चला आ रहा था। वह बुरी तरह थक चुका था। जब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने अपने बोझ को जमीन पर फेंक दिया और मृत्यु को इस दर्द से निजात दिलाने के लिए पुकारा। अगले ही पल मृत्यु उसके समक्ष आ खड़ी हुयी और पूछने लगी कि वह क्या चाहता है?

बुजुर्ग व्यक्ति बोला - "मुझ पर सिर्फ इतनी कृपा करें कि यह लकड़ी का गट्ठर फिर से मेरे सिर पर रखने में सहायता कर दें।"

जीवन अत्यंत प्रिय होता है। हताशा में मृत्यु को पुकारना तो आसान है परंतु वास्तव में मृत्यु का वरण करना बहुत कठिन।
 
[h=5]चिड़िया ने दिया क़ीमती सबक़

किसान ने एक दिन छोटी-सी चिड़िया पकड़ ली। वह इतनी छोटी थी कि किसान की एक मुट्ठी में दो चिड़ियां समा सकती थीं। किसान कहने लगा कि वह उसे पकाकर खा जाएगा। चिड़िया बोली, ‘कृपा करके मुझे छोड़ दो। वैसे भी मैं इतनी छोटी हूं कि तुम्हारे एक कौर के बराबर भी नहीं होऊंगी।’

किसान ने जवाब दिया, ‘लेकिन तुम्हारा मांस बहुत स्वादिष्ट होता है। और हां, मैंने कहावत सुनी है कि कुछ नहीं से कुछ भी होना बेहतर है।’ उसकी बात सुनकर चिड़िया बोली, ‘अगर मैं तुम्हें ऐसा मोती देने का वादा करूं, जो शुतुरमुर्ग के अंडे से भी बड़ा हो, तो क्या तुम मुझे आज़ाद कर दोगे?’ उसकी बात सुनकर किसान बहुत ख़ुश हो गया और तत्काल उसने मुट्ठी खोलकर उसे उड़ा दिया।

चिड़िया आज़ाद होते ही कुछ दूर पर एक पेड़ की थोड़ी ऊंची डाल पर जा बैठी, जहां तक किसान का हाथ नहीं पहुंच पाता था। किसान ने उसे बैठा देखकर बड़ी बेसब्री से कहा, ‘जाओ, जल्दी जाओ, मेरे लिए वह मोती लेकर आओ।’ चिड़िया हंसकर बोली, ‘वह मोती तो मुझसे भी बड़ा है, मैं उसे कैसे ला सकती हूं?’ किसान ने ग़ुस्से और खीझ से कहा, ‘तुम्हें लाना ही पड़ेगा, तुमने वादा किया है।’

चिड़िया वहीं बैठी रही। उसने जवाब दिया, ‘मैंने तुमसे कोई वादा नहीं किया था। मैंने सिर्फ़ यही कहा था कि अगर मैं ऐसा वादा करूं, तो क्या तुम मुझे छोड़ दोगे। और इतना सुनते ही तुम लालच में अंधे हो गए थे। ’ उसकी बात सुनकर किसान हाथ मलने लगा। चिड़िया बोली, ‘लेकिन दुखी मत हो, मैंने आज तुम्हें वह पाठ पढ़ाया है, जो ऐसे हर मोतियों से ज्यादा क़ीमती है। हमेशा कुछ भी करने से पहले सोच-विचार करो।’
[/h]
 
दो गलत मिलकर सही नहीं होते

हमने ऐसा सुना है कि अजातशत्रु ने
अपने पिता बिंबिसार की हत्या करके मगध की राजगद्दी हथिया ली थी।
जब कुछ समय गुजर गया तो अजातशत्रु को बहुत पश्चाताप हुआ।
उसने अपने पापों का प्रायश्चित करने का निर्णय लिया।
इसने अपने राजगुरू को बुलाकर पूछा कि वह किस तरह अपने पापों का प्रायश्चित कर सकता है?

राजगुरू ने उसे पशुबलि यज्ञ करने का परामर्श दिया।
सारे राज्य में पशुबलि यज्ञ की तैयारियाँ पूरे जोर-शोर के साथ की गयीं।
भगवान बुद्ध उसी दौरान उसके राज्य में पधारे।
उनके आगमन का समाचार सुनकर अजातशत्रु उनसे मिलने आया।

भगवान बुद्ध ने उससे पास की एक झाड़ी से फूल तोड़कर लाने को कहा।
अजातशत्रु ने ऐसा ही किया।
उन्होंने अजातशत्रु से फिर कहा - "अब दूसरा फूल तोड़कर लाओ ताकि पहला फूल खिल सके।"

अजातशत्रु ने निवेदन किया - "लेकिन महात्मा यह असंभव है। एक टूटा हुआ फूल दूसरे फूल को तोड़ने से कैसे खिल सकता है?"

बुद्ध ने उत्तर दिया - "उसी तरह जैसे तुम एक हत्या के पश्चाताप के लिए दूसरी हत्या करने जा रहे हो। एक गलत कार्य को तुम दूसरे गलत कार्य से कभी सही नहीं कर सकते।
इसके बजाए तुम अपना सारा जीवन मनुष्यों, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की सेवा में समर्पित कर दो।"

यह सुनकर अजातशत्रु उनके चरणों में गिर पड़ा और आजीवन उनका समर्पित अनुयायी बना रहा।
 
एक घर के मुखिया को यह अभिमान हो गया कि उसके बिना उसके
परिवार का काम नहीं चल सकता। उसकी छोटी सी दुकान थी।
उससे जो आय होती थी, उसी से उसके परिवार
का गुजारा चलता था। चूंकि कमाने वाला वह अकेला ही था इसलिए
उसे लगता था कि उसके बगैर कुछ नहीं हो सकता। वह लोगों के
सामने डींग हांका करता था।
एक दिन वह एक संत के सत्संग में पहुंचा। संत कह रहे थे,
'दुनिया में किसी के बिना किसी का काम नहीं रुकता। यह अभिमान
व्यर्थ है कि मेरे बिना परिवार या समाज ठहर जाएगा।
सभी को अपने भाग्य के अनुसार प्राप्त होता है।' सत्संग समाप्त
होने के बाद मुखिया ने संत से कहा, 'मैं दिन भर कमाकर जो पैसे
लाता हूं उसी से मेरे घर का खर्च चलता है। मेरे बिना तो मेरे
परिवार के लोग भूखे मर जाएंगे।'
संत बोले, 'यह तुम्हारा भ्रम है। हर कोई अपने भाग्य
का खाता है।' इस पर मुखिया ने कहा, 'आप इसे प्रमाणित करके
दिखाइए।' संत ने कहा, 'ठीक है। तुम बिना किसी को बताए घर से
6 महीने के लिए गायब हो जाओ।' उसने ऐसा ही किया। संत ने
यह बात फैला दी कि उसे बाघ ने खा लिया है। मुखिया के परिवार
वालों ने कई दिनों तक शोक मनाया। गांव वाले आखिरकार
उनकी मदद के लिए सामने आए। एक सेठ ने उसके बड़े लड़के
को अपने यहां नौकरी दे दी। गांव वालों ने मिलकर
लड़की की शादी कर दी। एक व्यक्ति छोटे बेटे की पढ़ाई का खर्च
देने को तैयार हो गया। 6 महीने बाद मुखिया छिपता-
छिपाता रात के वक्त अपने घर आया। घर वालों ने भूत समझकर
दरवाजा नहीं खोला। जब वह बहुत गिड़गिड़ाया और उसने
सारी बातें बताईं तो उसकी पत्नी ने दरवाजे के भीतर से ही उत्तर
दिया, 'हमें तुम्हारी जरूरत नहीं है। अब हम पहले से
ज्यादा सुखी हैं।' उस व्यक्ति का सारा अभिमान उतर गया.

भावार्थ ..... संसार किसी के लिए भी नही रुकता. यहाँ सभी के बिना काम चल सकता है इस संसार को चलाने
वाला परमात्मा है !!!
 
किसी गाँव में रहने वाला एक छोटा लड़का अपने दोस्तों के साथ
गंगा नदी के पार मेला देखने गया। शाम को वापस लौटते समय जब
सभी दोस्त नदी किनारे पहुंचे तो लड़के ने नाव के किराये के लिए
जेब में हाथ डाला। जेब में एक पाई भी नहीं थी। लड़का वहीं ठहर
गया। उसने अपने दोस्तों से कहा कि वह और थोड़ी देर
मेला देखेगा। वह नहीं चाहता था कि उसे अपने दोस्तों से नाव
का किराया लेना पड़े। उसका स्वाभिमान उसे
इसकी अनुमति नहीं दे रहा था।
उसके दोस्त नाव में बैठकर नदी पार चले गए। जब उनकी नाव
आँखों से ओझल हो गई तब लड़के ने अपने कपड़े उतारकर उन्हें सर
पर लपेट लिया और नदी में उतर गया। उस समय नदी उफान पर
थी। बड़े-से-बड़ा तैराक भी आधे मील चौड़े पाट को पार करने
की हिम्मत नहीं कर सकता था। पास खड़े मल्लाहों ने भी लड़के
को रोकने की कोशिश की।
उस लड़के ने किसी की न सुनी और किसी भी खतरे की परवाह न
करते हुए वह नदी में तैरने लगा। पानी का बहाव तेज़ था और
नदी भी काफी गहरी थी। रास्ते में एक नाव वाले ने उसे
अपनी नाव में सवार होने के लिए कहा लेकिन वह लड़का रुका नहीं,
तैरता गया। कुछ देर बाद वह सकुशल दूसरी ओर पहुँच गया।

उस लड़के का नाम था
‘लालबहादुर शास्त्री’.
जिनका दिया नारा आज भी गूजँता है...
!! जय जवान जय किसान !!
 
अरब देश की बात है| एक राजा था| उसके बड़े-ठाठ-बाट थे|
उसके पास किसी चीज की कमी न थी|
एक दिन वह राजा लड़ाई पर गया| उसके पास खाने-पीने
का सामन इतना था कि उसे लादने के लिए तीन सौ ऊंटों की जरूरत
पड़ी|
दुर्भाग्य से वह दुश्मन से हार गया और बंदी बना लिया गया|
उसके पास उसका रसोइया खड़ा था|
राजा ने कहा - "मुझे भूख लगी है| कुछ खाने को तैयार कर दो|"
रसोइए के पास मांस का एक टुकड़ा बचा था| उसने उसे देगची में
डालकर उबलने को रख दिया| कहीं कुछ साग-सब्जी मिल जाए
तो अच्छा होगा, यह सोचकर वह खोज में निकल पड़ा|
इतने में एक कुत्ता वहां आया| मांस की गंध से उसने अपना मुंह
देगची में डाल दिया| संयोग से देगची में उसका मुंह अटक गया|
उसने मुंह निकालने की बहुत कोशिश की| जब मुंह न
निकला तो देगची को लेकर ही वह वहां से भागा|
राजा ने वह दृश्य देखा तो जोर से हंस पड़ा| पास में एक
संतरी खड़ा था| उसने राजा की हंसी सुनी तो उसे बड़ा अचरज
हुआ| उसने कहा - "आप इतनी मुसीबत में हैं तब भी हंस रहे हैं|
क्या बात है?"
राजा ने जवाब दिया - "मुझे यह सोचकर हंसी आ रही है कि कल
तक मेरे रसोई के सामान को ले जाने के लिए तीन
सौ ऊंटों की जरूरत होती थी, अब उसके लिए एक
कुत्ता ही काफी है|"
किसी ने ठीक ही कहा है कि सुख में तो सभी खुश रहते हैं, लेकिन
असली मर्द तो वह है जो मुसीबत में भी हंस सके|
 
नगर के द्वार और जीभ पर ताले


एक राजा राज्य करता था। जिसकी बुद्धिमत्ता, चातुर्य और राज्य कौशल चतुर्दिक प्रसिद्धि के शिखर पर था। राज्य धन्य-धान्य से परिपूर्ण था और चहुँओर खुशहाली का साम्राज्य था।


राजा का एक मंत्री एक बार राज्य भ्रमण पर निकला। यात्रा से वापस आकर उन्होंने राजा से कहा – "राजन्! आपकी प्रसिद्धि चतुर्दिक है, सँसार के सभी अन्य राजा महाराजा आपकी बुद्धिमत्ता और राज्य कौशलता का लोहा मानते हैं, और चहुँओर लोग आपकी प्रशंसा करते हैं। राज्य भी धन्यधान्य से परिपूर्ण और प्रसन्न है। किन्तु फिर भी कुछ लोग मुझे ऐसे मिले जो आपकी बुराई निंदा हैं, आपके बारे में फूहड़ चुटकुले सुनाते हैं और आपके बुद्धिमत्ता पूर्ण निर्णयों की खिल्ली उड़ाते हैं। ऐसा कैसे है राजन?


राजा ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया – राज्य की समस्त जनता को ज्ञात है कि राजा उनके लिए क्या करता है। रहा प्रश्न जीभ का, तो मैं राज्य के बाह्य मार्गों पर बने हुए द्वारों को तो बंद कर उन पर ताले लगवा सकता हूँ, परन्तु मनुष्य की जीभ पर नहीं और उनकी ये जीभें ही मुझे सदैव उत्तम कार्य करते रहने को प्रेरित करती रहती हैं कि संभवतः कभी उनकी जीभ बदल जाए।
 
मिट्टी का अथवा सोने का?


कालिदास से एक बार राजा ने पूछा – कालिदास, ईश्वर ने आपको बुद्धि तो भरपूर दी है, परन्तु रूप-रंग देने में भी यदि ऐसी ही उदारता वे बरतते तो बात ही कुछ और होती।


कालिदास ने राजा के व्यंग्यात्मक पुट को पहचान लिया। कालिदास ने कुछ नहीं कहा, परंतु सेवक को पानी से भरे एक जैसे दो पात्र लाने को कहा – एक सोने का एक मिट्टी का।


दोनों पात्र लाए गए। गर्मियों के दिन थे। कालिदास ने राजा से पूछा – राजन् ! क्या आप बता सकते हैं कि इनमें से किस पात्र का पानी पीने के लिए उत्तम है?


राजा ने छूटते ही उत्तर दिया – यह तो सीधी सी बात है, मिट्टी का और फिर तुरंत उन्हें स्मरण हुआ कि कालिदास क्या कहना चाहते हैं?


बाह्य रूपरंग सरसरी तौर पर लुभावना लग सकता है, परन्तु असली सुंदरता तो आंतरिक होती है। मिट्टी का घड़ा आपकी (वास्तविक) प्यास बुझा सकता है, सोने का घड़ा नहीं!
 
एक गाँव में एक परिवार रहता था परिवार में कुल जमा चार लोग थे युवा पति-पत्नि, उनका दस साल का बेटा और पति का बुजुर्ग बाप... पति-पत्नि थोड़े खुदगर्ज किस्म के थे... बजुर्ग पिता अक्सर बीमार रहता था, और बेटे-बहू को उसकी देखभाल व इलाज में समय व पैसा खर्च करना कतई पसंद नहीं था... हाँ दस साल के उनके बेटे के लिये उसके दादा उसके सबसे अच्छे दोस्त थे... एक दिन रात को बेटा-बहू योजना बनाते हैं कि यह बुढ्ढा तो कि...सी काम का है नहीं, खर्चा अलग से करवाता है, इसलिये सुबह-सुबह बेटा अपने बूढ़े बाप को एक बोरे में ले जाकर पहाड़ की चोटी में एक गढ्ढे में दफन कर आयेगा... पोता इस योजना को सुन लेता है...

सुबह होती है, बेटा अपने बूढ़े बाप को लेकर चल पड़ता है पहाड़ की चोटी की ओर... चोटी पर पहुंच बोरे को एक तरफ रखता है, थोड़ा सुस्ताता है और फिर गढ्ढा खोदना शुरू करता है... कुछ ही देर में वह अनुभव करता है कि खोदने के लिये वह कुदाल तो एक बार चलाता है पर आवाजें दो बार आतीं हैं... वह हैरान-परेशान, फिर एक बार कुदाल चलाता है फिर वही होता है... वह अपने चारों तरफ देखता है तो पाता है कि थोड़ा सा नीचे एक झाड़ी के पीछे उसका दस साल का बेटा भी एक गढ्ढा खोद रहा है...

आगबबूला हो वह अपने बेटे से उस गढ्ढे को खोदने का कारण पूछता है तो दस साल का वह बच्चा कहता है कि " हे पिता, मैं तो आपका ही अनुकरण कर रहा हूँ... एक न एक दिन तो आप भी बूढ़े होंगे ही... मैंने सोचा तब के लिये गढ्ढा अभी से तैयार कर लूं."
 
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It will take just 37 seconds to read this and change your thinking..

Two men, both seriously ill, occupied the same
hospital room.

One man was allowed to sit up in his bed for an
hour each afternoon to help drain the fluid from
his lungs.

His bed was next to the room's only window.

The other man had to spend all his time flat on
his back.

The men talked for hours on end.

They spoke of their wives and families, their
homes, their jobs, their involvement in the
military service, where they had been on
vacation..

Every afternoon, when the man in the bed by the
window could sit up, he would pass the time by
describing to his roommate all the things he could
see outside the window.

The man in the other bed began to live for those
one hour periods where his world would be
broadened and enlivened by all the activity and
colour of the world outside.

The window overlooked a park with a lovely lake.Ducks and swans played on the water while
children sailed their model boats. Young lovers
walked arm in arm amidst flowers of every colour
and a fine view of the city skyline could be seen
in the distance.

As the man by the window described all this in
exquisite details, the man on the other side of
the room would close his eyes and imagine this
picturesque scene.

One warm afternoon, the man by the window
described a parade passing by.

Although the other man could not hear the band -
he could see it in his mind's eye as the
gentleman by the window portrayed it with
descriptive words.

Days, weeks and months passed.
One morning, the day nurse arrived to bring
water for their baths only to find the lifeless body
of the man by the window, who had died
peacefully in his sleep.

She was saddened and called the hospital
attendants to take the body away.

As soon as it seemed appropriate, the other man
asked if he could be moved next to the window.
The nurse was happy to make the switch, and
after making sure he was comfortable, she left
him alone.

Slowly, painfully, he propped himself up on one
elbow to take his first look at the real world
outside.
He strained to slowly turn to look out the window
besides the bed.

It faced a blank wall.

The man asked the nurse what could have
compelled his deceased roommate who had
described such wonderful things outside this
window.

The nurse responded that the man was blind and
could not even see the wall.

She said, 'Perhaps he just wanted to encourage
you.'

Epilogue:
There is tremendous happiness in making others
happy, despite our own situations.
Shared grief is half the sorrow, but happiness
when shared, is doubled.
If you want to feel rich, just count all the things
you have that money can't buy.
'Today is a gift, that is why it is called The
Present .'
 
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It will take just 37 seconds to read this and change your thinking..

Two men, both seriously ill, occupied the same
hospital room.

One man was allowed to sit up in his bed for an
hour each afternoon to help drain the fluid from
his lungs.

His bed was next to the room's only window.

The other man had to spend all his time flat on
his back.

The men talked for hours on end.

They spoke of their wives and families, their
homes, their jobs, their involvement in the
military service, where they had been on
vacation..

Every afternoon, when the man in the bed by the
window could sit up, he would pass the time by
describing to his roommate all the things he could
see outside the window.

The man in the other bed began to live for those
one hour periods where his world would be
broadened and enlivened by all the activity and
colour of the world outside.

The window overlooked a park with a lovely lake.Ducks and swans played on the water while
children sailed their model boats. Young lovers
walked arm in arm amidst flowers of every colour
and a fine view of the city skyline could be seen
in the distance.

As the man by the window described all this in
exquisite details, the man on the other side of
the room would close his eyes and imagine this
picturesque scene.

One warm afternoon, the man by the window
described a parade passing by.

Although the other man could not hear the band -
he could see it in his mind's eye as the
gentleman by the window portrayed it with
descriptive words.

Days, weeks and months passed.
One morning, the day nurse arrived to bring
water for their baths only to find the lifeless body
of the man by the window, who had died
peacefully in his sleep.

She was saddened and called the hospital
attendants to take the body away.

As soon as it seemed appropriate, the other man
asked if he could be moved next to the window.
The nurse was happy to make the switch, and
after making sure he was comfortable, she left
him alone.

Slowly, painfully, he propped himself up on one
elbow to take his first look at the real world
outside.
He strained to slowly turn to look out the window
besides the bed.

It faced a blank wall.

The man asked the nurse what could have
compelled his deceased roommate who had
described such wonderful things outside this
window.

The nurse responded that the man was blind and
could not even see the wall.

She said, 'Perhaps he just wanted to encourage
you.'

Epilogue:
There is tremendous happiness in making others
happy, despite our own situations.
Shared grief is half the sorrow, but happiness
when shared, is doubled.
If you want to feel rich, just count all the things
you have that money can't buy.
'Today is a gift, that is why it is called The
Present .'

same story ek movie me b dekhi h maine
[h=1]Vaada raha… i promise (2009)[/h]
 
एक सेठ था. उसने एक नौकर रखा. रख तो लिया, पर उसे उसकी ईमानदारी पर विश्वास नहीं हुआ, उसने उसकी परीक्षा लेनी चाही.
अगले दिन सेठ ने कमरे के फर्श पर एक रुपया डाल दिया. सफाई करते समय नौकर ने देखा. उसने रुपया उठाया और उसी समय सेठ के हवाले कर दिया.
दूसरे दिन वह देखता है कि फर्श पर पांच रुपए का नोट पड़ा है. उसके मन में थोड़ा शक पैदा हुआ,
हो-न-हो सेठ उसकी नीयत को परख रहा है. बात आई, पर उसने उसे तूल नहीं दिया.
पिछली बार की तरह नोट उठाया और बिना कुछ कहे सेठ को सौंप दिया....
वह घर में काम करता था, पर सेठ की निगाह बराबर उसका पीछा करती थी.
मुश्किल में एक हफ्ता बीता होगा कि एक दिन उसे दस रुपए का नोट फर्श पर पड़ा मिला.
उसे देखते ही उसके बदन में आग लग गई. उसने सफाई का काम वहीं छोड़ दिया और नोट को हाथ में लेकर सीधा सेठ के पास पहुंचा और बोला - "लो संभालो अपना नोट और घर में रखो अपनी नौकरी! तुम्हारे पास पैसा है, पर सेठ यह समझने के लिए कि अविश्वास से विश्वास नहीं पाया जा सकता, पैसे के अलावा कुछ और चाहिए. वह तुम्हारे पास नहीं है. मैं ऐसे घर मेँ काम नहीँ कर सकता!"
सेठ उसका मुंह ताकता रह गया. वह कुछ कहता कि उससे पहले ही वह नौजवान घर से बाहर जा चुका था.

सीख: विश्वास पर दुनिया कायम है, लेकिन शक विश्वास का सबसे बड़ा दुश्मन होता है
 
एक बार एक मछुआरा समुद्र किनारे आराम से छांव में बैठकर शांति से बीडी पी रहा था ।

अचानक एक बिजनैसमैन वहाँ से गुजरा और उसने मछुआरे से पूछा "तुम काम करने के बजाय आराम क्यों फरमा रहे हो?"

इस पर गरीब मछुआरे ने कहा "मै आज के लिये पर्याप्त मछलियाँ पकड चुका हूँ ।"

यह सुनकर बिज़नेसमैन गुस्से में आकर बोला "यहाँ बैठकर समय बर्बाद करने से बेहतर है कि तुम क्यों ना और मछलियाँ पकडो ।"

मछुआरे ने पूछा "और मछलियाँ पकडने से क्या होगा ?"

बिज़नेसमैन : उन्हे बेंचकर तुम और ज्यादा पैसे कमा सकते हो और एक बडी बोट भी ले सकते हो ।

मछुआरा :- उससे क्या होगा ?

बिज़नेसमैन :- उससे तुम समुद्र में और दूर तक जाकर और मछलियाँ पकड सकते हो और ज्यादा पैसे कमा सकते हो ।

मछुआरा :- "उससे क्या होगा?"

बिज़नेसमैन : "तुम और अधिक बोट खरीद सकते हो और कर्मचारी रखकर और अधिक पैसे कमा सकते हो ।"

मछुआरा : "उससे क्या होगा ?"

बिज़नेसमैन : "उससे तुम मेरी तरह अमीर बिज़नेसमैन बन जाओगे ।"

मछुआरा :- "उससे क्या होगा?"

बिज़नेसमैन : "अरे बेवकूफ उससे तू अपना जीवन शांति से व्यतीत कर सकेगा ।"

मछुआरा :- "तो आपको क्या लगता है, अभी मैं क्या कर रहा हूँ ? !!"

बिज़नेसमैन निरुत्तर हो गया ।

मोरल – "जीवन का आनंद लेने के लिये कल का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं । और
ना ही सुख और शांति के लिये और अधिक धनवान बनने की आवश्यकता है । जो इस क्षण है, वही जीवन है ।
 
एक राज्य में राजा ने एक दोषी व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई। फांसी की सजा पाए इस व्यक्ति ने अंतिम इच्छा के तौर पर राजा से मुलाकात का समय मांगा। राजा इस व्यक्ति से मिलने कारागार पहुंचे तो उसने राजा से कहा कि अगर मुझे फांसी दे दी गई तो मैंने एक ऐसी विद्या सीखी है, जो 20 साल में गधे को इंसान बना सकती है, वह विद्या भी मेरे साथ ही खत्म हो जाएगी।

राजा ने कहा ...कि अगर तुम्हारी बात में सच्चाई है तो मैं तुम्हें एक मौका देता हूं, लेकिन अगर बीस साल में तुमने गधे को इंसान नहीं बनाया तो तुम्हें फांसी पर लटका दिया जाएगा। राजा के आदेश पर उस व्यक्ति को रिहा कर दिया गया तो उसके परिवार के लोग खुश हुए, लेकिन उन्होंने इस बात पर दुख भी जताया कि आखिर बीस साल बाद जब आप गधे को इंसान नहीं बना पाओगे तो आपको फांसी पर लटका दिया जाएगा।

*दोषी व्यक्ति ने अपने घर के लोगों से कहा कि तुम लोग परेशान मत हो और बीस साल तक चैन की बंसी बजाओ। बीस साल में या तो"... गधा मर जाएगा या फिर राजा "। इसलिए तुम लोगों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है।
 
एक अमीर आदमी था। उसने समुद्र मेँ अकेले घूमने के लिए एक
नाव बनवाई।
छुट्टी के दिन वह नाव लेकर समुद्र की सेर करने निकला।
आधे समुद्र तक पहुंचा ही था कि अचानक एक जोरदार
तुफान आया।...
उसकी नाव पुरी तरह से तहस-नहस हो गई लेकिन वह
लाईफ जैकेट की मदद से समुद्र मेँ कूद गया।
जब तूफान शांत हुआ तब वह तैरता ततैरता एक टापू पर
पहुंचा लेकिन वहाँ भी कोई नही था।
टापू के चारो और समुद्र के अलावा कुछ भी नजर नही आ
रहा था।
उस आदमी ने सोचा कि जब मैंने पूरी जिदंगी मेँ
किसी का कभी भी बुरा नही किया तो मेरे साथ ऐसा क्यूँ
हुआ..?
उस आदमी को लगा कि भगवान ने मौत से बचाया तो आगे
का रास्ता भी भगवान ही बताएगा।
धीरे धीरे वह वहाँ पर उगे झाड-पत्ते खाकर दिन बिताने
लगा।
अब धीरे-धीरे उसकी श्रध्दा टूटने लगी, भगवान पर से
उसका विश्वास उठ गया।
उसको लगा कि इस दुनिया मेँ भगवान है ही नही।
फिर उसने सोचा कि अब पूरी जिंदगी यही इस टापू पर
ही बितानी है तो क्यूँ ना एक झोपडी बना लूँ ......?
फिर उसने झाड की डालियो और पत्तो से एक
छोटी सी झोपडी बनाई।
उसने मन ही मन कहा कि आज से झोपडी मेँ सोने
को मिलेगा आज से बाहर नही सोना पडेगा।
रात हुई ही थी कि अचानक मौसम बदला
बिजलियाँ जोर जोर से कड़कने लगी.!
तभी अचानक एक बिजली उस झोपडी पर आ गिरी और
झोपडी धधकते हुए जलने लगी।
यह देखकर वह आदमी टूट गया आसमान की तरफ देखकर
बोला
तू भगवान नही, राक्षस है।
तुझमे दया जैसा कुछ है ही नही
तू बहुत क्रूर है।
वह व्यक्ति हताश होकर सर पर हाथ रखकर रो रहा था।
कि अचानक एक नाव टापू के पास आई। नाव से उतरकर
दो आदमी बाहर आये और बोले कि हम तुमे बचाने आये हैं।
दूर से इस वीरान टापू मे जलता हुआ
झोपडा देखा तो लगा कि कोई उस टापू पर मुसीबत मेँ है।
अगर तुम अपनी झोपडी नही जलाते तो हमे
पता नही चलता कि टापू पर कोई है।
उस आदमी की आँखो से आँसू गिरने लगे।
उसने ईश्वर से माफी माँगी और बोला कि मुझे
क्या पता कि आपने मुझे बचाने के लिए मेरी झोपडी जलाई
थी।
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moral - दिन चाहे सुख के हों या दुख के, भगवान अपने भक्तों के साथ हमेशा रहते हैं।
 
संन्यास लेने के बाद गौतम बुद्ध ने अनेक
क्षेत्रों की यात्रा की।
एक बार वह एक गांव में गए। वहां एक स्त्री उनके पास आई
और
बोली- आप तो कोई राजकुमार लगते हैं। क्या मैं जान...
सकती हूं
कि इस युवावस्था में गेरुआ वस्त्र पहनने का क्या कारण है?
बुद्ध ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया कि तीन प्रश्नों के
हल ढूंढने
के लिए उन्होंने संन्यास लिया। यह शरीर जो युवा व
आकर्षक है,
पर जल्दी ही यह वृद्ध होगा, फिर बीमार व अंत में मृत्यु
के मुंह में
चला जाएगा। मुझे वृद्धावस्था, बीमारी व मृत्यु के कारण
का ज्ञान प्राप्त करना है।
उनसे प्रभावित होकर उस स्त्री ने उन्हें भोजन के लिए
आमंत्रित
किया। शीघ्र ही यह बात पूरे गांव में फैल गई।
गांववासी बुद्ध के
पास आए व आग्रह किया कि वे इस स्त्री के घर भोजन करने
न
जाएं क्योंकि वह चरित्रहीन है।
बुद्ध ने गांव के मुखिया से पूछा- क्या आप भी मानते हैं
कि वह
स्त्री चरित्रहीन है? मुखिया ने कहा कि मैं शपथ लेकर
कहता हूं
कि वह बुरे चरित्र वाली है। आप उसके घर न जाएं।
बुद्ध ने मुखिया का दायां हाथ पकड़ा और उसे ताली बजाने
को कहा। मुखिया ने कहा- मैं एक हाथ से
ताली नहीं बजा सकता क्योंकि मेरा दूसरा हाथ आपने
पकड़ा हुआ
है।
बुद्ध बोले- इसी प्रकार यह स्वयं चरित्रहीन कैसे
हो सकती है
जब तक इस गांव के पुरुष चरित्रहीन न हों। अगर गांव के
सभी पुरुष अच्छे होते तो यह औरत ऐसी न होती इसलिए
इसके
चरित्र के लिए यहां के पुरुष जिम्मेदार हैं। यह सुनकर
सभी लज्जित हो गए।
 
"संतान" -
मैं तकरीबन २० साल के बाद विदेश से अपने शहर लौटा था ! बाज़ार में घुमते हुए सहसा मेरी नज़रें
सब्जी का ठेला लगाये एक बूढे पर जा टिकीं,बहुत कोशिश के बावजूद भी मैं उसको पहचान
नहीं पा रहा था ! लेकिन न जाने ऐसा क्यों लग रहा था की मैं उसे बड़ी अच्छी तरह से जानता हूँ !
मेरी उत्सुकता उस बूढ़े से भी छुपी न रही , उसके चेहरे पर आई अचानक मुस्कान से मैं समझ
गया था कि उसने मुझे पहचान लिया था !
काफी देर की कशमकश के बाद जब मैंने उसे पहचाना तो मेरे पाँव के नीचे से मानो ज़मीन
खिसक गई ! जब मैं विदेश गया था तो इसकी बहुत बड़ी आटा मिल हुआ करती थी नौकर चाकर
आगे पीछे घूमा करते थे !धर्म कर्म, दान पुण्य में सब से अग्रणी इस दानवीर पुरुष को मैं
ताऊजी कह कर बुलाया करता था !
वही आटा मिल का मालिक और आज सब्जी का ठेला लगाने पर मजबूर?
मुझ से रहा नहीं गया और मैं उसके पास जा पहुँचा और बहुत मुश्किल से रुंधे गले से पूछा :
"ताऊ जी, ये सब कैसे हो गया ?"

भरी ऑंखें लिए मेरे कंधे पर हाथ रख उसने उत्तर दिया….
"बच्चे बड़े हो गए हैं बेटा !"
 
एक बार की बात है , एक नौविवाहित
जोड़ा किसी किराए के घर में रहने पहुंचा .
अगली सुबह , जब वे नाश्ता कर रहे थे ,
तभी पत्नी ने
खिड़की से देखा कि सामने वाली छत पर कुछ...
कपड़े फैले हैं , – “ लगता है इन लोगों को कपड़े
साफ़ करना भी नहीं आता …ज़रा देखो तो कितने
मैले लग रहे हैं ? “
पति ने उसकी बात सुनी पर अधिक ध्यान
नहीं दिया .
एक -दो दिन बाद फिर उसी जगह कुछ कपड़े फैले
थे . पत्नी ने उन्हें देखते ही अपनी बात
दोहरा दी ….” कब सीखेंगे ये लोग की कपड़े
कैसे साफ़ करते हैं …!!”
पति सुनता रहा पर इस बार भी उसने कुछ
नहीं कहा . पर अब तो ये आये दिन की बात
हो गयी , जब
भी पत्नी कपडे फैले देखती भला -बुरा कहना शुरू
हो जाती . लगभग एक महीने बाद वे यूँहीं बैठ कर
नाश्ता कर रहे थे . पत्नी ने हमेशा की तरह नजरें
उठायीं और सामने वाली छत की तरफ देखा , ”
अरे वाह , लगता है इन्हें
अकल आ ही गयी …आज तो कपडे बिलकुल साफ़
दिख रहे हैं , ज़रूर किसी ने टोका होगा !”
पति बोल , ” नहीं उन्हें किसी ने नहीं टोका .” ”
तुम्हे कैसे पता ?” , पत्नी ने आश्चर्य से
पूछा . ” आज मैं सुबह जल्दी उठ गया था और
मैंने इस
खिड़की पर लगे कांच को बाहर से साफ़ कर
दिया , इसलिए तुम्हे कपडे साफ़ नज़र आ रहे हैं .
“, पति ने बात पूरी की .

ज़िन्दगी में भी यही बात लागू होती है : बहुत
बार हम दूसरों को कैसे देखते हैं ये इस पर
निर्भर करता है की हम खुद अन्दर से कितने
साफ़ हैं . किसी के बारे में भला-बुरा कहने से
पहले अपनी मनोस्थिति देख लेनी चाहिए और
खुद से पूछना चाहिए की क्या हम सामने वाले में
कुछ बेहतर देखने के लिए तैयार हैं
या अभी भी हमारी खिड़की गन्दी है !
 
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