Mera Intzaar Karna !

Ek hasrat thi ki unke dil main panaah milegi,,, एक हसरत थी की उनके दिल मैं पनाह मिलेगी,,,
Kya pata tha unse mohabbat ki saja milegi,,, क्या पता था उनसे मोहब्बत की सजा मिलेगी,,,
Na apno ne samjha na gairon ne jaana,,, न अपनों ने समझा न गैरों ने जाना,,,
Kya pata tha meri taqdeer hi mujhe bewafa milegi,,, क्या पता था मेरी तकदीर ही मुझे बेवफा मिलेगी,,,


बडा ही मासूम वो हसीन शख्श दिखता था
मोहब्बत के नाम पर जो रोज बिकता था
दीवानों ने उसका नाम ही खुदा रख दिया
शायद वह दूसरों की तकदीर लिखता था
 
Kisi ranjish ko hawa do ki main zinda hoon abhi,,, किसी रंजिश को हवा दो की मैं जिन्दा हूँ अभी,,,,
Mujh ko ehsaas dila do ki main zinda hoon abhi,,, मुझ को एहसास दिला दो की मैं जिन्दा हूँ अभी,,,
Mere rukne se meri saansain bhi ruk jayengi,,,, मेरे रुकने से मेरी सांसें भी रुक जायेंगी ,,,
Faasle or badha do ki main zinda hoon abhi,,,, फासले और बढ़ा दो की मैं जिन्दा हूँ अभी,,,,
Zahar pine ki to aadat thi zamane walo,,,, ज़हर पीने की तो आदत थी ज़माने वालो,,,
Ab koi or davaa do ki main zinda hoon abhi,,, अब कोई और द्वा दो की मैं जिन्दा हूँ अभी,,,,




 
Kisi ranjish ko hawa do ki main zinda hoon abhi,,, किसी रंजिश को हवा दो की मैं जिन्दा हूँ अभी,,,,
Mujh ko ehsaas dila do ki main zinda hoon abhi,,, मुझ को एहसास दिला दो की मैं जिन्दा हूँ अभी,,,
Mere rukne se meri saansain bhi ruk jayengi,,,, मेरे रुकने से मेरी सांसें भी रुक जायेंगी ,,,
Faasle or badha do ki main zinda hoon abhi,,,, फासले और बढ़ा दो की मैं जिन्दा हूँ अभी,,,,
Zahar pine ki to aadat thi zamane walo,,,, ज़हर पीने की तो आदत थी ज़माने वालो,,,
Ab koi or davaa do ki main zinda hoon abhi,,, अब कोई और द्वा दो की मैं जिन्दा हूँ अभी,,,,


उदास चेहरे को खुशियों की परत दो
किसी के घर की दीवारों को छत दो
ज़िन्दगी वो जो किसी के काम आये
महज ज़िन्दा होने का सुबूत मत दो
 
Tumhari Dosti Tumhari Wafa Hi Kaafi Hai,,, तुम्हारी दोस्ती तुम्हारी वफ़ा ही काफी है,,,
Tamaam Umar Ye Aasra Hi Kaafi Hai,,, तमाम उम्र ये आसरा ही काफी है,,,
Jahan Milo Mil Ke Muskura Dena,,, जहाँ मिलो मिल के मुस्कुरा देना ,,,
Jeene Ke Waaste Ye Aasra Hi Kaafi Hai... जीने के वास्ते ये आसरा ही काफी है,,,
 
Dil banane wale ne dil kaanch ka banaya hota,,, दिल बनाने वाले ने दिल कांच का बनाया होता,,,
Todne wale k haath pe zakhm to aaya hota,,, तोड़ने वाले के हाथ पे ज़ख़्म तो आया होता,,,
Jab bhi dekhte apne hath ko wo,,, जब भी देखते अपने हाथों को वो,,,
Unhain hamara khayal to aaya hota.,,, उन्हें हमारा ख़याल तो आया होता,,,








 
Khushi talash li maine gam ke aashiyane main,,,ख़ुशी तलाश ली मैंने गम के आशियाने में !
Ab koi or kya dekha mujhe is jamane main,,, अब कोई और क्या देगा मुझे इस ज़माने में !!
Koi kisi ke liye itna beraham na bane,,, कोई किसी के लिए इतना बेरहम न बने !
Jitni duniyan ban gai mujhko satane main,,,, जितना दुनियां बन गई मुझको सताने में !!
 
उस चेहरे पर नज़र पडते ही ज़िन्दगी रुक जाती है
उसका नाम लिखते लिखते स्याही मुक जाती है
अब कैसे पता चले कौन बसा है इन आँखो में
वो पलके उठने से पहले ही फ़िर झुक जाती हैं
 
Teri bewafai ka aashiqi ka maatam hai,,, तेरी बेवफाई का आशिकी का मातम है,,,
Zindgi ki raahon main zindgi ka maatam hai,,, जिंदगी की राहों मैं जिंदगी का मातम है,,,
Mujhe das gaye dekho saanp aasteeno ke,,, मुझे डस गए देखो सांप आस्तीनों के,,,
Dushmano ka shikwa kya dosti ka maatam hai,,, दुश्मनों का शिकवा क्या दोस्ती का मातम है,,,
 
Teri bewafai ka aashiqi ka maatam hai,,, तेरी बेवफाई का आशिकी का मातम है,,,
Zindgi ki raahon main zindgi ka maatam hai,,, जिंदगी की राहों मैं जिंदगी का मातम है,,,
Mujhe das gaye dekho saanp aasteeno ke,,, मुझे डस गए देखो सांप आस्तीनों के,,,
Dushmano ka shikwa kya dosti ka maatam hai,,, दुश्मनों का शिकवा क्या दोस्ती का मातम है,,,


वो हमारा साथ निभाता भी तो कैसे
उनको तो साथ निभाने की आदत नहीं
हमको भी वो याद कैसे नहीं आयेंगे
हमें भी तो भूल जाने की आदत नहीं
 
Wafa ek pathar se paana chahti hoon,,,वफ़ा एक पत्थर से पाना चाहती हूँ
Main khud ko aazmana chahti hoon,,, मैं खुद को आज़माना चाहती हूँ,,,
Kyon ek naya dard deti hai ye meri zindgi,,,क्यों एक नया दर्द देती है ये मेरी जिंदगी,,
Jab bhi main khul kar muskurana chahti hoon,,,जब भी मैं खुल के मुस्कुराना चाहती हूँ,,,






 
Bichud gaya hai to ab uska saath kya maangoon,,, बिछुड़ गया है तो अब उसका साथ क्या मांगूं,,,
Zara si umar bachi hai gam se nijaat kya mangoon,,, जरा सी उम्र बची है गम से निजाद क्या मांगूं,,,
Wo saath hota to hoti zaroortain bhi bahut,,, वो साथ होता तो होती जरूरतें भी बहुत,,,
Akeli jaan ke liye ab kaaynaat kya mangoon,,, अकेली जान के लिए अब कायनात क्या मांगूं
 
Mera Intzaar Karna !

"...ये इरादा है, मेरा वादा है, लौट आउंगा मैं..."

~ 'दिल ने ये कहा है दिल से' नामक गीत से (धड़कन - हिंदी_Bollywood)
 
Last edited:

Kabeera khada baazar main mange sabki khair,,,कबीर खड़ा बाज़ार मैं मांगे सबकी खैर,,,
Naa kahoo se dosti naa kahoo se bair,,, ना कहू से दोस्ती ना कहू से बैर,,,

 
Wo pal aisa tha ki inkaar bhi na kar paaye,,, वो पल ऐसा था की इनकार भी न कर पाए ,,,
Duniyan ke dar se ikraar bhi na kar paaye,,, दुनियां के डर से इकरार भी न कर पाए,,,
Na thi zindgi jiske bina mumkin,,, न थी जिंदगी जिसके बिना मुमकिन,,,
Usne chhod diya or ham sawal bhi na kar paaye... उसने छोड़ दिया और हम सवाल भी न कर पाए...




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पुराणे गिले -शिकवे सें |

जमाने का ये दस्तूर बडा ही पुराना है
लोगों के जजबातों से दिल बहलाना है
अपना मकान रोशन करने की खातिर
किसी के आशियाने में आग लगाना है
 
ghani chot khai huo hoji.

लिखना एक कला है विरेन्द्र भाई ........
ये तो अपने अपने दिमाग की उपज है कि कैसे कोई दिल को झकझोर देने वाली रचना लिख डालता है .......

डाकू की कहानी लिखने वाला डाकू नहीं होता
:)
 
वो तो आपका नाम सुनकर ही चले आते हैं हम
वरना बन्दे को ख़ुद अपना ही पता कहाँ रहता है ।
दुनिया से लड़ते लड़ते अभी तक तो हारा नहीं मैं
न जाने क्यों तेरे मेरे बीच में सारा जहाँ रहता है ॥
 
चमकते चेहरे पर वो हिज़ाब किसका था
जो नींद में देखा वो ख्वाब किसका था ।
मुद्दत से पूछता रहा हूँ मैं एक ही सवाल
तुमने नहीं दिया तो वो जवाब किसका था ॥
 
Meri khamoshi thi jo sah gai,,,मेरी ख़ामोशी थी जो सह गई,,,
Uski yaadain hee ab is dil main rah gai,,,उसकी यादें ही अब इस दिल मैं रह गई,,,
Thi shayad uski bhi koi majboori,,,थी शायद उसकी भी कोई मजबूरी,,,
Jo meri zindgi ki kahani adhoori rah gai,,,जो मेरी जिंदगी की कहानी अधूरी रह गई,,,
 
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