यही नहीं, भगतसिंह का नाम लेकर २ खोटे आने खरे की तरह प्रचारित किये जा रहे हैं.
भगतसिंह ने तो और भी बहुत कुछ कहा था, किया था, उस सबको छोड़कर, उनके एक कथन की आड़ में कुकर्म छुपाना चाहते हैं? भगतसिंह ने भी नहीं सोचा होगा की उनके नाम और कथन का इस्तेमाल इस तरह खोटे को खरा दिखाने में किया जायेगा.
भगतसिंह ने तो और भी बहुत कुछ कहा था, किया था, उस सबको छोड़कर, उनके एक कथन की आड़ में कुकर्म छुपाना चाहते हैं? भगतसिंह ने भी नहीं सोचा होगा की उनके नाम और कथन का इस्तेमाल इस तरह खोटे को खरा दिखाने में किया जायेगा.
अर जै वो दो आने खोटे हों तो? और देण आले अँगरेज़ काले हों तो?, भगत सिंह ने नहीं सोची थी की इसा भी होगा, नहीं तो शहीदी की कसम, आज भगत सिंह भी बोलते की इससे तो गौरे ही ठीक थे !
Quoting again from a previous note:
"Let us first pass a preliminary version of the bill: Surprisingly, some among the educated class have started to believe in this myth. It is important to realize that a strong foundation for such a law is a must to begin with in order for it to be refined in the future. Secondly, here is no greater evidence than this long drawn out struggle for Lokpal bill to justify the need for us to get it right the first time."