ravindersura
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चौधरी छोटूराम ने सैंट स्टीफंस कालेज से बी.ए पास की , आगरा कालेज से ला पास किया | वकालत शुरू कर दी | वह सन 1911-12 में आगरा से रोहतक आ गए | उस समय पंजाब के किसान वर्ग की आर्थिक सामाजिक तथा राजनीतिक स्थिति अति दयनीय थी | पिछले डेढ़ सौ वर्षों में प्रकृति ने बार-बार विद्रोह किए | विनाशकारी प्रकोप बरसाए | बारह भीषण अकाल पड़े | महामारी , भुखमरी से लाखों आदमी मर गए | लाखों पशु मौत की गोद में चले गए | नदी-नाले सूख गए , कुएं , जोहड़ सूख गए , खेत सूख गए , फसलें सूख गई | जीवन सूख गया | ऐसी परिस्थिति का अनुचित लाभ उठाकर व्यापारियों ने , दूकानदारों ने , कसाइयों ने और शहरियों ने किसानों की बेबसी पर छापें मारे | टकों के भाव खेत की उपज , टंकों के भाव किसाओं के पशु खरीद लिए | पंजाब और राजपूताना में लाखों एकड़ कृषि भूमि रहन ले ली | 5 रुपया से 50 रुपया प्रति बीघा के हिसाब से किसाओं की ज़मीनें सूदखोरों की बहियों में कैद हो गई | किसान बंधुआ मजदूर हो गए | किसान के जीवन की नाव लंबे समय से डांवाडोल चल रही थी | कई बार डूबने को होती तो अज्ञात कारणों से बच जाती | नाव का कोई खेवैया , मांझी , मल्लाह नहीं था | वह रामभरोसे चल रही थी | किसान विरोधी तत्वों के बीच हिचकोले खा रहा था | इन विरोधियों के विरोध में कौन आए ? कुदरत , शासन और धनवान तीन ही सत्ताए थी , तीनों किसाओं को लूट रही थी | तीनों के हाथ मेहनत - कशों के खून से रंगे हुए थे |
ऐसे हालात में पंजाब के किसान को एक मांझी मिल गया | वह छोटूराम था | चौधरी साहब ने किसान समस्याओं का अध्ययन आरंभ किया | गाँव-गाँव में गए | उनमें बैठकर उनके दुःख सुने | किसानों के चहुतरफा शोषण से वह बहुत दुखी हुए | वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि यह समस्याएँ सुधारवादी आंदोलन से हल नहीं हो सकती | ये राजसत्ता हाथ में लेकर नियम अधिनियम बनाकर , राजतंत्र का स्वरूप बदलकर दूर की जा सकती हैं | वह हिन्दू-महसभा के संपर्क में आए | परंतु थोड़े ही दिनों में यह अनुभव हो गया कि कोई भी धार्मिक राजनैतिक पार्टी सिर्फ भाविक नारे लगाकर राज हथियाने में विश्वास रखती हैं | हिन्दू ही यदि हिंदुओं का शोषण करे तो हिन्दू महासभा के पास ऐसे शोषण को समाप्त करने का कोई कार्यकर्म नहीं बन सकता | अतः वे हिन्दू महासभा से अलग हो गए | वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए | कांग्रेस आज़ादी की लड़ाई लड़ रही थी | कांग्रेस आंदोलन में योगदान देना राष्ट्रिय धर्म था | उनका भविष्य का कार्यकर्म जनसाधारण के लिए आकर्षक था | आज़ादी में उनको अपनी दुर्व्यवस्था में सुधार होने की आशा दिखाई दी | विद्रोह विदेशी शासन सत्ता के विरुद्ध था | अतः उसमें बिलालिहाज जात पात , धर्म-पंथ , शोषणकारी और शोषित सब वर्ग भाग ले रहे थे क्योंकि दुनिया उम्मीद पर कायम हैं | अतः वह देश व्यापी आंदोलन था |
चौधरी साहब जिला कांग्रेस के प्रधान बनाए गए | इस बीच प्रथम विश्व युद्ध आरंभ हो गया | युद्ध जीतने की हालत में अंग्रेजों भारत को प्रांतीय स्वायत्तता का वायदा दिया था | इसलिए महात्मा गांधी जी ने गुजरात में फौजी भर्ती का अभियान चलाया | पंजाब में चौधरी छोटूराम और उनके साथी इस काम में सरगर्म थे |
युद्ध जीतने के बाद अंग्रेज़ अपने वायदें से मुनकिर हो गए और किसी भी विरोधी आंदोलन का दमन करने के लिए रोल्ट एक्ट जैसे दमनकारी अधिनियम लागू कर दिये | उनका कांग्रेस पार्टी से टकराव हो गया | महात्मा जी ने सन 1920-21 में असहयोग आंदोलन का आह्वान दिया | उनके अनुसार शिक्षा संस्थानों और किसानों को सरकार से हर प्रकार का असहयोग करने का आह्वान किया | छत्र शिक्षा केन्द्रों में न जाए और न फीस दे | किसान मालगुजारी न दें | भारतीय लैंड रैवेन्यू एक्ट के अंतर्गत यदि किसान मालगुजारी आड़ा न करें तो उसकी कृषिभूमि नीलाम की जा सकती हैं | जो नीलामी में लेगा , भूमि उसी की मलकीयत बन जाएगी और वह फिर किसान को वापिस नहीं मिल सकती | चौधरी साहब किसानों के लिए इस प्रकार के घातक आह्वान के विरुद्ध थे | पूँजीपतियों और व्यापारियों को अंग्रेजों से अपने व्यापारिक संबंध तोड़ने का कोई आह्वान नहीं दिया गया |
महात्मा गांधी रोहतक आए | उन्होने वैश्य हाई स्कूल की आधारशिला रखी | एक तरफ वह शिक्षण संस्थान बंद करने का आह्वान दे रहे थे दूसरी तरफ उनकी आधारशिलाए भी रख रहे थे | रोहतक में , गऊकरण तालाब पर । बड़ी कांफ्रेस थी | गांधी जी की उपस्थिती में शिक्षा संस्थानों को बंद करने और किसानों की ओर से मालगुजारी न देने का प्रस्ताव रखा गया | चौधरी साहब ने उसका विरोध किया | उनकी दलील थी कि मालगुजारी न देने की अवस्था में सरकार किसानों की ज़मीनें नीलाम कर देगी | इनकी ज़मीनों को वहीं लोग खरीद लेंगे जो गांधी जी के भक्त भी हैं और सरकार के सहयोगी भी हैं | किसान अपने रोजगार से वंचित हो जाएंगे और मजदूर हो जाएंगे | क्या गारंटी हैं कि आंदोलन के बाद उनकी ज़मीनें उन्हे वापिस मिल जाएंगी ? महात्मा गांधी उनसे सहमत नहीं हुए | चौधरी साहब ने कांग्रेस की इस पॉलिसी के विरुद्ध विद्रोह किया | स्टेज छोड़ कर चले आए और कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया | यह उनका सिधान्त आधारित विद्रोह था |
ऐसे हालात में पंजाब के किसान को एक मांझी मिल गया | वह छोटूराम था | चौधरी साहब ने किसान समस्याओं का अध्ययन आरंभ किया | गाँव-गाँव में गए | उनमें बैठकर उनके दुःख सुने | किसानों के चहुतरफा शोषण से वह बहुत दुखी हुए | वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि यह समस्याएँ सुधारवादी आंदोलन से हल नहीं हो सकती | ये राजसत्ता हाथ में लेकर नियम अधिनियम बनाकर , राजतंत्र का स्वरूप बदलकर दूर की जा सकती हैं | वह हिन्दू-महसभा के संपर्क में आए | परंतु थोड़े ही दिनों में यह अनुभव हो गया कि कोई भी धार्मिक राजनैतिक पार्टी सिर्फ भाविक नारे लगाकर राज हथियाने में विश्वास रखती हैं | हिन्दू ही यदि हिंदुओं का शोषण करे तो हिन्दू महासभा के पास ऐसे शोषण को समाप्त करने का कोई कार्यकर्म नहीं बन सकता | अतः वे हिन्दू महासभा से अलग हो गए | वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए | कांग्रेस आज़ादी की लड़ाई लड़ रही थी | कांग्रेस आंदोलन में योगदान देना राष्ट्रिय धर्म था | उनका भविष्य का कार्यकर्म जनसाधारण के लिए आकर्षक था | आज़ादी में उनको अपनी दुर्व्यवस्था में सुधार होने की आशा दिखाई दी | विद्रोह विदेशी शासन सत्ता के विरुद्ध था | अतः उसमें बिलालिहाज जात पात , धर्म-पंथ , शोषणकारी और शोषित सब वर्ग भाग ले रहे थे क्योंकि दुनिया उम्मीद पर कायम हैं | अतः वह देश व्यापी आंदोलन था |
चौधरी साहब जिला कांग्रेस के प्रधान बनाए गए | इस बीच प्रथम विश्व युद्ध आरंभ हो गया | युद्ध जीतने की हालत में अंग्रेजों भारत को प्रांतीय स्वायत्तता का वायदा दिया था | इसलिए महात्मा गांधी जी ने गुजरात में फौजी भर्ती का अभियान चलाया | पंजाब में चौधरी छोटूराम और उनके साथी इस काम में सरगर्म थे |
युद्ध जीतने के बाद अंग्रेज़ अपने वायदें से मुनकिर हो गए और किसी भी विरोधी आंदोलन का दमन करने के लिए रोल्ट एक्ट जैसे दमनकारी अधिनियम लागू कर दिये | उनका कांग्रेस पार्टी से टकराव हो गया | महात्मा जी ने सन 1920-21 में असहयोग आंदोलन का आह्वान दिया | उनके अनुसार शिक्षा संस्थानों और किसानों को सरकार से हर प्रकार का असहयोग करने का आह्वान किया | छत्र शिक्षा केन्द्रों में न जाए और न फीस दे | किसान मालगुजारी न दें | भारतीय लैंड रैवेन्यू एक्ट के अंतर्गत यदि किसान मालगुजारी आड़ा न करें तो उसकी कृषिभूमि नीलाम की जा सकती हैं | जो नीलामी में लेगा , भूमि उसी की मलकीयत बन जाएगी और वह फिर किसान को वापिस नहीं मिल सकती | चौधरी साहब किसानों के लिए इस प्रकार के घातक आह्वान के विरुद्ध थे | पूँजीपतियों और व्यापारियों को अंग्रेजों से अपने व्यापारिक संबंध तोड़ने का कोई आह्वान नहीं दिया गया |
महात्मा गांधी रोहतक आए | उन्होने वैश्य हाई स्कूल की आधारशिला रखी | एक तरफ वह शिक्षण संस्थान बंद करने का आह्वान दे रहे थे दूसरी तरफ उनकी आधारशिलाए भी रख रहे थे | रोहतक में , गऊकरण तालाब पर । बड़ी कांफ्रेस थी | गांधी जी की उपस्थिती में शिक्षा संस्थानों को बंद करने और किसानों की ओर से मालगुजारी न देने का प्रस्ताव रखा गया | चौधरी साहब ने उसका विरोध किया | उनकी दलील थी कि मालगुजारी न देने की अवस्था में सरकार किसानों की ज़मीनें नीलाम कर देगी | इनकी ज़मीनों को वहीं लोग खरीद लेंगे जो गांधी जी के भक्त भी हैं और सरकार के सहयोगी भी हैं | किसान अपने रोजगार से वंचित हो जाएंगे और मजदूर हो जाएंगे | क्या गारंटी हैं कि आंदोलन के बाद उनकी ज़मीनें उन्हे वापिस मिल जाएंगी ? महात्मा गांधी उनसे सहमत नहीं हुए | चौधरी साहब ने कांग्रेस की इस पॉलिसी के विरुद्ध विद्रोह किया | स्टेज छोड़ कर चले आए और कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया | यह उनका सिधान्त आधारित विद्रोह था |