anilsangwan
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Bhaiyo Ram Ram...
Bahut dina mein ban hatya sei.... Thanks to some moderators who think that I was creating problems for fellow members here
Mere saath saath aur bhi kuch bhai ban kiye.... Lekin hum bhi pakkey they..... fake id nahi banaye..... aur naa hi aage banayengey..... Khair... chhodo.... yeh sabb to chalta rahega....
Kaafi kuch hua hai iss beech.... bahut se logon ne socha ki hum bhoomigat ho gaye elections mein haar ke baad... Aur log kuch kuch likhney lag gaye.... Khair chhodo... Toipc se shuru kartey hain....
भाइयो. ... हार जीत तो होती रह्या करें .... बुरे वक़्त तो शायद हर नेता ने देखे हैं ,,,,,,, बंसीलाल को उसके अपने हल्के तोशाम में एक नौसिखिये धरमवीर ने हरा दिया था ..... और ठीक वैसे ही भूपेंदर हूडा को खुद रोहतक में इंदर सिंह नाम ने फौज्जी ने मिटटी में मिला दिया था.....पुराने वक़्त पे गौर करें तो खुद किलोई हलके ने भूपेंदर हूडा को हराया था ......और किसी और को जिताया था........महम ने दांगी को हीरो बनाया .....और उसी महम ने दांगी को एक पहलवान के हाथों पटखनी दी .............मास्टर हुकम सिंह कभी सी एम् बने.... और आज दादरी के वार्ड में मेंबर भी ना बनावे कोई...... खैर छोडो..... यह सब वक़्त के साथ बदल जाता है ,....
बंसीलाल को भिवानी ने १९९१ में कितने एम् एल एः दिए थे..... और सारे उसको छोड़ कर बिक गए थे.... भजनलाल के पास..... उस से बुरा वक़्त बंसीलाल ने नहीं देखा था..... लेकिन अगली बार समय फिर से उनका था .... और मुख्यमंत्री बने सन छियानवे में ..... क्यों विकास भाई ? सो कुछ बुरा नहीं होता .... वक़्त बुरा होता है ....
जहाँ तक प्रोफ संपत सिंह जी का सवाल है .... वह चौधरी देवीलाल जी के अनन्य भक्त रहे हैं....उनके ९ रत्नों में से एक रतन प्रोफ संपत सिंह ही हैं जीनोने एक बार साथ पकडा तो आज तक दगा नहीं किया ....... चौधरी देवीलाल जी ही उनको राजनीती में लाये थे... प्रोफ सिंह हमेशा से इमानदार रहे हैं और आज तक कोई उनके राजनितिक जीवन पर ऊँगली नहीं उठा सकता .....वोह आया राम गया राम की राजनीति में विश्वास नहीं रखते.......अगर दल बदलना होता तो जेपी की तरह कब के जा चुके होते ..................लेकिन उन्होने कभी निजी स्वार्थ ना देख कर हमेशा से पार्टी और प्रदेश की जनता के बारे में सोचा.....
जहाँ तक उनकी तीखी प्रतिक्रिया की बात है.... प्रोफ सिंह ने कार्येकर्ताओं के आत्म-मंथन के विचार सामने रखे हैं .... ...... पार्टी को मजबूत बनाने के लिए उसकी कमजोरियों को उजागर करना जरूरी है ... और यह काम कोई साहसी व्यक्ति ही कर सकता है ........ मैं सहमत हूँ अपने इनेलो समर्थक भाइयों से जो ये सोचते हैं की प्रोफ संपत सिंह को अगर कमान दी जाए तो पार्टी की दशा बदल सकती है ,,,,,,,,
लेकिन मेरी आज की कही एक बात याद रखना .... दिन सब के फिरते हैं .... एक समय आएगा जब जनता बदलाव चाहेगी .....!! और फिर इंडियन नेशनल लोक दल एक ऐसी पार्टी है जो चुनाव बेशक हार जाए .... लेकिन .... कभी हिम्मत नहीं हारती ||
Bahut dina mein ban hatya sei.... Thanks to some moderators who think that I was creating problems for fellow members here
Kaafi kuch hua hai iss beech.... bahut se logon ne socha ki hum bhoomigat ho gaye elections mein haar ke baad... Aur log kuch kuch likhney lag gaye.... Khair chhodo... Toipc se shuru kartey hain....
भाइयो. ... हार जीत तो होती रह्या करें .... बुरे वक़्त तो शायद हर नेता ने देखे हैं ,,,,,,, बंसीलाल को उसके अपने हल्के तोशाम में एक नौसिखिये धरमवीर ने हरा दिया था ..... और ठीक वैसे ही भूपेंदर हूडा को खुद रोहतक में इंदर सिंह नाम ने फौज्जी ने मिटटी में मिला दिया था.....पुराने वक़्त पे गौर करें तो खुद किलोई हलके ने भूपेंदर हूडा को हराया था ......और किसी और को जिताया था........महम ने दांगी को हीरो बनाया .....और उसी महम ने दांगी को एक पहलवान के हाथों पटखनी दी .............मास्टर हुकम सिंह कभी सी एम् बने.... और आज दादरी के वार्ड में मेंबर भी ना बनावे कोई...... खैर छोडो..... यह सब वक़्त के साथ बदल जाता है ,....
बंसीलाल को भिवानी ने १९९१ में कितने एम् एल एः दिए थे..... और सारे उसको छोड़ कर बिक गए थे.... भजनलाल के पास..... उस से बुरा वक़्त बंसीलाल ने नहीं देखा था..... लेकिन अगली बार समय फिर से उनका था .... और मुख्यमंत्री बने सन छियानवे में ..... क्यों विकास भाई ? सो कुछ बुरा नहीं होता .... वक़्त बुरा होता है ....
जहाँ तक प्रोफ संपत सिंह जी का सवाल है .... वह चौधरी देवीलाल जी के अनन्य भक्त रहे हैं....उनके ९ रत्नों में से एक रतन प्रोफ संपत सिंह ही हैं जीनोने एक बार साथ पकडा तो आज तक दगा नहीं किया ....... चौधरी देवीलाल जी ही उनको राजनीती में लाये थे... प्रोफ सिंह हमेशा से इमानदार रहे हैं और आज तक कोई उनके राजनितिक जीवन पर ऊँगली नहीं उठा सकता .....वोह आया राम गया राम की राजनीति में विश्वास नहीं रखते.......अगर दल बदलना होता तो जेपी की तरह कब के जा चुके होते ..................लेकिन उन्होने कभी निजी स्वार्थ ना देख कर हमेशा से पार्टी और प्रदेश की जनता के बारे में सोचा.....
जहाँ तक उनकी तीखी प्रतिक्रिया की बात है.... प्रोफ सिंह ने कार्येकर्ताओं के आत्म-मंथन के विचार सामने रखे हैं .... ...... पार्टी को मजबूत बनाने के लिए उसकी कमजोरियों को उजागर करना जरूरी है ... और यह काम कोई साहसी व्यक्ति ही कर सकता है ........ मैं सहमत हूँ अपने इनेलो समर्थक भाइयों से जो ये सोचते हैं की प्रोफ संपत सिंह को अगर कमान दी जाए तो पार्टी की दशा बदल सकती है ,,,,,,,,
लेकिन मेरी आज की कही एक बात याद रखना .... दिन सब के फिरते हैं .... एक समय आएगा जब जनता बदलाव चाहेगी .....!! और फिर इंडियन नेशनल लोक दल एक ऐसी पार्टी है जो चुनाव बेशक हार जाए .... लेकिन .... कभी हिम्मत नहीं हारती ||