Shayri (Continued)

लो आज हमने तोड़ दिया रिश्ता-ऐ-उम्मीद,लो
अब कभी गिला ना करेंगे किसी से हम...!!!

तंग आ गए कश-म-कशे जिंदगी से हम
ठुकरा ना दे इस जहान को बेदिली से हम
लो आज हमने तोड दिया रिश्ता ए उम्मीद
लो अब कभी किसी से गिला ना करेंगे हम
पर मिल गए जिंदगी में इत्तफाक़ से
तो पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम

 
जाटलैंड के सीरियस टॉपिक पढ़ने के बाद दिलो दिमाग को थोड़ी ताजगी और तरुणाई का टॉनिक भी चाहिए I न्यू ए सोच के मेरा भी दो चार उल्टी सीधी (random) तुकबंदी करण नै जी करग्या I ना पसंद आवै तो गाल ना काढियो I

इंसानी ख्वाहिसों का न कोई किनारा होता ना कोई अंजाम I ये तो बेलगाम घोड़े की तरह कुलाँचें भरती रहती हैं I इसमे हर्ज़ भी क्या है, क्योंकि दिल बहलाने का इससे खूबसूरत बहाना और क्या हो सकता है I खूबसूरत पड़ोसन को देख कर एक दिलज़ला आशिक क्या सोचता है, कुछ यों बयान किया जा सकता है I

ये खूबसूरत आँखें, शोख़ अंदाज़ ये फूल से आरिज़ पे मद्दम सी मुश्कान,
ये मासूमियत की बिजलियाँ ये जुल्फों की घटा, कोई कैसे ना हो तुमपे कुर्बान
तू किसी और के चमन का फूल है, ये बखूबी है मालूम मुझे,
बेबस हूँ मगर क्या करूं रूह बेचैन हो जाती है गर ना देखूं तुझे I
अज़ब उलझन है दिलों की ये वफ़ाई , ये कैसा है दस्तूर ज़माने का
जो मिल नहीं सकता क्यों देखता है हर दिल ख़्वाब उसे पाने का I
 
अगर पाना है मंजिल तो अपना रहनुमा खुद बनो क्योंकि
वो अक्सर भटक जाते है जिन्हें सहारा मिल जाता है ||
 
राहे मोहब्बत में अजीब पत्थरों से रहा वास्ता मेरा
न ज़ख्म नज़र आता है ... न दर्द सहा जाता है अब ....
 
जब से मिला है साथ तुम्हारा
दुनियां को भुला बैठा हूँ
न ख्याल रहा मुझको ही मेरा
खुद को अजनवी बना बैठा हूँ
 
अब बहुत सुकून है
लग रहा है
पास हो मेरे तुम
मेरे नहीं कोई बात नहीं
मैं तो तुम्हारा हूँ .........
 
यह इश्क ओ प्यार की बातें फक्त किस्से पुराने हैं
भला कच्चे घड़े पर कौन दरिया पार करता है
 
वो जा रहे थे और मैं खामोश खड़ा देखता रहा,
बुज़ुर्गों से सुना था कि पीछे से आवाज़ नही देते.
 
जब तक बिके ना थे, कोई पूछता ना था
उसने खरीद कर मुझे अनमोल कर दिया
 
हम डूब कर उबरे तो बस इतना ही देखा
औरों की तरह तू भी किनारे पे खड़ा था ||


 
कितना आसान था तेरे हिज्र में मर जाना,
फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते जाते ||

 
वो कह के चले इतनी मुलाक़ात बहुत है,
मैंने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है |
आँसूं मेरे थम जाएँ तो शौक़ से चले जाना
अभी कहाँ जाओगे बरसात बहुत है ||
 
हमें खबर है हवा का मिजाज़ रखते हो,
मगर ये क्या ज़रा देर को रुके भी नहीं |


 
इक वफा को पाने की कोशिश मे,
जख्मी होती हैं वफाएं कितनी कितनी
कितना मासूम सा लगता है लफ्ज "मोहोब्बत"
पर इस लफ्ज को निभाने में मिलती हैं सजाएं कितनी कितनी
 
Bhai Sunil, on light note likh raha hu..........ok???......"re tu baaj aa ja University College ke Bhanvre.....maar ken chhodega in kaatilana shayriyan gellyan.....us bakht to university bakshi nahin taine ib JL aalyan nen ghayal karega".......
इक वफा को पाने की कोशिश मे,
जख्मी होती हैं वफाएं कितनी कितनी
कितना मासूम सा लगता है लफ्ज "मोहोब्बत"
पर इस लफ्ज को निभाने में मिलती हैं सजाएं कितनी कितनी
 
Bhai Sunil, on light note likh raha hu..........ok???......"re tu baaj aa ja University College ke Bhanvre.....maar ken chhodega in kaatilana shayriyan gellyan.....us bakht to university bakshi nahin taine ib JL aalyan nen ghayal karega".......

hahaha....... phooleeeeeeee mere bhaiiiii

university me hum kam nahi the to ghaat tu bhi na tha
hum kaiya ne dekhya karte par ek ki baat me tu bhi tha
humne sabte naa mili par ek ki naat me tu bhi tha
hum hostel pade rahya karte par dharamshala jaat me tu bhi tha
din yaad dava diye jab hokke ki khaat me tu bhi tha
 
Last edited:
सच है कि चुप रहने से ये पागलपन बढ जाता है,
लेकिन पत्थर के इस शहर में आखिर किस से बात करे
।

Bheeg gaya daaman uss bedard dilbar ka bhi aaj,
ke baith ker uske agosh me, Dil khol ke roye hum....
 
आज तो चाला पाटेगा,
बूढ़े बाप ते बेटा न्यारा पाटेगा.
आज तो चाला पाटेगा.....

जब बेटे ने करी BA ,
बाब्बू ने खुड धर दिए..
जब बेटे ने करी MA ,
बाब्बू ने किल्ले बेच दिए..
जब बेटे ने करी Phd ,
माँ ने टूम भी बेच दी,
आज ओये बेटा इन रिश्त्याँ ने जड़ ते कटेगा ..

आज तो चाला पाटेगा,
बूढ़े बाप ते बेटा न्यारा पाटेगा....
आज तो चाला पाटेगा......

आप भूखे पेट रह के ,
बेटे तै चूरमा खुवाया था..
खुद धरती पे सो के ,
बेटा सेज पे सुवाया था..
बेटे के जीवन के सुख की खातिर,
बाब्बू ने साडी दुपहरी हल चलाया था...
आज ओये बेटा इन कुर्बानियां के मोल में ,
माँ-बाप ने घर ते काढेगा ....

आज तो चाला पाटेगा..
बूढ़े बाप ते बेटा न्यारा पाटेगा..
आज तो चाला पाटेगा......

देख के ने या हवा बखत की,
बाब्बू सन्न सा रहगया था..
माथा पकड़ के बैठ कून में...
मन में विचार बनावे था..
"हे राम, बीज तो मन्ने आछा ये बोया था,
अर्र संस्कारां का पानी भी खूब लाया था..
पैर मन्ने के बेरा था अक्क,
इस बेल के कड़वा फल लगेगा..."

आज तो चाला पाटेगा..
बूढ़े बाप ते बेटा न्यारा पाटेगा..
आज तो चाला पाटेगा......
--navi
 
Last edited:
कैसी बेरुखी है ये तेरी |
कैसी इजहारे मुहब्बत ||

ना तो मिलने से सुकून |
न दूर जाने से करार ||
 
Back
Top