कर्म भाग्य दोनों बड़े , इससे बढ़कर कौन
कर्म लगन से कीजिये , भाग्य रहे ना मौन i
मानव का मन कब मिला , नित होती तकरार
धरती अम्बर मिल गए , दरिया के उस पार i
ढाई आखर प्रेम के , कहत न लागे देर
उम्र सिरानी खोज जेंहि , जगत न पायो हेर i
मै क्या जानू तू बता , तू है मेरा कौन
मेरे मन् की बात को ...