जाटों को दिए गए अारक्षण को सुप्रीम कोर्ट न&#23

Update and Rohtak Meeting briefs on Jat Reservation Agenda from Shri Hawa Singh Sangwan




Hawa Singh Sangwan
जाट आरक्षण के लिए रैली 11 मई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर
रोहतक। दिनांक 12 अप्रैल, रविवार को प्रात: 11 बजे चौ० छोटूराम धर्मशाला में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की बैठक हुई, जिसमें दर्जन भर खाप प्रधानों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में जाट आरक्षण पर समीक्षा की गई, जिसमें समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह दलाल ने सभी प्रतिनिधियों को अपने-अपने विचार रखने का अवसर दिया, जिसमें समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवासिंह सांगवान ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डाली है, जिस पर जाट समाज को मात्र एक प्रतिशत उम्मीद है कि इसमें जाट समाज के पक्ष में कोई फैसला आएगा। हो सकता है, इसके बाद केंद्र सरकार क्यूरेटिव याचिका दाखिल करे, लेकिन हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार जाट आरक्षण का मामला सवैंधानिक पीठ में ले जाए। जाट समाज की तरफ से भी पुनर्विचार याचिका 13 अप्रैल को डाली जाएगी। देखने में आया है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन मामलों में भी लागू किया जा रहा है, जिनमें 17 मार्च से पहले दाखिलों व नौकरियों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। ये भी देखने में आया है कि यूपीएससी का परिणाम रोके रखा है, जो पूर्णतया जाट समाज के साथ पक्षपात है। यदि इसमें भी फैसले को लागू किया जाता है, तो हमारे बच्चों का भविष्य चौपट हो जाएगा। इसलिए हमें इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगानी पड़ेगी। इसके लिए जो भी बच्चे प्रभावित हैं, वे आपस में संपर्क करके एक अच्छे वकील के द्वारा न्यायालय में याचिका प्रस्तुत करें। इसके अलावा कोई दूसरा चारा प्रतीत नहीं होता।
बैठक में ये समिति की तरफ से यह फैसला लिया गया कि खापों को मीटिंग करके किसी एक खाप के प्रधान को को-आर्डीनेटर नियुक्त किया जाए। यदि खापें ऐसा करती हैं तो हमारा संगठन खापों के नेतृत्व में आंदोलन करने के लिए तैयार है। यदि खापें ऐसा नहीं कर पाईं, तो हमारी संघर्ष समिति आंदोलन करेगी और खापों के सहयोग की भी प्रार्थना करेगी। इसके अतिरिक्त यह भी फैसला लिया गया कि 11 मई को प्रस्तावित रैली जंतर-मंतर पर अवश्य होगी, जिसमें सभी जाट संगठन और खापें हिस्सा लेंगी और आगे की रणनीति का वहीं पर फैसला ले लिया जाएगा। उपस्थित खाप प्रधानों के अतिरिक्त संघर्ष समिति के रोहतक जिलाध्यक्ष धर्मपाल हुड्डा, हिसार जिलाध्यक्ष दलजीत पंघाल, सोनीपत जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह मोर, झज्जर जिलाध्यक्ष मास्टर ताराचंद जाखड़, भिवानी के जिलाध्यक्ष रघुबीर सिंह बूरा, जींद के जिलाध्यक्ष चंद्र सिंह चहल, रेवाड़ी के जिलाध्यक्ष सूबेदार रामचंद्र टीकला, पानीपत के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह खरब, प्रदेश महासचिव रामकिशन महलावत, महासचिव कप्तान जंगवीर सिंह मलिक, महासचिव कप्तान प्रताप सिंह, सरपंच रामकुमार धुआं आदि ने भी अपने विचार प्रकट किए।
बैठक में अंतिम फैसला यह लिया गया कि आंदोलन शुरू करने से पहले जाट समाज मेें इसका जोर-शोर से प्रचार किया जाए ताकि लाखों की संख्या में जाट और जाटनियां आंदोलन में भाग ले सकें। समिति में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि जब तक जाटों को अपना सवैंधानिक अधिकार नहीं मिलता, जाट अपना आंदोलन जारी रखेंगे, चाहे इसमें कितनी भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़ें। जाट आरक्षण का मुद्दा जाट समाज के लिए करो या मरो का फैसला है।
अगली बैठक 21 अप्रैल को हिसार की जाट धर्मशाला में होगी, जिसके लिए सभी जाट भाईयों को वहां पहुंचने के लिए अनुरोध किया जाता है। अभी समय आ गया है कि जाट अपनी एकता और अपने अधिकार के लिए जागरूकता का उदाहरण पेश करें।

 
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आई दिनों के बाद लिख रहा हूँ वो भी जाट आरक्षण के संबंध में सारी स्थिति स्पष्ट हो जाने के बाद अब जबकि केवल राजस्थान के 31 जिलों और दिल्ली राज्य के जाटों के लिए आरक्षण बचा रहा गया है यह जरूरी है की पूरे मसले पर गंभीरतापूर्वक विचार करें क्योंकि समाज के सम्मान का प्रश्न तो है ही युवाओं के भविष्य का भी विकराल रूप सामने है i यह मैंने बहुत पहले ही भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के श्री रमवीर सिंह वर्मा को बता दिया था कि आरक्षण एक संवैधानिक प्रावधान है इसे कोई खैरात में अथवा किसी दल का नेता या मंत्रिमंडल नहीं दे सकता यह संवैधानिक तरीके से ही लेना होता है अन्यथा गुजर तो सैंकड़े के करीब कुर्बानी देकर इसे कहाँ प्राप्त कर सके हैं i केंद्रीय और सम्बद्ध राज्यों के पिछड़ा वर्ग आयोग में यथोचित सुनवाई हो वे अनुशंशा करें और तब कोई सरकार इसे राजपत्र में अधिसूचित कर दे तो ही यह संभव है जैसा कि 1999 के राजस्थान के 2 जिलों को छोडकर और दिल्ली में मिला आरक्षण है i अब वक्त आ गया है कि अलग अलग खेमों में विभक्त अ,ब,स में बंटी जाट महासभाएं एक होकर सुप्रसिद्ध वकीलों, सेवा निवृत न्यायाधीशों और विद्वानों की समिति बनाएँ और आयोगों में जाने के लिए तथ्यात्मक आंकड़े तैयार करें और उसके बाद निरंतर सुनवाई की प्रक्रिया चले और आयोग पक्ष में फैसला दे यहाँ तो उल्टा हो रखा है आयोग का प्रतिवेदन जाटों के खिलाफ प्रस्तुत किया हुआ है ? इस यक्ष प्रश्न का प्रत्युत्तर हमें ही खोजना है i
 
आई दिनों के बाद लिख रहा हूँ वो भी जाट आरक्षण के संबंध में सारी स्थिति स्पष्ट हो जाने के बाद अब जबकि केवल राजस्थान के 31 जिलों और दिल्ली राज्य के जाटों के लिए आरक्षण बचा रहा गया है यह जरूरी है की पूरे मसले पर गंभीरतापूर्वक विचार करें क्योंकि समाज के सम्मान का प्रश्न तो है ही युवाओं के भविष्य का भी विकराल रूप सामने है i यह मैंने बहुत पहले ही भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के श्री रमवीर सिंह वर्मा को बता दिया था कि आरक्षण एक संवैधानिक प्रावधान है इसे कोई खैरात में अथवा किसी दल का नेता या मंत्रिमंडल नहीं दे सकता यह संवैधानिक तरीके से ही लेना होता है अन्यथा गुजर तो सैंकड़े के करीब कुर्बानी देकर इसे कहाँ प्राप्त कर सके हैं i केंद्रीय और सम्बद्ध राज्यों के पिछड़ा वर्ग आयोग में यथोचित सुनवाई हो वे अनुशंशा करें और तब कोई सरकार इसे राजपत्र में अधिसूचित कर दे तो ही यह संभव है जैसा कि 1999 के राजस्थान के 2 जिलों को छोडकर और दिल्ली में मिला आरक्षण है i अब वक्त आ गया है कि अलग अलग खेमों में विभक्त अ,ब,स में बंटी जाट महासभाएं एक होकर सुप्रसिद्ध वकीलों, सेवा निवृत न्यायाधीशों और विद्वानों की समिति बनाएँ और आयोगों में जाने के लिए तथ्यात्मक आंकड़े तैयार करें और उसके बाद निरंतर सुनवाई की प्रक्रिया चले और आयोग पक्ष में फैसला दे यहाँ तो उल्टा हो रखा है आयोग का प्रतिवेदन जाटों के खिलाफ प्रस्तुत किया हुआ है ? इस यक्ष प्रश्न का प्रत्युत्तर हमें ही खोजना है i
Yes Bijaraniya Sahib, only united community efforts can get this due right by waging a consistent, sincere and constitutional battle.
 
Latest Developments posted by Sh Hawa Singh Sangwan on Jat Reservation

प्यारे दोस्तो, भाईयो और बहनो,
निम्रलिखित ई-मेल चौ० विरेंद्र सिंह केंद्रीय मंत्री, चौ० अभिमन्यु, वित्त मंत्री हरियाणा सरकार तथा चौ० ओमप्रकाश धनखड़ कृषि मंत्री हरियाणा सरकार को उनके संज्ञान में लाने के लिए भेज दी गई है। आप भी अपने विचार कृपया भेजते रहें। हम किसी भी कीमत पर चैन से बैठने वाले नहीं, जब तक हमको हमारा ये अधिकार नहीं मिल जाता है।

आदरणीय मंत्री महोदय जी,
केंद्रीय सरकार स्वीकार करे या न करे, जाट आरक्षण का मुद्दा एक ज्वलंत मुद्दा है और जब तक इसका हल नहीं होगा, जाट समाज किसी भी कीमत पर चैन से बैठने वाला नहीं है क्योंकि ये उनके बच्चों के भविष्य का सवाल है। जाट समाज ये समझता है कि उनके अधिकार को छीन लिया गया है। ये तो इस प्रकार हुआ कि किसी के सामने खाने की थाली परोस दी जाए और जब वह खाने बैठे तो थाली को खींच दिया जाए। इसलिए जाट समाज के लिए अब ये अधिकार से बढकर प्रतिष्ठा का मुद्दा बन चुका है। हम देखते हैं कि दूसरी पिछड़ी जातियों के लोग इस बात पर विरोध कर रहे हैं कि जाटों को 27 प्रतिशत कोटे में शामिल न किया जाए। इसका सीधा-सादा हल है कि पिछड़ी जातियों के 27 प्रतिशत कोटे को बढ़ाकर 32 प्रतिशत कर दिया जाए क्योंकि पूरे देश में अनुसूचित जातियों का केंद्र स्तर पर उनकी जनसंख्या के अनुसार लगभग 16 प्रतिशत आरक्षण दिया हुआ है। इसी प्रकार जनजातियों को उनकी जनसंख्या के अनुसार 7 प्रतिशत दिया हुआ है। मंडल आयोग के अनुसार उस समय 54 प्रतिशत पिछड़ी जातियां थीं। उनको केवल उनकी जनसंख्या का आधा 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। मंडल आयोग के बाद दो दर्जन से अधिक जातियों को पिछड़ी जातियों में शामिल किया गया और जाटों को भी पिछड़ी जाति में शामिल कर लिया जाता है, तो पिछड़ी जातियों की संख्या लगभग 64 प्रतिशत बनती है। वैसे तो उनको उनकी जनसंख्या के अनुसार ये आरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन फिर भी उसका आधा 32 प्रतिशत दिया जाए तो किसी भी तरह से अनुचित नहीं है। 50 प्रतिशत से अधिक विशेष हालातों में दिया जा सकता है, जैसे कि तामिलनाडू, आंध्राप्रदेश और हरियाणा में दिया हुआ है। हरियाणा में केसी गुप्ता आयोग ने साफ लिखा है कि जाटों को पिछड़ी जाति में शामिल करने के बाद पिछड़ी जाति का कोटा ह्र1द्गह्म्ष्ह्म्श2स्रद्गस्र हो जाता है। इसलिए इन विशेष हालातों में आरक्षण का कोटा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर पांच जातियों को अलग से दस प्रतिशत दिया गया तथा उच्च जातियों को आर्थिक आधार पर अलग से दस प्रतिशत दिया गया, जो कुल मिलाकर लगभग 70 प्रतिशत बनता है। इसलिए केंद्र सरकार विशेष अध्यादेश के अनुसार पिछड़ी जातियों का कोटा 27 प्रतिशत से बढ़ाकर 32 प्रतिशत करते हुए जाटों को इसमें सम्मिलित करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होगी और दूसरी पिछड़ी जातियों का भी नाराज होने के लिए कोई बहाना नहीं रहेगा। इसके अतिरिक्त ये पूर्णतया भारतीय संविधान की धारा 15(4) व 16(4) के तहत उचित है। इसके अतिरिक्त आरक्षण पर जो भी आदेश जारी किए हैं(इंदिरा साहनी वर्सिज इंडिया के केस में), वे केवल न्यायालय ने किए हैं, न कि सरकार ने। जबकि कानून बनाने का कार्य सरकार को होता है, न कि न्यायालय का। ये भी उल्लेखनीय है कि क्रिमिलेयर का प्रावधान करके पिछड़ी जातियों का आरक्षण पहले ही आर्थिक आधार पर है।
इसलिए मेरा नम्र निवेदन है कि मेेरे सुझाव पर गंभीरता से विचार करने का कष्ट करें। समाज आपक सदा-सदा के लिए आभारी रहेगा।
आपका अपना
हवासिंह सांगवान, पूर्व कमांडेंट
संपर्क : 94160-56145
 
Clarification on OBC Status for Jats as per Latest developments; Posted by Sh Hawa Singh Sangwan


जाटों के बच्चों को केंद्र के लिए ओबीसी तथा हरियाणा राज्य के लिए विशेष पिछड़ी जाति के प्रमाण-पत्र इस्तेमाल करने चाहिएं
प्यारे दोस्तो, भाईयो और बहनो,
मैं कई कानून के जानकारों तथा अनुभवी लोगों से गहन चर्चा करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि हमें केंद्र स्तर की संस्थाओं व केंद्र की नौकरियों के लिए ओबीसी का प्रमाण-पत्र इस्तेमाल करना चाहिए। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने चार मार्च, 2014 का नोटिफिकेशन रद्द कर दिया है, लेकिन उसकी अपील में केंद्र सरकार तथा जाट समाज ने समय के अंदर रिवीजन पेटीशन दाखिल किए हंै, इसलिए जब तक हमारी अपीलें न्यायालय में चलती रहेंगी, जब तक सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को लागू नहीं समझा जाना चाहिए। इसलिए हमें केंद्र में ओबीसी का प्रमाण-पत्र इस्तेमाल करना चाहिए तथा हरियाणा में तो वैसे भी अभी तक हमारा आरक्षण हर तरह से सुरक्षित है। यदि फिर भी किन्हीं कारणों से ओबीसी का प्रमाण-पत्र स्वीकार नहीं किया जाता है, तो यह स्वाभाविक है कि हमारे बच्चों को जनरल कैटेगरी में शामिल कर लिया जाएगा। इससे अधिक कुछ नहीं हो सकता। इसलिए हमें धड़ल्ले से ओबीसी प्रमाण-पत्र इस्तेमाल करने चाहिएं। बाकी इस संबंध में हम जल्दी ही केंद्र में मंत्रियों से मिलने जा रहे हैं, जिसकी जानकारी आपको समय पर दे दी जाएगी तथा स्थिति को और भी स्पष्ट कर दिया जाएगा, लेकिन जो भी हो, हमें ओबीसी के प्रमाण पत्र इस्तेमाल करने चाहिएं। देखने में आया है कि हमारे बच्चे इस बात से बहुत ज्यादा परेशान हैं और इसमें परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। भविष्य में हम हर हालत में केंद्र सरकार से आरक्षण बहाल करवाकर रहेंगे, ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है।
 
जहाँ तक मैं समझता हूँ आज की तारीख मे चार मार्च, 2014 का केन्द्रीय सरकार का नोटिफिकेशन रद्द हो चुका है | केंद्र सरकार तथा जाट समाज द्वारा समय के अंदर रिविज़न पेटीशन दाखिल किए जाने से भी सर्वोच्च न्यायाल्य के आदेश के उक्त नोटिफ़िकेशन के रद्द हने पर तब तक कोई असर नहीं पड़ेगा ओर यह रद्द ही माना जाएगा जब तक सर्वोच्च न्यायाल्य का उच्च (Higher) बैंच सर्वोच्च न्यायाल्य के पहले वाले बैंच के आदेश पर सथ्गन आदेश (Stay) जारी नहीं करता | सर्वोच्च न्यायाल्य के स्थगन आदेश के बाद रिविज़न पेटीशन का फैसला होने तक जाटों को सरकार के नोटिफ़िकेशन अनुसार सभी लाभ मिलते रहेंगे ; अन्यथा नहीं |

धन्यवाद
 
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जाट आरक्षण के बारे दिनांक 1 मई 2015 को रोहतक मे हुई बैठक का विवरण दैनिक जागरण ने विस्तार से दिया है | सदस्यों की जानकारी हेतू इसका लिंक दिया जा रहा है |

http://epaper.jagran.com/ePaperArticle/02-may-2015-edition-rohtak-page_17-21922-6683-175.html

धन्यवाद |
 
May I ask a simple question: Shall we fill forms in obc now? I am confused with above two three posts. Jat reservation is void with effect from 4th March pr Not?
 
May I ask a simple question: Shall we fill forms in obc now? I am confused with above two three posts. Jat reservation is void with effect from 4th March pr Not?

No, The new notification issued on the eve of Parliamentary elections by G O I stands rejected by the Supreme Court !
 
May I ask a simple question: Shall we fill forms in obc now? I am confused with above two three posts. Jat reservation is void with effect from 4th March pr Not?


The clarification is that only Central Govt Notification dated 04 th March, 2014 has been set aside (rejected) by Supreme Court, this states that 4-3-2014 notification of Central Govt does not work even from the date of its notification. Means JATS included in OBC Catagory as per this notification are no more in OBC catagory for Central Jobs and Educational institutions and or other OBC benefits declared by central Govt; but the Jats shall remain in OBC in those states which have earlier included these in OBC lists of State (as UP, MP and some other states) and shall get the similar benefits of state Govt at par with other casts
Haryana Govt has not included Jats in states OBC catagory, but has created new catagory "special OBC" for 5 casts and has provided 10% reservation seperately for these five casts which include JATS, ROR, TYAGI, BISHNOI and JAT SIKHS. These casts in Haryana till date are eligible for this special reservation benefits. This is also challanged in P & H High court but stay not granted

Thanks
 
आमजन मे यह चर्चा आम है कि जाट आरक्षण जाटों की ही लापरवाही की भेंट चढ़ गया | जो लोग तहदिल से आरक्षण की कोशिश में थे, अपना समय व धन इस काम मे लगा रहे थे, नोटिफ़िकेशन के बाद उन पर तरह तरह के आरोप या छींटा कसी आम जाटजन भी करने लग गए थे ओर वो भी जिनका आरक्षण के आंदोलन मे कोई योगदान नहीं था ओर शायद वे आरक्षण के महत्व को भी नहीं समझते थे | दूसरी ओर हम मे से ही कुछ छुट्मइए लोग अपनी राजनीतिक इमेज चमकाने के लिये कुछ भी अटपटे ब्यान देते रहे लोगों को भरमाते रहे या अरक्षण के बीच मे राजनीति खेलते रहे | विरोधियों को आभाष हो गया था कि जाट एकता खंडित है ओर चोट मारने का सही मौका है | उन्होने चुपके से ज़ोर दार प्रहार किया ओर जाट यौधेय मार खा गए | शायद उनको आभाष नहीं था कि ऐसा भी हुआ करता है |

वैसे भी जाटों को आरक्षण देने के मुद्दे पर हमेशा से ही विरोध ज्यादा व सहयोग कम मिलता रहा है ओर अब तो यह ओर भी कठिन काम हो गया है , लेकिन शांतिपूर्वक संगठित होकर सही दिशा मे योजनावध तरीके से काम करें तो जाट समाज इस मुद्दे पर जरूर से जरूर कामयाब होगा |

हमे 11 मई को ज्यादा से ज्यादा संख्या मैं दिल्ली जाकर आरक्षण के समर्थक जाट नेताओ के विचार जरूर सुनने चाहिए | अफसोस है कि इस मुद्दे पर विचार करने या तैयारी करने के लिये ज़िलास्तर या ब्लाक स्तर पर रखी गई मीटिंग मे आम जाट जन कोई रुचि नहीं दिखा रहे है | यदि लंबे आंदोलन की जरूरत पड़ी तो जाट समाज यह मोर्चा भी गवां बैठेंगा

धन्यवाद |
 
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केंद्र में जाटों को आरक्षण जरूर मिलेगा : बालियान

मोरना: जाट धर्मशाला शुक्रताल में जनपद जाट महासभा एवं समाज सुधार सभा द्वारा आयोजित समाज सुधार महा सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री डा. संजीव बालियान ने कहा कि किसी त्रुटि के कारण जाट आरक्षण खारिज हुआ है लेकिन ये निश्चित हैं कि जाटों को केंद्र में आरक्षण जरूर मिलेगा। इसके लिए हम सबको मिलकर उस तरीके को खोजना है। जाट समाज संकट के दौर से गुजर रहा है कुदरत ने उसकी गेहूं की फसल को भी नुकसान पहुंचा दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे शुक्रताल में गंगा का जल स्तर बढ़ाने के लिए उसे मेन गंगा से जुड़वाएगें। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ. राकेश टिकैत ने कहा कि समाज में होने वाले विवाह शादियों में नव दंपत्ति को पर्यावरण शुद्धता के लिए के लिए पौधारोपण करना चाहिए। उन्होंने समाज के लोगों से नशे का त्याग कर आपसी झगड़े बंद करने का आह्वान। सम्मेलन में समाज में फैली समाजिक कुरीतियों कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा व नशा को दूर करने के लिए जन जागरण अभियान चलाने पर बल दिया गया। सम्मेलन को काग्रेस नेता नरेंद्र पाल वर्मा, भाजपा नेता डा. वीरपाल निर्वाल, कुंवर देवराज पंवार, धर्मवीर बालियान, अशोक बालियान, सुभाष चौधरी, एस के काकरान, स्वामी सत्यवेश मुनि, स्वामी भजनानंद महाराज आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता उत्तर प्रदेश जाट महासभा के अध्यक्ष मेजर एसएस अहलावत ने एवं संचालन महकार ¨सह, ने किया। रालोद युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष हर्ष राठी, बावना मंच के अध्यक्ष उधम ¨सह, वर्मा मंच के अध्यक्ष देवी ¨सह, वैध जगपाल ¨सह, जिला कुश्ती संघ के सचिव अमित राठी, पूर्व चेयरमैन मदन पाल ¨सह, प्रधान संगठन के ब्लाक अध्यक्ष र¨वद्र कुमार, प्रधान नीरज रायल, धर्मपाल ¨सह राठी, अजीत देशवाल, धीर ¨सह, पुष्पेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि केंद्र राज्य मंत्री ने धर्मशाला में सत्संग भवन का भी शिलान्यास किया और शुकदेव मंदिर में पूजा अर्चना कर संत ओमानंद महाराज का आशीर्वाद भी लिया। -

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राजस्थान में , जिस प्रकार से इन तिलकधारियों की सरकार ने मीनों को गुर्जरों से लड़वा कर , गुर्जरों के आंदोलन को खत्म करने की साजिश रची थी , कहीं वैसी ही साजिश अब ये तिलकधारी अन्य पिछड़ी जाति के लोगों को जाटों से लड़वा कर , जाटों के आंदोलन को खत्म करने की तो नहीं रच रहे हैं ?
' जय योद्धेय '
 
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ओबीसी मे जो दूसरी जातियाँ हैं उनका जाट आरक्षण का विरोध समझ आता हैं परंतु ये तिलकधारी जो जाट आरक्षण रद्द होने की खुशी मना रहे हैं इनका कारण समझ नहीं आया ? जाटों को आरक्षण से इन्हे क्या नुकसान हैं ? सर छोटूराम ने बार बार कहा कि दुश्मन पहचाओं और अब दुश्मन खुद ही सामने आ रहा हैं यदि अब भी नहीं चेते तो फिर कोई इलाज नहीं , फिर ऐसे ही इनके मानसिक गुलाम रहोगे !

जो पिछड़ी जातियाँ हमारा विरोध कर रही हैं वह भी उनका खुद का दिमाग या सोच नहीं हैं , उन्हे यह सोच दी गई हैं और किसने दी यह धीरे धीरे सामने आ रहा हैं | जाटों को आरक्षण मिलने से पहले हरियाणा के हिसार जिले मे कुछ पिछड़ी जाति के भाई जाट आरक्षण के विरोध में कई दिन तक धरने पर बैठे रहे थे | जाट आरक्षण संघर्ष समिति के लोग व साथ में कुछ दलित जाति के भाई उनको समझने गए | जब उन भाइयों से बात की तो उनकी बातों से साफ पता चल रहा था कि यह इनका खुद का दिमाग नहीं हैं इनको बहका कर बैठाया गया हैं | पिछड़ी जाति के भाइयों के दिमाग में एक खामखा का भय घुसा दिया गया हैं कि जाट तुम्हारा सारा हक खा जाएंगे | मैंने वहाँ एक भाई से कहा कि बावले भाई मण्डल कमिशन ने ओबीसी को 54% आरक्षण दिया था , जिसे कोर्ट ने घटा कर 27% कर दिया , तुम अपनी सारी ऊर्जा हमारी खिलाफत में जाया करने के बजाए ओबीसी कोटे को 27% से बढ़ा कर 54% में लगाते तो बात समझ भी आती , क्यों किसी के बहकावे में बैठे हों ? वहाँ एक युवा साथी बैठा था उसके यह बात समझ भी आई उसने कहा कि यदि आप लोगों को आरक्षण मिलता हैं और आप लोग आगे 54% की लड़ाई लड़ते हो तो मैं आपके साथ हूँ , पर जब उसने वहाँ अपने नेता जी की तरफ देखा तो फिर उसने अपने शब्दों के आगे मगर लगा दिया , मगर फिलहाल हम आप की खिलाफत जरूर करेंगे ! आखिर में हमने उनसे यहीं कहा की हम आरक्षण भी लेकर रहेंगे और आगे 54% की नहीं 64% की लड़ाई भी लड़ेंगे | हम 64% की लड़ाई भी लड़ते पर कुछ मूर्ख शंखों के कारण ब्रेक लग गया | काफी समझाया पर आखिर में वहीं बात के हमे तो सिर्फ आपका (जाट आरक्षण) विरोध करना हैं | बहुत समझाने पर जब देखा की नहीं मानेंगे तो आखिर में एक दलित भाई बोला की इनसे बात करने का कोई फायदा नहीं यह लोग " स्पोंसर्ड " हैं , और थे भी !

दो दिन से सोश्ल मीडिया में कुछ जाट साथियों के कमेंट पढ़ा रहा हूँ , उनके कमेंट पढ़ कर ऐसा लग रहा हैं कि उनसे बड़ा राष्ट्र भक्त शायद ही कोई हों ! वे भाई एक तरफ तो कह रहे हैं कि जाटों को भी आरक्षण मिलना चाहिए , दूसरी तरफ कहते हैं आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए ! ऐसे लोगों कि मानसिकता समझ से परे हैं | पता नहीं इन लोगों के मन में ऐसा क्या डर या शर्म हैं जो ये ऐसा बोल रहे हैं ? ऐसे भाइयों के लिए हरियाणवी में एक कहावत हैं " स्याणी दो बार पोए , फेर भी भूखी सोए " | मेरी समझ के अनुसार ऐसा ये भाई लोग तिलकधारी लोगों के दबाव में बोल रहे हैं | तिलकधारी ऐसा माहौल बना रहे हैं जैसे कि जाटों को आरक्षण देने से कोई बहुत बड़ा राष्ट्रद्रोह वाला काम हो जाएगा | जाटों को आरक्षण की बात आती हैं तो यह लोग कहते हैं कि जाट जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं | क्या इन तिलकधारियों का जाट आरक्षण विशेष का विरोध जातिवादी सोच नहीं हैं ? इन तिलकधारियों के बहकावे में आकर हम पहले भी एक बार 1990-91 मे गलती कर चुके हैं , अब भी मौका हैं इनसे बचो ! 1990-91 में मैं खुद ऐसे धूर्तों के बहकावे में आ कर आरक्षण का विरोध कर रहा था , और चंडीगढ़ के सैक्टर 17 में सभी छात्रों ने बस फूँक दी | यदि उस वक़्त यहीं ऊर्जा हम आरक्षण लेने में लगाते तो जो नुकसान हमने 23-24 साल झेला हैं वह ना होता ! जो भाई आर्थिक आधार की बात कर रहे हैं वह यह समझ लें की यदि आर्थिक आधार पर आरक्षण होता हैं तो इसका फायदा हमें शायद ही मिले ! उसका कारण हैं कि कल को यहीं पाखंडी लोग हमारी ज़मीनों की फर्द उठा कर खड़े हो जाएंगे कि जाट गरीब कैसे हैं ? इनका तो एक किल्ला लाख करोड़ का हैं ! और फिर ये शहरी लोग आर्थिक आधार की मलाई चखेंगे और हम ऐसे ही लार टपकाते रह जाएंगे | ये जो भाषा बोल रहे हैं उसे समझों , इनका कहना हैं कि आरक्षण से जातिवाद को बढ़ावा मिलता हैं , जातिवाद से हिन्दू घटेगा , इसलिए जाति आधार पर आरक्षण खत्म करो ! मतलब राष्ट्र से पहले इन्हे अपने धर्म की चिंता हैं , क्योंकि उससे फिर धर्म मे जो आरक्षण इन्हे मिला हुआ हैं वह खत्म हो जाएगा ! आरक्षण क्या हैं क्यों हैं उसे समझों , फिलहाल जो आरक्षण मिलता हैं उसमे आर्थिक आधार का प्रावधान हैं ,सो इनके बहकावे से बचो | हमारे आरक्षण मांगने से राष्ट्र को कोई खतरा नहीं हैं और ना ही इससे जातिवाद को बढ़ावा मिलता हैं | हम देश की सेवा सदियों से करते आ रहे हैं चाहे वह खेत हो या सीमा , और आगे भी ऐसे ही करते रहेंगे , और ना ही हमने इनसे राष्ट्रवाद का कोई प्रमाण पत्र लेना ! इसलिए इन धूर्तों के डर , शर्म या किसी भी प्रकार के बहकावे में आ कर अपने पाव पर कुल्हाड़ी मारने वाला काम ना करें !

' जय छोटूराम ' ' जय योद्धेय '
 
जाने हमे कब और कैसे समझ आयेगी

श्री हवा सिंह सांगवान जी के फेस्बूक के लेख की कॉपी तो कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है |



Hawa Singh Sangwan


Yesterday at 1:40pm ·


प्यारे दोस्तो, भाईयो और बहनो,
11 मई की जाट रैली एक विशाल रैली थी, जिसके दो उद्देश्य थे : जाट समाज में जागरूकता पैदा करना तथा केंद्र सरकार को प्रधानमंत्री जी के तहत ज्ञापन देना था कि हमारे सैंकड़ों बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। रैली का उद्देश्य काफी हद तक पूरा हुआ, लेकिन स्टेज पर जो अफरातफरी मची, उससे समाज को काफी निराशा भी हुई। लेकिन ये जानने का विषय है कि वहां अफरातफरी क्यों हुई? अफरातफरी का एक ही कारण था कि कुछ स्वार्थी स्वंभू नेताओं ने स्टेज को हाईजैक किया। इस षडयंत्र को मैं पहले से ही समझ रहा था क्योंकि रोहतक की एक मई की पंचायत में ये फैसला लिया गया था कि जंतर-मंतर की मंजूरी भगतसिंह दलाल और महाबीर सिंह दहिया, पूर्व एसीपी दिल्ली लेंगे और वहां पर स्टेज का बंदोबस्त आदि के लिए भी हम लोगों ने आपस में होने वाले खर्चे को बांट लिया था। लेकिन सूबे सिंह समैण और धर्मबीर गोयत ने मिलकर षडयंत्र रचा। जब इसके लिए मंजूरी के लिए डीसीपी/एसीपी ऑफिस में भगत सिंह दलाल व महाबीर दहिया गए तो वहां पर सूबे सिंह समैण और धर्मबीर गोयत भी मंजूरी के लिए पहुंच गए और जिद करने लगे कि मंजूरी वही लेंगे और उन्होंने मंजूरी लेकर स्टेज को हाईजैक करने के लिए खुद ही बंदोबस्त किया, जिसके परिणामस्वरूप जाटों को धूप में भी बैठना पड़ा और इन लोगों ने अपनी मर्जी से लोगों को बुलाया, जिसमें अनेकों खापों के प्रधान, जो सैंकड़ों-सैंकड़ों लोगों को लेकर आए, उन्हें भी बोलने का मौका नहीं दिया गया और फिर स्टेज पर जिन्होंने चंदे की घोषणा की तो उन्हें बोलने का मौका दिया गया। बड़ा साफ है कि सूबे सिंह समैण और धर्मबीर गोयत इस अफरातफरी के लिए सीधे-सीधे जिम्मेवार हैं, जिन्होंने कई राजनीतिक इच्छाएं पाल रखी हैं, लेकिन जाट समाज इनकी इच्छाओं को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगा, ऐसा मेरा विश्वास है।


लगता है कि आम जाट जन व पढे लिखे जाट तबके सो कॉल्ड जाट आरक्षण की अगवाई कर रहे इन लोगों के प्रति संवदेनशील नहीं हो पाये हैं | यही कारण है कि जाट समाज का अपना गंभीर मुद्दा होते हुए भी जन आंदोलन नहीं बन पा रहा है | कुछ भी हो हमे इस बारे गंभीरता से सोचना चाहिए |


धन्यवाद
 
Last edited:
An extract from dr Sanjeev balyan face book page

Anuj J Tomar- And sir what about reservation. You are doing the same what the UPA government did. Sir SC refer the decision to centre government in December on jat reservation government make this. Thousands of aspirants are suffering . and u r just and just. Review petition 1 month depart nothing is going.
Like · Reply · May 2 at 8:18am

Dr Sanjeev Balyan जाट आरक्षण पर क़ानूनी प्रक्रिया चल रही है और वह प्राथमिकता पर है
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Like · 4 · May 2 at 8:25am
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Piyush Rana बहुत अच्छे सर
 
Social Naxalism is on cards if this Bahman Baniya Sarkar doesnt realise the situation. I am amused those BJP seasonal frogs who used to chant Modi Modi are not well beneath the soil.Anyone?
 
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