Hariyanvi Rhymes for children ( hariyanvi ) please contribute...

मछली जल की रानी स
जीवन उह का पाणी स
हाथ लायें तें डर जावे
बाहर काढें तें मर जावे
दो दन धर दे ते सड़ जावे

is last line tai aage:

दो दन धर दे ते सड़ जावे
ustai pehlya fry karkai kha jaawe ;)
 
कुल्लाबादी कुरर!!!!!!!!
काली चिड़िया फुररर !!!!
रमलू का दादा खान्सेगा
रमलू छोरा हंसेगा


(बालक रोंदा हो जब उह का नाँ ले के ने हंसाया करदे )
 
बावली भल्लो
तावली तावली चल्लो
काम सारे बिगाड़े
तीन तेरा तीगाडे
हुई बात ने नाटे
झुट्ठी थाली चाटे




( या कोए बावली सी या घणी सीधी-साधी छोरी होया करदी उहने कह्या करदे )
 
बल्लो बल्लो बावली
सानी काट्टे तावली
एक पूली कटगी
सारी बल्लो अट्गी
 
ताई री ताई
थारे घर में बिलाई
बिलाई पी गी दूध
ताऊ ने मारे जूत
बिलाई गई मर
भामण हो गा सर
चांदी की करो दान
ना थारा घटेगा मान
भामण का मन खोटा
ताऊ ने मार्या सोंटा
भामण गया भाज
ना मुंह दिखाया आज
 
लल्ला रे ललमनिया रे
नाहने मुन्ने भाई रे
माँ के लाडले सिपाही रे
तेरी दादी ने बाँझ बताई रे
तेरे दादा ने बियाह की सलाही रे
सो जा नाहने भाई रे
सो जा नाहने सिपाही रे
१२ गज का तानिया रे
छान ठुवान जाइए रे
हांगा थोड़ा लाइए रे
दंगा घना मचाइए रे
सो जा नाहने भाई रे
सो जा नाहने सिपाही रे

भाई साहब! पूरे कर दिये।
 
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]आज सोमवार स [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]काटडे के भुखार स [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]तडके मंगलवार स [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]ल्याणा मेंह्स का न्यार स [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]परसुं बुधवार स [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]मेंह्स ने दी धार स [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]नरसूं गुरुवार स [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]ताता दूध त्यार स [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]तरसूँ शुक्रवार स [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]घी दूध की बहार स [/FONT]
[FONT=Verdana, Arial, Tahoma, Calibri, Geneva, sans-serif]षड्शुं शनिवार स [/FONT]
थारे घर में मुस्स्याँ का आचार स
हरशुं इतवार स
मौज करो छुट्टी का वार स


(या कविता गा के ने बालकां के हफ्ते के दिन याद हो जाया करदे )
 
एक चिड़िया के दो बच्चे
चिड़िया ल्यावे दाणा
एक खोश कें खा जा
वो था बड़ा श्याणा
दूजा रह्जावे भूखा
वो था माड़ा याणा
दुज्जे ने मिले ना भोड्डा
भूख तें होगा कोड्डआ
कती माड़ा था गात
फेर आया एक काग
वोह था भूखा आज
दोनुआँ मांह तें किः ने खाऊं
ठाड्डा झेद में भर ले जाऊं
उह के पसंद आया मोटा
बच्गा जान तें छोट्टा
किहे का हक़ ना मारो
जीवन सफल हो थारो


 
दादा जी की गाड्डी

गिहूँआँ की भरी ठाड्डी
राश ने हाम सहारांगे
आज गिहूँ तारांगे
भरज्यांगे कोठे अर माट
सारे साल रहवेंगे ठाठ


 
मामा जी क:जावांगे ,
हलवा पूरी खावांगे ,
मामाजी ने लाये धान ,
धान्नां के थे कई क्यार,
धान्नां के लाडू लाये हजार |
 
लीलू गाँवारिया गाल में फिरे ,
रघ-रघ रमलू की चाकी घड़े
चाकी मांह तें चून लिकड़े ,
रमलू चून के मोहलुए घड़े ,
लीलू गांवरिया............


( छोटे-छोटे बालकां की कड़ में दोनु हाथां तें चाकी घडन की ढाल घुन्स्याँ तें बालक नु घडदी हाण कहया करदे ,उह तें बालक भोत हांस्या करें )
 
रमलू छोरा जौर का ,
सानी सपानी ढोर का |
बलध भी राजी ,
मेन्ह्स भी राजी ,
बाखर खुवावे रोज का ,
रमलू छोरा जौर का |
दूध की भरी बाल्टी ,
मेन्ह्स ना कदे टालती ,
निखड़ू दूध ओज का,
रमलू छोरा जौर का |
बलध तगड़े ठाड़ेडे ,
खूब भजावें गाडेडे,
हल जोडें रोज का ,
रमलू छोरा जौर का ,
सानी सपानी ढोर का ||
 
बल्लो बल्लो बावली
सानी काट्टे तावली
एक पूली कटगी
सारी बल्लो अट्गी
म्हारे कानी न्यू कह्या करें :-

आंवली की बावली
डंघ धरे तावली
एक डंघ ग्यार में
ग्यार लागी सलवार में
( आंवली की लुगाइयां ने अर के उड़े ब्याही होई छोरियां ने चीडाया करदे )
 
लंगड़ दीन,
बजावे बीन ,
हाथ में लाठी ,
रोटी गिन
(लंगड़े बालकां नु चीडाया करदे,कह-कह के |)
 
कुल्लाबादी कुरर!!!!!!!!
काली चिड़िया फुररर !!!!
रमलू का दादा खान्सेगा
रमलू छोरा हंसेगा


(बालक रोंदा हो जब उह का नाँ ले के ने हंसाया करदे )

जितेंदर रबिंदर थे दो भाई
मार mundaassa खोद्दें खाई
खाई मै तैं लिक्डी एक बुढ़ी सी लुगाई
रबिंदर बोल्ल्या या मेरी ताई
 
एक चिड़िया के दो बच्चे
चिड़िया ल्यावे दाणा
एक खोश कें खा जा
वो था बड़ा श्याणा
दूजा रह्जावे भूखा
वो था माड़ा याणा
दुज्जे ने मिले ना भोड्डा
भूख तें होगा कोड्डआ (hahahahaha................)
कती माड़ा था गात
फेर आया एक काग
वोह था भूखा आज
दोनुआँ मांह तें किः ने खाऊं
ठाड्डा झेद में भर ले जाऊं
उह के पसंद आया मोटा
बच्गा जान तें छोट्टा
किहे का हक़ ना मारो
जीवन सफल हो थारो


आपनै व कहनी भी आवै है के, अक्क : दो मैह्न्स जन्ग्गल मैं ब्या गी एक नै कटड़ा दिया दुज्जी नै कटड़ी
कटड़े नै बिचारी कटड़ी धोख्हे तै कुए मैं धका दी ........................................
 
अतिशोयक्तियाँ उन् ने कहया करें जो बढ़ा चढ़ा के फेर जो चलन स उस के उलटे हों ,


अतिशोयक्तियाँ

हाथी ने दिए अंडे
कीड़ी गयी ठाण
मछली चढ़ेगी रुंख पे
गूंगे ने दिए बयान


लंगडा भाज्या थाया ना
नंगे के हर लिये चिर
आँधा समझावन लाग्या
टूंडे ने बनाई तस्वीर

खोते ने बेद पढ़ लिये
मुसे ने ब्याह दी भाण
गंडेवा हांडे भाजता
कपोत ने चढाये बाण



शेर मिमायाण लाग्या

बकरी ने मारी धाड़

ऊंट बडगया बिल मै

कुकुर ले उडार



थाणेदार डाका डालें
चोर लेवें शिर
राजा होगया रंक
सिपाही बणगये भीर

बानिये होगे फौज मै

जाट तोड़े खाट

बामण समझावाण लागे

सोला दुनी आठ


घोड़े की चंधाल लावे
मिंढक ठावे टाँग
मुर्गा देवे अंडे
मुर्गी देवे बाँग


बांदर बनावे आलने

कोयल देवें सिख

मुस्से बिल्लियाँ नु खावे

माणस करे प्रीत


बाड़ खेत नु खावण लागी
नेता बण गये पीर
युधिष्ठिर को मान नहीं
दुर्योधन होया धर्मबीर


----रवि "अतृप्त "
 
Last edited:
बागड़ी आया ऊँट पे,
ऊँट भाज्या छूट के,
धेड पड्या ठाठी,
उप्पर तें पड़गी काठी ,
काट्ठी गई टूट ,
बागड़ी गया रूस |


( भ्यानी तोशाम कानी के रिश्तेदार बालकां ने चीडाया करदे )
 
हरयाणवी बोली में भोत सारी इस्सी चीज सें जो ढंगसर खंगाली नहीं सें | कई बे इस्सी इस्सी बातां का बेरा पाट्टे स अक बन्दा सोच नि सकदा | आज जो शीक्षआविद आधुनिक पढ़ाई की बात करें सें वो तरीके ते म्हारी गाम्डू में कददे तें सिखाये जावें सें बालकां ताहीं | अगले कई दिनाँ में कुछ इस्सी-अ ढाल की प्रस्तुती होंगी मेरी जो लुप्तप्राय होगी थी |इब्ब में उन् ने माड़ी मोटि अदला बदली की गेल छापूंगा :-

डोडो बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |...........


डोडो ने फेटया मोर ,
डोडो बेबे क्यूँ चाली गाम छोड़ ?
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |



डोडो ने फेटया उल्लू ,
बेबे क्यूँ तू स कुहलू ?
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |




डोडो ने फेत्या सुवा ,
डोडो बेबे क्यूँ पट्ट्या हिया ?
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |




डोडो ने फेटि कोतरी
उप्पर बेठी चोंत्री ,
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेटि टे ,
के होया डोडो बेबे ?
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |







डोडो ने फेट्या कबूतर ,
आंसू पुन्झे तले उतर ,
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेटि काबर ,
डोडो बेबे राख तूँ सबर ,
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेटि चील ,
डोडो बेबे आँख क्यूँ गई सील ?
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेट्या ढूग्गा ,
डोडो बेबे के होग्या ?
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेट्या बाज ,
डोडो बेबे कित चाली आज ?
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |







डोडो ने फेट चिड़िया ,
मीठी बोली की पुडिया ,
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेटि टटीहरी ,
दुःख की होई सीरी ,
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेट्या बगला ,
डोडो ने देख सुबक्ला ,
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेटि कुंआर ,
डोडो बेबे तेरे तें मन्ने स प्यार ,
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेट्या काग ,
डोडो बेबे मेरा प्यार गया जाग ,
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेटि कोल ,
डोडो बेबे किः ने दिया हिया छोल ?
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेट्या खातीचिडा ,
डोडो बेबे मेरे होई बड़ी पीड़ा ,
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





डोडो ने फेट्या बेंय्या ,
डोडो बेबे क्यूँ पट्ट्या हिया ?
डोडो बता तेरे के होया ?
कुण से तेरे तें दुःख दिया ?
"में थी बेठी बाड़ पे ,
डला मार्या नाड़ पे ,
राही-राही जाँ थी ,
में के जले का खाँ थी |





----- रवि "अतृप्त "


( बालकां ने खीलान की गेल आपणे आस पड़ोस के प्क्षियाँ की भी जानकारी दिया करदे म्हारे पुरखे )

 
आपणे मोधू ने ब्याहवांगे,
नई बोढिया ल्यावांगे ,
हाथी घोड़े बुलावांगे |


बर्तन- भांडे ,कासण -बासण ,
सारे मन्ज्वावांगे ,
आपणे मोधू ने ब्याहवांगे,
नई बोढिया ल्यावांगे |



गोबर- पाणी ,सान्नि- सपान्नी ,
भरोटे हेल ठुवावांगे ,
आपणे मोधू ने ब्याहवांगे,
नई बोढिया ल्यावांगे |



चुल्हा -चौका ,धार -डोका ,
दूध भी बिल्वावांगे ,
आपणे मोधू ने ब्याहवांगे,
नई बोढिया ल्यावांगे |



लाम्णी-सामणी ,छोल -चास्णी ,
कोहलू भी झुक्वावांगे ,
आपणे मोधू ने ब्याहवांगे,
नई बोढिया ल्यावांगे |


रोटी-सोटी,लीपा-पोती ,
जूआरा ले के खान्दावांगे ,
आपणे मोधू ने ब्याहवांगे,
नई बोढिया ल्यावांगे |



तील -तागा ,दामण -सामण,
सूंट भी सिम्वावांगे ,
आपणे मोधू ने ब्याहवांगे,
नई बोढिया ल्यावांगे |



----रवि "अतृप्त "
 
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