देख तू खो ना जाये दुनिया की कशमकश में कहीं,
ज्यादा रौशनी बची नहीं है अब उल्फत की पनाहों में |
यूँ तो सब उम्र गुजरी है एक तनहा सफ़र में "साहिल",
फिर भी ख्वाब हैं कुछ पल रहें महबूब की बाँहों में | |
ज्यादा रौशनी बची नहीं है अब उल्फत की पनाहों में |
यूँ तो सब उम्र गुजरी है एक तनहा सफ़र में "साहिल",
फिर भी ख्वाब हैं कुछ पल रहें महबूब की बाँहों में | |
चल तो पडे हो मंजिल की पनाहों में
इंतजार अब भी रहता है निगाहों में ।
हर मोड पर जरा संभल कर मुडना
न जाने कहाँ कौन खडा हो राहों में ॥