dhoondhta hai ab woh mujhe mehfil dar mehfil
keh do use, har kisi ko hum hote nahin haasil
ये तन्हाई की रातें हैं तुम्हारी महफिल के हासिल
अब आदत की तरह तुम नहीं ज़िंदगी में शामिल ||
कोई वादा मोहब्बत का हम भी कर जाते लेकिन
पहले जरा बन कर दिखलाइये प्यार के काबिल ||