ravinderjeet
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हमसफ़र सो रहा है सन्नाटा
दास्ताँ हो रहा है सन्नाटा
कोई दस्तक न कोई आहट है
चैन से सो रहा है सन्नाटा
कैसे रंगीनियों में डूबीं रात
खुसबुए बो रहा है सन्नाटा
दूधिया चांदनी को ओढ़े हुए
बेखबर सो रहा है सन्नाटा
क़त्ल करके तमाम आवाज़ें
आस्तीं धो रहा है सन्नाटा
('रिन्द' सागरी)
दास्ताँ हो रहा है सन्नाटा
कोई दस्तक न कोई आहट है
चैन से सो रहा है सन्नाटा
कैसे रंगीनियों में डूबीं रात
खुसबुए बो रहा है सन्नाटा
दूधिया चांदनी को ओढ़े हुए
बेखबर सो रहा है सन्नाटा
क़त्ल करके तमाम आवाज़ें
आस्तीं धो रहा है सन्नाटा
('रिन्द' सागरी)