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कुछ जाट चौधरियों में नेतृत्व की कमी और सही समय पर सही फैसला लेने की योग्यता नहीं : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि जाट आरक्षण पर कुछ लोग राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं क्योंकि जिस कमेटी से मुझे निकालने की बात की जा रही है, उस 21 सदस्यीय कमेटी में मैं कभी था ही नहीं। दूसरा, 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री से मिलने के बाद इन लोगों ने स्वयं मीडिया के सामने बयान दिया था कि कमेटी को भंग कर दिया गया है। 12 दिसंबर को हरियाणा पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट जाट समाज के हक में आने के बाद खापों ने तुरंत ही 14 दिसंबर को रोहतक में फैसला लिया था कि वे 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री से मिलने के बाद ही आगे का फैसला लेंगे, लेकिन जींद जिले के कुछ चौधरी समय पर फैसला नहीं ले पाए, जिस कारण कुछ जगह से आंदोलन के लिए 16 दिसंबर को ही जत्थे निकल पड़े थे और जब यही चौधरी 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री से मिलें तो इन्होंने अपनी संतुष्टि जाहिर की तथा आंदोलन को वापिस लेने की घोषणा भी की। लेकिन जत्थे इनके आदेश का इंतजार करते रहे, मगर इन चौधरियों में कोई भी जत्थों से जाकर नहीं मिला, इस कारण जत्थों के लोग हैरान और परेशान रहे। इससे यह साबित होता है कि ऐसे चौधरियों में नेतृत्व की कमी और सही समय पर सही फैसला लेने की योग्यता नहीं है जिस कारण आम जाट को तकलीफ उठानी पड़ी तथा ऐसे ही लोग खापों को बदनाम करवाने के जिम्मेवार हैं।
सांगवान ने आगे बतलाया कि जाटों ने मार्च, 2011 में रेल रोको आंदोलन चलाया, उसी का परिणाम है कि आज पिछड़ा आयोग का गठन होने पर जाटों के हक में फैसला आया तथा केंद्र स्तर पर राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को भी पुनर्विलोकन का अधिकार दिलवाया। लेकिन इन चौधरियों ने जाट आरक्षण की मांग के लिए कहीं भी आज तक एक कागज तक नहीं दिया, जबकि हमारी संघर्ष समिति ने 14 हजार से अधिक कागज जाट आरक्षण की मांग के लिए विभिन्न स्तर पर दिए हैं और हमें हरियाणा सरकार पर पूरा विश्वास है कि कमेटी के एक सदस्य मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला विदेश से आने के बाद अधिसूचना जारी कर दी जाएगी तथा केंद्र में भी समय आने पर हमारी मांग को पूरा करवाएगी। लेकिन बड़े आश्चर्य की बात है कि जो लोग मार्च, 2011 में आंदोलन के दौरान हम लोगों को गैर सामाजिक तत्व बता रहे थे और उनका सामाजिक बहिष्कार भी किया गया था, वही लोग आज पंचायती चौधरी बनकर श्रेय लेने के लिए उछल-कूद कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कर्नल ओपी सिंधु, जो आयोग की रिपोर्ट का विरोध कर रहे थे, 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री के घर में जाकर उनका धन्यवाद कर रहे थे। ऐसे लोगों से जाट समाज को बहुत ही सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसे ही लोग जाट समाज को बहकाते रहे हैं और हमारे खिलाफ अनाप-शनाप दुष्प्रचार करते रहे हैं।
इस अवसर पर समिति के कैप्टन सोहनलाल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जिला प्रधान कपूर सिंह धनाना, सूबेदार कलीराम धनाना, कैप्टन भोपाल सिंह धनाना, राजसिंह कार्यकारी अध्यक्ष जाटू 84 खाप, राजसिंह घणघस, रघुबीर सिंह बूरा, सूबेदार उमेदसिंह बामला, जोगेंद्र सिंह तालू, सूबेदार सुमेर सिंह भांडवा, जगत सिंह मिताथल, जगबीर तोशाम, दयाकिशन बडेसरा, ओमबीर बवानीखेड़ा, संदीप ढांडा प्रेमनगर आदि साथ थे।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि जाट आरक्षण पर कुछ लोग राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं क्योंकि जिस कमेटी से मुझे निकालने की बात की जा रही है, उस 21 सदस्यीय कमेटी में मैं कभी था ही नहीं। दूसरा, 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री से मिलने के बाद इन लोगों ने स्वयं मीडिया के सामने बयान दिया था कि कमेटी को भंग कर दिया गया है। 12 दिसंबर को हरियाणा पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट जाट समाज के हक में आने के बाद खापों ने तुरंत ही 14 दिसंबर को रोहतक में फैसला लिया था कि वे 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री से मिलने के बाद ही आगे का फैसला लेंगे, लेकिन जींद जिले के कुछ चौधरी समय पर फैसला नहीं ले पाए, जिस कारण कुछ जगह से आंदोलन के लिए 16 दिसंबर को ही जत्थे निकल पड़े थे और जब यही चौधरी 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री से मिलें तो इन्होंने अपनी संतुष्टि जाहिर की तथा आंदोलन को वापिस लेने की घोषणा भी की। लेकिन जत्थे इनके आदेश का इंतजार करते रहे, मगर इन चौधरियों में कोई भी जत्थों से जाकर नहीं मिला, इस कारण जत्थों के लोग हैरान और परेशान रहे। इससे यह साबित होता है कि ऐसे चौधरियों में नेतृत्व की कमी और सही समय पर सही फैसला लेने की योग्यता नहीं है जिस कारण आम जाट को तकलीफ उठानी पड़ी तथा ऐसे ही लोग खापों को बदनाम करवाने के जिम्मेवार हैं।
सांगवान ने आगे बतलाया कि जाटों ने मार्च, 2011 में रेल रोको आंदोलन चलाया, उसी का परिणाम है कि आज पिछड़ा आयोग का गठन होने पर जाटों के हक में फैसला आया तथा केंद्र स्तर पर राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग को भी पुनर्विलोकन का अधिकार दिलवाया। लेकिन इन चौधरियों ने जाट आरक्षण की मांग के लिए कहीं भी आज तक एक कागज तक नहीं दिया, जबकि हमारी संघर्ष समिति ने 14 हजार से अधिक कागज जाट आरक्षण की मांग के लिए विभिन्न स्तर पर दिए हैं और हमें हरियाणा सरकार पर पूरा विश्वास है कि कमेटी के एक सदस्य मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला विदेश से आने के बाद अधिसूचना जारी कर दी जाएगी तथा केंद्र में भी समय आने पर हमारी मांग को पूरा करवाएगी। लेकिन बड़े आश्चर्य की बात है कि जो लोग मार्च, 2011 में आंदोलन के दौरान हम लोगों को गैर सामाजिक तत्व बता रहे थे और उनका सामाजिक बहिष्कार भी किया गया था, वही लोग आज पंचायती चौधरी बनकर श्रेय लेने के लिए उछल-कूद कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कर्नल ओपी सिंधु, जो आयोग की रिपोर्ट का विरोध कर रहे थे, 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री के घर में जाकर उनका धन्यवाद कर रहे थे। ऐसे लोगों से जाट समाज को बहुत ही सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसे ही लोग जाट समाज को बहकाते रहे हैं और हमारे खिलाफ अनाप-शनाप दुष्प्रचार करते रहे हैं।
इस अवसर पर समिति के कैप्टन सोहनलाल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जिला प्रधान कपूर सिंह धनाना, सूबेदार कलीराम धनाना, कैप्टन भोपाल सिंह धनाना, राजसिंह कार्यकारी अध्यक्ष जाटू 84 खाप, राजसिंह घणघस, रघुबीर सिंह बूरा, सूबेदार उमेदसिंह बामला, जोगेंद्र सिंह तालू, सूबेदार सुमेर सिंह भांडवा, जगत सिंह मिताथल, जगबीर तोशाम, दयाकिशन बडेसरा, ओमबीर बवानीखेड़ा, संदीप ढांडा प्रेमनगर आदि साथ थे।
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