[h=6]वक्त बे वक्त ना तू घर से निकल
है जमाना ख़राब थोडा डर से निकल
आग है ज़माने में हर और लगी हुई
गर धुआं है उधर तो इधर से निकल
है जिक्र हर तरफ सिर्फ तेरे नाम का
मन में होगी शांति तू खबर से निकल
देख ले तू जिन्दगी में तूफ़ान कितने है
मिलेगा किनारा तू भवर से निकल
धूप धूल धुआं कितना फैला है यहाँ
हवा मिलेगी खुली तू शहर से निकल
इर्ष्या बैर नफरतो से निकल इन्द्रजीत
रस सोम का मिलेगा इस जहर से निकल [/h]
है जमाना ख़राब थोडा डर से निकल
आग है ज़माने में हर और लगी हुई
गर धुआं है उधर तो इधर से निकल
है जिक्र हर तरफ सिर्फ तेरे नाम का
मन में होगी शांति तू खबर से निकल
देख ले तू जिन्दगी में तूफ़ान कितने है
मिलेगा किनारा तू भवर से निकल
धूप धूल धुआं कितना फैला है यहाँ
हवा मिलेगी खुली तू शहर से निकल
इर्ष्या बैर नफरतो से निकल इन्द्रजीत
रस सोम का मिलेगा इस जहर से निकल [/h]