Shayri (Part 1)

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[h=6]वक्त बे वक्त ना तू घर से निकल
है जमाना ख़राब थोडा डर से निकल

आग है ज़माने में हर और लगी हुई
गर धुआं है उधर तो इधर से निकल

है जिक्र हर तरफ सिर्फ तेरे नाम का
मन में होगी शांति तू खबर से निकल

देख ले तू जिन्दगी में तूफ़ान कितने है
मिलेगा किनारा तू भवर से निकल

धूप धूल धुआं कितना फैला है यहाँ
हवा मिलेगी खुली तू शहर से निकल

इर्ष्या बैर नफरतो से निकल इन्द्रजीत
रस सोम का मिलेगा इस जहर से निकल
[/h]
 
गर तेरी आँख का इशारा हो जाए
इस गरीब का भी गुज़ारा हो जाए

ना करूं जिस पल तेरा शुक्रिया जिंदगी
मेरा सांसों से ही किनारा हो जाए

आजमाकर तो देख यह जादू भी होगा
बस सोचते ही कोई तुम्हारा हो जाए

नदियाँ गर अपनी जिद पर उतर आयें
क्या मजाल समन्दर खारा हो जाये

वो चाहेगा तो हो सकता है बेचैन
तू भी उसे सबसे प्यारा हो जाए
 
तेरे वजूद की रग-रग में यूँ पैबस्त हैं हम
हमारे दावे की अज़ियत को आजमाया कर
हमें कुबूल नहीं है तेरा उदास बदन
तू अपने आप से मिल कर भी मुस्कुराया कर....​
 
इस से बड़ी बेबसी और क्या होगी मेरे लिए....
मेरे दर से आज फकीर खाली हाथ लौट गया....​
 
कैसी तौहीने बज्मे हस्ती है,
रहने वालो ये कैसी बस्ती है
.मौत को लोग देते हैं कंधा,
जिन्दगी रहम को तरसती है..​
 
वक़्त की दीवार पर लम्हे उगा करते है,

वही लम्हे याद बनकर भी चुभा करते है​
 
दिल कर रहा है कब से मर जाने के इरादे,

यादें तुम्हारी लेकिन जीने को कह रही हैं..!!​
 
हम तुम थे नजदीक एक दूसरे के फिर भी अपनी दूरी थी,
रही वक्त की दीवार हमारे बीच इशारों की कमजोरी थी !​
 
रिवाजें निभाने का वक़्त आ गया है......
तुम्हे भूल जाने का वक्त आ गया है......
तेरी बदली नजरों से आहत है फ़िर दिल.....
कि फ़िर मुस्कुराने का वक्त आ गया है.....
शहर भर में फैलीं है अपनी कहानी......
अब नजरें बचाने का वक्त आ गया है...​
 
अपने हाथों हारा हूँ, वरना किसके बस का हूँ
खुद को ही खो बैठा हूँ,मैं अब क्या खो सकता हूँ।​
 
आँसू मैं ना ढूँदना हूमें,
दिल मैं हम बस जाएँगे,
तमन्ना हो अगर मिलने की,
तो बंद आँखों मैं नज़र आएँगे.
लम्हा लम्हा वक़्त गुज़ेर जाएँगा,
चँद लम्हो मैं दामन छूट जाएगा,
आज वक़्त है दो बातें कर लो हमसे,
कल क्या पता कौन आपके ज़िंदगी मैं आ जाएगा.
पास आकर सभी दूर चले जाते हैं,
हम अकेले थे अकेले ही रेह जाते हैं,
दिल का दर्द किससे दिखाए,
मरहम लगाने वेल ही ज़ख़्म दे जाते हैं,
वक़्त तो हूमें भुला चुका है,
मुक़द्दर भी ना भुला दे,
दोस्ती दिल से हम इसीलिए नहीं करते,
क्यू के डरते हैं,कोई फिर से ना रुला दे,
ज़िंदगी मैं हमेशा नये लोग मिलेंगे,
कहीं ज़ियादा तो कहीं काम मिलेंगे,
ऐतबार ज़रा सोच कर करना,
मुमकिन नही हैर जगह तुम्हे हम मिलेंगे.
ख़ुशबो की तरह आपके पास बिखर जाएँगे,
सुकों बन कर दिल मे उतर जाएँगे,
मेहसूस करने की कोशिश तो कीजिए,
दूर होते हो भी पास नेज़र आएँगे ..............​
 
एक मुद्दत से मेरी माँ नहीं सोई 'ताबिश '

मैंने इक बार कहा था मुझे डर लगता है !!

अब्बास ताबिश
 
हुश्न उसका आये रोज़ निखर रहा था
बन खुशबू फिज़ाओ में बिखर रहा था
जाने क्यू मेहरबा था खुदा उसपे इतना
हर अदा में अंदाज़ उसके भर रहा था
डाल न दे डाका कोई दौलते-हुश्न पर
यही सोच-सोचकर वो डर रहा था
तैर रहा था हल्का सा तबस्सुम लबो पर
जब आईने आगे बैठा वो संवर रहा था
मेरी तौबा भूले से ना जाऊंगा उसके आगे
पिछले दीदार का ही महीनो असर रहा था
जाने क्यू पसंद था बच्चो का उसे साथ
हलाकि वो मेरा हम उम्र रहा था
हुआ था जिस रोज़ निकाह उसका
पूरे शहर की वो ताज़ा खबर रहा था
 
तुम्हारी नाक पर गुस्सा क्यूं हर वक्त रहता है
मुझे लेकर तेरा लहजा बड़ा ही सख्त रहता है

मुझे सचमुच में खो दोगी एक दिन सच्ची कहता हूँ
तुम्हारी बेरुखी से तंग तुम्हारा भक्त रहता है
 
Jo hua use bhool kar apni duniya mein naya kadam rakhana,
Yeh duniya hain badi be-rahem lekin tum apni manzil par nazar rakhana !!
 
क्या लगाऊ उसको रंग वो खुद गुलाल हो जाता है
बस खाली हाथ लगाने से ही चेहरा लाल हो जाता है
सब फीका उसके सामने जाहे रंग हो या भंग
उसकी आँखों में झाँकने पर नशा कमाल हो जाता है
 
प्यार व्यार और इश्क रे भईया
हम ना लेते रिस्क रे भईया
हम तो है आजाद पंछी
नहीं होना है फिक्स रे भईया
क्या जाने पिट विट जाये
कौन लगाएगा विक्स रे भईया
पुलिस वुलिस में पकड़ा दे कोई
लाल कर देंगे हिप्स रे भईया
इसी लिए हम सीधे सादे
कभी ना खोले लिप्स रे भईया
अब के बरस शादी हो जाये
हो गए है टवंटी
सिक्स रे भईया ....
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इस रस्ते में कीचड़ बहुत है अपने आप को सम्भाल लो
लोभ लालच धोखा मक्कारी सब मिलेंगे देख भाल लो
तुम ध्यान हटाओगे तो फिसल जाओगे ..
दोनों और है आग लगी हुयी बस सीधे देखने की आदत डाल लो
 
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