ravinderjeet
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खुशी का हर लम्हा और, ज़िंदगी का गम भी है,
इसी का है हर सितम, इसका नज़रे करम भी है,
झुका दिया इसने सबको, क्या पीर क्या सिकंदर,
वक़्त बेरहम भी है, और वक़्त ही मरहम भी है.
इसी का है हर सितम, इसका नज़रे करम भी है,
झुका दिया इसने सबको, क्या पीर क्या सिकंदर,
वक़्त बेरहम भी है, और वक़्त ही मरहम भी है.