Shayri (Part 1)

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मेहमान बन के आये किसी रोज़ अगर वो
उस रोज़ बिन सजाये ही मेरा घर सजा लगे
 
सलीके से अब दिल दुखाए जाते हैं|
रुलाने के बाद, फिर हँसाए जाते हैं।
 
क्यों लोग जमाने से वफा माग रहे हैं|
कातिलों से मसीहा की अदा माग रहे हैं||
 
ये अहसासों की बातें हैं, पुरानी हो नही सकती |
जो बूंदें आँख से टपकें, वो पानी हो नही सकती ||
 
चिराग किससे अपना दर्द बयान करे, जिसको जलाने वाला ही बुझा गया।
अपनों ने बढ़ायी थी जहां उलझन, वहां कोई गैर आके मसला सुलझा गया।
 
ना जाने कौन दुआओं में याद रखता है,
मैं डूबता हूँ और समंदर उछाल देता है !!
 
तलाश कर मेरी कमी को अपने दिल में ऐ दोस्त |
दर्द हो तो समझ लेना कि महोब्बत अभी बाकी है ||
 
बिना गम के ख़ुशी का पता कैसे चलेगा |
बिना रोंए हुए, हंसी का मज़ा कैसे मिलेगा ||
जो उसे करता हैं, उसे वही जानता है |
अगर हम जान गए तो, उसे खुदा कौन कहेगा ||
 
तेरी यादें भी हैं मेरे बचपन के खिलोने जैसी |
तनहा होता हूँ तो इन्हें ले कर बैठ जाता हूँ ||
 
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