Mera Intzaar Karna !

Meri zindgi ke raaz main ek raaz tum bhi ho,,,मेरी जिंदगी के राज़ में एक राज़ तुम भी हो,,,
Meri bandgi ki pyaas main ek pyaas tum bhi ho,,,मेरी बंदगी की प्यास में एक प्यास तुम भी हो,,,

Tum kya ho kuch to ho,ya nahin ho magar,,, तुम क्या हो कुछ तो हो,या नहीं हो मगर,,,
Meri zindgi ki kaash main ek kaash tum bhi ho,,,मेरी जिंदगी की काश में एक काश तुम भी हो...
 
[FONT=Verdana, Arial, Helvetica, sans-serif]Hamne anjaane main unhain kabhi rula diya,,,हमने अनजाने में उन्हें कभी रुला दिया,,,[/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Helvetica, sans-serif]Unhone kuch majbooriyon se hamain bhula diya,,,उन्होंने कुछ मजबूरियों से हमें भुला दिया,,,[/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Helvetica, sans-serif]Ham to waise bhi akele the duniyan main,,,हम तो वैसे भी अकेले थे दुनियां में,,,[/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Helvetica, sans-serif]Kya hua jo unhone ye ehsaas dila diya,,,क्या हुआ जो उन्होंने ये एहसास दिला दिया,,,[/FONT]
 
Meri khamoshi thi jo sah gai,,,मेरी ख़ामोशी थी जो सह गई,,,
Uski yaadain hee ab is dil main rah gai,,,उसकी यादें ही अब इस दिल मैं रह गई,,,
Thi shayad uski bhi koi majboori,,,थी शायद उसकी भी कोई मजबूरी,,,
Jo meri zindgi ki kahani adhoori rah gai,,,जो मेरी जिंदगी की कहानी अधूरी रह गई,,,


अंधेरे का बोझ तो रोशनी पर लदा है
इन खामोशियों में भी एक सदा है
कोई तो सच्चाई भी नहीं कह पाता
मजबूरी बयां करना भी एक अदा है
 
Meri zindgi ke raaz main ek raaz tum bhi ho,,,मेरी जिंदगी के राज़ में एक राज़ तुम भी हो,,,
Meri bandgi ki pyaas main ek pyaas tum bhi ho,,,मेरी बंदगी की प्यास में एक प्यास तुम भी हो,,,

Tum kya ho kuch to ho,ya nahin ho magar,,, तुम क्या हो कुछ तो हो,या नहीं हो मगर,,,
Meri zindgi ki kaash main ek kaash tum bhi ho,,,मेरी जिंदगी की काश में एक काश तुम भी हो...

Excellent ...... Super Like :)
 
Hamne anjaane main unhain kabhi rula diya,,,हमने अनजाने में उन्हें कभी रुला दिया,,,
Unhone kuch majbooriyon se hamain bhula diya,,,उन्होंने कुछ मजबूरियों से हमें भुला दिया,,,
Ham to waise bhi akele the duniyan main,,,हम तो वैसे भी अकेले थे दुनियां में,,,
Kya hua jo unhone ye ehsaas dila diya,,,क्या हुआ जो उन्होंने ये एहसास दिला दिया,,,


अश्कों का कभी हमने हिसाब नहीं मांगा
सुलगते हुए सवालों का जवाब नहीं मांगा
सितम करने वाले भी हद से गुजर गये
हर जुल्म सहा मगर
इंकलाब नहीं मांगा
 
Har koi mujhe paane ki jid main hai,,,हर कोई मुझे पाने की जिद में है,,,
Shayad koi mujhe aazmane ki zid main hai,,,शायद कोई मुझे आजमाने कि जिद में है,,,
Jiski chaahat hai mujhe itni shiddat se,,,जिसकी चाहत है मुझे इतनी शिद्दत से,,,
Wohi mujhe bhool jaane ki zid main hai...वोही मुझे भूल जाने कि जिद में है...



 
Teri bewafai mahaz ek bahana hai,,,तेरी बेवफाई महज़ एक बहाना है,,,
Dard ko kisi bahane lab par laana hai,,,दर्द को किसी बहाने लब पर लाना है,,,
Bas ek wohi nahin milta aake mujhse,,,बस एक वोही नहीं मिलता आके मुझसे,,,
Zakham ek gahraa jise dikhana hai...ज़ख़्म एक गहरा जिसे दिखाना है...

 
जब मेरे दिल को तुमने पत्थर कह दिया
बस ज़िन्दगी बची थी जो तेरे नाम कर दी
 
Har dil main dard chupa hota hai,,,हर दिल में दर्द छुपा होता है,,,
Bayan karne ka andaaz juda hota hai,,,बयां करने का अंदाज़ जुदा होता है,,,
Koi ashkon se bata deta hai,,,कोई अश्कों से बता देता है,,,
Or kisi ki hansi main bhi dard chupa hota hai...और किसी कि हंसी में भी दर्द छुपा होता है....
 
Kismat ke haathon wo hi majboor hote hain,,,किस्मत के हाथों वो ही मजबूर होते हैं,,,
Jo haqiqat se bahut door hote hain,,,जो हकीकत से बहुत दूर होते हैं,,,
Aksar sazaa milti hai unhin ko,,,अक्सर सज़ा मिलती है उन्हीं को,,,
Jo har traf se bekasoor hote hain...जो हर तरफ से बेक़सूर होते हैं ....

[FONT=Arial, Helvetica, sans-serif]
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हमारे अंदाज़-ऐ-बयां को कहाँ समझ पायी दुनियाँ
वरना भड़कते शोलों को कभी चिंगारी नहीं कहते
 
Har koi mujhe paane ki jid main hai,,,हर कोई मुझे पाने की जिद में है,,,
Shayad koi mujhe aazmane ki zid main hai,,,शायद कोई मुझे आजमाने कि जिद में है,,,
Jiski chaahat hai mujhe itni shiddat se,,,जिसकी चाहत है मुझे इतनी शिद्दत से,,,
Wohi mujhe bhool jaane ki zid main hai...वोही मुझे भूल जाने कि जिद में है...




ये ज़िद ही है जो काम कर गई
ज़िन्दगी किसी के नाम कर गई
कोई बेवजह ही शोहरत कमा गया
किसी
विजय को बदनाम कर गई
 
Har dil main dard chupa hota hai,,,हर दिल में दर्द छुपा होता है,,,
Bayan karne ka andaaz juda hota hai,,,बयां करने का अंदाज़ जुदा होता है,,,
Koi ashkon se bata deta hai,,,कोई अश्कों से बता देता है,,,
Or kisi ki hansi main bhi dard chupa hota hai...और किसी कि हंसी में भी दर्द छुपा होता है....


ये अन्दाज-ए-बयां बहुत पुराना है
मोहब्बत का दुश्मन ये जमाना है
दर्द-ए-दिल तो महज एक बहाना है
आज किसी
विजय को आजमाना है
 
Har dil main dard chupa hota hai,,,हर दिल में दर्द छुपा होता है,,,
Bayan karne ka andaaz juda hota hai,,,बयां करने का अंदाज़ जुदा होता है,,,
Koi ashkon se bata deta hai,,,कोई अश्कों से बता देता है,,,
Or kisi ki hansi main bhi dard chupa hota hai...और किसी कि हंसी में भी दर्द छुपा होता है....

दर्द-ए-दिल को यूं दिखाया नहीं करते
लेकिन अश्कों को छुपाया नहीं करते
चाहत तो आंखो से बयां हो जाती है
प्यार करने वाले जताया नहीं करते
 
Kismat ke haathon wo hi majboor hote hain,,,किस्मत के हाथों वो ही मजबूर होते हैं,,,
Jo haqiqat se bahut door hote hain,,,जो हकीकत से बहुत दूर होते हैं,,,
Aksar sazaa milti hai unhin ko,,,अक्सर सज़ा मिलती है उन्हीं को,,,
Jo har traf se bekasoor hote hain...जो हर तरफ से बेक़सूर होते हैं ....




मोहब्बत कभी मजबूर नहीं होती
हकीकत सपनों से दूर नहीं होती
तेरे लिये हर सजा मंजूर है लेकिन
बेवफ़ाई माथे का सिन्दूर नहीं होती
 
Excellent...nice creation.


दर्द-ए-दिल को यूं दिखाया नहीं करते
लेकिन अश्कों को छुपाया नहीं करते
चाहत तो आंखो से बयां हो जाती है
प्यार करने वाले जताया नहीं करते
 
Jaroori to nahin ki jeene ke liye koi sahara ho,,,जरूरी तो नहीं जीने के लिए कोई सहारा हो,,,
Jaroori to nahin ki ham jiske hain vo bhi hamara ho,,,जरूरी तो नहीं कि हम जिसके हैं वो भी हमारा हो,,,
Kuch kashtiyan doob jaaya karti hain,,,कुछ कश्तियाँ डूब जाया करती हैं,,,
Jaroori to nahin ke har kashti ke liye kinara ho...जरूरी तो नहीं कि हर कश्ती के लिए किनारा हो...




 
Jaroori to nahin ki jeene ke liye koi sahara ho,,,जरूरी तो नहीं जीने के लिए कोई सहारा हो,,,
Jaroori to nahin ki ham jiske hain vo bhi hamara ho,,,जरूरी तो नहीं कि हम जिसके हैं वो भी हमारा हो,,,
Kuch kashtiyan doob jaaya karti hain,,,कुछ कश्तियाँ डूब जाया करती हैं,,,
Jaroori to nahin ke har kashti ke liye kinara ho...जरूरी तो नहीं कि हर कश्ती के लिए किनारा हो...

सहारों की आस में ज़िन्दगी निकल जाती है
हम दीवानों को हमदर्दी कहां रास आती है
जब चलती है अपनी किश्ती समन्दर में
कितनी ही बार तूफ़ानों को आजमाती है ॥

 
आखों के अश्क मोहब्बत की कहानी कहते हैं
जमाने के सितम तोहफ़ा समझकर सहते है
हम तो वादा करते हैं जिन्दगी भर के लिये
लोग जिन्दगी भर सिर्फ़ वादे करते रह्ते है
 
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