Reservation is our constitutional right

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केंद्र स्तर पर जाटों को आरक्षण नहीं मिला तो आंदोलन की घोषणा होगी 19 जुलाई को : सांगवान
भिवानी। आज जाट धर्मशाला में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की भिवानी इकाई की बैठक पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें जाट आरक्षण की समीक्षा की गई तथा केंद्रीय मंत्री सुश्री शैलजा कुमारी के विचारों से भी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को अवगत करवाया गया।
बैठक में पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने कहा कि यदि किन्हीं कारणों से 18 जुलाई तक जाट समाज को केंद्र में आरक्षण नहीं मिला तो 19 जुलाई को आंदोलन करने की घोषणा करने के अलावा जाट समाज के पास दूसरा कोई चारा नहीं होगा और यदि आंदोलन करना पड़ा तो वह पूरी तरह मानसिक और शारीरिक तैयारी के साथ दिल्ली में किया जाएगा, जो सही नीति और नीयत से होगा, जिस प्रकार मार्च, 2011 में रेल रोको आंदोलन चलाया था और हरियाणा सरकार को पिछड़ा आयोग बिठाने के लिए मजबूर किया था। कुछ पदाधिकारियों ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि कुछ लोग राजनीति से प्रेरित होकर हरियाणा में मिले आरक्षण के बारे में जाटों में भ्रम फैलाने में लगे हैं कि इससे जाट समाज को नुकसान होगा, फिर वही लोग दिल्ली में जाकर आरक्षण की बात करते हैं। यदि वे हरियाणा के आरक्षण से संतुष्ट नहीं हैं, तो उन्हें हरियाणा में आंदोलन चलाना चाहिए, दिल्ली में जाने से राज्य स्तर का आरक्षण कैसे मिल सकता है?
बैठक में इस बात पर भी चर्चा की गई कि किन्हीं कारणों से मूला जाटों को आरक्षण से अलग रख दिया गया, जबकि हमारी शुरू से ही मांग थी कि पूरे जाट समाज को बगैर किसी धर्म, पंथ और क्षेत्र के भेदभाव के आरक्षण दिया जाए, लेकिन फिर भी मूला जाटों के साथ न्याय नहीं हुआ। अभी यही न्याय दिलाने के लिए संपूर्ण हरियाणा से मूला जाटों के प्रतिनिधियों को 6 मई, सोमवार के दिन पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाऊस, गुडगांव में हरियाणा पिछड़ा आयोग ने सुनवाई के लिए बुलाया है, जिसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है और प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान के साथ भिवानी से जोगेंद्र तालू व ओमपाल आर्य को भी वहां जाने के लिए नियुक्त कर दिया गया है। सांगवान ने आगे बतलाया कि हरियाणा में आरक्षण के आदेश को अच्छी तरह से लागू नहीं किया जा रहा है, इसलिए पांच मई को प्रात: 9 बजे दिल्ली में हरियाणा के मुख्यमंत्री के साथ संघर्ष समिति की बैठक निर्धारित की गई है।
 
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यदि जाटों को 18 जुलाई तक केंद्र में आरक्षण नहीं मिला तो केंद्र सरकार आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे
हिसार। आज जाट धर्मशाला में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति कार्यकारिणी की बैठक चौ. महेंद्र सिंह भगाणा की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें जाटों को केंद्र स्तर पर आरक्षण पर गहन विचार-विमर्श व मंथन किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से इस बात को दोहराया गया कि हमने केंद्र सरकार को उसकी मांग के अन
ुसार चार महीने का समय दिया था, जो 18 जुलाई को समाप्त हो जाएगा। यदि इस अवधि में जाटों को केंद्र में आरक्षण नहीं दिया जाता है तो आंदोलन करने के अलावा जाट समाज के पास दूसरा कोई चारा नहीं होगा और इस आंदोलन की घोषणा आरक्षण न मिलने की सूरत में 18 जुलाई के बाद तुरंत कर दी जाएगी। आंदोलन पूरा मानसिक और शारीरिक तैयारियों से किया जाएगा, जिसमें किसी प्रकार की ड्रामेबाजी नहीं होगी। आंदोलन शांतिपूर्वक किया जाएगा। यदि दिल्ली प्रशासन और पुलिस जाटों के विरोध में बल प्रयोग करती है तो जाट इसका मुकाबला करेंगे।
इस अवसर पर समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने कहा कि जाट आरक्षण मुद्दे पर हरियाणा के मुख्यमंत्री चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा तथा केंद्र में सामाजिक न्याय मंत्री कुमारी शैलजा के बीच कोई मतभेद नहीं है। उनका कोई राजनीतिक मतभेद हो सकता है, जिससे संघर्ष समिति को कोई लेना देना नहीं है। आठ राज्यों के जाटों को केंद्र स्तर पर कुमारी शैलजा की सिफारिश के आधार पर ही आरक्षण मिलना है और जाट समाज के लिए यह गर्व की बात होगी क्योंकि कुमारी शैलजा हरियाणा प्रदेश से संबंध रखती हैं तथा उनका जन्म दलित समाज में हुआ है और दोनों ही समाज कमेरे वर्ग में आते हैं, जिससे इन समाजों के भविष्य में संबंध और भी सुदृढ़ होंगे। सांगवान ने आगे बतलाया कि हमारी संघर्ष समिति शुरू से कह रही है कि हरियाणा में जाट समाज को दिया गया आरक्षण बिल्कुल उचित है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि कुछ लोग इस आरक्षण को अनुचित बतलाकर जाट समाज को गुमराह कर रहे हैं आंदोलन करने की बजाय अपने घर में बैठ गए हैं या फिर दिल्ली में जाकर केंद्र स्तर पर आरक्षण की बात करते हैं, जबकि हरियाणा राज्य में इसे अनुचित बतला रहे हैं। ऐसे लोगों से जाट समाज को सावधान रहकर अपने जाति प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का तकनीकी संस्थाओं व नौकरियों में फायदा उठाना चाहिए।
हिसार जिले के समिति अध्यक्ष दलजीत सिंह पंघाल ने कहा कि यदि जाटों को 18 जुलाई के बाद दिल्ली में आंदोलन करना पड़ा तो हिसार जिले से हजारों की संख्या में जाट और जाटनियां आंदोलन में हिस्सा लेकर अपने अधिकार की लड़ाई लड़ेंगे।
 
जाट आरक्षण का श्रेय लेने के लिए जाट संगठनों में मची होड़ : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि जाट आरक्षण का श्रेय लेने के लिए जाटों के एक से एक नए संगठन खड़े हो रहे हैं और उनमें भारी होड़ लगी हुई है। जाटों का पहला संगठन महाराजा महेंद्र प्रताप ने सन् 1906 में अखिल भारतवर्षीय जाट सभा बनाई, जिसके 1998 में दो भाग हो गए और अखिल भारतीय जाट सभा का गठन किया गया, जिसके प्रथम अध्यक्ष स्व. चौ. दारा सिंह पहलवान बने तथा उनकी जगह चौ. अजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री को 30 मार्च, 2013 को अध्यक्ष बनाया गया। अभी-अभी 12 मई, 2013 को एक अलग से अखिल भारतीय जाट सभा का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंद्र सिंह को बनाया गया है, जिन्होंने जाटों के लिए केंद्र में आरक्षण के लिए मांग की है।
सांगवान ने आगे बतलाया कि ये सभी बड़ा हास्यास्पद मामला है कि पंजाब में अभी तक पिछड़ा आयोग ने जाट आरक्षण के लिए कोई भी कार्रवाई शुरू नहीं की है, जबकि नया कानून बोलता है कि केंद्र में आरक्षण लेने के लिए पहले राज्य स्तर पर आरक्षण होना अनिवार्य है। वहीं दूसरी ओर कई संगठन हरियाणा राज्य में मिले आरक्षण को अनुचित बतला रहे हैं और लड़ाई केंद्र में आरक्षण पाने के लिए लड़ रहे हैं। लेकिन अगर राज्य में ही आरक्षण सही नहीं मिला तो केंद्र स्तर पर आरक्षण किस तरह दिया जा सकता है। ये सभी संगठन केवल श्रेय लेने के लिए जाट समाज को बुरी तरह से गुमराह कर रहे हैं। इसलिए सांगवान ने आगे कहा कि हरियाणा में विशेष पिछड़ा जातियों के छात्रों व नौकरी के लिए आवेदन करने वालों को बगैर हिचक के अपने जाति प्रमाण-पत्र बगैर किसी देरी के बनवा लेने चाहिएं क्योंकि जो भी अभ्यर्थी मैरिट में आएगा, उसकी गणना सामान्य वर्ग में होगी, उसके बाद बचे हुओं को विशेष पिछड़ी जाति में शामिल किया जाएगा। इसलिए सभी को अपने आवेदनों के साथ जाति प्रमाण-पत्र लगाने चाहिएं और निकट भविष्य में जाटों को केंद्र स्तर पर भी आरक्षण मिलना भी तय है। फिर भी किसी कारणवश 18 जुलाई तक नहीं मिलता तो आंदोलन भी तय है। इसलिए जाट समाज को बिल्कुल भी बहकने की आवश्यकता नहीं है।
 
जाट आरक्षण का श्रेय लेने के लिए जाट संगठनों में मची होड़ : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि जाट आरक्षण का श्रेय लेने के लिए जाटों के एक से एक नए संगठन खड़े हो रहे हैं और उनमें भारी होड़ लगी हुई है। जाटों का पहला संगठन महाराजा महेंद्र प्रताप ने सन् 1906 में अखिल भारतवर्षीय जाट सभा बनाई, जिसके 1998 में दो भाग हो गए और अखिल भारतीय जाट सभा का गठन किया गया, जिसके प्रथम अध्यक्ष स्व. चौ. दारा सिंह पहलवान बने तथा उनकी जगह चौ. अजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री को 30 मार्च, 2013 को अध्यक्ष बनाया गया। अभी-अभी 12 मई, 2013 को एक अलग से अखिल भारतीय जाट सभा का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंद्र सिंह को बनाया गया है, जिन्होंने जाटों के लिए केंद्र में आरक्षण के लिए मांग की है।
सांगवान ने आगे बतलाया कि ये सभी बड़ा हास्यास्पद मामला है कि पंजाब में अभी तक पिछड़ा आयोग ने जाट आरक्षण के लिए कोई भी कार्रवाई शुरू नहीं की है, जबकि नया कानून बोलता है कि केंद्र में आरक्षण लेने के लिए पहले राज्य स्तर पर आरक्षण होना अनिवार्य है। वहीं दूसरी ओर कई संगठन हरियाणा राज्य में मिले आरक्षण को अनुचित बतला रहे हैं और लड़ाई केंद्र में आरक्षण पाने के लिए लड़ रहे हैं। लेकिन अगर राज्य में ही आरक्षण सही नहीं मिला तो केंद्र स्तर पर आरक्षण किस तरह दिया जा सकता है। ये सभी संगठन केवल श्रेय लेने के लिए जाट समाज को बुरी तरह से गुमराह कर रहे हैं। इसलिए सांगवान ने आगे कहा कि हरियाणा में विशेष पिछड़ा जातियों के छात्रों व नौकरी के लिए आवेदन करने वालों को बगैर हिचक के अपने जाति प्रमाण-पत्र बगैर किसी देरी के बनवा लेने चाहिएं क्योंकि जो भी अभ्यर्थी मैरिट में आएगा, उसकी गणना सामान्य वर्ग में होगी, उसके बाद बचे हुओं को विशेष पिछड़ी जाति में शामिल किया जाएगा। इसलिए सभी को अपने आवेदनों के साथ जाति प्रमाण-पत्र लगाने चाहिएं और निकट भविष्य में जाटों को केंद्र स्तर पर भी आरक्षण मिलना भी तय है। फिर भी किसी कारणवश 18 जुलाई तक नहीं मिलता तो आंदोलन भी तय है। इसलिए जाट समाज को बिल्कुल भी बहकने की आवश्यकता नहीं है।


There is a need to change the attitude " Reservation is birth right of Jats".

Our ancestors have sacrificed themselves for saving the country or for producing food for the country. History is a proof in itself.
 
There is a need to change the attitude " Reservation is birth right of Jats".

Our ancestors have sacrificed themselves for saving the country or for producing food for the country. History is a proof in itself.

Shaantanu,

Kindly tell us why there is a need to change the attitude which you find so annoying and why is it annoying to you in particular?
 
Shaantanu,

Kindly tell us why there is a need to change the attitude which you find so annoying and why is it annoying to you in particular?

A slight correction: "Shantanu" not "Shaantanu".
It is not annoying to me, i think you have misread and misunderstood my statement. I have only asserted the facts stated in support of "Jat reservation" by other writers.
 
All for making the Jat's fool again. These news are created for the UP polls, after the polls, these would be forgotten as usual.

It's likely that this game would be understood by the Jats this time and that they would give their reply via the ballots. I hope Congress man are listening, their game can not continue forever...


Well this country needs fodder in the form of people called soldiers to be killed at Indian borders and inside India as it happened recently, when a congress convey was attacked by naxals. The soldiers and the security forces have to fight forces which are alien to this country and their own blood who wage war in the name of religion across the border due to bad political system, governance and misdirection from the political systems in Pakistan and Afghanistan.
This has been happening for ages in north western India.

When it comes to giving back to the communities defending the borders created by the political system. The same communities have least representation in Indian Parliament, they are not given proper quota in jobs and other parts of the system and these communities are the most exploited in one form or the other.
 
The nation, the Govt and the society which neglects the security forces, has to suffer sooner or later, After indepndence,kissan and fauji jawan have been totally neglected, insulted and deprived of their ecconomical and social dues, thus India has to suffer, waite a bit you may face worst situation on our security internal and external
 
आरक्षण के संबंध में विशेष पिछड़ी जातियों को भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि विशेष पिछड़ी जातियों को मिले आरक्षण के बारे में कुछ लोग भ्रमित करने वाली बातें फैलाकर समाज को गुमराह कर रहे हैं कि विशेष पिछड़ी जाति का फार्म भरने से उनकी गिनती केवल विशेष पिछड़ी जाति में की जाएगी, जो सरासर अनुचित है। इस संबंध में कानून बड़ा साफ है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों के उम्मीदवार, जो मेरिट में आएंगे, उनकी गिनती सामान्य में की जाएगी। शेष उम्मीदवारों को अपने वर्ग में मेरिट के आधार पर रखा जाएगा। हरियाणा सरकार की अधिसूचना के अनुसार विशेष पिछड़ी जातियों को ये सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो पिछड़ी जातियों के लिए हैं। इसीलिए विशेष पिछड़ी जातियों के सभी अभ्यर्थी हरियाणा सरकार के किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालयों में दाखिले लेने वाले तथा हरियाणा सरकार की नौकरियों में आवेदन करने वालों को चाहिए कि वे अपना विशेष पिछड़ी जाति प्रमाण-पत्र बनावाकर अपने फार्मों के साथ अवश्य लगाएं।
सांगवान ने आगे बतलाया कि जहां तक चुनाव में जाट उम्मीदवारों के आरक्षण का प्रश्र है, वह सभी केंद्र में पिछड़ी जाति में सम्मिलत करने के बाद सामान्य रूप से लागू हो जाएगा। वर्तमान में केंद्र सरकार ने क्रिमिलेयर की सीमा साढ़े चार लाख से बढ़ाकर छह लाख कर दी है। इसलिए केवल पचास हजार या इससे अधिक वेतन या पेंशन लेने वालों के लिए ही यह लागू होगा। इसीलिए बाकी को इस बारे में किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सांगवान ने आगे कहा कि हरियाणा में कुछ तहसीलों में विशेष जातियों के प्रमाण-पत्र बनवाने में अधिकारी अनावश्यक ही देरी कर रहे हैं, उसके लिए हरियाणा सरकार से लिखित रूप में शिकायत कर दी गई है।
 
प्यारे दोस्तो,
आज की प्रेस विज्ञप्ति में मैंने आरक्षण के बारे में कुछ स्पष्ट करने की कोशिश की है और उम्मीद है कि कल अखबारों में छपने पर हमारे समाज के काफी लोग इसको समझ जाएंगे। इसके अतिरिक्त कुछ दोस्तों ने केंद्र में आरक्षण के लिए सवाल किया है, तो मैं ये बताना चाहूंगा कि नवंबर, 2011 में राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग ने कानून बना दिया है कि जब तक प्रदेश स्तर पर आरक्षण नहीं है, केंद्र में नहीं मिल सकता है। वर्तमान में दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा राज्य में जाट समाज को राज्य स्तर पर आरक्षण मिल चुका है। राजस्थान में जाटों को राज्य और केंद्र स्तर पर आरक्षण मिला हुआ है, लेकिन वहां दो जिलों भरतपुर और धौलपुर को छोड़ दिया गया है। अभी जाटों को केंद्र में आरक्षण देने के लिए कार्रवाई चल रही है और अभी जब भी आरक्षण मिलेगा, इन ऊपरलिखित सभी राज्यों में जाटों को केंद्र स्तर पर आरक्षण एक साथ मिलेगा। यदि फिर भी जाट समाज के साथ न्याय नहीं होता है, तो हम मानसिक और शारीरिक तौर पर केंद्र सरकार के विरोध में दिल्ली में आंदोलन करने के लिए पूर्णतया तैयार हैं, इसमें हमें किसी प्रकार का भी संशय नहीं है और आंदोलन किस प्रकार चलाया जाता है, हम अच्छी तरह से जानते हैं, लेकिन सबसे बड़ा अफसोस मुझे इस बात का है कि जम्मू एवं काश्मीर में जाटों को राज्य स्तर पर आरक्षण नहीं मिला और वहां के जाट बहुत गरीब हैं। वहां पर हिंदू, सिख और मुसलमान जाटों की लगभग बराबर-बराबर जनसंख्या है और इनमें सभी में बहुत अच्छा भाईचारा है। यहां तक कि हिंदू और सिख जाटों में आपस में खुलकर रिश्ते होते हैं। सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है कि महाराष्ट्र राज्य में हालांकि बहुत कम जाट हैं, लेकिन फिर भी वहां जातियों की सूची में आज तक जाट नाम की वहां कोई जाति नहीं है, जिसके लिए वहां की जाट सभा के द्वारा अपना मांग पत्र तैयार करके हमने जनवरी, 2013 में हरियाणा के मुख्यमंत्री चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के माध्यम से वहां की सरकार को भेज चुके हैं, और आशा है कि वहां के जाटों का नाम कम से कम एक जातीय सूची में तो अवश्य आ जाएगा। हमने यह अच्छी तरह से समझ लिया है कि पंजाब के जाटों ने अभी तक आरक्षण के लिए मन नहीं बनाया है और न ही इसकी अहमियत को समझने की कोशिश की है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि पंजाब के जाटों को निकट भविष्य में आरक्षण मिल पाएगा। पंजाब के जाटों ने सभी प्रयासों के बावजूद अभी तक आरक्षण के लिए कोई पहल नहीं की है, जिसके कुछ कारण हैं, जो मैं कभी बाद में बतलाऊंगा। बाकी शेष राज्यों के जाट केंद्र में आरक्षण के लिए धैर्य से इंतजार करें। फेसबुक में एक साथी ने लिखा है कि आरक्षण बंद होना चाहिए। तो इस बारे में मैं अपनी राय स्पष्ट करना चाहता हूं कि जब तक इस देश में प्रजातंत्र रहेगा, आरक्षण कभी समाप्त नहीं हो सकता, क्योंकि इस देश के दबे-कुचले और पिछड़े लोगों को आगे लाने का केवल यही रास्ता है। हमें तो सुश्री कुमारी शैलजा के साथ मुलाकात में यह स्पष्ट कर दिया था कि सरकारी नौकरियां दिन प्रतिदिन कम होती जा रही हैं। यदि इन दबे-कुचले और पिछड़े लोगों का भविष्य में भला करना है, तो प्राईवेट सेक्टर में आरक्षण अति शीघ्र लागू किया जाए।
मैं मेरे दोस्तों को यह भी याद दिलाना चाहूंगा कि मंडल आयोग के समय जाटों ने स्वयं आरक्षण लेने से मना कर दिया था क्योंकि उन्होंने कहा था कि वे पिछड़ा नहीं कहलाना चाहते क्योंकि इससे उनका स्वाभिमान घटता है और ये जाट उत्तरप्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के थे, जिनके कारण दूसरे राज्यों के जाटों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा। इस बात का राजस्थान के जाटों को बहुत ज्यादा अफसोस था। इसलिए उन्होंंने मुद्दे को समझते हुए सन् 1992 से अपने अधिकार के लिए आंदोलन शुरू किया और ये आंदोलन 27 अक्टूबर, 1999 तक चलता रहा जब तक कि जाटों को वहां आरक्षण नहीं मिल गया। इस आंदोलन को चलाने में चौ. ज्ञानप्रकाश पिलानिया, आईपीएस सेवानिवृत तथा वर्तमान में राज्यसभा के सदस्य चौ. विजय पूनिया व चौ. राजाराम मील आदि का विशेष योगदान था, जिन्होंने इस आंदोलन को अपने अंजाम तक पहुंचाया। राजस्थान को छोडक़र बाकी जिन जाटों को राज्य स्तर पर आरक्षण मिला हुआ है, उनको किसी प्रकार का आंदोलन नहीं करना पड़ा। हरियाणा में आरक्षण के लिए आंदोलन की शुरूआत 26 जनवरी, 2008 में शुरू हुई, जिसमें चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अतिरिक्त चौ. विरेंद्र सिंह डूमरखा, चौ. अजयसिंह चौटाला, श्रीमति किरण चौधरी, श्री दीपेंद्र सिंह हुड्डा और श्रीमति श्रुति चौधरी आदि जाट नेताओं ने जाट आरक्षण का खुलकर समर्थन किया, लेकिन अधिकतर जाट नेता इस बारे में आज तक अपनी चुप्पी साधे रहे हैं। लेकिन हरियाणा में दो जाट नेता ऐसे हैं, जिन्होंने जाट आरक्षण का समर्थन न करके जाटों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिलाने की बात करके दूसरे समाज के लोगों को भडक़ाने का कार्य किया तथा जाटों को सरेआम गुमराह किया। इन्होंने तो यहां तक कहा कि हरियाणा में जाटों को पिछड़ी जाति के 27 प्रतिशत के कोटे में शामिल न किया जाए और उन्हें आर्थिक तौर पर आरक्षण दिया जाए। इन दोनों नेताओं ने सरासर जाट समाज को गुमराह करते हुए अपनी वोटों के लिए दूसरे समाजों को खुश करने की कार्रवाई करके सरेआम जाट समाज के साथ दगा किया है। इन दोनों जाट नेताओं में से एक बड़ा नेता है, दूसरा उससे छोटा नेता है, लेकिन दोनों अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों से संबंध रखते हैं। इसलिए मेरे हरियाणा के प्यारे दोस्तों से मैं ये जानना चाहूंगा कि ये दोनों नेता कौन-कौन हैं?
जय जाट।
आपका हवासिंह सांगवान, पूर्व कमांडेंट।
 
जाट आरक्षण का श्रेय लेने के लिए जाट संगठनों में मची होड़ : सांगवान
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बतलाया कि जाट आरक्षण का श्रेय लेने के लिए जाटों के एक से एक नए संगठन खड़े हो रहे हैं और उनमें भारी होड़ लगी हुई है। जाटों का पहला संगठन महाराजा महेंद्र प्रताप ने सन् 1906 में अखिल भारतवर्षीय जाट सभा बनाई, जिसके 1998 में दो भाग हो गए और अखिल भारतीय जाट सभा का गठन किया गया, जिसके प्रथम अध्यक्ष स्व. चौ. दारा सिंह पहलवान बने तथा उनकी जगह चौ. अजय सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री को 30 मार्च, 2013 को अध्यक्ष बनाया गया। अभी-अभी 12 मई, 2013 को एक अलग से अखिल भारतीय जाट सभा का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंद्र सिंह को बनाया गया है, जिन्होंने जाटों के लिए केंद्र में आरक्षण के लिए मांग की है।
सांगवान ने आगे बतलाया कि ये सभी बड़ा हास्यास्पद मामला है कि पंजाब में अभी तक पिछड़ा आयोग ने जाट आरक्षण के लिए कोई भी कार्रवाई शुरू नहीं की है, जबकि नया कानून बोलता है कि केंद्र में आरक्षण लेने के लिए पहले राज्य स्तर पर आरक्षण होना अनिवार्य है। वहीं दूसरी ओर कई संगठन हरियाणा राज्य में मिले आरक्षण को अनुचित बतला रहे हैं और लड़ाई केंद्र में आरक्षण पाने के लिए लड़ रहे हैं। लेकिन अगर राज्य में ही आरक्षण सही नहीं मिला तो केंद्र स्तर पर आरक्षण किस तरह दिया जा सकता है। ये सभी संगठन केवल श्रेय लेने के लिए जाट समाज को बुरी तरह से गुमराह कर रहे हैं। इसलिए सांगवान ने आगे कहा कि हरियाणा में विशेष पिछड़ा जातियों के छात्रों व नौकरी के लिए आवेदन करने वालों को बगैर हिचक के अपने जाति प्रमाण-पत्र बगैर किसी देरी के बनवा लेने चाहिएं क्योंकि जो भी अभ्यर्थी मैरिट में आएगा, उसकी गणना सामान्य वर्ग में होगी, उसके बाद बचे हुओं को विशेष पिछड़ी जाति में शामिल किया जाएगा। इसलिए सभी को अपने आवेदनों के साथ जाति प्रमाण-पत्र लगाने चाहिएं और निकट भविष्य में जाटों को केंद्र स्तर पर भी आरक्षण मिलना भी तय है। फिर भी किसी कारणवश 18 जुलाई तक नहीं मिलता तो आंदोलन भी तय है। इसलिए जाट समाज को बिल्कुल भी बहकने की आवश्यकता नहीं है।

WE HEARED THAT in haryana and at national level also, sh Hawa singh is spoiling the progress of reservation to jats by playing in the hands of Hooda sahab, ofcourse, hooda has given service to his son in food & supply and promised ticket from dadari in next elections, that is why Hawa singh was about to be thrown out of caste in one of the meeting at Hisar, people also say that Hawa singh when in service took lot of money for helping to get jobs in CRPF, God knows how far it is true,
 
WE HEARED THAT in haryana and at national level also, sh Hawa singh is spoiling the progress of reservation to jats by playing in the hands of Hooda sahab, ofcourse, hooda has given service to his son in food & supply and promised ticket from dadari in next elections, that is why Hawa singh was about to be thrown out of caste in one of the meeting at Hisar, people also say that Hawa singh when in service took lot of money for helping to get jobs in CRPF, God knows how far it is true,

Fatah Singh Sahab,

Welcome back with new ID.

How have you been?
 
WE HEARED THAT in haryana and at national level also, sh Hawa singh is spoiling the progress of reservation to jats by playing in the hands of Hooda sahab, ofcourse, hooda has given service to his son in food & supply and promised ticket from dadari in next elections, that is why Hawa singh was about to be thrown out of caste in one of the meeting at Hisar, people also say that Hawa singh when in service took lot of money for helping to get jobs in CRPF, God knows how far it is true,

ek aur fajula aaya sai,iski bhi suno koi.fajulle laga raha.
 
अच्छा चाचू लौट आए और वो भी एक नए अवतार मे , चाचू आपका इस अवतार मे जाटलैंड पर इस्तकबाल करते हैं :applause:
समर मेरे ख्याल से यह फौजी चाचू नहीं हो सकते , क्योंकि फौजी आदमी नकली काम नहीं करेगा चाहे कुछ हो जाओ , ऐसे काम सिर्फ नौटंकी वाले ही कर सकते हैं :stupid:
 
WE HEARED THAT in haryana and at national level also, sh Hawa singh is spoiling the progress of reservation to jats by playing in the hands of Hooda sahab, ofcourse, hooda has given service to his son in food & supply and promised ticket from dadari in next elections, that is why Hawa singh was about to be thrown out of caste in one of the meeting at Hisar, people also say that Hawa singh when in service took lot of money for helping to get jobs in CRPF, God knows how far it is true,
वैसे आपने यह कहा सुना और किस से सुना ???
आजकल जाटों मे कुछ लोग दुत्ति जैसे होने लगे हैं , कहेंगे हमने सुना हैं और जब पुछो की कहा सुना तो गुम हो जाते हैं |
कोई भी आंदोलन हो प्रचार से ज्यादा दुसप्रचार ज्यादा तेजी से चलता हैं , और लोग ऐसे अफवाहों को ज्यादा हवा देते हैं की हमने कहीं सुना था , सुनी सुनाई जरूर बताएँगे परंतु उस बात की सच्चाई का पता नहीं करेंगे |
खर्ब साहब मान लिया आपने यह कहीं सुना परंतु क्या आप यह बताने का कष्ट करेंगे की यह सुनने के बाद आपने कोई तफतीश की , अगर की तो सच्चाई क्या पाई ?
सुनी सुनाई बाते करना लुगाइयों का काम होता हैं मर्दों का नहीं , आजकल जाट भी लुगाइया होने लगे यह देख कर ताज्जुब होता हैं |

खर्ब साहब आपकी ऐसी बातों से कुछ जलने की बु आ रही हैं
:stupid:
 
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