ye..arakshan arakshan...........kya hai.

Ab yaad aaya isse bolo jab rajasthan mein mila tab khud CM tha aur tab juban band ho gai thi

सामाजिक समानता के लिए भी आरक्षण जरूरी
सिरसा, मुख्य संवाददाता : विधानसभा में विपक्ष के नेता व इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला ने जहां जाट आरक्षण को जायज करार दिया है, वहीं उन्होंने दूसरी जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए भी आरक्षण की वकालत की है। उन्होंने इस बाबत एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करने की बात कही है। सिरसा स्थित अपने आवास पर शुक्रवार को पत्रकारों से मुखातिब पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस देश में दो संविधान नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजस्थान में जाट आरक्षण तो देश के दूसरे हिस्से में क्यों नहीं? उन्होंने अपने पक्ष को आधार देते हुए कहा कि न केवल आर्थिक अपितु सामाजिक समानता के लिए भी जाट समुदाय को आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने अपनी बिरादरी के साथ-साथ अन्य जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े गरीबों को भी आरक्षण के दायरे में लाने की बात कही। उन्होंने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर इनेलो ने विधानसभा में भी कहा था कि आरक्षण के पक्ष में एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया।
 
जाट आरक्षण: सीएम ने गृह मंत्री को पत्र लिखा
लखनऊ : प्रदेश सरकार ने कहा है कि वह कोर्ट के आदेशों के अनुरूप कार्रवाई करेगी। सरकार का यह भी कहना है कि आंदोलन को लेकर उत्पन्न स्थितियों के प्रति वह संवेदनशील है, लेकिन इस पूरे मामले में केन्द्र द्वारा राज्य सरकार को न ही कोई जानकारी दी गई और न ही बातचीत के किसी निष्कर्ष से अवगत कराया गया है। राज्य सरकार केन्द्र की रणनीति से भी अनभिज्ञ है। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद प्रदेश सरकार की तरफ से कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने प्रेस कान्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मायावती ने इसके हल के लिए शुक्रवार को प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी के साथ बैठक की और केन्द्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर मामले के शीघ्र समाधान का अनुरोध किया है। कैबिनेट सचिव ने कहा कि भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति आरक्षण के मुद्दे पर पांच मार्च से कफूरपुर रेलवे लाइन पर बैठकर आंदोलन कर रही है। यह आंदोलन यूपी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान, हरियाणा, पंजाब तथा जम्मू में भी इसकी प्रतिक्रिया हुई है। ज्योतिबाफुलेनगर के जिला प्रशासन ने आंदोलन के हल के लिए काफी प्रयास किये, लेकिन वह लोग वार्ता के लिए तैयार नहीं हैं। आंदोलनकारियों द्वारा यात्रा बाधित किये जाने से आमजन को असुविधा हो रही है। गुरुवार को प्रदेश के मुख्य सचिव ने भी भारत सरकार के कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर मामले का हल कराने को केन्द्र सरकार का सहयोग मांगा।उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार जाट समुदाय के आरक्षण का पूरा समर्थन करती है। जाट समुदाय के लोग भारत सरकार के समक्ष अपनी बात गंभीरता व अनुशासित ढंग से रखें। केन्द्र सरकार ही जाट समुदाय को आरक्षण दिये जाने की मांग पर निर्णय लेने में सक्षम है। इसलिए जाट समुदाय के लोग आंदोलन का रास्ता छोड़कर आपसी बातचीत से रास्ता निकालें। यह पूछे जाने पर उच्च न्यायालय के मामले के स्वत: संज्ञान लेने और राज्य सरकार को हिदायत देने के बाद सरकार अचानक सक्रिय हुई तो उन्होंने कहा कि सुबह ही मुख्यमंत्री ने बैठक बुलायी थी। अच्छा हुआ कि न्यायालय ने भी इस मामले का संज्ञान ले लिया। यह पूछे जाने पर कि क्या दो हजार आंदोलनकारी सरकार पर भारी पड़ रहे हैं? कैबिनेट सचिव ने इसका सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने दोहराया कि मामले में निर्णायक भूमिका केन्द्र सरकार की है।
 
जाटों की सरकार को चेतावनी, बल प्रयोग हुआ तो गंभीर होंगे नतीजे
ठ्ठ चंडीगढ़, जागरण न्यूज नेटवर्क आरक्षण के लिए रेलवे ट्रैक पर जाम लगाए बैठे जाटों ने कहा है कि आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस बल का प्रयोग किया गया तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस बीच, लगातार तेरहवें दिन शुक्रवार को भी हिसार-भिवानी-दिल्ली रेल टै्रक पर मय्यड़ के पास जाटों का कब्जा रहा। हिसार-जयपुर और हिसार-लुधियाना रेलमार्ग पर भी ग्यारहवें दिन भी अलग-अलग स्थानों पर जाटों का कब्जा रहा। शुक्रवार को नारनौल क्षेत्र में निजामपुर के पास जाट समुदाय के लोगों ने रेवाड़ी-रींगस रेल ट्रैक पर कब्जा जमा लिया। इसके साथ ही रींगस रूट से जयपुर के रास्ते गुजरात की ओर जाने वाली ट्रेनों की आवाजाही भी रुक गई है। हरियाणा और जयपुर के बाद भरतपुर के पिपरऊ गांव में गुरुवार को ट्रैक पर पहुंचे जाटों का कब्जा शुक्रवार को भी बरकरार रहा। नदवई और खेलड़ी रेलवे स्टेशन के मध्य सैकड़ों की संख्या में बैठे जाटों की प्रशासन के अधिकारियों से किसी भी तरह की वार्ता नहीं हो सकी। रेल प्रशासन को मजबूरी में आठ ट्रेनों को रद करना पड़ा है। पांच ट्रेनों के रूट भी बदले गए हैं। दूसरी ओर, 20 मार्च तक के अल्टीमेटम का समय निकट आने के साथ ही आंदोलनकारी आगामी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। इस अवधि तक मांग पूरी नहीं होने पर दिल्ली को चारों ओर से सील करने की चेतावनी दी गई है। उधर, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन हवा सिंह सांगवान ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला पर जाट आरक्षण के विषय पर लोगों को गुमराह न करने की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे जाट आरक्षण के पक्षधर हैं तो पहले प्रदेश में लागू कराने के लिए ठोस पहल करते हुए इस संबंध में घोषणा करें। उन्होंने आशंका जाहिर की केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार आंदोलनकारियों से निपटने के लिए बल प्रयोग की तैयार में जुटी है। सांगवान ने कहा कि यदि ऐसा किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और दिल्ली के रास्ते चारों तरफ से बंद कर दिए जाएंगे।

Now its JAT not jat from haryana/up
 
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Way to go , hats off to you all. Kai logon ne dekha bhi nahi hoga jo ye dudh bilo rahi hain ki aise bilote hain dudh.
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एक और वार्ता के बाद ही निकलेगा हल
नई दिल्ली , जागरण ब्यूरो: केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण के मुद्दे पर पिछले दो सप्ताह से राष्ट्रीय राजमार्गो और रेल लाइनों पर जमे जाट आंदोलनकारियों से सरकार एक दौर की वार्ता और करेगी। राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में जाट आंदोलन और इससे उत्पन्न स्थितियों की समीक्षा की गई। इस जटिल मुद्दे का सर्वमान्य हल ढूंढने के लिए सरकार फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। जाट आरक्षण समिति के नेताओं को संसद सत्र के बाद समझौता वार्ता के लिए बुलाए जाने की संभावना है। यह केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर विचार किया गया। जाट आंदोलनकारियों से सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम और सामाजिक न्याय मंत्री मुकुल वासनिक की वार्ता हो चुकी है। इस दौरान जाट आंदोलनकारियों ने आरक्षण दिए जाने के बारे में अपना पक्ष रखा था। उधर जाट आंदोलनकारियों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में रेल लाइनों और राष्ट्रीय राजमार्गो पर अपना धरना जारी रखा। आंदोलनकारी नेताओं ने केंद्र सरकार को धमकी भी दी कि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वे इस बार काली होली मनाएंगे। जबकि केंद्र सरकार ने जाट आंदोलनकारियों से घर लौट जाने की अपील की है। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि समस्या का समाधान निकलने के कगार पर है। इस मसले पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। उन्हें उम्मीद है जल्दी ही समस्या सुलझ जाएगी। हुड्डा ने स्पष्ट किया कि इस बारे में उन्होंने अपनी ओर से सरकार को पहले ही प्रस्ताव भेज दिया है।
 
Jats have blinked first

In this game of patience testing: Jats have blinked first or rather they have been forced to blink first with the govt. threatening to use force againt the innocent and unarmed protesters.

Despite numerous representations to various Haryana CMs including Chautalaji and Hoodaji and also the Centre, Jats have not got their due. Every time they are fooled into believing that either their case has been forwarded to the high command or that a committee is being formed to look into their demands and this game of passing the buck has continued for too long and brought us to a stage when the patience of the Jat community is actually running thin. When the Jat CMs of Haryana have not given reservation to Jats we cannot expect them to recommend to the Centre reservation for Jats in govt. jobs. They (Hoodaji) would proudly announce the according of second official language status to Punjabi in Haryana but would shy away when the question of Jats getting their rightful due comes. Our so called leaders have let us down time and again.

Jats got no result from peaceful representations and meetings. In fact they have been threatened with use of force (guns) by the govt. by using this force on the innocent and unarmed men and women who are peacefully protesting. Enough is enough - the govt. (state or centre) cannot take us for granted. When the youth in Kashmir takes to guns and militancy you invite them and give them jobs in all state and central govt. jobs but when the youth in Haryana makes representations for jobs you threaten them with guns. Is this democracy?

With this govt. threat of use of force, my determination and support for RESERVATION for Jats has grown further and am ready to do whatever I can in my individual and collective capacity to attain what we seek.

To all our Jat leaders like Col. Sindhu, Mr. Malik, Mr. Sangwan, I would only like to say that we all are with you shoulder to shoulder - Please do not let this spark die down as it is a question of now or never.
 
ठ्ठ नई दिल्ली/ लखनऊ, जागरण ब्यूरो/एजेंसी इलाहाबाद हाईकोर्ट के रेलवे ट्रैक तुरंत खाली कराने संबंधी आदेश का शनिवार को असर दिखा और आंदोलित जाटों ने यूपी में रेलवे ट्रैक खाली कर दिया पर हरियाणा में आंदोलन यथावत है। आंदोलनकारी नेताओं ने कहा, केंद्र के साथ वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकल सका है। हालांकि यूपी में तो हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए हमने ट्रैक खाली कर दिया है, लेकिन आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, रेलवे ने शाम पांच बजे ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया। जेपीनगर में काफूरपुर स्टेशन पर 15 दिन से रेलवे ट्रैक पर डटे जाटों को हटाने के लिए अफसरों ने सुबह से ही मशक्कत शुरू कर दी। पुलिस ने शनिवार सुबह जाट नेता यशपाल मलिक और उम्मेद सिंह को नाटकीय अंदाज में धरना स्थल से उठा कर हाइवे स्थित रजबपुर थाने में रोक लिया, जिससे उनकी गिरफ्तारी का संदेश फैल गया। इस बीच राज्य सरकार की ओर से डीजीपी कर्मवीर सिंह तथा प्रमुख सचिव गृह कुंवर फतेहबहादुर सिंह के साथ प्रदेश के व्यवसायिक शिक्षा मंत्री लक्ष्मीनारायण हेलीकाप्टर से गजरौला पहुंच गए। प्रमुख सचिव ने कार से रजबपुर थाने पहुंचकर बंद कमरे में जाट नेताओं से बातचीत की। जिस वक्त ये दोनों जाट नेता रजबपुर थाने में थे, उसी दौरान काफूरपुर ट्रैक पर जारी धरने के बीच जाट नेता सतपाल चौधरी ने ऐलान किया कि संघर्ष समिति अध्यक्ष श्री मलिक ने फोन से संदेश देते हुए न्यायालय के सम्मान में ट्रैक से धरना हटाने को कहा है। लिहाजा यह धरना नजदीकी कालेज मैदान में शिफ्ट किया जा रहा है। करीब ढाई बजे ट्रैक पूरी तरह से खाली कर दिया गया। दोपहर करीब सवा तीन बजे केंद्र द्वारा भेजे गए विशेष हेलीकाप्टर से यशपाल मलिक समेत चार जाट नेताओं को वार्ता के लिए दिल्ली रवाना कर दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम और सामाजिक न्याया और अधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक के साथ बातचीत के बाद यशपाल मलिक ने कहा,सरकार ने उनकी मांग को जायज माना है। यह भरोसा भी दिलाया है कि इस पर वे जल्दी ही फैसला कर लेंगे, लेकिन कोई समय सीमा नहीं दी गई। गृह मंत्री ने यह अनुरोध जरूर किया है कि इस दौरान आंदोलन रोक दिया जाए। इस बारे में फैसला सभी जाट नेता मिल कर करेंगे कि सरकार से समय सीमा मिले बिना आंदोलन वापस लिया जा सकता है या नहीं। मलिक ने सख्त रवैये के संकेत देते हुए कहा, सरकार को अगर लगता है कि कोर्ट के आदेश के बाद एक राज्य में रेल लाइन खाली करवा ली गई है और इसी तरह वे पूरे आंदोलन को बंद करवा सकेंगे तो यह गलतफहमी होगी। हमने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए रेल लाइन खाली कर दी है, लेकिन रेललाइन के सामने हमारा प्रदर्शन और धरना जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने अदालत में अपना पक्ष रखने की बात भी कही। मलिक ने पूरे घटनाक्रम में राज्य सरकार खासकर जेपी नगर और मुरादाबाद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाया और कहा, केंद्र से वार्ता के लिए दिल्ली में दोपहर तीन बजे का वक्त तय था। इसके लिए केंद्र ने समय से हेलीकाप्टर मुरादाबाद भेज दिया था, लेकिन स्थानीय पुलिस अफसरों ने उन्हें रजबपुर थाने व रास्ते में जानबूझकर लेट किया, ताकि केंद्रीय वार्ता का समय निकल जाए। उन्होंने इसके लिए दोषी पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हरियाणा में आंदोलन की कमान संभाले हवा सिंह सांगवान ने कहा कि हरियाणा में रेल लाइन पर धरना जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जाट समुदाय ने होली नहीं मनाने और आंदोलन जारी रखने का फैसला पहले ही कर लिया है।
 
केंद्र व जाटों के बीच दूसरे दौर की वार्ता में नहीं बनी बात
हिसार, जागरण टीम : केंद्रीय गृह मंत्री चिदंबरम के साथ शनिवार को दिल्ली में दूसरे दौरे की बातचीत से जाट नेता संतुष्ट तो हैं, लेकिन हरियाणा में अभी ट्रैक से नहीं हटेंगे। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन हवा सिंह सांगवान ने वार्ता को संतोषजनक बताते हुए कहा है कि केंद्र ने उनकी मांग को जायज ठहराया है। उन्होंने कहा कि इस बारे में सोमवार को एक बैठक कर रणनीति पर चर्चा होगी। तब तक हरियाणा में शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रहेगा और आंदोनकारी रेल लाइनों पर बैठे रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी मांग अभी केंद्र ने नहीं मांगी है, इसलिए जाट समुदाय के लोग रविवार को होली नहीं मनाएंगे। जाट नेताओं को दिल्ली ले जाने के लिए सेना का एक विशेष हेलीकाप्टर शनिवार को आंदोलन स्थल हिसार जिले के मय्यड़ के पास पहुंचा था। इसके बाद यहां से समिति के प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन हवा सिंह सांगवान के नेतृत्व में जिला प्रधान दलजीत पंघाल सहित नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री से वार्ता केलिए विशेष हेलीकाप्टर से रवाना हुए। इस बीच, चौदहवें दिन शनिवार को भी हिसार-भिवानी-दिल्ली रेल टै्रक पर मय्यड़ के पास जाटों का कब्जा बना रहा। हिसार-जयपुर और हिसार-लुधियाना रेलमार्ग पर भी बारहवें दिन भी अलग-अलग स्थानों पर जाटों का कब्जा रहा। एक सप्ताह से जींद-कुरुक्षेत्र रेल ट्रैक पर ग्योंग के निकट जाट ट्रैक पर जमे रहे। बामला स्टेशन का नाम बदलकर जाटपुर का नाम दे दिया है।
 
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रेल ट्रैक पर बैठे रहे जाट, नहीं मनाई होली
कैथल, जागरण संवाद केंद्र : जाट आरक्षण का लेकर पिछले एक सप्ताह से दर्जनों गांव के जाट समाज के लोगों ने शनिवार को होली के दिन भी जींद-कुरुक्षेत्र रेल ट्रैक पर ग्योंग गांव के निकट धरना दिया। पिछले कई दिनों से प्रदेशभर में जाट समुदाय के लोग जाटों को आरक्षण की मांग को लेकर रेलवे ट्रैक पर बैठे हुए है। गांव खुराना, गुहणा, कुलतारण, सेगा, भैणी माजरा, ग्योंग गांव से जाट समाज के लोग गांव के रेलवे स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पर धरना दिया। जाट समाज के लोग दीपा राम, मियंा सिंह, पाला राम, विजय, शमशेर सिंह, कृष्ण व नरेंद्र, सतपाल सिंह, चन्द्रभान जोगीराम, शमशेर सिंह ने कहा कि आरक्षण समाज के लोगों का अधिकार है। पिछले काफी समय से वे आरक्षण की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे है, लेकिन न तो इस और प्रदेश सरकार ध्यान दे रही है और केंद्र सरकार। इस कारण जाट समाज के युवाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जाट समाज के लोगों ने बताया कि जब सरकार ने दूसरी बिरादरी के लोगों को आरक्षण दे दिया तो जाटों को क्यों नही आरक्षण दिया जा रहा। आंदोलनकारियों ने बताया कि जब तक जाटों का आरक्षण नही दिया जाएगा तब तक वे रेलवे ट्रैक से नही उठेंगे।
 
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बदल दिया नाम जाट आरक्षण के समर्थन में भिवानी के गांव बामला के समीप रेलवे ट्रैक पर धरने पर बैठे आंदोलनकारियों ने स्टेशन का नाम भी जाटपुर धर दिया है
 
धरनास्थल पर बढ़ रहा लोगों का जमावड़ा
नरवाना, संवाद सहयोगी : जाट आरक्षण के मुद्दे को लेकर जाट आन्दोलन ज्यों-ज्यों लंबा खिंचता जा रहा है, त्यों-त्यों जाट समुदाय के लोग लामबंद होते जा रहे हैं। धरने की अध्यक्षता बिनैन खाप के प्रधान नफे सिंह नैन कर रहे हैं जबकि मंच संचालन रघुबीर नैन, जगबीर सच्चा खेड़ा, रणधीर नैन धरौदी कर रहे हैं। इस धरने पर दनौदा गांव के एक छोटे से बच्चे विजय सहित सात लोग अनिश्चित कालीन अनशन पर बैठे हैं। दो लोग शनिवार को आमरण अनशन पर बैठ गए हैं तथा बाकी पांच कल रविवार को आमरण अनशन लेंगे। बिनैन खाप के प्रधान नफे सिंह ने कहा कि उन्होंने कहा कि आरक्षण लिए बिना चैन से नहीं बैठेंगे। जाट संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार को 21 मार्च तक का समय दिया है, अगर सरकार ने मांग को नहीं माना तो दिल्ली का घेराव करेंगे। दिल्ली में बाहर से होने वाली खाद्य पदार्थो की सप्लाई बंद कर देंगे। धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को होली को काली होली के रूप में मनाया। फाग को काले दिवस के रूप में मनाने के लिए प्रदर्शनकारी महिलाएं रविवार को काली चुनरी ओढ़ कर धरने में भाग लेंगी। रेलवे ट्रैक पर दिये जा रहा धरने में जाट समुदाय के लोग काफी उत्साहित दिखाई दे रहे हैं।
 
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उकलाना, संवाद सहयोगी : हिसार लुधियाना रेलवे मार्ग पर उकलाना से गाजूवाला रेलवे स्टेशन पर जाट आरक्षण के चलते ग्रामीणों ने डेरा डाला हुआ है। शनिवार को जाट समुदाय के सैंकड़ों ग्रामीणों के साथ महिलाएं भी टै्रक पर आ डटीं। गांव के भाईचारा पंचायत प्रमुख सूरत सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कहा कि वह समुदाय को आरक्षण मिलने तक रेलवे मार्ग पर डटे रहेंगे।

PS- ab inka santi se baithane ka tarika bhi JL pe kisi ko galt lag sakta hai
 
Jats in Haryana continue stir for quota in Government jobs
Sirsa, March 19, 2011

Even as Jats of western Uttar Pradesh today lifted their fortnight-long blockade at Kafurpur railway station in Amroha district, Jats in Haryana continued to disrupt rail traffic at 13 places in the state.

The agitation in the state has affected around 450 passenger and goods trains since March 6 and led to losses of more than Rs 200 crore for the North-Western Railways, official sources said.

The agitation has also brought to a halt production of electricity in Rajiv Gandhi Thermal Power Plant at Khedar, due to which Haryana is facing a power shortage.

The Jat protests have also adversely effected production in the Hisar-based Jindal Strips.

Haryana is also facing shortage of wheat, edible oil and other commodities due to disruption of good trains, with different government and non-government agencies suffering losses running into lakhs of rupees.

Jats Reservation Struggle Committee national president Hawa Singh Sangwan said they were fighting a do-or-die battle since the government did not show seriousness in implementing its earlier promises.

"We will withdraw our ongoing agitation only when our demand for reservation in Central jobs is met," he asserted.

Meanwhile, the agitation also affected people who wanted to return to their native places on the occcasion of Holi.

North-Western Railways Chief Public Relations Officer Lalit Vohra told UNI that Railways had suffered a loss of more than Rs 200 crore due to disruption or cancellation of 150 passenger and 30 goods trains.
 
Security beefed up in Kurukshetra ahead of Jats' meeting


Tight security arrangement has been put in place ahead of a meeting of Jat leaders today to deliberate on the future course of action in view of their ongoing stir in Haryana demanding quota for the community in government jobs.
Heavy police presence was seen in the city today, particularly around Jat Dharamshala here, where the meeting was underway.
Among those taking part in the meeting were Santosh Dahiya, president of the women's wing of All India Jat Arakshan Sangharsh Samiti and Dharam Singh Chhot, vice-president of the Samiti.
Barricades were placed along the roads leading to the city last night to block the entry of agitators in the city from the adjoining areas of Ambala, Yamunanagar, Karnal and Kaithal districts.
Police are also keeping vigil at Kurukshetra railway junction and Pipli crossing on GT Road, in an attempt to thwart any effort by agitators to block the rail and road traffic on the national highway number one route, said officials.
The Jats have blocked 12 rail lines in Haryana for over two weeks, affecting train services on several routes, including Jind-Hisar, Hisar-Jakhhal, Jaipur-Hisar, Hisar-Bathinda and Delhi-Rohtak.
The protesters are demanding inclusion of the Jat community in the list of Other Backward Classes (OBC) to enable them to avail the benefit of reservation in government jobs, both in state and the Union governments.
The Jats in UP, meanwhile, withdrew their fortnight-long blockade from the railway tracks on Marc 19 following an Allahabad high court order but a crucial meeting between the protesters and the government failed to find an amicable solution to the demand.
 
Jats threaten to block Delhi-Ambala rail route

Agitating Jats on Monday threatened to block the Delhi-Ambala rail route if their demand for reservation in Central government jobs under the OBC category was not met by March 25. They also threatened to cut off the national capital from the rest of North India in the next phase of their stir if the demand was not fulfilled by March 28. These decisions were taken taken at a meeting of top Jat leaders here as a huge posse of policemen stood guard at the venue.
If the Congress-led UPA government at the Centre did not accept their demand by March 25, Jats would lay siege to the Delhi-Ambala route, community leaders Santosh Dahiya and Dharmpa Chhot told mediapersons here.
The blockade of the route will mean disruption of rail services to Amritsar and Pathankot in Punjab, Jammu in J and K, Una in Himachal Pradesh and the Chandigarh Union Territory.
"If the UPA government does not announce the quota for Jats by March 28, then Delhi will be cut off from the rest of North India.
"No water from Yamuna, no petroleum products like LPG from the Panipat Refinery and no milk and vegetables will be allowed to enter the national capital," the two leaders said.
Later, the Jats, led by Dahiya, President of the Women Cell of the All India Jat Arakshan Sangharsh Samiti, and Chhot, AIJAS Vice President, torched the effigy of the UPA government near the Maharana Partap Chowk here.
Recently, the protesters squatted on 12 rail lines in Haryana for over two weeks affecting train services on several routes including Jind-Hisar, Hisar-Jakhhal, Jaipur-Hisar and Delhi-Rohtak.
The Jats in UP had lifted their fortnight-long blockade of rail tracks following an Allahabad High Court order.
The impasse, however, persisted with a crucial meeting between the protesters and the Central government failing to find an amicable solution to the their demand.
 
Jats in Haryana continue stir for quota in Government jobs
Sirsa, March 19, 2011

Even as Jats of western Uttar Pradesh today lifted their fortnight-long blockade at Kafurpur railway station in Amroha district, Jats in Haryana continued to disrupt rail traffic at 13 places in the state.

The agitation in the state has affected around 450 passenger and goods trains since March 6 and led to losses of more than Rs 200 crore for the North-Western Railways, official sources said.

The agitation has also brought to a halt production of electricity in Rajiv Gandhi Thermal Power Plant at Khedar, due to which Haryana is facing a power shortage.

The Jat protests have also adversely effected production in the Hisar-based Jindal Strips.

Haryana is also facing shortage of wheat, edible oil and other commodities due to disruption of good trains, with different government and non-government agencies suffering losses running into lakhs of rupees.

Jats Reservation Struggle Committee national president Hawa Singh Sangwan said they were fighting a do-or-die battle since the government did not show seriousness in implementing its earlier promises.

"We will withdraw our ongoing agitation only when our demand for reservation in Central jobs is met," he asserted.

Meanwhile, the agitation also affected people who wanted to return to their native places on the occcasion of Holi.

North-Western Railways Chief Public Relations Officer Lalit Vohra told UNI that Railways had suffered a loss of more than Rs 200 crore due to disruption or cancellation of 150 passenger and 30 goods trains.
Is this a new group forme din presidency of sangwan ji..as per my knowledge, sangwan ji was the state president of the gruop led by yaspal malik (national president) ..did these two set apart? and what abouthe group led by colonel sindhu..is that also a separate group?
 
Is this a new group forme din presidency of sangwan ji..as per my knowledge, sangwan ji was the state president of the gruop led by yaspal malik (national president) ..did these two set apart? and what abouthe group led by colonel sindhu..is that also a separate group?

Yup you are right Prashant... this is a typo
 
Agitation spills over to Delhi

The ongoing Jat agitation in Haryana may spill over into Gurgaon with the local Jat community threatening to block all roads leading to Delhi if their demand for reservation under the Other Backward Classes (OBC) category is not met by March 28. Nearly 100 representatives of the Jat community staged a peaceful demonstration outside the deputy commissioner's office in Gurgaon on Monday and handed over a memorandum of their demands to the state government. The Jats have been protesting for the last few weeks to seek 27% reservation in central government jobs.
"All Jats in the country are united in their fight for rights," Raj Singh, a leader of Jat Reservation Agitation Committee (Gurgaon district), said.Ram Kataria, president of the committee, said, "We are taking up the matter with the Centre as well as the state government. We are here just to request the DC to push forward our case at the state level. This is for the sake of the development and growth of our community."
He further said, "We will cut off the Capital from the rest of North India in the next phase of our stir if our demands are not fulfilled by March 28. We will block all roads and rail routes in Gurgaon after that."
Deputy commissioner PC Meena has assured the Jats that he will forward their demands to the state. "I do not have any personal grudge against them. I will forward the case the rest is up to the state government," Meena said.
The stir has been gaining steam across the country as protestors had recently blocked 12 rail routes in Haryana for more than two weeks affecting train services on several routes including Jind-Hisar, Hisar-Jakhhal, Jaipur-Hisar and Delhi-Rohtak.
Meanwhile, at a meeting held in Amroha district in Uttar Pradesh on Monday, the leaders of All India Jat Arakshan Sangharsh Samiti (AIJASS) decided to continue their 15-day stir.
 
जाटों को आरक्षण देने पर केंद्र ‘सकारात्मक’

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हिसार. जाटों को आरक्षण देने पर केंद्र सरकार का रुख सकारात्मक लगता है। नॉर्थ ब्लॉक में शनिवार को केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम से एक घंटे की मुलाकात के बाद ऐसा खुद जाट नेताओं ने माना।

उनके अनुसार, चिदंबरम ने जाटों को आरक्षण देने की मांग को जायज माना है मगर इसे लागू करने की कोई समयसीमा तय नहीं की। ऐसे में तेरह स्थानों पर रेलवे ट्रैक जाम किए बैठे जाट समाज के प्रतिनिधि सोमवार को यहां मय्यड़ में आएंगे। चिदंबरम से हुई बातचीत का ब्योरा यहां रखा जाएगा। इसमें तय होगा, आगे क्या करना है।

शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और रेलवे को हुक्म दिया था कि जाटों से रेलवे ट्रैक खाली कराए जाएं। शायद इसी का नतीजा था कि केंद्र सरकार ने शनिवार दोपहर यहां बीएसएफ का हेलीकॉप्टर भेजा और अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष हवा सिंह सांगवान समेत नौ नेताओं को दिल्ली बुलाया। शाम पांच बजे चिदंबरम और केंद्रीय मंत्री मुकुल वासनिक के साथ समिति की बातचीत हुई। इसमें समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक, महासचिव कर्नल यामीन समेत बीसेक नेता शामिल थे।

चिदंबरम से मिलने के बाद यहां मय्यड़ लौट रहे प्रदेश अध्यक्ष सांगवान ने दैनिक भास्कर को बताया कि चिदंबरम और वासनिक से बातचीत सकारात्मक रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग(एनसीबीसी) से मंजूरी लेकर जाट आरक्षण की मांग को पूरा करने के लिए केंद्र तैयार है। हमने तीन महीने की समयसीमा रखने की बात कही। चिदंबरम ने कहा, ऐसा संभव नहीं है।

बैठक में मौजूद सचिवों ने कहा कि यह ऐसा काम है, जो एक महीने में भी हो सकता है इसलिए समय सीमा तय नहीं की जा सकती है। केंद्रीय मंत्रियों ने आंदोलन खत्म करने की बात कही। हमने कह दिया कि समाज की राय लिए बगैर ऐसा नहीं हो सकता है। दैनिक भास्कर के यह पूछने पर कि बातचीत को सफल माना जाए या विफल।

राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक और हवासिंह सांगवान ने कहा, न हम जीते, न ही हारे। केंद्र का रुख सकारात्मक है मगर उसे समयसीमा भी तय करनी चाहिए। इस बीच मय्यड़, सिवानी, जाखल, बामला आदि स्थानों पर रेलवे ट्रैक पर जाट समुदाय के सदस्य बैठे रहे। कहीं होली न मनाने का फैसला किया गया तो कहीं काली होली मनाई जाएगी।

फाग के अगले दिन सोमवार सुबह 11 बजे मय्यड़ में बैठक होगी। इसमें तेरह स्थानों पर धरना दे रहे जाट समाज के प्रतिनिधि यहां बुलाए जाएंगे। केंद्र से हुई बातचीत का ब्योरा दिया जाएगा। जैसा समाज कहेगा, वैसा करेंगे।

हवा सिंह सांगवान प्रदेश अध्यक्ष
 
हुड्डा से बातचीत विफल, आंदोलन तेज घेरेंगे &#23

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चंडीगढ़/हिसार. आरक्षण के मुद्दे पर हरियाणा के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ सोमवार को हिसार में वार्ता विफल रहने पर जाट नेताओं ने आंदोलन और तेज करने की घोषणा की है। जाट नेताओं का दावा है कि केंद्रीय गृहमंत्री चिदंबरम ने पत्र लिखकर आरक्षण पर विचार का वादा किया है।

उधर, कुरुक्षेत्र में जाट नेताओं ने धमकी दी कि इस मुद्दे पर दिल्ली की बिजली-पानी सप्लाई बंद कर देंगे। उनकी मांग नहीं मानी तो 28 मार्च से दिल्ली-अंबाला ट्रैक भी जाम कर देंगे। रेलवे ने एहतियातन मंगलवार से करीब 54 ट्रेनें रद्द रखी हैं। हरियाणा में अभी कुल 14 ट्रैक बंद हैं।

जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष कमांडेंट हवासिंह ने हिसार के रामायण गांव में बताया कि पत्र भेजकर चिदंबरम ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश मिलने के छह महीने में जाटों को केंद्र की ओबीसी सूची में शामिल करने का वादा किया है। लेकिन हुड्डा ने राज्य में आरक्षण देने में असमर्थता जताई। इसके तुरंत बाद जाटों ने आंदोलन और तेज करने की घोषणा कर दी। जाटों ने उत्तरी हरियाणा में 25 मार्च से आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। उधर, इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने कहा कि राज्य सरकार आरक्षण पर विधानसभा में बिल लाए, हम उसे पास कराएंगे। ( somebody ask him why it was not brought in during his regime still der aaye durasat aaye)

चंडीगढ़ से शताब्दी सहित पांच ट्रेनें रद्द

चंडीगढ़. आंदोलन के मद्देनजर चंडीगढ़ से नई दिल्ली के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस समेत पांच गाड़ियां दो दिन के लिए रद्द कर दी गई हैं। उत्तर रेलवे अंबाला मंडल के सीनियर डीसीएम जीएम सिंह ने बताया कि चंडीगढ़ से नई दिल्ली 12006 शताब्दी एक्सप्रेस, जो सुबह 6.53 पर चंडीगढ़ से रवाना होती है, नई दिल्ली से चंडीगढ़ आने वाली 12005 शताब्दी एक्सप्रेस, रात 8.45 बजे आने वाली शताब्दी एक्सप्रेस मंगलवार और बुधवार को रद्द रहेंगी।

हिमालयन क्वीन, चंडीगढ़-इलाहाबाद ऊंचाहार एक्सप्रेस भी दो दिन तक रद्द रहेंगी। उधर, चंडीगढ़ जयपुर गरीब रथ एक्स. आगामी आदेश तक नहीं चलेगी। जनशताब्दी एक्सप्रेस सुबह 7.30 बजे, 2926ए कालका-बांद्रा-पश्चिम एक्सप्रेस 11.25 बजे और शताब्दी एक्सप्रेस शाम 6.20 बजे चंडीगढ़ से जाएंगी।

सीएमजी ने की एक्शन की समीक्षा

सरकार के क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (सीएमजी) ने सोमवार को आरक्षण की मांग पर अड़े जाटों के आंदोलन से बनी स्थिति और रेल व सड़क यातायात बहाल करने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की। साथ ही केंद्र सरकार नेशनल कमीशन फॉर बैकवर्ड क्लास (एनबीएससी )के नियमों में बदलाव की अनुमति देने पर भी विचार कर रही है।
 
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