Hariyanvi Rhymes for children ( hariyanvi ) please contribute...

तले चाह की दूकान
उप्पर इंदिरा का मकान
मकान में लागी आग
इंदिरा गई भाज
भाज्दी -भाज्दी धेड पड़ी
पड़दें उह की फूटी घडी
घडी के बजगे बारा
जीतेगा रलदू म्हारा

( ये चुनाव के बखत गाया करदे ,जब हाम बालक थे ,जब इंदिरा का जोर था अर रलदू की थां जो भी कांग्रेस के विरोध में चुनाव लड़र्या होंदा उह का नाँ धर देंदे |)
 
टविंकल -टविंकल , लिट्टल स्टार |
मारे लट्ठ , सर फोड़े चार |
भाजगे डाकां , गाम तें बाहर |
बाजरे की रोटी , डाकलाँ का साग |
छिक- छिक खाई , मारी डकार |
उप्पर आसमान में ,झोटी बयाई |
तले ताई की ,चढ़ी कढाई |
कढाई में तले ,गुलगुले चार |
टविंकल -टविंकल , लिट्टल स्टार |

( या पोयम एक चुटकले का भाग थी ,मन्ने नु सोच के अक जट्टां के बालकां की कही होई स ,किस्से नु सिखानी हो तो सिखा लियो,ज्यां तें आड़े छाप दी )
 
गऊ का जाया
धोली गाँ ने दिया बाछड़ा,
बाछड़ा स मेरा याडी |
याडी मेरा भाजता हंडे ,
करे कसुत खिलारी ||

सांझ सी के लागी भूख ,
मन्ने दिए उह ताहि दो टूक |
जब गावडी घरां आई ,
दोनुआ ताहि धार पयाई||

याडी मेरा बन्ग्या नारा ,
नाथ उह के दी घाल |
मन्ने वो हलाया फेर ,
ठुमक ठुमक चाल ||

रहडुए में जब जोड्या ,
बन्ग्या वो कती घोड़ा |
भाज भाज के बहावे हल ,
घरां आ के खावे बनोले खल ||

खूब खेत कमाया ,
कदे ना गया बियाहा |
दुखण लागे गोडे हाड ,
जुआ तार बगाया ||

बुड्ढा होग्या गऊ का जाया ,
नाथ काढ दी जेवडा बगाया |
घेर में बेठ्या करे जुगाली,
याद आवें हल आर हाली ||
 
गऊ का जाया
धोली गाँ ने दिया बाछड़ा,
बाछड़ा स मेरा याडी |
याडी मेरा भाजता हंडे ,
करे कसुत खिलारी ||

सांझ सी के लागी भूख ,
मन्ने दिए उह ताहि दो टूक |
जब गावडी घरां आई ,
दोनुआ ताहि धार पयाई||

याडी मेरा बन्ग्या नारा ,
नाथ उह के दी घाल |
मन्ने वो हलाया फेर ,
ठुमक ठुमक चाल ||

रहडुए में जब जोड्या ,
बन्ग्या वो कती घोड़ा |
भाज भाज के बहावे हल ,
घरां आ के खावे बनोले खल ||

खूब खेत कमाया ,
कदे ना गया बियाहा |
दुखण लागे गोडे हाड ,
जुआ तार बगाया ||

बुड्ढा होग्या गऊ का जाया ,
नाथ काढ दी जेवडा बगाया |
घेर में बेठ्या करे जुगाली,
याद आवें हल आर हाली ||

बहुत ही बढ़िया भाई जी
 
| हाम कीड़ी नु घुघु के बिल में गेर कें या कविता गाया करदे :-
घुघु के घर में चोर ,
घुघु बाहर लिक्कड़ |
घुघु के घर में चोर ,
घुघु बाहर लिक्कड़ |
(फेर जब घुघु उह कीड़ी की टांग खींच के ने रेते के मांह खींच लेंदा तो नु गाया करदे )
घुघु ने कर दिया तोड़ ,
घुघु ने खाए टिक्कड़ |
घुघु ने कर दिया तोड़ ,
घुघु ने खाए टिक्कड़ |
(अर फेर बिल के चारुं ओड के आंगली फिराया करदे )
 
नाना जी नमस्ते ,
लाडू -पेडे सस्ते ,
हाम भी खूब खावांगे
पड़ोसियां नु दीखावांगे |
पडोसी मांगे भोरा
रोवे उनका छोरा
नाना जी नमस्ते ,
लाडू -पेडे सस्ते ,
 
काला भुंड ,
चने बोवे |
फंश्गा लींड,
खड्या रोवे |
दादी उह्की ,
चिमटा टोहवे |

( ये जूमला काले रंग के बालकां नु चिडान के काम आया करदा जब उनकी गेल लड़ाई हो जांदी )
 
तेरा बाबू भी देखे बाट,
तू मूत के चक्कर काट ,
तू न्यू -ए माँगता हंडे जा
आपां न्यू-ए ल्यन्न्गे ठाठ

( ये जब कहया करदे जब कोए बालक दुसरे बालक पे किम्मे खावण की चीज मांग लेन्दा अर बालक देणा ना चांदा तो यु जूमला कह दिया करदे )
 
उलळी गाडी टूटे जोत
रलदू कै लागी माड़ी चोट
रलदू के खिंडगे सूखे रोट
रलदू जा बोझयाँ की ओट ए ओट

जब किसे ki गाडी उलळ जाया करदी , जब चिडाया करदे
 
जांडी
म्हारे खेत में जांडी ,
झींझ लागें आंडी |
कोए छोटी ,कोए मोटि,
कोए पतली, कोए लांबी ||

रमलू भी खावे ,
रलदू भी खावे ,
खावें सारे गुहांडी |
म्हारे खेत में जांडी ,
झींझ लागें आंडी ||

डाहले तोड़े ,
डाहली तोड़ी ,
तोड़ कें गेरी,
आडी बाँगी |
म्हारे खेत में जांडी ,
झींझ लागें आंडी ||

गर्मी गई ,
झींझ भी गई
चूहड़े के ने,
आ झांगी |
म्हारे खेत में जांडी ,
झींझ लागें आंडी |


--------रवि "अतृप्त "
 
आधी रात ने बाजे भोण
कुत्ते सुण कें लागे रोंण
मोर भी गेल्याँ कुकाए
गाम में चोर आये

( पहलम रात ने जब नु होया करदा तो बाल्कां ने नु कहया करदे अक चोर आवें सें ज्यां तें ये सब बोलेन सें )
 
तू खड्या जोहड़ के काठे
तू होई बात ने नाटे
तेरा पजामा झर-झर पाट्टे

( झूठ बोलनिये बालक नु चिडाया करदे |
 
ढींग-ढाण्ग तले
ढींग-ढाण्ग तले
तोतक आले आम तले
मन्ने डेरा लाया
थारा सारा गाम जले
चेली चेले पाँ दाबें
धोरे मेरे धुनी जले
ढींग-ढाण्ग तले
ढींग-ढाण्ग तले
तोतक आले आम तले
( बेरा ना क्यूँ गाया करदे )
 
बदलू की गेल्याँ,
रोलम -रोल |
माधे लेगा उह की ,
झोट्टी खोल |
खेत भी लिए,
कोड़ियां के मोल |
बदलू हंडे ,
लाँगड़ खोल |
बदलू इब्ब तू ,
गोबर बटोल |
बदलू की गेल्याँ,
रोलम -रोल |
( बदलू अर माधे दो भाई थे ,माधे ने बदलू की सारी चीजां पे बेईमानी तें कब्जा कर राख्या था ,ज्यां तें उन् ने गाल के बालक न्यू कह के ने चीडाया करदे | इन् दोनुआ का जीकर "अल्बादी बाल्कां के किस्से" में भी आया स | बदलू-माधे की थां,और किस्से का नाँ धर कें भी गा सके सें |)
 
बदलू की गेल्याँ,
रोलम -रोल |
माधे लेगा उह की ,
झोट्टी खोल |
खेत भी लिए,
कोड़ियां के मोल |
बदलू हंडे ,
लाँगड़ खोल |
बदलू इब्ब तू ,
गोबर बटोल |
बदलू की गेल्याँ,
रोलम -रोल |
( बदलू अर माधे दो भाई थे ,माधे ने बदलू की सारी चीजां पे बेईमानी तें कब्जा कर राख्या था ,ज्यां तें उन् ने गाल के बालक न्यू कह के ने चीडाया करदे | इन् दोनुआ का जीकर "अल्बादी बाल्कां के किस्से" में भी आया स | बदलू-माधे की थां,और किस्से का नाँ धर कें भी गा सके सें |)

Manne sochi माधे Bhupinder Hooda hai View attachment 12401
 
बिल्लो-ए-बिल्लो
आलू के रपिये किल्लो
बिल्लो ने ताखड़ी बाट
मारे बागा कें
बिल्लो भाजी
भोथा ठा कें
फेर घरां आई
म्हारे बता कें
बालक लेगे
चीजो ठा कें

( या बिल्लो शरणार्थी थी अर दूकान कर रि थी ,बालक चिडाया करदे इहने न्यू कह- कह कें ने )
 
छोट्टा रे छोट्टा
तेरे बाबू ने
मार्या शोट्टा
तेरे भाई की गेल्याँ
तेरा गल घोटया
थारे खाण का टोट्टा
ज्यां तें तू रह्ग्या छोट्टा

( बोन्ने बालकां ने चिडाया करदे )
 
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