Shayri (Continued)

आसमान में मत ढूंढो अपने सपनो को,
सपनो के लिये तो ज़मीन की ज़रूरत होती हो |
सब कुछ मिल जाये तो जीने का क्या मज़ा,
जीने के लिये भी एक कमी की ज़रूरत होती है ||



 
हम उसके है, ये राज़ तो वो जान गया है,
वो किसका है ये सवाल, मुझे सोने नहीं देता |


 
बचपन की वो अमीरी न जाने कहा खो गयी |
जब पानी मे हमारे भी जहाज़ चला करते थे ||
 
कुछ हकीकत तो कुछ फ़साना रह गया |
शायद मुझे उन्हें कुछ बताना रह गया ||

एक वक़्त मिले फिर से हम तो लगा |
पीछे एक गुजरा ज़माना रह गया ||
 
उल्फते सफर संग दस्ते सहरा में ....
खोज रहा है इंसा खुद का पता इस मतलबी दुनिया में |
 
किसी के जख्म का मरहम किसी के दर्द का इलाज ||
लोगो ने बाँट रखा है दवा की तरह मुझे ||
 
मेरी निगाहों की तलाश बस इतनी है,
आखरी सांस से पहले उस का दीदार हो जाये....
 
यहाँ से ढूंढ़ कर ले जाये कोई तो मुझ को
जहां से ढूंढने निकला था बेखुदी में तुझे .......
 
लम्हों लम्हों में कटी जिंदगी ,एक याद सी बन जाती है
चुपके से दिल की बात अल्फाजों में बदल जाती है |
 
तू तो नफ़रत भी न कर पाएगा इतनी शिद्दत के साथ,
जिस बला का प्यार तुझसे बे-ख़बर मैंने किया ।
 
"ये शरारत भरा लहजा तो मेरी आदत है,
तु हर एक बात पे,यों नम ना किया कर आँखें....!!"
 
हर इक हसरत हंस कर उनकी पूरी की हमने ,
हमारी एक तमन्ना उनके दिल को भारी कर गयी.
 
बुलंदियों की ख़्वाहिशें तो बहुत हैं मगर |
दूसरों को रौंदने का हुनर कहाँ से लाएं ||
 
"ले रहा था 'मोहब्बत' के बाज़ार से 'इश्क' की चादर,
लोगों के हुजूम से आवाज आई 'साहिब' आगे से 'कफ़न' भी लेना"
 
अजीब अँधेरा है साकी तेरी महफ़िल में,
हमने दिल भी जलाया मगर रौशनी न हुई.
 
तुम दो फरेब ओर मै समझू प्यार इसे |
अब इतनी भी सादगी का जमाना नहीं रहा ||
 
मज़ा आ जाए गर हो जाए इतना अबकी बारिश में |
हमारी आखँ के आँसू तुम्हारी छत पे जा बरसें ||
 
~ Mitti ka jism leke pani k ghar me hu...
Manzil hai maut meri har pal safar me hu..
Hona hai Qatl ye malum hai muje..
Lekin ye nahi pata mai kis kiski nazar me hu..!!~
 
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