Mera Intzaar Karna !

Awesome composition Vijay, every word written here is direct dil-se :)
Have always enjoyed poetry written by you.
Keep pouring.....

Thanx a lot, Divya :)

Some thing from my collection .....

phir usi raahguzar par shayad..
hum kabhi mil sakein .. magar shayad..

jo bhi bichhde hain kab mile hain FARAZ..
phir bhi tu intezaar kar .. shayad..

मंजिल की ओर कदम बढा कर तो देख
रास्तों पर मिलते हैं हमसफ़र .. शायद


सुबह के उजालों में अब ज्यादा देर नहीं
रात का यह आखिरी है पहर .. शायद


आजकल अधूरा सा नहीं लगता ’विजय’
अपना सा कोई आया है नजर .. शायद
 
आसमानों की नीयत हमें साफ़ नहीं लगती
दिल के समन्दर में भी हलचल ज्यादा है ।
किनारे बैठ कर तमाशा देखें देखने वाले
हमारी किश्ती ने किया तूफ़ान से वादा है ॥
 
बीते हुए उन लम्हों को सपना समझ कर भुला लेना
दिल में मचलते हुए अरमानों को चुपके से सुला लेना ।
आज खुशियों में साथ हंसने वाले हज़ारों मिल जायेंगे
जब अश्क बहाने का मौसम आये तो मुझे बुला लेना ॥
 
रास्ते खुद बन गये हम जिधर निकल जाते हैं
कदमों की आहट से ही पत्थर पिघल जाते हैं ।
वक्त की किसी भी धूप से हम नही डरने वाले
हम तो वो जर्रा हैं जो सूरज को निगल जाते हैं ॥
 
ganni badia baat khi aapne bhai
kissi ko panne ki chahat se bhi aksar pyar ho jaata hai
kissi pe yaken ke liye dil kaa souda karro ye jaroori to nahi
kissi jhooth ke sahare bhi aksar jee liya jaata hai
har baat se parda uthaya jaaye ye jaroori to nahi


vijay bhai jaisa meri samaj aaya likha diya :) koi tech problem ho to jarror batna kai baar kuch likhna bahut accha lagta hai muje bhi
 
another good one
बीते हुए उन लम्हों को सपना समझ कर भुला लेना
दिल में मचलते हुए अरमानों को चुपके से सुला लेना ।
आज खुशियों में साथ हंसने वाले हज़ारों मिल जायेंगे
जब अश्क बहाने का मौसम आये तो मुझे बुला लेना ॥
 
पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार करना क्या
जो दिल हारा हुआ हो उस पर फिर अधिकार करना क्या
मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कश्मकश मे है
हो गर मालूम गहराई तो दरिया पार करना क्या
 
पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार करना क्या
जो दिल हारा हुआ हो उस पर फिर अधिकार करना क्या
मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कश्मकश मे है
हो गर मालूम गहराई तो दरिया पार करना क्या


जो छोड कर चला जाये उसका इंतजार क्या करना
कोइ बेशर्मी पर उतर आये उसे शर्मसार क्या करना ।
ये माना इनसान को पह्चानना बहुत ही मुश्किल है
पर आजमाया हुआ हो उस पर एतबार क्या करना ॥
 
जो छोड कर चला जाये उसका इंतजार क्या करना
कोइ बेशर्मी पर उतर आये उसे शर्मसार क्या करना ।
ये माना इनसान को पह्चानना बहुत ही मुश्किल है
पर आजमाया हुआ हो उस पर एतबार क्या करना ॥

बहुत खूब, क्या बात है !!!!
 
तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है समझता हूँ
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ
तुम्हे मै भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नही लेकिन
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ
 
तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है समझता हूँ
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है समझता हूँ
तुम्हे मै भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नही लेकिन
तुम्ही को भूलना सबसे ज़रूरी है समझता हूँ


तेरे पास रहकर भी मैं तेरे दिल से बहुत दूर था
भूलना तो चाहा मगर अपनी चाहत से मजबूर था ।
अब कोशिश करने पर भी याद ना आओ तो क्या
वादा करके भूल जाना तो तुम्हारा ही दस्तूर था ॥
 
भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिये
तुम से कहीं मिला हूँ मुझे याद कीजिए
मेरी निगाह -ए -शौक़ से हर गुल है देवता
मैं इश्क का खुदा हूँ मुझे याद कीजिए
 
दूर वादी में दुधिया बादल
झुक के पर्बत को प्यार करते हैं
दिल में नाकाम हसरतें लेकर
हम तेरा इंतज़ार करते हैं
 
दूर वादी में दुधिया बादल
झुक के पर्बत को प्यार करते हैं
दिल में नाकाम हसरतें लेकर
हम तेरा इंतज़ार करते हैं

वक्त का कारवाँ अपनी रफ़्तार से चलता रहा
खामोशी से दिल में कोई अरमान पलता रहा ।
बुझ गई जब तमाम रोशनियाँ आँधियों में
बस उनकी मोहब्बत का चिराग जलता रहा ।।
 
कौन इस राह से गुज़रता है
दिल यूँ ही इंतज़ार करता है


देख कर भी न देखने वाले
दिल तुझे देख-देख डरता है
 
ख़त्म हुआ तारों का राग
जाग मुसाफ़िर अब तो जाग


धूप की जलती तानों से
दश्त-ए-फ़लक में लग गई आग
 
अब के सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई ,
मेरा घर मिट्टी का था , मेरे ही घर बरसात हुई ,
उसकी भी जिद्द है बिजलियाँ गिराने की ,
और हमारी भी जिद्द है वहीँ आशियाँ बनाने की i
 
वक्त की हवाओं का यारों असर देख लो,
बिख़रे हुए पत्तों का ये मंज़र देख लो।


शौक से छुप जाओ बेवफाई के जंगल में,
पहले मेरी आंखों में वफ़ा का खंज़र देख लो।

अश्कों से उभर आये हैं हथेली पर छालें,
है इंतज़ार में तपिश किस कदर देख लो।

पल-पल में हुस्नें रंगत उड़ती नजर आयेगी,
आईने में शक्ल गौर से अगर देख लो।

ठोकरों में आये, तो मंदिरों में सज गए,
रास्तों के पत्थरों के भी मुकद्दर देख लो।

‘आस' यूं तो रहते हैं घरों में रिश्ते लेकिन,
दिलों के दरमियां है कितना अंतर देख लो।
 
कौन इस राह से गुज़रता है
दिल यूँ ही इंतज़ार करता है


देख कर भी न देखने वाले
दिल तुझे देख-देख डरता है



चल तो पडे हो मंजिल की पनाहों में
इंतजार अब भी रहता है निगाहों में ।
हर मोड पर जरा संभल कर मुडना
न जाने कहाँ कौन खडा हो राहों में ॥
 
जो छोड कर चला जाये उसका इंतजार क्या करना
कोइ बेशर्मी पर उतर आये उसे शर्मसार क्या करना ।
ये माना इनसान को पह्चानना बहुत ही मुश्किल है
पर आजमाया हुआ हो उस पर एतबार क्या करना ॥

पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार करना क्या
जो दिल हारा हुआ हो उस पर फिर अधिकार करना क्या
मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कश्मकश मे है
हो गर मालूम गहराई तो दरिया पार करना क्या
जो बह जाये पहाडो के बीच खामोशी से वो झरना क्या
मौत खुद बुलाये बार बार दर पे आकर फिर मौत से डरना क्या
जो बेशर्म हो बेवफाई कर ज़माने में
फिर उस इन्सान का जीना क्या और मरना
 
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