prashantacmet
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Ranaji,
Jatasura has been mentioned by B S Dahiya. I have not concluded that it is Jat. It may be a person of some Jat clan and asura which does not mean demon in persian. Persian term asura is respectable. Demon is the creation of brahmanical writers. Devasura sangram tells this thing. Both are good people. Jatasura may also be used for an asura with long hair. Is there any historical fact which says he had no relation with Jats? We have brought out information about Jatasura so that we can know if he has got any relation with Jat. Varahamihara is a real person and he is from Persian origin. Varaha is probably his clan and Mihira means Sun which indicates persian origin and Jat connection. Varaha are existing Jats in Malwa which was also the area of varahamihira. It may sound strange but has certain evidences.
This sounds digestable...but what you say abt this...it shows Moh. gori connection with jat....don't u think that such bull**** must be eradicated from this site?..I found it here http://www.jatland.com/home/Nain
जाट इतिहासकार भले राम बेनीवाल ने अपनी पुस्तक 'जाट योद्धाओं का इतिहास' में इस गोत्र का विस्तार से वर्णन किया है. उनके अनुसार यह चंद्रवंशी गोत्र है. यह जाटों के प्राचीनतम गोत्रों में से एक है. भले राम जी, ठाकुर देशराज के तंवर गोत्र से उत्पति के प्रमाण से सहमत नहीं हैं. नैन गोत्र इससे पहले भी अस्तित्व में था. राजस्थान में भिरणी गाँव जिला हनुमानगढ़ और बालेवास जिला हनुमानगढ़, राजस्थान में प्रचलित कहानी सच प्रतीत होती है. शमशेर सिंह पुत्र बलदेव सिंह अपनी ३३ पीढियों का खुलासा करते हैं जो सभी राजा अनंगपाल तोमर से जाकर मिलती हैं. राजा अनंगपाल के कोई लड़का नहीं था. जिस समय उनकी आयु ९० वर्ष थी उस समय ईरान देश के निष्कासित राजा क़यामत खां अपनी बेगम व जवान पुत्री शाहबानो के साथ अनंगपाल के दरबार में आया, वह जाट कौम का था और उसके परिवार ने ८ वीं सदी में इस्लाम ग्रहण किया था. क़यामत खां की जवान बेटी को हिन्दू बनाकर उसका नाम बदल कर सुमन देवी रखा और उससे शादी की थी तब उससे एक लड़का पैदा हुआ था. राजा के कुल पुरोहितों ने राजा को सलाह दी कि यह बच्चा राज्य के लिए अहितकर है. इस कारण राजा ने आया को हुक्म दिया कि उस बालक की हत्या कर दे लेकिन उस आया के मन में रहम आ गया तथा उस अबोध बालक को 'गौर' (गोबर आदि फैंकने का स्थान) में फेंक दिया. जब एक कुम्हार व कुम्हारी गौर में पहुंचे तो उन्होंने उस बालक को उठा लिया तथा गौर में मिलने के कारण इनका नाम गौर सिंह रखा जो बाद में मोहम्मद गौरी के नाम से प्रसिद्ध हुआ. वह दिल्लीके राजा अनंगपाल क इकलोता पुत्र था तथा उसका गोत्र नैन था. इस गोत्र के बारे में जो वंशावली जाट इतिहास एवं समकालीन सन्दर्भ के लेखक प्रताप सिंह शास्त्री ने दी है वह शमशेर सिंह गाँव धमतान साहब जिला जींद, हरियाणा द्वारा दी गयी से मेल खाती है. <SUP id=cite_ref-3 class=reference>[4]</SUP>