Shayri (Continued)

कुछ इस तरह सौदा किया मुझसे वक्त ने ,
तुजुर्बे दे कर वो मेरी नादानी ले गया ॥
 
बहाना क्यूँ तलाश करते हो
मसरूफ होने का
बस इतना कह दिया करो
अब दिल में जगह नहीं
 
Balhara ji...chije beshak repeat ho jaye par unka matlab kabhi nahi badalta..its the essence of that thing which touches the heart...
n secondly...mai bhai nahi hu..naam se pata chal jana chahiye tha ji...:)
 
Balhara ji...chije beshak repeat ho jaye par unka matlab kabhi nahi badalta..its the essence of that thing which touches the heart...
n secondly...mai bhai nahi hu..naam se pata chal jana chahiye tha ji...:)

हामने के बेरा , आजकाल के नाम ते उभयलिंगी होवें सें ,बेरा-ए कोणी पाट्दा ,बीरा स अक बीरी स ।
मेरा नाम देख ,जाणू ते तडके साढ़े आठ आला रोहतक तें जींद जाण आला अद्धा स । सारी इन्फोर्मेशन कट्ठी बागा देवे स ।
 
Last edited:
पेड़ बहुत उदास देखे हैं मैने |
पत्ते हो गये साज देखे हैं मैने ||

जिन्दगी की बुझती नहीं प्यास |
जाने कैसे ज़ज्बात देखे हैं मैने ||
 
~ Parindon ko milegi manzil ek din, yeh failey hue unke par bolte hain....Wahi log rehte hain khamosh aksar, zamane mein jinke hunar bolte hain....!!~
 
आग है, पानी है, मिट्टी है, हवा है, मुझ में|
और फिर मानना पड़ता है के ख़ुदा है मुझ में|
आईना ये तो बताता है के मैं क्या हूँ लेकिन,
आईना इस पे है ख़मोश के क्या है मुझ में|
 
फुरसत में कभी करेंगे तुझसे हिसाब - ए - जिंदगी ,
अभी तो हम खुद ही उलझे हैं खुद को सुलझाने में |
 
जबकि खंज़र, ख़ुद अपने दोस्तों ने मार दिया,
उलझनों में हूँ, कि किस-किस को मैं क़ातिल लिख दूँ ?

सबको हासिल है बराबर हुनर परखने का,
किसको ज़ाहिल, किसे मैं इश्क़ के क़ाबिल लिख दूँ ?
 
मेरे महबूब की ये अदा, सरे बाज़ार पिटवा न दे|
क्यों हर चेहरे में नज़र आज कल आते हैं मुझे||
 
Aankho me sama jao, Is dil me raha karna
Taaron me mila karna, Phoolo me hasa karna
jabse tumhe dekha hai jabse tume paya hai
kuch hosh nhi mujhko ek nasha sa chaya hai
ab jo b baat karni ho aankho se kaha karna ....!!
 
एक अरसे से मयस्सर नहीं मुझे |
वो लफ्ज जिसे लोग करार कहते है ||
 
आसमान में मत ढूंढो अपने सपनो को,
सपनो के लिये तो ज़मीन की ज़रूरत होती हो |
सब कुछ मिल जाये तो जीने का क्या मज़ा,
जीने के लिये भी एक कमी की ज़रूरत होती है ||




Heads up for you sir.........Really awesome sahyari you wrote:cool:

One from my side as well................

Kal raat khuda ne puchha ,tu itna dosto mein kyun khoya hai,
tab andar se ye awaaz aayi,
dosto ne hi to di hai khushiyan,
pyar karke to hamesha ye dil roya hai…
 
हमको तो आदत है यों भी प्यासा जीते जाने की,

दो घूँट पानी के लिए किसी कुँए को जूठा क्या करना?
 
मेरा ये शायराना अंदाज देखकर...सावन कुछ यूँ चिड़चिड़ाकर बोला....

"मेरे इस शबाब पर अब तू इतना भी शायराना ना हो ,

मैं तो मौसम हूँ मुझे ढलते, बदलते देर नहीं लगती ...."
 
~ Khushi meri talaash me yun hi firti rahi.....
kabhi use mera ghar na mila....
kabhi use hum ghar na mile..~

[h=5] घर केसे मिलता ? घर तो था एक कोने में ,[/h] हमें तो यूँ ही सूकून मिल गया ,रो लिए एक कोने में । -------रवि "अतृप्त"
 
हमको तो आदत है यों भी प्यासा जीते जाने की,

दो घूँट पानी के लिए किसी कुँए को जूठा क्या करना?

कुंआं झूठे -सुच्चे को नहीं जानता ,

वो अमीर- गरीब को नहीं पहचानता ,

उसकी फितरत हे प्यास बुझाने की ,

ये तुम पर छोड़ा ए बटोही ,

किसी के लिए हे वो जिन्दगी ,


किसी के लिए हे जगह मर जाने की ॥

-------रवि "अतृप्त"
 
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