Shayri (Part 1)

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Jaan boojh kar goonga hoon or bahraa hoon main,,,जान बूझ कर गूंगा और बहरा हूँ मैं ,,,
Isiliye is shahar main jinda hoon main,,,इसीलिए इस शहर में जिन्दा हूँ मैं,,,
Usne rasman jab bhi poocha mera haal,,,उसने रसमन जब भी पुछा मेरा हाल,,,
Maine tanjan kah diya acha hoon main...मैंने तन्जन कह दिया अच्छा हूँ मैं...


 
Tum apne seene main gam na bharna,,,
Or apni aankhon ko tar na karna,,,
Jo umar bhar saath chal na paaye,,,
Kabhi use hamsafar na karna,,,
Safar khushi ka ho ya ho gamon ka ke maut ki aakhhri dagar ka,,,
Tumhain kasam hai bagair mere kabhi bhi koi safar na karna...
 
Dekha hai jindgi main hamne ye aazmake,,,देखा है जिंदगी में हमने ये आजमा के,,,
Dete hain log dhokha dil ke kareeb aake,,,देते हैं लोग धोखा दिल के करीब आके,,,
Kis dushmani ka mujhse badla liya hai ya-rab,,,किस दुश्मनी का मुझसे बदला लिया है या-रब,,,
Khush hain jahan wale mera aashiyan jala ke,,,खुश हैं जहाँ वाले मेरा आशियाँ जला के,,,
Mujhko fareb dekhar mere rahnumaan ne loota,,,मुझको फरेब देकर मेरे रहनुमां ने लूटा,,,
Daaman chhuda liya hai manzil ke paas aake,,,दामन छुडा लिया है मंजिल के पास आके,,,
E-na-khuda,khuda ka kuch khauf khaaya hota,,,ए-न-खुदा, खुदा का कुछ खौफ खाया होता,,,
Kashti meri dubo di sahil ke paas la ke...कश्ती मेरी डुबो दी साहिल के पास ला के....
 
वहाँ कैसे कोई दिया जले जहाँ दूर तक भी हवा न हो,,,
उन्हें हाले दिल न सुनाइये जिन्हें दर्द-ए-दिल का पता न हो,,,
हों अजब तरह कि शिकायतें हों अजब तरह कि इनायतें,,,
तुझे मुझ से शिकवे हज़ार हों मुझे तुझसे कोई गिला न हो...
 
Jaan boojh kar goonga hoon or bahraa hoon main,,,जान बूझ कर गूंगा और बहरा हूँ मैं ,,,
Isiliye is shahar main jinda hoon main,,,इसीलिए इस शहर में जिन्दा हूँ मैं,,,
Usne rasman jab bhi poocha mera haal,,,उसने रसमन जब भी पुछा मेरा हाल,,,
Maine tanjan kah diya acha hoon main...मैंने तन्जन कह दिया अच्छा हूँ मैं...
very nice...
 
Ye adaalat ke dareechon se sada aai hai,,,ये अदालत के दरीचों से सदा आई है,,,
Aaj insaaf ka insaaf tamashaai hai,,,आज इन्साफ का इन्साफ तमाशाई है,,,
Jisne insanon ko maara vo khula phirta hai,,,जिसने इंसानों को मारा, वो खुला फिरता है,,,
Jaanvar maara tha maine to sazaa paai hai...जानवर मारा था मैंने तो सज़ा पाई है...

 
शिकवे हो ,शिकायत हो
चाहे ग़मों की रवायत हो
कब्र सी खामोशी हो
चाहे दुखों
का दरिया हो
या हो परेशानियों की शहर
तलाश करना
कोई गुलमोहर जरुर होगा
तेरे नाम का ,तेरी मुस्कान का
 
चल न पाए कभी इस दुनिया के बाज़ार में
लोग कहते है की सिक्के खोटे है हम
कहने वाले तो कहते है हमें घमंडी भी
पर रातो में अक्सर रोते है हम
जो भी मिलता है उसे बना लेते है अपना
फिर अपनों को ही खोते है हम
टूटती है रोज़ आशा की कोई किरण
फिर एक नई उम्मीद के बीज बोते है हम
 
"उनकी खैरो-ख़बर नही मिलती,
हमको ही ख़ासकर नही मिलती !
शायरी को नज़र नही मिलती ,
मुझको तू ही अगर नही मिलती!
रूह में,दिल में,जिस्म में दुनिया,
ढूंढता हूँ मगर नही मिलती !
लोग कहते हैं रूह बिकती है ,
मैं जिधर हूँ उधर नही मिलती
 
मत कर अपने पर इतना गरूर ऐ इंसान
ना जाने खुदा ने तेरे जैसे कितने
बना-२ कर मिटा दिए
 
अपनों की चाहतो ने दिए इस कदर फरेब
हम लिपट कर रोते रहे हर अजनबी के साथ
 
बड़े दावे करते थे वो उम्र भर साथ निभाने के
अभी जिन्दा है तो भूला दिया,मर जाते तो क्या होता
 
Nazar Ko Badlo To Nazare Badal Jate Hai,
Soch Ko Badlo To sitare Badal Jate Hai,
Kashtiya Badal ne ki jarurat nahi,
Disha Ko Badlo to Kinare Khud-b-Khud badal jate hai.
 
उनकी तुर्बत पे एक दिया भी नहीं जिनके लहू से जलते हैं चिरागे वतन

जगमगाते हैं मकबरे उनके जो बेचते रहे शहीदों का कफन
 
Kisiko Yun Rulaya Nahi Karte,
Jhoote Khwab Kisiko Dikhaya Nahi Karte,
Agar Koi Aapki Zindagi Main Khaas Nahi Hai,
To Usse Reh-Reh Kar Ye Ehsaas Dilaya Nahi Karte…
 
तमाम उम्र इसी बात का गुरुर रहा मुझे *
किसी ने मुझसे कहा था की हम तुम्हारे है​
 
यह क्यां हो गया हैं तेरी कैनात को खुदा ,
के जिन्दा लोग तरश्ते हैं ज़िंदगी के लिए !​
 
आज देकर ज़हर वो हाल पूछते हैं हमारा ......
अ खुदा तुने ये मोह्हबत बनाई क्यूँ है ......

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मोहब्बत मुझे तुझसे नहीं, तेरे किरदार से है ऐ जान ,
वरना हसीन लोग तो बाज़ार में सरे आम बिका करते हैं।

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