Reservation is our constitutional right

Status
Not open for further replies.
Atlist record does not say so and we have not seen
Please hold your horses sir!.. i know you can not tolerate even a word from me and will loose your nerves soon....By the way, I will not write further on this thread, you and your loved ones be happy with your attitude
 
Last edited:
Please hold your horses sir!.. i know you can not tolerate even a word from me and will loose your nerves soon....By the way, I will not write further on this thread, you and your loved ones be happy with your attitude

Mr, when you know my attitude than why are you coming in between directly/indirectly in my discussion, when others comments in your favour agaist me than why do not you react like this here, My attitude not at all as you think but if you feel strongly than I can say that you are responsible for my such attitude, as far as your leaving this forum is concern, I will not say that we will miss you and bye bye, but it is personal choice and I have nothing to say.
 
भिवानी, जागरण संवाद केंद्र : अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमाडेट हवासिंह सागवान ने कहा है कि यदि 15 अगस्त तक राज्य व केंद्र सरकार जाटों को आरक्षण नहीं प्रदान करती है तो इस बार राष्ट्रव्यापी आदोलन चलाया जाएगा, जिसके लिए अभी से तैयारिया शुरू कर दी गई हैसोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि 29 अप्रैल को कैथल के जवाहर पार्क में सुबह 11 बजे संघर्ष समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी, जिसमें जाट आरक्षण पर अभी तक की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह दलाल ने महाराष्ट्र के मालेगाव से 20 अप्रैल से अपना प्रचार शुरू कर दिया है, जो देश के 13 राज्यों से होते हुए 15 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। सागवान ने कहा कि जब पिछली बार मार्च 2011 में आदोलन किया गया तो आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशकर ने हमारा समर्थन किया था, जबकि बाबा रामदेव व अन्ना हजारे, जो दोनों पिछड़ी जाति से संबंध रखते है, अभी तक हमारे आदोलन के बारे में एक शब्द भी नहीं बोले हैं। यह भी देखा गया है कि जब भी जाट समाज आदोलन करता है तो ये दोनों भी अपने आदोलन का बिगुल बजा देते है। जब हमने 23 मार्च को जंतर-मंतर पर एक दिन का धरना दिया तो अन्ना हजारे 25 मार्च को एक दिन का धरना देने के लिए वहीं पहुच गए।​
 
भिवानी, जागरण संवाद केंद्र : अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमाडेट हवासिंह सागवान ने कहा है कि यदि 15 अगस्त तक राज्य व केंद्र सरकार जाटों को आरक्षण नहीं प्रदान करती है तो इस बार राष्ट्रव्यापी आदोलन चलाया जाएगा, जिसके लिए अभी से तैयारिया शुरू कर दी गई हैसोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि 29 अप्रैल को कैथल के जवाहर पार्क में सुबह 11 बजे संघर्ष समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी, जिसमें जाट आरक्षण पर अभी तक की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह दलाल ने महाराष्ट्र के मालेगाव से 20 अप्रैल से अपना प्रचार शुरू कर दिया है, जो देश के 13 राज्यों से होते हुए 15 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। सागवान ने कहा कि जब पिछली बार मार्च 2011 में आदोलन किया गया तो आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशकर ने हमारा समर्थन किया था, जबकि बाबा रामदेव व अन्ना हजारे, जो दोनों पिछड़ी जाति से संबंध रखते है, अभी तक हमारे आदोलन के बारे में एक शब्द भी नहीं बोले हैं। यह भी देखा गया है कि जब भी जाट समाज आदोलन करता है तो ये दोनों भी अपने आदोलन का बिगुल बजा देते है। जब हमने 23 मार्च को जंतर-मंतर पर एक दिन का धरना दिया तो अन्ना हजारे 25 मार्च को एक दिन का धरना देने के लिए वहीं पहुच गए।​
I do not think, Anna has any thing against jat reservation, secondly he is not a politician who are fond issuing statements even without intention/interest, as far as the so called Baba Ramdev is concern, you know well that he is anti jat and not only ramdev but most yadavs feel that if jats get OBC status, their community will be effected adversely, Also ramdev is playing in the hands of congress, Congress is trying its best to derail our movement and BS Hooda is in lead to please congress. Brother, earlier mr malik was acting as national president of this movement, now you have mentioned name of Bhagat singh Dalal, so brother there seems to be some confusion. Many jat brothers from Haryana informed me that the sangthan in the state has already been divide by the congress, both the groups are accusing each other for working undr the directions of the congress for the benifit of their leaders, I sincerely hope and believe that the above impression may not be true. In any case our leaders have to be very careful of the congress and its hidden agenda. I personally feel that unity at national and state level is very essencial for success, regards
 
Last edited:
. I personally feel that unity at national and state level is very essencial for success, regards
एकता होना अच्छी बात हैं पर इस एकता के नाम पर कायरो की भीड़ करके क्या फायदा | शायद ही कोई जाट किसी कायर रणछोड़ की हिमायत करेगा |
 
Col Kharb, Negativity of the thought of the people who lead is itself an indication that they do not trust their own community.
You smart enough to measure success.

quote_icon.png
Originally Posted by Fateh
. I personally feel that unity at national and state level is very essencial for success, regards



एकता होना अच्छी बात हैं पर इस एकता के नाम पर कायरो की भीड़ करके क्या फायदा | शायद ही कोई जाट किसी कायर रणछोड़ की हिमायत करेगा |
 
Yes brother, I do understand, infact I have very disappointing information, but what can be done, I feel, neither, congress is going to give them tickets/post as people are hoping nor reservation, The desire of some for name/fame/power/position is effecting our efforts
 
आज से 5 साल पहले जब कमांडेंट हवा सिंह सांगवान ने इस आन्दोलन की शुरुआत की थी तब भी लोगो को यही चिंता सता रही थी के यह आदमी इस आरक्षण की आड़ में अपनी राजनैतिक भूमिका बना रहा हैं | उस वक़्त भी जाटों को अपने हक से ज्यादा कमांडेंट साहब की चिंता हो रही थी की कहीं यह आदमी नेता ना पाक जाए और आज भी समाज को यहीं चिंता हैं | जब इस आन्दोलन के प्रति समाज में जागरूकता की शुरुआत की थी तब ऐसे दुष्प्रचार से तंग आ कर कमांडेंट साहब ने सांगवान खाप की एक पंचायत बुला कर नेम लिया था के मैं जिन्दगी में कभी कोई किसी प्रकार का चुनाव नहीं लडूंगा , अगर कभी लड़ता मिल जाऊ तो मेरे जूता मार देना | 5 साल में इस आन्दोलन में कई उतार चढाव आये कई तरह के चेहरे आये गए परन्तु यह नेम कमांडेंट साहब को हर मीटिंग में लेना पड़ता हैं , हर मीटिंग में शुरुआत करने से पहले वो एक पाँव पर खड़े हो कर यह नेम लेते हैं उसके बाद आगे की कार्यवाही शुरू करते हैं | उनके रिटायर होने के बाद हरियाणा में तीन विधान सभा चुनाव हो लिए व दो बार लोकसभा के चुनाव हो लिए , अगर उनकी सोच सिर्फ एक विधायक बनने की होती तो इतनी मेहनत किसी राजनितिक दल में करते तो शायद अब तक उनको कोई न कोई दल टिकेट जरुर दे देता | लोग भी अजीब हैं उस इंसान से नेम जरुर लेंगे जो उनसे कुछ लेने नहीं देने आया हैं , उन नेताओ से नेम नहीं लेते जो उनको ठगते हैं | लोग यह हिसाब नहीं लगाते की अगर कमांडेंट साहब को कांग्रेस से इतना ही प्यार होता तो वह अपनी किताब में नेहरु व कांग्रेस के खिलाफ नहीं लिखते | लोग कांग्रेस की मौखिक बुराई करते हैं कमाडेंट साहब ने तो कांग्रेस व नेहरु परिवार की लिखित में बुराई कर रखी हैं , गद्दार लिख रखा हैं | इन सब बातों से अगर लोगो को यकीन नहीं होता तो अब क्या इलाज ? आप लोग उनके द्वारा लिखित किताब " असली लुटेरे कौन ? '' पढ़े उसके बाद किसी नतीजे पर पहुंचे और यह बताये की इस समाज को कैसे यकीन आयेगा ?
अब रही कांग्रेस या मुख्यमंत्री हुड्डा से मुलाक़ात की बात तो आज जो आन्दोलन चल रहा हैं जिस हक की लड़ाई चल रही हैं वो कांग्रेस व हुड्डा साहब ने देना हैं , अगर हक लेना हैं तो इनसे मुलाक़ात भी करनी पड़ेगी अगर सिर्फ मुखालफत करते रहेंगे मुलाक़ात करेंगे नहीं तो फिर यह हक की लड़ाई सिरे कैसे चढ़ेगी ? और जब कभी कांग्रेस के नेताओ या हरियाणा के मुख्यमंत्री हुड्डा से मुलाक़ात करने गए हैं तो कमान्डेंट साहब हमेशा समिति के सदस्यों के साथ गए हैं कभी भी किसी कांग्रेसी नेता से अकेले मुलाक़ात नहीं की | आखरी मीटिंग हरियाणा के मुख्यमंत्री से 3 फरवरी को हुई थी जिसमे पुरे हरियाणा से करीब 150 -200 व्यक्ति शामिल थे |
समाज के कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए इस तरह के दुष्प्रचार करते रहते हैं , परन्तु समाज इन लोगो से सवाल नहीं करता , इनसे यह नहीं पूछता की वो लोग कितनी बार आयोग के समक्ष पेश हुए हैं क्या पैरवी की हैं , पैरवी में क्या और कितने ठोस दस्तावेज प्रस्तुत किये हैं ?
हक की लड़ाई हमेशा दो फ्रंट पर लड़ी जाती हैं , पहला फ्रंट जन-आन्दोलन का होता हैं , उसके बाद दूसरा फ्रंट होता हैं सरकार की बनाई हुई सैवधानिक संस्था | हक की लड़ाई को कानूनन दर्जा दिलाने के लिए सरकार की बनाई हुई सैवधानिक संस्था के सामने अपने मजबूत पक्ष रखना ताकि अपनी हक की मांग को सैवधानिक दर्जा मिल सके |
 
Last edited:
Yes brother, I do understand, infact I have very disappointing information, but what can be done, I feel, neither, congress is going to give them tickets/post as people are hoping nor reservation, The desire of some for name/fame/power/position is effecting our efforts

Is it so.
Indeed, bad omens for the community!
 
आज से 5 साल पहले जब कमांडेंट हवा सिंह सांगवान ने इस आन्दोलन की शुरुआत की थी तब भी लोगो को यही चिंता सता रही थी के यह आदमी इस आरक्षण की आड़ में अपनी राजनैतिक भूमिका बना रहा हैं | उस वक़्त भी जाटों को अपने हक से ज्यादा कमांडेंट साहब की चिंता हो रही थी की कहीं यह आदमी नेता ना पाक जाए और आज भी समाज को यहीं चिंता हैं | जब इस आन्दोलन के प्रति समाज में जागरूकता की शुरुआत की थी तब ऐसे दुष्प्रचार से तंग आ कर कमांडेंट साहब ने सांगवान खाप की एक पंचायत बुला कर नेम लिया था के मैं जिन्दगी में कभी कोई किसी प्रकार का चुनाव नहीं लडूंगा , अगर कभी लड़ता मिल जाऊ तो मेरे जूता मार देना | 5 साल में इस आन्दोलन में कई उतार चढाव आये कई तरह के चेहरे आये गए परन्तु यह नेम कमांडेंट साहब को हर मीटिंग में लेना पड़ता हैं , हर मीटिंग में शुरुआत करने से पहले वो एक पाँव पर खड़े हो कर यह नेम लेते हैं उसके बाद आगे की कार्यवाही शुरू करते हैं | उनके रिटायर होने के बाद हरियाणा में तीन विधान सभा चुनाव हो लिए व दो बार लोकसभा के चुनाव हो लिए , अगर उनकी सोच सिर्फ एक विधायक बनने की होती तो इतनी मेहनत किसी राजनितिक दल में करते तो शायद अब तक उनको कोई न कोई दल टिकेट जरुर दे देता | लोग भी अजीब हैं उस इंसान से नेम जरुर लेंगे जो उनसे कुछ लेने नहीं देने आया हैं , उन नेताओ से नेम नहीं लेते जो उनको ठगते हैं | लोग यह हिसाब नहीं लगाते की अगर कमांडेंट साहब को कांग्रेस से इतना ही प्यार होता तो वह अपनी किताब में नेहरु व कांग्रेस के खिलाफ नहीं लिखते | लोग कांग्रेस की मौखिक बुराई करते हैं कमाडेंट साहब ने तो कांग्रेस व नेहरु परिवार की लिखित में बुराई कर रखी हैं , गद्दार लिख रखा हैं | इन सब बातों से अगर लोगो को यकीन नहीं होता तो अब क्या इलाज ? आप लोग उनके द्वारा लिखित किताब " असली लुटेरे कौन ? '' पढ़े उसके बाद किसी नतीजे पर पहुंचे और यह बताये की इस समाज को कैसे यकीन आयेगा ?
अब रही कांग्रेस या मुख्यमंत्री हुड्डा से मुलाक़ात की बात तो आज जो आन्दोलन चल रहा हैं जिस हक की लड़ाई चल रही हैं वो कांग्रेस व हुड्डा साहब ने देना हैं , अगर हक लेना हैं तो इनसे मुलाक़ात भी करनी पड़ेगी अगर सिर्फ मुखालफत करते रहेंगे मुलाक़ात करेंगे नहीं तो फिर यह हक की लड़ाई सिरे कैसे चढ़ेगी ? और जब कभी कांग्रेस के नेताओ या हरियाणा के मुख्यमंत्री हुड्डा से मुलाक़ात करने गए हैं तो कमान्डेंट साहब हमेशा समिति के सदस्यों के साथ गए हैं कभी भी किसी कांग्रेसी नेता से अकेले मुलाक़ात नहीं की | आखरी मीटिंग हरियाणा के मुख्यमंत्री से 3 फरवरी को हुई थी जिसमे पुरे हरियाणा से करीब 150 -200 व्यक्ति शामिल थे |
समाज के कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए इस तरह के दुष्प्रचार करते रहते हैं , परन्तु समाज इन लोगो से सवाल नहीं करता , इनसे यह नहीं पूछता की वो लोग कितनी बार आयोग के समक्ष पेश हुए हैं क्या पैरवी की हैं , पैरवी में क्या और कितने ठोस दस्तावेज प्रस्तुत किये हैं ?
हक की लड़ाई हमेशा दो फ्रंट पर लड़ी जाती हैं , पहला फ्रंट जन-आन्दोलन का होता हैं , उसके बाद दूसरा फ्रंट होता हैं सरकार की बनाई हुई सैवधानिक संस्था | हक की लड़ाई को कानूनन दर्जा दिलाने के लिए सरकार की बनाई हुई सैवधानिक संस्था के सामने अपने मजबूत पक्ष रखना ताकि अपनी हक की मांग को सैवधानिक दर्जा मिल सके |

Every crusader has to face such predicaments and unpalatable comments, do not waver from your chosen path.
 
My dear sir, my point is not agaist Mr Hawa singh, there are many other leaders, you must be aware what happened near hisar, who played what role, why sh Hawa singh was not allowed, what accusation went from both side, fOR YOUR INFORMATION, mR hAWA SINGH HAS TAKEN UP THIS WORK, THERE ARE MANY WHO ARE WORKING SINCE LONG, tHOUGH, i AM NOT A LEADER BUT EVEN WHILE IN ARMY SERVICE I met ch. Bansi lal ch Devi lal,CH hUKAM SINGH, ch Omprakash chautala and the present CM FOR THE SAME CAUSE.tHREE ARE alieve you may like to confirm my statement, When Mr Hawa singh formally given the state leadership I was with him, COL sandhu was keen in the state leadership, he tried his best in that function as well as lateron to come in, he approached me from many sides to support him but I stood for Hawa singhji, because he was sincere, now God knows why people have gone against him, though, the other group seems bit political but some problem is with us also, I and our kharb brothers have so for given our unconditional support to Mr Hawa singh FACING COMMISION WRITING ETC IS NOT VERY BIG THING, ANY PERSON CAN DO IT BUT Mr Hawa ingh has contributed a lot no body can deny. Even NOW i EXPRESS MY VIEWS BECAUSE i WANT THAT WE MUST GET RESERVATION WHICH IS POSSIBLE IF WE ARE ONE, SO IF POSSIBLE mR hAWA SINGH MUST TAKE THE OTHER GROUP ALSO ALONG, REGARDS
 
My dear sir, my point is not agaist Mr Hawa singh, there are many other leaders, you must be aware what happened near hisar, who played what role, why sh Hawa singh was not allowed, what accusation went from both side, fOR YOUR INFORMATION, mR hAWA SINGH HAS TAKEN UP THIS WORK, THERE ARE MANY WHO ARE WORKING SINCE LONG, tHOUGH, i AM NOT A LEADER BUT EVEN WHILE IN ARMY SERVICE I met ch. Bansi lal ch Devi lal,CH hUKAM SINGH, ch Omprakash chautala and the present CM FOR THE SAME CAUSE.tHREE ARE alieve you may like to confirm my statement, When Mr Hawa singh formally given the state leadership I was with him, COL sandhu was keen in the state leadership, he tried his best in that function as well as lateron to come in, he approached me from many sides to support him but I stood for Hawa singhji, because he was sincere, now God knows why people have gone against him, though, the other group seems bit political but some problem is with us also, I and our kharb brothers have so for given our unconditional support to Mr Hawa singh FACING COMMISION WRITING ETC IS NOT VERY BIG THING, ANY PERSON CAN DO IT BUT Mr Hawa ingh has contributed a lot no body can deny. Even NOW i EXPRESS MY VIEWS BECAUSE i WANT THAT WE MUST GET RESERVATION WHICH IS POSSIBLE IF WE ARE ONE, SO IF POSSIBLE mR hAWA SINGH MUST TAKE THE OTHER GROUP ALSO ALONG, REGARDS

Thanks for your support sir!!
 
Status
Not open for further replies.
Back
Top