ravinderjeet
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ravinder bhaii ... kasuta khajana bhar raha h kavita ka ....
kitab kad se chape h .....
dhanyawaad navdeep ,pasand karan khaatar.
ravinder bhaii ... kasuta khajana bhar raha h kavita ka ....
kitab kad se chape h .....
dhanyawaad navdeep ,pasand karan khaatar.
गऊ का जाया
धोली गाँ ने दिया बाछड़ा,
बाछड़ा स मेरा याडी |
याडी मेरा भाजता हंडे ,
करे कसुत खिलारी ||
सांझ सी के लागी भूख ,
मन्ने दिए उह ताहि दो टूक |
जब गावडी घरां आई ,
दोनुआ ताहि धार पयाई||
याडी मेरा बन्ग्या नारा ,
नाथ उह के दी घाल |
मन्ने वो हलाया फेर ,
ठुमक ठुमक चाल ||
रहडुए में जब जोड्या ,
बन्ग्या वो कती घोड़ा |
भाज भाज के बहावे हल ,
घरां आ के खावे बनोले खल ||
खूब खेत कमाया ,
कदे ना गया बियाहा |
दुखण लागे गोडे हाड ,
जुआ तार बगाया ||
बुड्ढा होग्या गऊ का जाया ,
नाथ काढ दी जेवडा बगाया |
घेर में बेठ्या करे जुगाली,
याद आवें हल आर हाली ||
बहुत ही बढ़िया भाई जी
बदलू की गेल्याँ,
रोलम -रोल |
माधे लेगा उह की ,
झोट्टी खोल |
खेत भी लिए,
कोड़ियां के मोल |
बदलू हंडे ,
लाँगड़ खोल |
बदलू इब्ब तू ,
गोबर बटोल |
बदलू की गेल्याँ,
रोलम -रोल |
( बदलू अर माधे दो भाई थे ,माधे ने बदलू की सारी चीजां पे बेईमानी तें कब्जा कर राख्या था ,ज्यां तें उन् ने गाल के बालक न्यू कह के ने चीडाया करदे | इन् दोनुआ का जीकर "अल्बादी बाल्कां के किस्से" में भी आया स | बदलू-माधे की थां,और किस्से का नाँ धर कें भी गा सके सें |)
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