History of Sheoran clan (Contd)
शिवराण गोत्र का इतिहास: पंडित अमीचन्द्र शर्मा
पंडित अमीचन्द्र शर्मा[SUP]
[1][/SUP]ने शिवराण गोत्र गोत्र का इतिहास और वंशावली निम्नानुसार दी है:
शिवराण गोत्र: [p.18]: रियासत
नीमराना का स्वामी अति विख्यात
संकटराव (1310 ई.)
चौहान वंशी क्षेत्रीय हुये। संकट राव ने 120 वर्ष (?) की आयु में दूसरा विवाह
नावाँ और
कादमा ग्राम के क्षेत्रीय की पुत्री पवन रेखा के साथ करवाया था। पवन रेखा ने संकटराव से यह वचन लिया था कि आप की मृत्यु के पश्चात राज्य के स्वामी उसकी संतान ही होंगी।
रानी पवन रेखा के 2 पुत्र हुये – 1
लाह , और 2
लौरे
बड़ी रानी के 19 पुत्र हुये – 1 हरसराज, 2 ग्रहराज, 3 बहराज, 4 नलदूदा, 5 सीर, 6 पीथे 7 त्रानचंद, 8 त्रिलोकचंद, 9 मान, 10 खैणसी, 11 मैणसी, 12 सैंसमल, 13 खैरा, 14 काहूड़ासी, 15 बुक्कणसी, 16 विजयराव, 17
शिवराव, 18 राधाकृष्ण, 19 परमानंद
संकट राव के देहांत के बाद दोनों रानियों की संतानों में राज्य के लिए संघर्ष हुआ। उस समय दिल्ली का बादशाह
हुमायूँ (1508–1556)[SUP]*[/SUP] था। उसकी आज्ञा से पवनरेखा के बड़े पुत्र
*नोट - एक पीढ़ी के 25 वर्ष मानकर गणना करने पर
रावसंकट का समय 1910 - (24x25 = 600) = 1310 ई. के करीब आता है। परंतु यह समय दिल्ली बादशाह
हुमायूँ (1508–1556) का नहीं है जैसा कि पंडित अमीचन्द्र शर्मा ने ऊपर लिखा है। अर्थात
रावसंकट इससे पूर्व में हुये हैं। यह काल
अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.) का बनता है। इसमें अनुसंधान की आवश्यकता है।
[p.19]:
लाह को राज्य मिला। पवनरेखा ने बादशाह हुमायूँ की आज्ञा पाकर बड़ी रानी के 19 पुत्रों को देश निकाला दे दिया और वे देश के विभिन्न भागों में चले गए और बस गए।
शिवराव ने
बुड़ोली गाँव बसाया। वह
चौहान संघ छोडकर पुनः
जाट संघ में सम्मिलित हो गया।
चौहान संघ मुख्यत: जाट गोत्रों से ही बना था। शिवराव की संतान शिवराण कहलाई। तहसील
दादरी चरखी रियासत
जींद में शिवराण गोत्र के 25 ग्राम हैं। उनमे मुख्य ग्राम
बेरला है। लुहारु रियासत में नवाब साहिब शासन कर रहे थे वहाँ इस गोत्र के 25 ग्राम हैं। शिवराण गोत्र के जाट
चौहान वंशी हैं।
4 वर्ष के लगभग हुये कि
बड़ी खोथ जिला
हिसार में नंदराम और नानग भाट आए थे। उन्होने बड़ी खोथ के शिवराण गोत्र के जाटों की वंशावली सुनाई थी।
बड़ी खोथ का सरस्वती राम नंबरदार शिवराव से 24 पीढ़ी पीछे हुआ है जिसकी वंशावली निम्नानुसार है:
1
राव संकट (1310 ई.), 2
शिवराव (1335 ई.), 3 पीथा, 4 बाला, 5 उमरा, 6 रातू, 7 पून, 8 अंचल, 9 ?, 10 राणा, 11 रंतपाल,
[p.20]: 12 अजनूपल्ल, 13 भालू, 14 मैनपाल, 15 जीतू, 16 सोभन, 17 मेघराज, 18 चंदू, 19 जगता, 20 फूल्लू, 21 सुखचंद, 22 उष्णाक, 23 रामलाल, 24
सरस्वतीराम (1910 ई.)
यह वंशावली नानग और नंदराम भाट की बही से लिखी गई है। ये ग्राम
श्यामपुरा, थाना सतनाली, तहसील
नारनौल रियासत पटियाला के हैं।
अब हम जिला
रोहतक के
खेड़ी सुलतान नामक ग्राम के
चौहान वंशी राजपूत क्षत्रियों की वंशावली लिखते हैं:
1
संकटराव, 2 हरसराज, 3 विजयराज, 4 पद्मपाल, 5 जगतू, 6 सूढ़े, 7 मलसी , 8 अम्बा, 9 आल्हाणसी, 10 भरेपाल, 11 पिचाण 12 मानकचन्द, 13 वाद्दा, 14 चन्दा, 15 नरसिंह 16 राम सिंह, 17 काशीराम, 18 इंद्रभान, 19 अमरसिंह, 20 सेवासिंह, सुलतानसिंह
हरसराज और शिवराव संकटराव के पुत्र थे। हरसराज की संतान के
खेड़ी सुलतान के ठाकुर सेवा सिंह और ठाकुर सुलतान सिंह राजपूत क्षत्रिय हैं और राव संकट राव से 20 वीं पीढ़ी
[p 21]: पीछे हुये हैं। बड़ी खोथ के चौधरी सरस्वती राम
रावसंकट से 24 वीं पीढ़ी पीछे हुये। ये जाट क्षत्रिय हैं।
ठाकुर देशराज का मत
ठाकुर देशराज लिखते हैं कि
राज्य जींद में इस वंश के 25 गांव हैं और
लुहारू स्टेट के 52 गांव पूरे शिवराण गोत्र जाटों के हैं।
हिसार जिलें में भी अनेक गांव है। भाट लोगों ने लिखा है कि शिवराव नामी राजपूत ने जो अब से 24 पीढ़ी पहले हुआ था, जाटनी से शादी कर ली, इसलिए उसकी सन्तान के लोग शिवराण कहे जाते हैं। इससे भी बड़ा गपोड़ा और क्या होगा कि एक ही आदमी के सिर्फ चौबीसवीं पीढ़ी में सैकड़ों गांव बस गए! हमारा मत है जो कि बिलकुल सही है कि शिवराण-जाट
शिवि अथवा
सिवोई समूह के जत्थे में से हैं, जो कि शिवि गोत्र अथवा
शैव्य जाटों के भाई-बन्धु हैं।
मालवा से हटकर जिस समय ये लोग राजस्थान में गए, उस समय इनका एक दल
नीमराणे के आस-पास भी पहुंच गया और हुमायूं के समय तक उनका छोटा-मोटा राज इस स्थान पर रहा।[SUP]
[2]
References 1. [URL="https://www.jatland.com/home/Jat_Varna_Mimansa"]Jat Varna Mimansa (1910), Author: Pandit Amichandra Sharma, Published by Lala Devidayaluji Khajanchi, pp.18-21
2.
जाट इतिहास:ठाकुर देशराज,पृष्ठ-596 [/URL][/SUP]