What's wrong with BJP?

राजस्थान में यो 'बीजेपी फोबिया' गलत नहीं हैं वहा भाजपा में राजपूतो का प्रभुत्व हैं | जैसा की मैंने पहले भी कहा हैं की राजस्थान में राजनीति "जाट बनाम राजपूत" चलती हैं | राजस्थान में 'जाट मुख्यमंत्री ' भी एक मुद्दा हैं पर उससे अहम् मुद्दा वहा के जाटों के लिए यह रहता हैं की कहीं कोई ठाकर मुख्यमंत्री ना बन जाये | राजस्थान में दूसरा किसी जाति का मुख्यमंत्री बन जाये उससे जाट को इतना परहेज नहीं जितना एक राजपूत मुख्यमंत्री से होता हैं | इन राजपूतो को मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर रखने के लिए वाहा का जाट कांग्रेस से संधि में अपनी भलाई समझता हैं | आपने उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों का दलितों से संधि का सही उदाहरण दिया हैं हम जाटों को भी कौम की भलाई को देखते हुए संधिया करनी चाहिए | राजनीति हमेशा संधि की होती हैं इसलिए जाट कौम को भी अपने अपने क्षेत्र के हिसाब अपने कौमी मुद्दों के स्वार्थो को देखते हुए इन सियासी दलों से राज्य और केंद्र सत्र पर संधि करनी चाहिए |

So indirectly you are accepting that nothing is good in congress but it is the fear of thakurs that makes Jats to vote for Congress. चलो राका भाई साहेब जाटों की तो समझ आई की उनको ठाकरों से डर है, लेकिन कांग्रेस को किस से डर है कि वोह JAT को CM नहीं बनात. BJP ने ठाकरों कि वोट ली तो उनको CM भी बनाया. कांग्रेस तो अह्शान फ्राह्मोश है: वोट जाटों कि लेनी और कुर्सी अशोक गहलोत/ जोशी को दो!!

Between, this thread is about what ails BJP and NOT who should Jats vote for??
 
Jats of Rajasthan are always been free, fearless n' rebel by nature and history is witness. This is somewhat true that Rajputs of Rajasthan who're in power and been rulers most of the part tried to oppress poor peasant Jats of the region but they couldn't hold it for long. That's why, Jats and Rajputs still keeping ages old rivalry and bloody politicians take advantage of it.

Rajasthani Jats been loyal to Congress but always been fooled n' exploited at large. Now they're realizing the fact that their real enemy is not Rajputs but the corrupt Congress govt. Specially in this tenure of Congress, Gehlot is the biggest enemy and anti-Jat neta, he left no stone turned to defame and oppress Jat community. Even CP Joshi keep telling in public, Gehlot'll have to face severe consequences of his Anti-Jat attitude.

Congress again played its card by making Chandrabhan as Congress chief and trying to give sweet candy of Jat CM again, but I'm pretty sure this time Congress govt will bite the dust and will not come in power for so long in future!


PS: It was BJP govt led by Vajpayee ji who gave reservation to Rajasthani Jats!


Cheers
Jit


So indirectly you are accepting that nothing is good in congress but it is the fear of thakurs that makes Jats to vote for Congress. चलो राका भाई साहेब जाटों की तो समझ आई की उनको ठाकरों से डर है, लेकिन कांग्रेस को किस से डर है कि वोह JAT को CM नहीं बनात. BJP ने ठाकरों कि वोट ली तो उनको CM भी बनाया. कांग्रेस तो अह्शान फ्राह्मोश है: वोट जाटों कि लेनी और कुर्सी अशोक गहलोत/ जोशी को दो!!

Between, this thread is about what ails BJP and NOT who should Jats vote for??
 
Jats of Rajasthan are always been free, fearless n' rebel by nature and history is witness. This is somewhat true that Rajputs of Rajasthan who're in power and been rulers most of the part tried to oppress poor peasant Jats of the region but they couldn't hold it for long. That's why, Jats and Rajputs still keeping ages old rivalry and bloody politicians take advantage of it.

Rajasthani Jats been loyal to Congress but always been fooled n' exploited at large. Now they're realizing the fact that their real enemy is not Rajputs but the corrupt Congress govt. Specially in this tenure of Congress, Gehlot is the biggest enemy and anti-Jat neta, he left no stone turned to defame and oppress Jat community. Even CP Joshi keep telling in public, Gehlot'll have to face severe consequences of his Anti-Jat attitude.

Congress again played its card by making Chandrabhan as Congress chief and trying to give sweet candy of Jat CM again, but I'm pretty sure this time Congress govt will bite the dust and will not come in power for so long in future!


PS: It was BJP govt led by Vajpayee ji who gave reservation to Rajasthani Jats!


Cheers
Jit
YES THERE IS SENSE AND TRUE, AGREED, but what about the weakness/wrong with BJP, ALSO NOW MR BAJPAI IS NOT CONTROLING THE PARTY, as long as Advani remains in light, not only jats but all kisaans can forget any favourable attitude from the BJP, BUT THAT DOESNOT MEAN THAT i AM SIDING CONGRESS, IT WAS ANTI KISAAN/JAT AND REMAINS SO
 
We JAT always trust to any 3rd person without reviewing their background and authencity.Whether it is Congress or BJP, they are poltical parties and only see their own interest like ex CM of Rajasthan Mohan lal Sukhadia gave reservation to Meena community in ST cadre to save his government and because of this visonary action of Meena comudity leaders of that time their cast is too much ahead than any comuudity of India. But in our commudity we never got such visionary leader. Choto Ram was good leader but he always worked for masses and never does any discrimnation between cast or religion.One point of view this is very good attitude but all leaders should be like that only. We Indians are blindly supporting Nehru family but one of main cause of our partition was Nehru amition to become PM. And we are paying for his ambition since long. From my point of view their are only 2 casts one is GOOD and another is BAD and these two things are always in all cast.If you see Brahmins they are always blood sucker of their own cast and other casts at the age of 60 they were doing 6-7 marriages with 10 to17 years old girls.
It is more important to have good person at good position rather than BAD person of our own cast at BIG position. Once our country people will literate and understand this fact our most of the problems will automatically solved.
 
पहले ६० साल फूंक दिए, दूसरा मोर्चा (BJP) खडा करण खातर, २०-२५ साल इस तीसरे मोर्चे ने मजबूत करण में लाग ज्यान्गे१ फेर कोई शगूफा छेड़ देगा कि यह तीसरा मोर्चा भी ठीक नही, चौथा लेके आओ १ इतने में इस गांधी परिवार के पोते पडपोते फूट डाल डाल के राज करी जांगे१ कुछ तो देश नापुन्संक हो लिया, कुछ और हो ज्यागा, फेर इस कि रियासत घोषित कर देना१

तीसरे मोर्चे वाले indirectly यह कह रहे हैं कि बीजेपी को हटाओ और तीसरा मोर्चा लाओ/.मतलब कांग्रेस यही रहे..बस इसका मुकाबला अब तीसरा मोर्चा करेगा!!


ऐसा करो..कांग्रेस हटाओ और तीसरा मोर्चा लाओ : फेर होण तो टक्कर बीजेपी और तीसरे मोर्चे में !!


मेरी भी मांग है .. तीसरा मोर्चा लाओ!!
:tongue::singing:

wrightly said ..pehle ye pehla morcha hatao or dusra morcha lao..jab hi tishre morche ki shruvat ho sakti hai..
vote out congress..

BJP Politics is directionless and Congress politics is in wrong direction as said by vikda
to atleast wrong direction vale ko to hatao...
 

So indirectly you are accepting that nothing is good in congress but it is the fear of thakurs that makes Jats to vote for Congress. चलो राका भाई साहेब जाटों की तो समझ आई की उनको ठाकरों से डर है, लेकिन कांग्रेस को किस से डर है कि वोह JAT को CM नहीं बनात. BJP ने ठाकरों कि वोट ली तो उनको CM भी बनाया. कांग्रेस तो अह्शान फ्राह्मोश है: वोट जाटों कि लेनी और कुर्सी अशोक गहलोत/ जोशी को दो!!

Between, this thread is about what ails BJP and NOT who should Jats vote for??

मैं वोट डालने में कम ही यकीन रखता हु और यदि कभी डाला भी हैं तो वो अजय सिंह (इनेलो ) को | मैंने यह कभी नहीं कहा के कांग्रेस बढ़िया स | देश में ऐसी कोई पार्टी नहीं हैं जिसपे एतबार किया जा सके , लोग मज़बूरी या अपना स्वार्थ देख कर वोट डालते हैं | इन राजनीतिक दलों ने ये अलग अलग नाम के पाले मांड राखे स आदमी वोही स बस पाले बदल कर अपनी छवि ठीक बताये जा स |
हरियाणा में तो वैसे भी एक मिसाल दी जा स कांग्रेस के बारे में के ' जाट कदे कांग्रेसी कोणी हो अर्र जाटनी कदे रांड कोणी हो' खैर इब दोनों काम होण लागे | कांग्रेस कल्चर अर्र जाट कल्चर में रात दिन का फर्क स , जाट मज़बूरी में कांग्रेस में जा सके स राजी ख़ुशी नहीं |
राजस्थान में लड़ाई चौधर की स और भाजपा में ठाकरा की चौधर रह स | भाजपा सरकार में मैंने खुद देखी हैं ठाकरा की चौधर | एक आम विधायक प्रेम सिंह बाजौर अगर मुख्यमंत्री को किसी टेंडर के बारे में कह देता की यह उनको चाहिए तो मुख्यमंत्री की भी आसंग नहीं थी उसकी बात मोड़ दे | यह तो सिर्फ एक ठाकर विधायक के रुतबे की मिसाल दी स इसी और कई स |
राजस्थान में भाजपा ने जाटों को आरक्षण दिया तो जाटों ने भी इनको वोट देकर इस एहसान का बदला तार दिया पर असली रोल्ला तो चौधर का था वो भाजपा ने ठाकरा ताहि दिए राखी इसे कारण जाट इन्ते उलटे हट गए |
रही बात भाजपा के खस्ताहाल की तो उसके जिम्मेवार ये खुद हैं जो वादे करते हैं वो ये निभाते नहीं हैं , अगर वादा खिलाफी वाली पार्टी ही चाहिए तो फेर लोगा धोरे कांग्रेस स ऐ | हरियाणा, पंजाब , दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान जहा जाटों की इतनी बड़ी संख्या हैं वाहा भाजपा को यह नहीं सुहाता की कोई जाट नेता उभरे | आज के समय में भाजपा में किसी भी राष्ट्रिय सत्र के जाट नेता का नाम बता दो ?
हामने तो जाट बाहुल्य क्षेत्र का बेरा स के यहाँ भाजपा क्यों नहीं उभरती बाकि देश का हामने ठेका कोणी :)
 
@raka

कमाल करो हो जनाब, दिल्ली में बमुश्किल 1.5 % जाट होंगे, इसके बावजूद साहिब सिंह वर्मा को भा.ज.पा. ने मुख्यमंत्री बनाया, क्योंकि वर्मा जी इस लायक थे...प्रवेश वर्मा अभी युवक है, आने वाले समय में अगर उसने साबित किया कि वह वर्मा जी का सही उत्तराधिकारी साबित हो सकता है तो उसे भी मौका मिलेगा...
 
@rakaकमाल करो हो जनाब, दिल्ली में बमुश्किल 1.5 % जाट होंगे, इसके बावजूद साहिब सिंह वर्मा को भा.ज.पा. ने मुख्यमंत्री बनाया, क्योंकि वर्मा जी इस लायक थे...प्रवेश वर्मा अभी युवक है, आने वाले समय में अगर उसने साबित किया कि वह वर्मा जी का सही उत्तराधिकारी साबित हो सकता है तो उसे भी मौका मिलेगा...
Upender, We know how vermaji was made CM, i WAS THROUGH OUT ASSOCIATED WITH STRUGGLE, i GIVE YOU ONE EXAMPLE, Advani said in the meeting that jat can become CM in UP, hARYANA ETC BUT NOT IN dELHI, THEY WERE KEEN TO BRING SUSMA OR SOME PUNJABI/BANIA, THANK GOD MAJORITY OF MLAs WERE WITH VERMAJI SO HE MADE IT, tO ME THERE SEEMS TO BE NO DIFFERENCE BETWEEN these two major parties and both are anti defence services, anti kissan and anti jat, but there is no alternative,
 
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@raka

कमाल करो हो जनाब, दिल्ली में बमुश्किल 1.5 % जाट होंगे, इसके बावजूद साहिब सिंह वर्मा को भा.ज.पा. ने मुख्यमंत्री बनाया, क्योंकि वर्मा जी इस लायक थे...प्रवेश वर्मा अभी युवक है, आने वाले समय में अगर उसने साबित किया कि वह वर्मा जी का सही उत्तराधिकारी साबित हो सकता है तो उसे भी मौका मिलेगा...

भाई उपेंदर , जवाब देने से पहले सवाल तो ध्यान से पढ़ लेता मैं इतिहास की नहीं वर्तमान की बात कर रहा हु | सवाल यह था के 'आज के समय में भाजपा में किसी भी राष्ट्रिय सत्र के जाट नेता का नाम बता दो' ?
रही वर्मा जी की बात तो उनका भी बेरा स के भाजपा ने उनको कैसे बनाया था | कर्नल साहब और अच्छी तरह से बता देंगे जैसा की साहब ने बताया की ये उस सारी कहानी से अच्छी तरह से वाकिफ हैं |
जाट मुख्यमंत्री तो कांग्रेस ने हरियाणा में बनाया था | टिकेट बांटी भजन लाल ने , भजन लाला भावी मुख्यमंत्री के नाम से चुनाव लड़ा और जीता गया | जब भजन लाल के नाम से पूर्ण बहुमत आ गया तो ऍन मौके पर हुड्डा साहब को मुख्यमंत्री घोषित कर दिया ,भजन लाल व उनके विधायक देखते रह गए |
 
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Hrayana wala vikalpa to ek dum bekaar sai.. Chautala kaunsa kam sai.. ek number ka bhrshta sai yo bhi to..

चिंता मत कर भाई , हरियाणा में कांग्रेस और चौटाला का भी विकल्प हैं और वो विकल्प हैं जनहित कांग्रेस | इमानदारी की मिसाल कही जाने वाली अन्ना हजारे की टीम भी अभी पीछे सी हिसार लोकसभा चुनाव में इसी जनहित कांग्रेस को वोट देने की हिमायत करके गयी थी | इतनी पढ़ी लिखी समझदार टीम किसी भ्रष्ट पार्टी की हिमायत तो कर नहीं सकती इसलिए अगर हरयाणा में रामराज ल्याना स तो आगे आने वाले चुनाव में इस जनहित कांग्रेस के गठबंधन को वोट दे ;)
 
भा.ज.पा. जाटों की दुश्मन नहीं है. कोई पार्टी किसी को राष्ट्रीय स्तर का नेता नहीं बनाती, बल्कि कोई भी राष्ट्रीय स्तर का नेता अपने संघर्ष, अपने प्रयासों से यह मुकाम हासिल करता है. अब अगर कोई नेता उभरकर सामने ही नहीं आएगा तो क्या पार्टी किसी के घर में घुसकर जबर्दस्ती किसी को राष्ट्रीय स्तर का नेता घोषित कर देगी??? दिल्ली में अगर कोई जाट मुख्य मंत्री बना तो वह भा.ज.पा. से जुड़कर बना...वो तो साहिब सिंह वर्मा जी की असामयिक मृत्यु हो गई, नहीं तो वे अभी और नए मुकाम हासिल करते... राजस्थान में अगर जाटों से संबंधित कोई व्यक्ति मुख्य मंत्री बना तो वह भी भा.ज.पा. से जुड़कर ही बना (वसुंधरा राजे सिंधिया, जो धौलपुर के जाट राजा की पत्नी हैं)...यू.पी. में अगर जाटों की आरक्षण की मांग मानी गई तो वह भा.ज.पा. के कारण मानी गई, क्योंकि तब यू.पी. में भा.ज.पा. की सरकार थी...
मैं कोई भा.ज.पा. का प्रचार नहीं कर रहा, लेकिन यदि किसी पार्टी को बिना किसी आधार के जाट विरोधी बनाकर पेश किया जाए तो यह अनुचित होगा...भा.ज.पा. तो खूब ये चाहती है कि जाट जैसी भारत की प्रमुख जातियों में से एक उसके साथ हो जाए...दरअसल कोई भी पार्टी जाटों के खिलाफ हो ही नहीं सकती...चाहे वो कांग्रेस हो, भा.ज.पा. हो या ब.स.पा....हां, एक संतुलन बनाकर जरूर चलना पड़ता है...आखिरकार भारत में केवल जाट थोड़े ही रहते हैं...
गलती सुधार : ऊपर अपनी पोस्ट में गलती से मैंने दिल्ली में जाटों की संख्या 1.5 % लिख दी, क्योंकि ऐसा मैंने कहीं पढ़ा था...मैंने और खोजबीन की तो पाया कि यह संख्या गलत है...दिल्ली की कुल वोट संख्या में जाटों का हिस्सा 7 से 8 % है और दिल्ली में भी जाटों की संख्या इसी प्रतिशत के आसपास होनी चाहिए...
 
भा.ज.पा. जाटों की दुश्मन नहीं है. कोई पार्टी किसी को राष्ट्रीय स्तर का नेता नहीं बनाती, बल्कि कोई भी राष्ट्रीय स्तर का नेता अपने संघर्ष, अपने प्रयासों से यह मुकाम हासिल करता है. अब अगर कोई नेता उभरकर सामने ही नहीं आएगा तो क्या पार्टी किसी के घर में घुसकर जबर्दस्ती किसी को राष्ट्रीय स्तर का नेता घोषित कर देगी??? दिल्ली में अगर कोई जाट मुख्य मंत्री बना तो वह भा.ज.पा. से जुड़कर बना...वो तो साहिब सिंह वर्मा जी की असामयिक मृत्यु हो गई, नहीं तो वे अभी और नए मुकाम हासिल करते... राजस्थान में अगर जाटों से संबंधित कोई व्यक्ति मुख्य मंत्री बना तो वह भी भा.ज.पा. से जुड़कर ही बना (वसुंधरा राजे सिंधिया, जो धौलपुर के जाट राजा की पत्नी हैं)...यू.पी. में अगर जाटों की आरक्षण की मांग मानी गई तो वह भा.ज.पा. के कारण मानी गई, क्योंकि तब यू.पी. में भा.ज.पा. की सरकार थी...
मैं कोई भा.ज.पा. का प्रचार नहीं कर रहा, लेकिन यदि किसी पार्टी को बिना किसी आधार के जाट विरोधी बनाकर पेश किया जाए तो यह अनुचित होगा...भा.ज.पा. तो खूब ये चाहती है कि जाट जैसी भारत की प्रमुख जातियों में से एक उसके साथ हो जाए...दरअसल कोई भी पार्टी जाटों के खिलाफ हो ही नहीं सकती...चाहे वो कांग्रेस हो, भा.ज.पा. हो या ब.स.पा....हां, एक संतुलन बनाकर जरूर चलना पड़ता है...आखिरकार भारत में केवल जाट थोड़े ही रहते हैं...
गलती सुधार : ऊपर अपनी पोस्ट में गलती से मैंने दिल्ली में जाटों की संख्या 1.5 % लिख दी, क्योंकि ऐसा मैंने कहीं पढ़ा था...मैंने और खोजबीन की तो पाया कि यह संख्या गलत है...दिल्ली की कुल वोट संख्या में जाटों का हिस्सा 7 से 8 % है और दिल्ली में भी जाटों की संख्या इसी प्रतिशत के आसपास होनी चाहिए...

In fact, till now BJP has been fiefdom of Brahman and Baniyas, they did not allow any other leader to grow, but, at the same time they did not single out Jats to give step motherly treatment. They have given the same step motherly treatment anybody who was not Brahman and Baniya, but they have realised this and allowing OBC leaders to come up. Whereas Congress singled out JATs and deliberately excluded them-there lies the all difference.
 
In fact, till now BJP has been fiefdom of Brahman and Baniyas, they did not allow any other leader to grow, but, at the same time they did not single out Jats to give step motherly treatment. They have given the same step motherly treatment anybody who was not Brahman and Baniya, but they have realised this and allowing OBC leaders to come up. Whereas Congress singled out JATs and deliberately excluded them-there lies the all difference.
If you are just talking for Rajasthan definitely something big is being conspired against jats..they are being targeted and slandered.. I guess this is deliberately done by gahlot and associates to defame renown Jat leaders so that there be no-one big from Jat community in next CM election to stake for the CM post. Secondly, It is absolutely necessary to vote out congress in each and every election and I don't see any other option except BJP at national level ..but noone can deny that BJP is now being run and dominated by Punjabi khatris and aroras and my heart never says to trust on them!!
 
भा.ज.पा. जाटों की दुश्मन नहीं है. कोई पार्टी किसी को राष्ट्रीय स्तर का नेता नहीं बनाती, बल्कि कोई भी राष्ट्रीय स्तर का नेता अपने संघर्ष, अपने प्रयासों से यह मुकाम हासिल करता है. अब अगर कोई नेता उभरकर सामने ही नहीं आएगा तो क्या पार्टी किसी के घर में घुसकर जबर्दस्ती किसी को राष्ट्रीय स्तर का नेता घोषित कर देगी??? दिल्ली में अगर कोई जाट मुख्य मंत्री बना तो वह भा.ज.पा. से जुड़कर बना...वो तो साहिब सिंह वर्मा जी की असामयिक मृत्यु हो गई, नहीं तो वे अभी और नए मुकाम हासिल करते... राजस्थान में अगर जाटों से संबंधित कोई व्यक्ति मुख्य मंत्री बना तो वह भी भा.ज.पा. से जुड़कर ही बना (वसुंधरा राजे सिंधिया, जो धौलपुर के जाट राजा की पत्नी हैं)...यू.पी. में अगर जाटों की आरक्षण की मांग मानी गई तो वह भा.ज.पा. के कारण मानी गई, क्योंकि तब यू.पी. में भा.ज.पा. की सरकार थी...
मैं कोई भा.ज.पा. का प्रचार नहीं कर रहा, लेकिन यदि किसी पार्टी को बिना किसी आधार के जाट विरोधी बनाकर पेश किया जाए तो यह अनुचित होगा...भा.ज.पा. तो खूब ये चाहती है कि जाट जैसी भारत की प्रमुख जातियों में से एक उसके साथ हो जाए...दरअसल कोई भी पार्टी जाटों के खिलाफ हो ही नहीं सकती...चाहे वो कांग्रेस हो, भा.ज.पा. हो या ब.स.पा....हां, एक संतुलन बनाकर जरूर चलना पड़ता है...आखिरकार भारत में केवल जाट थोड़े ही रहते हैं...
गलती सुधार : ऊपर अपनी पोस्ट में गलती से मैंने दिल्ली में जाटों की संख्या 1.5 % लिख दी, क्योंकि ऐसा मैंने कहीं पढ़ा था...मैंने और खोजबीन की तो पाया कि यह संख्या गलत है...दिल्ली की कुल वोट संख्या में जाटों का हिस्सा 7 से 8 % है और दिल्ली में भी जाटों की संख्या इसी प्रतिशत के आसपास होनी चाहिए...

Upender, CMs point is correct, but reasons were different, like you I can give you more than 100 points where congress did for jats but that doesnot mean I consider conress for jats, I have my strong reasons based on my personal experiences that both the parties are (comparatively) against jats, kissan and defence services, till today the reality is this and in future any thing can happen, I am also not marketing any political party, Ofcourse there is no alternative so we have to accept BJP, i PERSONALLY WOULD BE HAPPY IF THIRD FRONT IS REVIVED OR SOME NEW PARTY OR OUT FIT COMEUP
 

Upender, CMs point is correct, but reasons were different, like you I can give you more than 100 points where congress did for jats but that doesnot mean I consider conress for jats, I have my strong reasons based on my personal experiences that both the parties are (comparatively) against jats, kissan and defence services, till today the reality is this and in future any thing can happen, I am also not marketing any political party, Ofcourse there is no alternative so we have to accept BJP, i PERSONALLY WOULD BE HAPPY IF THIRD FRONT IS REVIVED OR SOME NEW PARTY OR OUT FIT COMEUP

Fully agreed, Sir.
 
भा.ज.पा. जाटों की दुश्मन नहीं है. कोई पार्टी किसी को राष्ट्रीय स्तर का नेता नहीं बनाती, बल्कि कोई भी राष्ट्रीय स्तर का नेता अपने संघर्ष, अपने प्रयासों से यह मुकाम हासिल करता है. अब अगर कोई नेता उभरकर सामने ही नहीं आएगा तो क्या पार्टी किसी के घर में घुसकर जबर्दस्ती किसी को राष्ट्रीय स्तर का नेता घोषित कर देगी??? दिल्ली में अगर कोई जाट मुख्य मंत्री बना तो वह भा.ज.पा. से जुड़कर बना...वो तो साहिब सिंह वर्मा जी की असामयिक मृत्यु हो गई, नहीं तो वे अभी और नए मुकाम हासिल करते... राजस्थान में अगर जाटों से संबंधित कोई व्यक्ति मुख्य मंत्री बना तो वह भी भा.ज.पा. से जुड़कर ही बना (वसुंधरा राजे सिंधिया, जो धौलपुर के जाट राजा की पत्नी हैं)...यू.पी. में अगर जाटों की आरक्षण की मांग मानी गई तो वह भा.ज.पा. के कारण मानी गई, क्योंकि तब यू.पी. में भा.ज.पा. की सरकार थी...
मैं कोई भा.ज.पा. का प्रचार नहीं कर रहा, लेकिन यदि किसी पार्टी को बिना किसी आधार के जाट विरोधी बनाकर पेश किया जाए तो यह अनुचित होगा...भा.ज.पा. तो खूब ये चाहती है कि जाट जैसी भारत की प्रमुख जातियों में से एक उसके साथ हो जाए...दरअसल कोई भी पार्टी जाटों के खिलाफ हो ही नहीं सकती...चाहे वो कांग्रेस हो, भा.ज.पा. हो या ब.स.पा....हां, एक संतुलन बनाकर जरूर चलना पड़ता है...आखिरकार भारत में केवल जाट थोड़े ही रहते हैं...
गलती सुधार : ऊपर अपनी पोस्ट में गलती से मैंने दिल्ली में जाटों की संख्या 1.5 % लिख दी, क्योंकि ऐसा मैंने कहीं पढ़ा था...मैंने और खोजबीन की तो पाया कि यह संख्या गलत है...दिल्ली की कुल वोट संख्या में जाटों का हिस्सा 7 से 8 % है और दिल्ली में भी जाटों की संख्या इसी प्रतिशत के आसपास होनी चाहिए...
उपेंदर भाई आपने जो ये भाजपा की जाट संबंधित राजनीति वाली बात की हैं, जैसी चाल भाजपा ने राजस्थान में जाट-राजपूत के साथ खेली थी ऐसी ही चाल कांग्रेस ने दिल्ली में जाट-ब्राह्मण के साथ खेल रखी हैं , या दिल्ली की मुख्यमंत्री शिला दीक्षित बहु तो ब्राह्मणा की स पर छोरी जाटा की स
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रही जाट जैसी प्रमुख जाति वाली बात तो भाजपा ने राजपूत नाम की एक जाट जैसी प्रमुख जाति पकड़ रखी हैं उत्तर प्रदेश से राजनाथ सिंह , मध्यप्रदेश से शिवराज चौहान राजस्थान से जसवंत सिंह व पहले बाबा शेखावत थे, छत्तीसगढ़ से डा.रमण सिंह , हिमाचल से प्रेम धूमल व उत्तरांचल से जन.खंडूरी | इब एक पार्टी में दो चौधरी (जाट व राजपूत ) क्यूकर रह सके स
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भाजपा के साथ सारी कट्टर हिन्दू कहे जाने वाली जातिया जूड़ी है जबकि जाट ,गुज्जर व अहीर कट्टर हिन्दू नहीं हैं इस लिए ये जातिया इस पार्टी से मोह नहीं जोड़ पाई |

किसी को राष्ट्रिय सत्र का नेता बनाने में पार्टी का भी बहुत बड़ा योगदान होता हैं यह बात आडवाणी के संघर्ष से सिद्ध होती हैं | 1991 में आडवाणी की रथ यात्रा से इस भाजपा की तरफ लोग ज्यादा आकर्षित हुए थे | इस यात्रा के बाद भाजपा आडवानी के नाम से जानी जाने लगी थी लोगो को यह था के आडवानी भावी प्रधानमंत्री हैं देश के | परन्तु जब भाजपा का राज आया तो ब्राह्मण लॉबी के आगे इन सिन्धी महाशय की लॉबी कमजोर पड़ गई | मेहनत करी सिन्धी महाशय ने और मलाई ले गए ब्रह्मण, संघर्ष धरा का धरा का रह गया |
 
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